"शाम हो गई - कान्हा छोड़ दो मेरी कलइया" एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय राधा-कृष्ण भजन है, जो वृंदावन की कुंज गलियों में होने वाली रासलीला और राधा-कृष्ण के मधुर प्रेम-संवाद को चित्रित करता है। यह भजन विशेष रूप से 'राधा-कृष्ण झांकी' और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अत्यंत लोकप्रिय है। वैष्णव भक्ति परंपरा में, राधा रानी को कृष्ण की 'ह्लादिनी शक्ति' माना गया है। यह भजन भक्त को उस दिव्य प्रेम के सागर में ले जाता है जहाँ कृष्ण अपनी प्रियतमा राधा से अनुनय-विनय कर रहे हैं। इस भजन का गायन मन में प्रेम, समर्पण और सात्विक आनंद का संचार करता है, जो साधक को लौकिक बंधनों से मुक्त कर अलौकिक रस में डुबो देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
शाम हो गई, कान्हा छोड़ दो मेरी कलइया,
हो गई शाम, कान्हा छोड़ दो मेरी कलइया।
घर जाने दो मुझे, देर हो गई है भारी,
मैया मेरी राह देखे, है बड़ी वो प्यारी।
छोड़ दो मेरी कलइया, कान्हा छोड़ दो मेरी कलइया॥
वृंदावन की कुंज गलिन में, शोर मचा है भारी,
सब सखियाँ मेरी राह देख रही, मैं हूँ सबसे न्यारी।
पकड़ के हाथ मेरा, तुम क्यों हो इतराते,
राधा-राधा नाम जपूँ, क्यों तुम हो मुस्कुराते?
छोड़ दो मेरी कलइया, कान्हा छोड़ दो मेरी कलइया॥
मुरली की धुन में मुझे, न तुम ऐसे बहकाओ,
प्रेम की इस डोर में, न तुम मुझे फँसाओ।
श्याम सुंदर तुम हो, मैं हूँ राधा रानी,
प्रेम की ये रीत है, बड़ी पुरानी-पुरानी।
छोड़ दो मेरी कलइया, कान्हा छोड़ दो मेरी कलइया॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। यहाँ 'शाम' केवल दिन का ढलना नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा की ओर प्रस्थान करने का संकेत है। राधा रानी का कृष्ण से कलइया (कलाई) छोड़ने का आग्रह करना वास्तव में उस 'अहंकार' या 'लौकिक बंधन' को छोड़ने का प्रतीक है, जो भक्त को भगवान से जोड़े रखता है। राधा रानी कहती हैं कि "घर जाने दो", जिसका अर्थ है कि आत्मा को अब अपने वास्तविक धाम (गोलोक) की ओर लौटना है। कृष्ण का उन्हें रोकना उनके प्रति अटूट प्रेम और आकर्षण को दर्शाता है। यह भजन सिखाता है कि कृष्ण प्रेम में पड़कर भक्त सब कुछ भूल जाता है, और यही विरह और मिलन का अद्भुत संगम है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- भक्ति का स्वरूप: यह भजन 'माधुर्य भाव' की भक्ति को समर्पित है।
- सांस्कृतिक महत्व: यह भजन विशेष रूप से जन्माष्टमी, होली और रासलीला के कार्यक्रमों में गाया जाता है।
- आध्यात्मिक संदेश: राधा-कृष्ण का प्रेम जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को संध्याकाल (गोधूलि बेला) में गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे आप अपने घर के मंदिर में, कीर्तन मंडली में या किसी भी राधा-कृष्ण उत्सव के दौरान गा सकते हैं। इसे गाते समय मन में राधा-कृष्ण की छवि का ध्यान करना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| कलइया | कलाई | प्रेम का बंधन |
| कुंज गलिन | वृंदावन की गलियां | लीला स्थल |
| श्याम सुंदर | भगवान कृष्ण | आराध्य देव |
| ह्लादिनी शक्ति | राधा रानी | आनंद प्रदान करने वाली शक्ति |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | शाम हो गई - कान्हा छोड़ दो मेरी कलइया |
|---|---|
| आराध्य | श्री राधा-कृष्ण |
| विषय | प्रेम, विरह और समर्पण |
| भाषा | ब्रज मिश्रित हिंदी |
| उपयुक्त अवसर | संध्या आरती, कीर्तन, उत्सव |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
Q2: राधा-कृष्ण के प्रेम का क्या अर्थ है?
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री भक्ति परंपरा और लोक-प्रचलित भजनों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को राधा-कृष्ण की भक्ति के प्रति प्रेरित करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
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स्रोत एवं संदर्भ
ब्रह्म पुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण और वैष्णव संप्रदाय की पारंपरिक भजन संकलिकाएं।
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