"भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना" यह अत्यंत ही लोकप्रिय, मार्मिक और चेतावनी रस से परिपूर्ण चेतावन भजन है, जिसे महान गायक श्री निगम जी की अनूठी और गंतव्य तक पहुँचाने वाली आवाज ने अमर बना दिया है। सनातन धर्म, संत परंपरा और लोक संस्कृति में चेतावन भजनों का एक विशिष्ट और सर्वोच्च स्थान रहा है। ये भजन मनुष्य को मोह-माया की नींद से जगाकर उसके वास्तविक स्वरूप, कर्मों के सिद्धांत (कर्म फल) और परमेश्वर के प्रति समर्पण का बोध कराते हैं। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक के अंतर्मन को झकझोर कर यह सिखाता है कि जीवन क्षणभंगुर है और मनुष्य के द्वारा किए गए कर्म ही उसके साथ चलते हैं। सुबह की बेला में, संध्या वंदन के समय, सत्संग कार्यक्रमों अथवा एकांत साधना के दौरान इस भजन का श्रवण और गायन मन को असीम शांति और आत्मिक शुद्धि प्रदान करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मुखड़ा (Refrain):
भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का मत करना।
पुष्प नहीं बन सकते तुम तो, कांटे बनकर मत खटकना।।
भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का मत करना।
अंतरा 1:
यह संसार सराय मुसाफिर, आना-जाना लगा रहेगा।
अच्छे कर्मों का ही पूंजी, साथ तुम्हारे सदा रहेगा।।
पाप की गठरी सिर मत धरना, बुरा किसी का मत करना।
भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का मत करना।।
अंतरा 2:
पल दो पल की जीवन गाथा, अंत माटी में मिल जाना।
किस बात का अहंकार है, खाली हाथ ही तुझे है जाना।।
अभिमान की आग में जल मत, बुरा किसी का मत करना।
भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का मत करना।।
अंतरा 3:
जो बोओगे वही काटोगे, अटल विधाता का नियम यही है।
दूसरों को जो पीड़ा देता, उसका जीवन सदा दुखी है।।
किसी के आंसू तुम मत पोछ सको, तो दर्द किसी को मत देना।
भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का मत करना।।
अंतरा 4:
शिव की महिमा अपरम्पार है, हर कण में उसका वास सदा।
प्राणी तुझको होश रहे यह, पल-पल देखे जग का खुदा।।
सतमार्ग पर चलना सीख ले, बुरा किसी का मत करना।
भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का मत करना।।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह चेतावन भजन मनुष्य को उसके नैतिक और आध्यात्मिक कर्तव्यों का बोध कराता है। भजन की पहली पंक्ति—"भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का मत करना"—अहिंसा, परोपकार और निष्काम कर्म के मूल सिद्धांतों को दर्शाती है। यदि हम किसी के जीवन में सुख या आनंद नहीं ला सकते, तो कम से कम हमारे द्वारा किसी को कष्ट भी नहीं पहुँचना चाहिए। जिस प्रकार एक पुष्प सभी को अपनी सुगंध और सुंदरता से प्रसन्न करता है, उसी प्रकार मनुष्य का स्वभाव भी कँटे की तरह चुभने वाला नहीं बल्कि फूल की तरह कोमल होना चाहिए।
संसार को एक 'सराय' (अस्थाई विश्राम स्थल) के रूप में चित्रित करते हुए भजन यह समझाता है कि मनुष्य इस धरती पर केवल कुछ दिनों का मेहमान है। यहाँ धन-दौलत, मान-सम्मान और शरीर नश्वर हैं। साथ जाने वाली एकमात्र पूंजी हमारे द्वारा किए गए अच्छे कर्म और पुण्य हैं। इसलिए पाप और दूसरों के प्रति ईर्ष्या की गठरी अपने सिर पर ढोने से बचना चाहिए। अभिमान या अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, जो उसे पतन के मार्ग पर ले जाता है। अंत में माटी में मिल जाने वाले शरीर के लिए किसी का दिल दुखाना बुद्धिमत्ता नहीं है।
कर्म के अटल सिद्धांत (Law of Karma) का स्मरण कराते हुए भजनकार कहते हैं कि प्रकृति का नियम सर्वत्र एक समान है—जो बोओगे, वही काटोगे। जो लोग दूसरों के जीवन में कांटे बोते हैं, उन्हें अंततः स्वयं ही पीड़ा सहनी पड़ती है। भगवान शिव तांडव स्तोत्र और महादेव की आराधना से जुड़ी चेतना यही सिखाती है कि सृष्टि के कण-कण में परमात्मा विराजमान हैं और हमारे हर छोटे-बड़े कर्म का लेखा-जोखा दिव्य शक्तियों के पास रहता है। इसलिए जीवन सत्य, धर्म और करुणा के मार्ग पर व्यतीत होना चाहिए।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक संगीतिक रचना नहीं है, बल्कि यह सनातन दर्शन और उपनिषदों के नैतिक उपदेशों का सार है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- कर्म योग की प्रेरणा: यह भजन श्रीमद्भगवद्गीता के निष्काम कर्म और अहिंसा के संदेश को अत्यंत सरल भाषा में जन-जन तक पहुँचाता है।
- चेतावनी रस प्रधान: यह साधक को संसार की असारता और मोह-माया के प्रपंच से चेताने का कार्य करता है।
- सार्वभौमिक संदेश: इसका संदेश किसी एक संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानवता के लिए कल्याणकारी है।
- मानसिक शांति: इस भजन का निरंतर श्रवण करने से अंतःकरण की शुद्धि होती है और अहंकार, क्रोध जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों का शमन होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस पावन भजन को गाने और सुनने के लिए कोई विशेष नियम की बाध्यता नहीं है, तथापि आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए इसे निम्नलिखित अवसरों पर अपनाया जा सकता है:
- प्रातःकालीन वंदना: दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और सत्कर्मों के संकल्प के साथ करने के लिए सुबह स्नान के पश्चात इसे सुनना अत्यंत लाभदायक है।
- संध्याकालीन सत्संग: घर में संध्या के समय दीप प्रज्वलन के उपरांत परिवार के साथ इस भजन का स्मरण करने से घर का वातावरण पवित्र और शांत बनता है।
- महाशिवरात्रि एवं प्रदोष व्रत: भगवान शिव की आराधना और श्री हनुमान चालीसा पाठ के साथ इस चेतावन भजन का गायन विशेष फलदायी होता है।
- एकांत साधना एवं ध्यान: जब मन अशांत हो, तब इस भजन के बोल अंतःकरण को शांत करने में औषधि का कार्य करते हैं।
- परोपकार ही धर्म है: यदि आप किसी का उपकार नहीं कर सकते, तो किसी को नुक्सान पहुँचाने का अधिकार भी आपको नहीं है।
- अहंकार का त्याग: जीवन नश्वर है, इसलिए अपनी संपत्ति, पद या बल का अभिमान कभी नहीं करना चाहिए।
- कर्म प्रधान जीवन: हमारे अच्छे और बुरे कर्मों का फल हमें अवश्य भोगना पड़ता है, इसलिए सदा सत्कर्म करें।
- सहिष्णुता और करुणा: दूसरों के प्रति दया भाव रखना और किसी के दिल को ठेस न पहुँचाना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।
- सनातन संत वाणी एवं लोक भजन परंपरा
- श्रीमद्भगवद्गीता - कर्मयोग एवं दैवी संपद विभाग
- पारंपरिक चेतावन भजन संग्रह एवं लोक साहित्य
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन भगवान शिव (महादेव) की चेतना और सनातन संत परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। महादेव को वैराग्य, सत्य, करुणा और संहार (अहंकार का संहार) के देवता के रूप में पूजा जाता है। संत-महात्माओं ने हमेशा से लोक कल्याण को ही सबसे बड़ी पूजा माना है। श्री निगम जी जैसे महान गायकों ने अपनी मधुर और गंभीर वाणी से इस भजन के माध्यम से शिवभक्तों और आध्यात्मिक पिपासुओं को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
चेताराम और चेतावनी भजनों की यह परंपरा उत्तर भारत के लोक संगीत, खासकर संतों की वाणी से उपजी है। कबीर दास, सूरदास और तुलसीदास जैसे संतों के दर्शन का प्रभाव इन भजनों की रचना में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आधुनिक काल में लोक कलाकारों और भजन गायकों ने इसे सुरीली धुनों में पिरोकर आम जनमानस के हृदय तक पहुँचाया है। यह भजन लोगों को उनके दैनिक जीवन में नैतिकता और सदाचार का पाठ पढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रभावोत्पादक हिंदी (खड़ी बोली एवं लोक मिश्रित अवधी-ब्रज प्रभाव) है। इसकी काव्य शैली गेय है, जिसमें तुकबंदी का सुंदर प्रयोग किया गया है। 'पुष्प' और 'कांटे', 'सराय' और 'मुसाफिर' जैसे रूपकों (Metaphors) के माध्यम से दार्शनिक सत्यों को बहुत ही सहजता से समझाया गया है, ताकि एक साधारण व्यक्ति भी इसके मर्म को तुरंत समझ सके।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
इस भजन से हमें निम्नलिखित अमूल्य जीवन सीख मिलती हैं:
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदांश | सरल अर्थ | आध्यात्मिक / संदर्भगत अर्थ |
|---|---|---|
| सराय | अस्थाई विश्राम गृह | यह नश्वर संसार जहाँ जीव कुछ दिनों के लिए आता है। |
| मुसाफिर | यात्री | इस संसार में यात्रा करने वाला जीवात्मा। |
| गट्री | बोझ या पोटली | कर्मों (पाप-पुण्य) का संचय। |
| विधाता | रचयिता, भगवान | नियमों और कर्म फल के विधाता परमेश्वर। |
| अपरम्पार | जिसकी कोई सीमा न हो | भगवान की महिमा और शक्ति अनंत है। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"भला किसी का कर ना सको तो, बुरा किसी का मत करना..."
इस शुरुआती पंक्ति में जीवन का सबसे बड़ा नैतिक सूत्र दिया गया है। यदि आप किसी के जीवन में उजाला नहीं ला सकते, तो उसके मार्ग में अंधेरे के कांटे भी न बिछाएं।
"यह संसार सराय मुसाफिर, आना-जाना लगा रहेगा..."
यहाँ संसार की अनित्यता का वर्णन है। हम सब यहाँ यात्री हैं, स्थायी रूप से कोई नहीं रहने वाला, इसलिए मोह व्यर्थ है।
"जो बोओगे वही काटोगे, अटल विधाता का नियम यही है..."
यह कर्म के सिद्धांत (Law of Cause and Effect) की व्याख्या है, जिससे कोई भी प्राणी बच नहीं सकता।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के भाव से साम्य रखने वाला पावन संस्कृत श्लोक:
"अक्रोधेन जयेत्क्रोधमसाधुं साधुना जयेत्।
जयेत्कदर्थं दानेन जयेत्सत्येन चाऽनृतम्।।"
भावार्थ: क्रोध को शांति से जीते, दुष्ट को सज्जनता से जीते, कंजूस को दान से और असत्य को सत्य से जीते। यही सनातन धर्म का सार है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना |
| मुख्य गायक | श्री निगम जी एवं अन्य लोक कलाकार |
| श्रेणी / शैली | चेतावनी भजन, लोक भक्ति गीत |
| भाषा | हिंदी (लोक मिश्रित) |
| मुख्य भाव | परोपकार, कर्म सिद्धांत, चेतावनी, समर्पण |
| उपयुक्त अवसर | सत्संग, प्रातःकालीन स्मरण, ध्यान, शांति पाठ |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: यह भजन मुख्य रूप से किस संदेश पर आधारित है?
उत्तर: यह भजन मुख्य रूप से परोपकार, अहिंसा, कर्म के सिद्धांत और अहंकार त्यागने के संदेश पर आधारित है।
प्रश्न 2: "भला किसी का कर ना सको तो बुरा किसी का मत करना" भजन के गायक कौन हैं?
उत्तर: इस प्रसिद्ध चेतावन भजन को श्री निगम जी सहित कई प्रसिद्ध लोक और संत कलाकारों ने अपनी आवाज दी है।
प्रश्न 3: चेतावन भजन सुनने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है?
उत्तर: चेतावन भजन सुनने से मन का अहंकार शांत होता है, मोह-माया से विरक्ति मिलती है और सत्कर्म करने की प्रेरणा जागृत होती है।
प्रश्न 4: क्या इस भजन को घर में पूजा के समय गाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, इस भजन को सुबह या संध्या के समय घर में या सत्संग के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।
प्रश्न 5: कर्म का सिद्धांत इस भजन में किस प्रकार समझाया गया है?
उत्तर: भजन में स्पष्ट किया गया है कि "जो बोओगे वही काटोगे", अर्थात जैसा कर्म मनुष्य करेगा, वैसा ही फल उसे भुगतना होगा।
प्रश्न 6: क्या इस भजन का संबंध किसी विशेष देवी-देवता से है?
उत्तर: यह भजन समग्र सनातन दर्शन, संत परंपरा और भगवान शिव की चेतना से जुड़ा हुआ है, जो सत्य और धर्म का मार्ग दिखाता है।
प्रश्न 7: जीवन में परोपकार का क्या महत्व है?
उत्तर: परोपकार से अंतःकरण शुद्ध होता है, समाज में प्रेम बढ़ता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
प्रश्न 8: इस भजन को कब और कैसे सुनना सबसे अच्छा रहता है?
उत्तर: प्रातःकाल उठने के बाद या एकांत समय में शांत चित्त से इस भजन को सुनने से मानसिक शांति और सकारात्मकता प्राप्त होती है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री भक्तालोक (Bhaktilok.in) के विद्वान संपादकीय मंडल द्वारा सनातन परंपरा, लोक भजनों के संकलन और नैतिक मूल्यों के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इस आलेख का उद्देश्य पाठकों को उच्च कोटि की भक्तिमय और प्रेरणादायक सामग्री प्रदान करना है। यह पूर्णतः संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
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