सनातन धर्म की पावन और समृद्ध परंपरा में संकीर्तन, भजन और प्रभु नाम का स्मरण जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ने का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग माना गया है। कलयुग के इस कालखंड में जहां चारों ओर मानसिक अशांति, भौतिक दौड़भाग और तृष्णा का साम्राज्य है, वहीं भगवान के श्री चरणों में समर्पित भजन साधक के अंतर्मन को शीतलता प्रदान करते हैं। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रीय, हृदयस्पर्शी और भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन है—"देना हो तो दीजिये जन्म जन्म का साथ (मेरे सिर पर रख दो बाबा अपने ये दोनों हाथ)"। यह भजन प्रसिद्ध भजन गायक मुकेश बागड़ा जी की मधुर वाणी और अनन्य भाव से गाया गया है, जिसने लाखों भक्तों के हृदयों में बाबा के प्रति अटूट प्रेम और विश्वास को जागृत किया है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के सम्पूर्ण बोल (Lyrics), उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और जीवन पर पड़ने वाले उसके सकारात्मक प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
देना हो तो दीजिये जन्म जन्म का साथ,
मेरे सिर पर रख दो बाबा अपने ये दोनों हाथ।
तेरे सिवा मेरा इस दुनिया में कोई नहीं, कोई नहीं,
तू ही मेरी नैया, तू ही मेरा खेवनहार सही।
जब-जब जीवन की राहों में भटका मेरा मन,
तेरी यादों ने ही सींचा मेरा तन और मन।
भटक रहा था माया के इस झूठे संसार में,
तूने आकर थाम लिया मझधार में आकर प्यार से।
दुनिया की नजरों में मेरी कोई औकात नहीं,
पर मेरे खाटू वाले बाबा, तू कभी छोड़ेगा साथ नहीं।
जन्म-जन्म का नाता तुमसे ऐसा जोड़ा मैंने,
अपना सब कुछ तुझपर बाबा, आकर छोड़ दिया मैंने।
सिर पर जब हो तेरा साया, डर किस बात का,
तू ही रखवाला है मेरा, जीवन की हर रात का।
देना हो तो दीजिये जन्म जन्म का साथ,
मेरे सिर पर रख दो बाबा अपने ये दोनों हाथ।
हारे का सहारा बाबा, तू ही है मेरा भगवान,
तेरे चरणों में अर्पित है मेरा यह सारा प्राण।
सदा रहे यह प्रेम तुम्हारा, इस जीवन में और हर पल,
यही प्रार्थना है तुझसे, ओ खाटू वाले हलचल।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक भक्त की अपनी आराध्य देव के प्रति अनन्य पुकार और पूर्ण शरणागति (Surrender) का जीवंत दस्तावेज है। भजन की पहली पंक्ति "देना हो तो दीजिये जन्म जन्म का साथ" में साधक भगवान से धन, धान्य, वैभव या सांसारिक सुखों की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि वह केवल ईश्वर का सान्निध्य और उनका शाश्वत साथ मांग रहा है। भारतीय दर्शन के अनुसार, यह संसार नश्वर है और यहां के सभी संबंध स्वार्थ पर आधारित हैं; केवल ईश्वर का चरण-कमल ही ऐसा आश्रय है जो जन्म-मजन्तर के बंधनों से मुक्त करा सकता है।
पंक्ति "मेरे सिर पर रख दो बाबा अपने ये दोनों हाथ" में भगवान के आशीर्वाद, वात्सल्य और सुरक्षा का प्रतीक चिन्ह प्रस्तुत किया गया है। जब कोई माता-पिता या गुरु अपने बच्चे या शिष्य के सिर पर हाथ रखते हैं, तो उसे निर्भयता और पूर्ण सुरक्षा का अनुभव होता है। ठीक इसी प्रकार, भक्त अपने आराध्य से यह निवेदन करता है कि वह उसके जीवन के समस्त भयों, चिंताओं और कष्टों को हर लें और अपनी कृपा का छत्रछाया हमेशा बनाए रखें। इसी प्रकार के अन्य अनमोल भजनों और स्तुतियों के लिए आप श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र के पावन पाठ का भी स्मरण कर सकते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
खाटू श्याम बाबा और श्री कृष्ण के भक्तों के बीच इस भजन का अत्यधिक आध्यात्मिक महत्व है। इसकी विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- पूर्ण शरणागति (Bhakti Bhava): यह भजन साधक के अहंकार को मिटाकर भगवान के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
- मानसिक शांति: इस भजन के नियमित श्रवण या गायन से अवसाद, चिंता और मानसिक तनाव दूर होता है।
- भक्ति रस का संचार: स्वर सम्राट मुकेश बागड़ा जी की शैली में यह भजन श्रोताओं की आँखों में आनंद के आंसू और हृदय में प्रेमभाव जगा देता है।
- सत्संग और कीर्तन में उपयोग: खाटू श्याम जी के फाल्गुन मेले, एकादशी उत्सव और साप्ताहिक कीर्तन में यह भजन अनिवार्य रूप से गाया जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत को अपनी दैनिकचर्या में शामिल करने से जीवन की ऊर्जा सकारात्मक होती है। इस भजन को निम्नलिखित अवसरों पर गाया जा सकता है:
- ब्रह्म मुहूर्त या प्रातःकालीन पूजा: सुबह उठकर स्नान के पश्चात शांत चित्त से इस भजन को सुनने या गुनगुनाने से पूरा दिन सकारात्मकता से बीतता है।
- संध्या वंदन के समय: शाम के वक्त दीपक जलाने के उपरांत भगवान के समक्ष बैठकर इस भजन का स्मरण करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- खाटू श्याम संकीर्तन या जागरण: सामूहिक सत्संग के दौरान जब यह भजन तालियों और मृदंग की थाप के साथ गाया जाता है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से हारे के सहारे, कलियुग के अवतारी देवता श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक जी) को समर्पित है। महाभारत काल में अपनी वीरता और भगवान श्री कृष्ण को अपना शीश दान करने वाले वीर बर्बरीक को कृष्ण जी ने कलयुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था। जो भक्त बाबा की शरण में जाता है, उसे जीवन में कभी भी निराशा का सामना नहीं करना पड़ता।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
भजन सम्राट मुकेश बागड़ा द्वारा गाए गए इस भजन के गीत और संगीत रचना में खाटू धाम की संस्कृति और राजस्थान की लोक-भक्ति परंपरा की गहरी छाप देखने को मिलती है। सरल हिंदी और राजस्थानी शब्दावली के मिश्रण से रचित यह गीत आम जनमानस के हृदय को सरलता से स्पर्श कर लेता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सुबोध और ग्राह्य हिंदी है, जिसमें ब्रज और राजस्थानी भाषा के लोक-गीतों की मिठास भी घुली हुई है। काव्य शैली के अंतर्गत अनुप्रास और रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है, जैसे "नैया" और "खेवनहार" का रूपक जीवन की कठिनाइयों और भगवान की तारक शक्ति को दर्शाने के लिए अत्यंत सटीक रूप से उपयोग किया गया है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें सिखाता है कि मनुष्य को अपनी सफलताओं का अभिमान और असफलताओं का दुःख भगवान के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। जब जीवन की डोर किसी सर्वशक्तिमान के हाथों में सौंप दी जाती है, तब भय और चिंता का स्वतः अंत हो जाता है। यह हमें सिखाता है कि सांसारिक बंधनों से ऊपर उठकर केवल परमात्मा के प्रेम को ही अपने जीवन का एकमात्र ध्येय बनाना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| खेवनहार | नाव को पार लगाने वाला नाविक | भगवान श्री कृष्ण या बाबा श्याम जो भवसागर से पार लगाते हैं। |
| मझधार | नदी के बीच की तेज धारा या संकट | जीवन के भयंकर संकट और मोह-माया के जाल। |
| शरणागति | अपने आपको पूर्णतः भगवान को सौंप देना | अहंकार का त्याग कर ईश्वर की शरण में जाना। |
| साया | छाया या सुरक्षा का आवरण | ईश्वर की कृपा और आशीर्वाद जो हर पल भक्त की रक्षा करता है। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"देना हो तो दीजिये जन्म जन्म का साथ..."
भक्त कहता है कि हे प्रभु! यदि आप मुझे कुछ देना ही चाहते हैं, तो मुझे क्षणिक सुख या धन-दौलत मत दीजिए, बल्कि मुझे जन्म-जन्मांतर तक अपनी भक्ति और अपनी संगति प्रदान कीजिए।
"मेरे सिर पर रख दो बाबा अपने ये दोनों हाथ..."
यह पंक्ति अभयदान की मांग है। भक्त अपने आराध्य से निवेदन करता है कि वह अपना वरद हस्त उसके मस्तक पर सदा के लिए रख दें ताकि वह हर परिस्थिति में सुरक्षित महसूस करे।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन की भावना से मेल खाता हुआ श्रीमद्भगवद्गीता का पावन श्लोक स्मरणणीय है:
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥"
(अर्थात् जो भक्त अनन्य भाव से मेरा स्मरण और भजन करते हैं, उनके योग-क्षेम (आवश्यकताओं की पूर्ति और रक्षा) का उत्तरदायित्व मैं स्वयं वहन करता हूँ।)
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | देना हो तो दीजिये जन्म जन्म का साथ |
|---|---|
| गायक / कलाकार | मुकेश बागड़ा (Mukesh Bagda) |
| आराध्य देव | श्री खाटू श्याम बाबा / भगवान श्री कृष्ण |
| भाषा | सरल हिंदी / राजस्थानी लोक शैली |
| मुख्य थीम | भक्ति, शरणागति और जन्म-जन्मांतर का साथ |
| भाव | प्रेम, विनय और पूर्ण विश्वास |
| उपयुक्त अवसर | खाटू श्याम दर्शन, एकादशी, जागरण और दैनिक सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह आलेख सनातन भक्ति परंपरा, खाटू श्याम संकीर्तन साहित्य और श्रोताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य भक्तों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स, सटीक भावार्थ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। सभी संदर्भ पारंपरिक ग्रंथों, लोक-संकीर्तन और श्री कृष्ण-श्याम भक्ति परंपराओं पर आधारित हैं।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भगवद्गीता - गीताप्रेस गोरखपुर प्रकाशन
- खाटू श्याम कथा एवं संकीर्तन परंपरा
- पारंपरिक भजन संकलन एवं लोक संगीत संग्रह
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