भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

यह पावन भजन "देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई" भगवान श्री जगन्नाथ, उनके अग्रज बलभद्र और बहन सुभद्रा की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा के पावन अवसर पर गाया जाने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित होने वाली पुरी की रथयात्रा सनातन धर्म का एक ऐसा महापर्व है, जहाँ स्वयं जगत के स्वामी (जगन्नाथ) अपने गर्भगृह से बाहर आकर जन-साधारण को दर्शन देते हैं। इस भजन में उसी अलौकिक क्षण की प्रसन्नता, भक्तों का उत्साह, और प्रभु की असीम करुणा का सजीव चित्रण किया गया है। यह भजन श्रोताओं के हृदय में भक्ति रस का संचार करता है और उन्हें पुरुषोत्तम क्षेत्र पुरी की दिव्य गलियों में ले जाता है, जहाँ चारों ओर 'जय जगन्नाथ' का महाघोष गूंज रहा होता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई ॥

(कोरस / मुखड़ा)
देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई,
भक्तों के मन में छाई है आज बधाई।
जय जगन्नाथ, जय जगन्नाथ, जय जगन्नाथ स्वामी,
तुम हो घट-घट के वासी, प्रभु अंतर्यामी।
देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई...

(अंतरा - 1)
बलभद्र भैया संग सुभद्रा विराजी,
रथ पर बैठे हैं प्रभु, लीला है साजी।
नंदीघोष रथ पर विराजे हैं कन्हाई,
देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई...

(अंतरा - 2)
शंख और घंटा बाजे, बाजे शहनाई,
भक्तों की टोली ने महिमा है गाई।
झाड़ू बुहारे राजा, सेवा है पाई,
देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई...

(अंतरा - 3)
गुंडिचा मंदिर को चले हैं त्रिपुरारी,
दर्शन को तरसे हैं सब नर और नारी।
जो भी खींचेगा रथ, मुक्ति उसने पाई,
देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई...

(अंतरा - 4)
अद्भुत है रूप प्रभु का, नयन विशाला,
गले में सोहे सुंदर वैजयंती माला।
शरण में आए की लाज प्रभु ने बचाई,
देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई...

(अंतरा - 5)
भक्ति के रंग में रंगा सारा जग सारा,
बहती है पुरी में पावन प्रेम की धारा।
'भक्तिलोक' के संग गाओ प्रभु की दुहाई,
देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस सुंदर भजन का मुख्य भाव भगवान जगन्नाथ की असीम करुणा और उनके प्रति भक्तों के अनन्य समर्पण को प्रदर्शित करना है। भजन की शुरुआत में ही रथयात्रा के आगमन की घोषणा की गई है, जो भक्तों के लिए किसी परम उत्सव से कम नहीं है। जब भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर निकलते हैं, तो वह दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है।

भजन का गहरा आध्यात्मिक अर्थ यह है कि भगवान जगन्नाथ केवल मंदिर की चारदीवारी में बंद रहने वाले देवता नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण सृष्टि के स्वामी हैं। वे स्वयं चलकर अपने उन भक्तों के पास आते हैं जो किसी कारणवश मंदिर तक नहीं पहुँच पाते। रथयात्रा के दौरान राजा द्वारा सोने की झाड़ू से रथ के मार्ग को साफ करने की प्रथा (छेरा पहरा) यह दर्शाती है कि भगवान के दरबार में कोई बड़ा या छोटा नहीं है; वहाँ राजा भी एक साधारण सेवक की भाँति सेवा करता है। यह भजन हमें अहंकार का त्याग कर ईश्वर की शरण में जाने का संदेश देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि रथयात्रा के समय की जाने वाली सामूहिक साधना का एक हिस्सा है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सामूहिकता का प्रतीक: इस भजन को सामूहिक रूप से गाने से भक्तों में एकता और भ्रातृत्व की भावना का विकास होता है।
  • शरणागति का भाव: भजन की पंक्तियाँ साधक को भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण करने के लिए प्रेरित करती हैं।
  • ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ: इसमें रथयात्रा की पारंपरिक रीतियों जैसे 'छेरा पहरा' (राजा द्वारा झाड़ू लगाना) और 'गुंडिचा मंदिर' की यात्रा का सुंदर उल्लेख है।
  • मुक्ति का मार्ग: शास्त्रों में मान्यता है कि जो व्यक्ति रथयात्रा के समय रथ को खींचता है या केवल भगवान के दर्शन करता है, वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। यह भजन उसी विश्वास को सुदृढ़ करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान के नाम का संकीर्तन किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • रथयात्रा महोत्सव: आषाढ़ मास की रथयात्रा के दौरान इस भजन का गायन अत्यंत शुभ और फलदायी होता है।
  • दैनिक संध्या आरती: घर के मंदिर या सामूहिक सत्संग में संध्या काल के समय इस भजन को ढोलक, मंजीरे और शंख की ध्वनि के साथ गाया जा सकता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और प्रसन्नता होनी चाहिए। 'जय जगन्नाथ' के जयकारों के साथ बीच-बीच में ताली बजाकर कीर्तन करने से वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री जगन्नाथ (जो साक्षात भगवान श्री कृष्ण के रूप हैं), उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र (शेषनाग के अवतार) और उनकी बहन देवी सुभद्रा को समर्पित है। पुरी की इस पावन धरा पर चैतन्य महाप्रमहाप्रभु जैसे महान संतों ने भगवान जगन्नाथ के सामने नृत्य करते हुए संकीर्तन की परंपरा को पुनर्जीवित किया था। इस भजन में उसी संकीर्तन परंपरा की झलक मिलती है, जो भक्त को सीधे भगवान के दिव्य प्रेम से जोड़ती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय संकीर्तन शैली पर आधारित है। इसकी रचना रथयात्रा के पावन प्रसंग को ध्यान में रखकर की गई है। सदियों से पुरी में उड़िया और हिंदी दोनों भाषाओं में भगवान जगन्नाथ की महिमा का गान किया जाता रहा है। यह भजन उसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है जो भारत के पूर्वी तट से लेकर संपूर्ण विश्व में सनातन धर्म की महिमा का प्रसार करती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी है। इसमें ब्रजभाषा और खड़ी बोली का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'पद' या 'गीत' है जिसमें लयबद्धता और गेयता का विशेष ध्यान रखा गया है। 'नयन विशाला', 'वैजयंती माला' और 'घट-घट के वासी' जैसे शब्दों का प्रयोग भगवान के दिव्य स्वरूप को सजीव कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

  1. समानता का संदेश: भगवान के रथ के मार्ग को राजा द्वारा साफ करना यह सिखाता है कि ईश्वर की दृष्टि में सभी मनुष्य समान हैं। हमें भी अपने जीवन से जाति, वर्ग और पद के अहंकार को मिटाना चाहिए।
  2. सेवा भाव: जीवन की सार्थकता निस्वार्थ सेवा में है। जैसे भक्त रथ खींचकर प्रभु की सेवा करते हैं, वैसे ही हमें समाज के कमजोर वर्गों की सेवा करनी चाहिए।
  3. ईश्वर की सर्वव्यापकता: भगवान केवल मंदिर में नहीं, बल्कि 'घट-घट' में वास करते हैं। इसलिए हर जीव के प्रति दया और करुणा का भाव रखना ही सच्ची भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
नंदीघोष भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम यह रथ पीत और लाल रंग के कपड़ों से सजाया जाता है और इसके सारथी दारुक हैं।
गुंडिचा मंदिर भगवान की मौसी का घर रथयात्रा के दौरान भगवान यहाँ 9 दिनों के लिए विश्राम करते हैं।
बुहारे झाड़ू लगाना / साफ करना अहंकार को दूर कर हृदय को स्वच्छ करने का प्रतीक।
अंतर्यामी मन की बात जानने वाले ईश्वर जो हमारे बिना कहे ही हमारी प्रार्थना सुन लेते हैं।
वैजयंती माला विजय की माला भगवान विष्णु द्वारा धारण की जाने वाली पांच रत्नों या फूलों की दिव्य माला।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई, भक्तों के मन में छाई है आज बधाई।"
कवि कहते हैं कि देखो, जगत के स्वामी जगन्नाथ जी की पावन रथयात्रा आ गई है। इस शुभ अवसर पर सभी भक्तों के हृदय में अत्यंत हर्ष और उल्लास है, और वे एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं।

"बलभद्र भैया संग सुभद्रा विराजी, रथ पर बैठे हैं प्रभु, लीला है साजी।"
भगवान जगन्नाथ अकेले नहीं हैं, बल्कि उनके साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भी रथ पर विराजमान हैं। प्रभु ने भक्तों को दर्शन देने के लिए यह अद्भुत और दिव्य लीला रची है।

"शंख और घंटा बाजे, बाजे शहनाई, भक्तों की टोली ने महिमा है गाई।"
रथयात्रा के मार्ग में चारों ओर शंख, घंटे और शहनाई की मंगल ध्वनि गूंज रही है। भक्तों के समूह आनंदित होकर प्रभु की महिमा का गान कर रहे हैं।

"झाड़ू बुहारे राजा, सेवा है पाई, देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई।"
पुरी के गजपति राजा स्वयं को भगवान का प्रथम सेवक मानते हुए सोने की झाड़ू से रथ के आगे बुहारी (सफाई) करते हैं। यह दृश्य दर्शाता है कि भगवान के सामने सांसारिक वैभव और सत्ता शून्य है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

रथयात्रा के समय भगवान जगन्नाथ के इस प्रसिद्ध श्लोक का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

"जगन्नाथ स्वामी नयनपथगामी भवतु मे ॥"

अर्थ: हे संपूर्ण जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ! आप मेरे नेत्रों के मार्ग पर चलने वाले (अर्थात मुझे सदैव दर्शन देने वाले) बनें।

इसके अतिरिक्त, श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी इस अवसर पर विशेष फल प्रदान करता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई
मुख्य देवता भगवान श्री जगन्नाथ (श्री कृष्ण), बलभद्र, सुभद्रा
मुख्य पर्व पुरी रथयात्रा (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया)
भाषा सरल हिंदी (संकीर्तन शैली)
भक्ति भाव सख्य, दास्य और माधुर्य भाव
गायन का समय रथयात्रा उत्सव, सुबह/शाम की प्रार्थना
मुख्य संदेश समानता, समर्पण और अहंकार का त्याग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा प्रतिवर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित की जाती है। यह उत्सव लगभग 9 दिनों तक चलता है।

इस भजन के श्रद्धापूर्वक गायन और श्रवण से मन को शांति मिलती है, अहंकार का नाश होता है और भगवान जगन्नाथ की कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

रथयात्रा में तीन मुख्य रथ होते हैं: भगवान जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष', भगवान बलभद्र का रथ 'तालध्वज' और देवी सुभद्रा का रथ 'दर्पदलन' या 'पद्म रथ' कहलाता है।

'छेरा पहरा' रथयात्रा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण रस्म है जिसमें पुरी के राजा स्वयं आकर सोने की झाड़ू से रथ के चबूतरे और मार्ग की सफाई करते हैं। यह दर्शाता है कि भगवान के सामने सभी समान हैं।

हाँ, इस भजन को आप अपने घर के मंदिर में दैनिक पूजा या विशेष रूप से रथयात्रा के दिन गा सकते हैं। इससे घर में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का वास होता है।

गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। रथयात्रा के दौरान भगवान अपने भाई-बहन के साथ यहाँ आते हैं और 9 दिनों तक यहीं निवास करते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्री कृष्ण वृंदावन की लीलाओं को याद कर भाव-विभोर हो गए, तो उनका शरीर पिघलने लगा और उनकी आँखें बड़ी-बड़ी हो गईं। इसी भावमय रूप में वे जगन्नाथ पुरी में विराजमान हैं।

स्कंद पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति भक्ति भाव से रथयात्रा के समय भगवान के रथ की रस्सी को खींचता है, उसके संचित पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख और भजन "देखो जी जगन्नाथ की रथ यात्रा है आई" सनातन धर्म की समृद्ध संकीर्तन परंपरा पर आधारित है। इस सामग्री को तैयार करने में पारंपरिक ग्रंथों, पुरी मंदिर की आधिकारिक रीतियों और प्रामाणिक भजनों के संकलनों का संदर्भ लिया गया है। यह सामग्री पूरी तरह से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और त्रुटिहीन भजन लिरिक्स के साथ-साथ उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • स्कंद पुराण: पुरुषोत्तम क्षेत्र महात्म्य (जगन्नाथ पुरी की महिमा और रथयात्रा का वर्णन)।
  • चैतन्य चरितामृत: महाप्रभु चैतन्य देव की रथयात्रा संकीर्तन लीला।
  • जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (पुरी): रथयात्रा की पारंपरिक रीतियों और इतिहास का आधिकारिक विवरण।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 08 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!