भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरे नैनों से घायल ज़माना हुआ भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें तेरे नैनों से घायल ज़माना हुआ भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

हिंदू सनातन धर्म की समृद्ध संकीर्तन परंपरा में भगवान श्री कृष्ण और खाटू श्याम जी के भजनों का एक विशिष्ट स्थान है। "तेरे नैनों से घायल ज़माना हुआ" एक ऐसा ही अत्यंत लोकप्रिय, भावपूर्ण और मधुर भजन है जो भक्त के हृदय में छिपे अनन्य प्रेम, विरह और पूर्ण समर्पण के भाव को अभिव्यक्त करता है। यह भजन मुख्य रूप से 'माधुर्य भाव' और 'समर्पण भाव' पर आधारित है, जिसमें भगवान के नयनों की सम्मोहक शक्ति, उनकी मंद मुस्कान और मुरली की मधुर तान का अत्यंत सुंदर चित्रण किया गया है। जब कोई भक्त इस भजन को गाता है, तो वह सांसारिक बंधनों को भूलकर पूरी तरह से श्याम रंग में रंग जाता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, कठिन शब्दों के अर्थ और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं, ताकि साधक और संगीत प्रेमी दोनों ही इसके वास्तविक रस का आस्वादन कर सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तेरे नैनों से घायल ज़माना हुआ |
साँवरे मैं भी तेरा | दिवाना हुआ |

तेरे नैनों ने ले ली रे मेरी जान | साँवरे |
मेरा दिल तुझपे है कुर्बान है मेरे श्याम साँवरे |

तेरे पैर पैंजनियां बाजै |
आँखों में काजल साजै |
मैं पागल सी हो जाऊँ |
तेरी जब जब मुरली बाजै |
मेरे दिल को घायल करे |
तेरी मुस्कान साँवरे |
मेरा दिल तुझपे है कुर्बान |
है मेरे श्याम साँवरे।

राधा भी तेरी दीवानी |
मीरा हो गई मस्तानी |
जब याद तेरी तड़पाएँ |
मेरी आँख से झलकें पानी |
सच कहते हैं हाय |
सच कहते हैं तुम्हे छलिया |
बेईमान साँवरे |
मेरा दिल तुझपे है कुर्बान |
है मेरे श्याम साँवरे।

तुझसे दूरी मेरे श्याम |
बिलकुल ना सह पाऊँ |
जो तूने ठुकराया |
तेरे दर पर मर जाऊँ |
चौखट पे मर जाऊँ |
तू साथ तो है मेरे |
फिर क्या घबराना है |
तेरे नाम की मस्ती में |
मुझे चलते जाना है |
ले हाथ पकड़ मेरा |
क्या जाएगा तेरा |
तुझसे दूरी मेरे श्याम |
बिलकुल ना सह पाऊं |
बस इतनी तमन्ना है |
मैं तेरा हो जाऊं।

कहता संदीप दीवाना |
मुझे श्याम रंग | रंग जाना |
चाहे कुछ भी कहे ये ज़माना |
झूठे रिश्तों से |
झूठे रिश्ते नातों से |
मैं परेशान साँवरे |
बस इतनी तमन्ना है |
मैं तेरा हो जाऊं।

मेरा दिल तुझपे है कुर्बान |
है मेरे श्याम साँवरे।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन जीवात्मा और परमात्मा के बीच के अलौकिक संबंध को दर्शाता है। यहाँ 'घायल' होने का अर्थ किसी भौतिक चोट से नहीं, बल्कि भगवान के सौंदर्य और उनकी कृपा दृष्टि से मुग्ध हो जाने से है। जब भक्त कहता है कि "तेरे नैनों से घायल ज़माना हुआ", तो इसका अर्थ है कि संपूर्ण सृष्टि भगवान श्री कृष्ण के नयनों की करुणा और आकर्षण से बंधी हुई है।

भजन के प्रथम भाग में भगवान के रूप सौंदर्य का वर्णन है। उनके चरणों में बजने वाली पैंजनियां (पायल) और आँखों में लगा काजल भक्त के मन को हर लेते हैं। मुरली की ध्वनि सुनते ही भक्त सुध-बुध खो बैठता है। यह अवस्था श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित गोपियों की उस अवस्था के समान है, जहाँ वे मुरली की तान सुनकर अपने सभी गृह-कार्यों को छोड़कर वन की ओर दौड़ पड़ती थीं।

द्वितीय भाग में ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों जैसे राधा जी और मीरा बाई की भक्ति का उल्लेख है। यह दर्शाता है कि युग चाहे जो भी हो, भगवान की भक्ति का स्वरूप हमेशा एक जैसा ही अनन्य और निष्काम रहता है। अंतिम पंक्तियों में भक्त संसार के झूठे रिश्तों से विरक्ति और भगवान के चरणों में पूर्ण शरणागति की प्रार्थना करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे सामान्य गीतों से अलग कर एक उच्च कोटि का आध्यात्मिक संकीर्तन बनाती हैं:

  • माधुर्य और विरह का अद्भुत समन्वय: इस भजन में जहाँ एक ओर भगवान के सौंदर्य का आनंद है, वहीं दूसरी ओर उनसे दूर होने की तड़प (विरह) भी है।
  • शरणागति की पराकाष्ठा: "जो तूने ठुकराया, तेरे दर पर मर जाऊँ" - यह पंक्ति भक्त के उस अटूट विश्वास को दर्शाती है जहाँ उसके पास भगवान के अतिरिक्त कोई दूसरा आश्रय नहीं है।
  • सांसारिक विरक्ति: भजन में संसार के रिश्तों को "झूठे रिश्ते-नाते" कहकर संबोधित किया गया है, जो आदि शंकराचार्य के 'मोहमुद्गर' (भज गोविंदम) के दर्शन से मेल खाता है।
  • सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: इसकी लय और ताल इतनी सरल और कर्णप्रिय हैं कि यह सामूहिक कीर्तन और जागरणों में भक्तों को झूमने पर विवश कर देती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं होता, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:

  • संध्या काल और आरती के बाद: संध्या कालीन पूजा या आरती के पश्चात शांत मन से इस भजन का गायन करने से मानसिक शांति मिलती है।
  • एकादशी और द्वादशी तिथि: खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए एकादशी का दिन अत्यंत पवित्र होता है। इस दिन श्याम मंदिर या घर के मंदिर में ज्योत जलाकर इस भजन को गाना विशेष कृपा दायक माना जाता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में भगवान श्री कृष्ण या श्याम बाबा की छवि का ध्यान करना चाहिए। हाथों से ताली बजाकर और भावविभोर होकर गाने से इसका आध्यात्मिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण और उनके कलयुगी अवतार श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है। सनातन परंपरा में खाटू श्याम जी को 'हारे का सहारा' कहा जाता है। भजन में ब्रज की अधिष्ठात्री देवी श्री राधा रानी और मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख संत मीरा बाई का भी स्मरण किया गया है। मीरा बाई की भक्ति 'माधुर्य भाव' की पराकाष्ठा थी, जिन्होंने गिरधर गोपाल को ही अपना सर्वस्व मान लिया था। इस भजन में भी उसी मीरा-भाव की झलक मिलती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन के रचनाकार 'संदीप दीवाना' हैं, जिन्होंने आधुनिक युग में सरल शब्दों के माध्यम से शास्त्रीय भक्ति भाव को आम जनमानस तक पहुँचाने का कार्य किया है। इस भजन की पृष्ठभूमि राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर और ब्रज भूमि के भक्ति रस से प्रेरित है। आज के समय में यह भजन देश-विदेश के कोने-कोने में होने वाले श्याम कीर्तनों का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और लोक-भाषा (खड़ी बोली हिंदी) से प्रभावित है, जिसमें ब्रजभाषा के कुछ मधुर शब्दों जैसे 'पैंजनियां', 'बाजै', 'साजै' का प्रयोग किया गया है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'गीतिका' या 'पद' है, जिसमें अंत्यानुप्रास अलंकार (Rhyming) का सुंदर प्रयोग हुआ है, जैसे 'दीवानी-मस्तानी-पानी'। यह शैली श्रोता के कान और मन दोनों को तुरंत आकर्षित कर लेती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति रस में सराबोर नहीं करता, बल्कि जीवन के कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण व्यावहारिक और आध्यात्मिक संदेश भी देता है:

  1. संसार की नश्वरता का बोध: "झूठे रिश्तों से मैं परेशान साँवरे" - यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि इस संसार के सभी भौतिक संबंध अस्थायी हैं। केवल ईश्वर के साथ हमारा संबंध ही शाश्वत और सच्चा है।
  2. निर्भयता का संदेश: "तू साथ तो है मेरे, फिर क्या घबराना है" - जब मनुष्य ईश्वर पर पूर्ण विश्वास कर लेता है, तो उसके जीवन से सभी प्रकार का भय समाप्त हो जाता है।
  3. अनन्य निष्ठा: भक्त का यह संकल्प कि वह केवल भगवान का ही होकर रहना चाहता है, हमें सिखाता है कि साधना में एकाग्रता और अनन्य निष्ठा कितनी आवश्यक है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
साँवरे श्याम वर्ण वाले (श्री कृष्ण) भगवान का वह रूप जो अपनी सुंदरता से मन को मोह लेता है।
पैंजनियां पायल / नूपुर भगवान के चरणों की दिव्य ध्वनि जो अनाहत नाद का प्रतीक है।
छलिया छल करने वाला / मन चुराने वाला भगवान जो भक्तों के अहंकार और दुखों का हरण (छल) कर लेते हैं।
चौखट द्वार / शरण भगवान का वह पावन दर जहाँ पहुँचकर जीव को मुक्ति मिलती है।
तमन्ना इच्छा / अभिलाषा मोक्ष या केवल ईश्वर की प्राप्ति की तीव्र इच्छा।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तेरे नैनों से घायल ज़माना हुआ, साँवरे मैं भी तेरा दीवाना हुआ..."
हे साँवरिया सरकार! आपके इन विशाल और करुणामयी नयनों की एक चितवन से यह सारा संसार सम्मोहित है। मैं भी आपकी इसी दिव्य छवि को देखकर आपका अनन्य प्रेमी बन गया हूँ।

"तेरे पैर पैंजनियां बाजै, आँखों में काजल साजै..."
आपके सुकोमल चरणों में बंधी पायल जब रुनझुन बजती है और आपकी सुंदर आँखों में जो काजल सुशोभित हो रहा है, वह मेरे हृदय को असीम आनंद से भर देता है।

"राधा भी तेरी दीवानी, मीरा हो गई मस्तानी..."
आपके इस रूप की दीवानी केवल मैं ही नहीं, बल्कि साक्षात् आह्लादिनी शक्ति श्री राधा जी और महलों का सुख त्यागने वाली मीरा बाई भी थीं। आपकी याद में जब भी मेरी आँखें भर आती हैं, तो मुझे मीरा के उस विरह का अहसास होता है।

"तू साथ तो है मेरे फिर क्या घबराना है, तेरे नाम की मस्ती में मुझे चलते जाना है..."
जब मुझे यह विश्वास हो जाता है कि आप सदैव मेरे साथ हैं, तो संसार की कोई भी परिस्थिति मुझे डरा नहीं सकती। अब तो बस आपके नाम के संकीर्तन की मस्ती में ही यह जीवन व्यतीत करना है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के माधुर्य भाव को समझने के लिए श्रीमद्भागवत महापुराण और स्तोत्र साहित्य के इस प्रसिद्ध श्लोक का स्मरण करना अत्यंत प्रासंगिक है, जो भगवान के सौंदर्य का वर्णन करता है:

"कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं,
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्।
सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं,
गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥"

अर्थ: जिनके ललाट पर कस्तूरी का तिलक है, वक्षस्थल पर कौस्तुभ मणि है, नासिका के अग्रभाग में सुंदर मोती है, हाथ में मुरली है, कलाई में कंगन है, संपूर्ण शरीर पर सुगंधित चंदन लगा है, गले में मोतियों की माला है और जो गोपियों से घिरे हुए हैं, ऐसे गोपाल शिरोमणि श्री कृष्ण की जय हो।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरे नैनों से घायल ज़माना हुआ
मुख्य आराध्य देव भगवान श्री कृष्ण / श्री खाटू श्याम जी
रचनाकार / कवि संदीप दीवाना
मुख्य भाव माधुर्य भाव, विरह, अनन्य समर्पण (शरणागति)
भाषा सरल हिंदी (ब्रजभाषा के पुट के साथ)
गायन के लिए उत्तम अवसर श्याम फाल्गुन मेला, एकादशी कीर्तन, जन्माष्टमी, दैनिक संध्या वंदना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन के मूल लेखक और गीतकार प्रसिद्ध श्याम भक्त 'संदीप दीवाना' हैं। उन्होंने अपने भावपूर्ण शब्दों से इस भजन को सजाया है।

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण और उनके कलयुगी स्वरूप श्री खाटू श्याम जी को समर्पित है।

यहाँ 'घायल' होने का अर्थ किसी शारीरिक पीड़ा से नहीं है, बल्कि भगवान के अलौकिक सौंदर्य, उनकी करुणा और प्रेम से मुग्ध होकर अपना सर्वस्व भूल जाने से है।

इस भजन को आप कभी भी गा सकते हैं, परंतु एकादशी तिथि, जन्माष्टमी, या संध्या कालीन आरती के समय इसका गायन मन को विशेष शांति प्रदान करता है।

राधा जी और मीरा बाई सनातन धर्म में अनन्य प्रेम और भक्ति की सर्वोच्च प्रतीक हैं। उनका उल्लेख यह दर्शाने के लिए किया गया है कि भगवान की भक्ति में जो आनंद है, वही जीवन का परम लक्ष्य है।

हाँ, आप अपने घर के मंदिर में धूप-दीप जलाकर अत्यंत श्रद्धापूर्वक इस भजन का गायन कर सकते हैं। इससे घर का वातावरण सकारात्मक और भक्तिमय बनता है।

यह पंक्ति हमें वैराग्य का संदेश देती है। यह बताती है कि संसार के भौतिक संबंध नश्वर हैं, जबकि ईश्वर के साथ जीव का संबंध ही एकमात्र सत्य और शाश्वत है।

इस भजन की भाषा सरल हिंदी है, जिसमें ब्रजभाषा के मधुर शब्दों का समावेश है। इसकी शैली गेय (गाने योग्य) और अत्यंत सुरीली है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ, भावार्थ और आध्यात्मिक विश्लेषण को तैयार करने के लिए श्रीमद्भागवत महापुराण, पारंपरिक कृष्ण भक्ति साहित्य और प्रामाणिक संकीर्तन संग्रहों का संदर्भ लिया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और त्रुटिहीन भक्ति सामग्री पहुँचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण (रासपंचाध्यायी प्रसंग)
  • संत मीराबाई के प्रामाणिक पद संग्रह
  • पारंपरिक श्याम भजन एवं कीर्तन संकलन

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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