"तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है" सनातन धर्म के आधुनिक संकीर्तन साहित्य में एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजन है। यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण के कलयुगी अवतार श्री खाटू श्याम जी को समर्पित है, जिसमें भक्त अपनी अनन्य शरणागति और अटूट विश्वास को अभिव्यक्त करता है। इस भजन का मुख्य भाव 'समर्पण' (Sharanagati) और 'कृतज्ञता' (Gratitude) है। जब एक जीवात्मा सांसारिक मोह-माया और चिंताओं से मुक्त होकर अपने आराध्य के चरणों में सर्वस्व समर्पित कर देती है, तब उसे संसार की किसी भी वस्तु की कमी महसूस नहीं होती। इस भजन के माध्यम से भक्त यह स्वीकार करता है कि प्रभु की कृपा और उनकी 'मोरछड़ी' की छाया ही उसके जीवन का एकमात्र संबल है। सत्संगों, कीर्तनों और विशेष रूप से एकादशी के पावन अवसर पर इस भजन का गायन भक्तों को एक अलौकिक शांति और दिव्य आनंद की अनुभूति कराता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है,
मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है।
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है...
मेरे सर पे हर पल मोरछड़ी है,
मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है।
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है...
मैंने पुकारा या ना पुकारा,
तूने दिया है मुझे हर पल सहारा।
पग डगमगाए मेरे जो कहीं हैं,
थामा मुझे तेरे हाथों ने ही है।
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है...
तेरी कृपा हो तेरी मेहर हो,
शिप्रा पे तेरी सीढ़ी नज़र हो।
मुझको ज़माने की परवाह नहीं है,
तू जो करे बस वही तो सही है।
मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है...
तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है,
मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस पावन भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और दार्शनिक है। यह जीवात्मा और परमात्मा के बीच के उस अटूट संबंध को दर्शाता है, जहां भक्त अपने अस्तित्व को पूरी तरह से भगवान के चरणों में विलीन कर देता है।
भजन की शुरुआत इस परम सत्य की घोषणा से होती है कि यदि जीवन में ईश्वर का साथ हो, तो किसी भी भौतिक या आध्यात्मिक वस्तु की कमी नहीं रह जाती। भक्त कहता है कि हे प्रभु! जब से आपका वरदहस्त मेरे सिर पर आया है, मेरा जीवन अत्यंत सुगम और आनंदमय हो गया है। सांसारिक कठिनाइयां और संघर्ष अब मुझे विचलित नहीं करते, क्योंकि मुझे विश्वास है कि आप हर परिस्थिति में मेरे साथ हैं।
भजन के अंतरा में भक्त अपनी निर्बलता और भगवान की सर्वज्ञता को स्वीकार करता है। वह कहता है कि चाहे मैं संकट के समय आपको पुकार पाऊं या न पुकार पाऊं, आप अंतर्यामी हैं और बिना पुकारे ही मेरी सहायता के लिए दौड़े चले आते हैं। जब भी जीवन की राह पर चलते हुए मेरे कदम डगमगाए हैं, तब-तब आपके कृपालु हाथों ने मुझे गिरने से बचाया है। यह भाव श्रीमद्भगवद्गीता के उस आश्वासन को जीवंत करता है जिसमें भगवान कहते हैं कि वे अपने अनन्य भक्तों का योगक्षेम स्वयं वहन करते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भक्ति मार्ग का एक व्यावहारिक दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- पूर्ण शरणागति का संदेश: यह भजन भक्त को सिखाता है कि जब हम अपनी चिंताओं को भगवान को सौंप देते हैं, तो हमारा जीवन भारमुक्त हो जाता है।
- मोरछड़ी की महिमा: खाटू श्याम जी की 'मोरछड़ी' को भक्तों के कष्टों को हरने वाला और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना गया है। भजन में इसका उल्लेख भक्त के सुरक्षित होने के भाव को सुदृढ़ करता है।
- संसार से विरक्ति और प्रभु में आसक्ति: "मुझको ज़माने की परवाह नहीं है" यह पंक्ति दर्शाती है कि जब भक्त को दिव्य प्रेम का आस्वाद मिल जाता है, तो वह लोक-लाज और सांसारिक आलोचनाओं से ऊपर उठ जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष परिस्थितियां और समय अत्यंत फलदायी माने गए हैं:
- संध्या काल की आरती व कीर्तन: संध्या के समय जब घर या मंदिर में दीप प्रज्वलित किया जाता है, तब इस भजन का गायन मन को शांत करता है और दिनभर के मानसिक तनाव को दूर करता है।
- एकादशी व्रत के अवसर पर: खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए एकादशी का दिन अत्यंत पवित्र होता है। इस दिन श्याम बाबा के दरबार में या घर पर ज्योत लेकर इस भजन को गाना विशेष कृपा दायक माना जाता है।
- कठिन परिस्थितियों में संबल के लिए: जब जीवन में निराशा या असमंजस की स्थिति हो, तब इस भजन का शांत मन से श्रवण करने पर आंतरिक शक्ति और मार्गदर्शन प्राप्त होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से श्री खाटू श्याम जी (भगवान श्री कृष्ण के कलयुगी स्वरूप) को समर्पित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। भगवान श्री कृष्ण ने उनके इस सर्वनाशक प्रण को देखते हुए उनसे उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक के इस महान बलिदान से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके स्वयं के नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे। इस भजन में प्रयुक्त शब्द जैसे 'मोरछड़ी' सीधे तौर पर श्याम बाबा की पूजा पद्धति और उनके स्वरूप से जुड़े हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन आधुनिक श्याम भजनों की श्रेणी में आता है। इसकी रचना लोक-भावनाओं और सरल भक्ति को ध्यान में रखकर की गई है। राजस्थान और हरियाणा के क्षेत्रों से शुरू होकर आज यह भजन संपूर्ण भारत और विदेशों में बसे सनातनी परिवारों के बीच गाया जाता है। कलयुग में नाम संकीर्तन की महिमा को प्रतिपादित करने वाले इस भजन ने लाखों भक्तों के हृदय में ईश्वर के प्रति विश्वास को पुनः जागृत किया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है। इसमें जटिल संस्कृतनिष्ठ शब्दों के स्थान पर आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिससे यह सीधे हृदय को स्पर्श करता है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'गीत' या 'पद' है जिसमें लयबद्धता और गेयता का अद्भुत समन्वय है। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं (जैसे 'मोरछड़ी' और 'सीढ़ी नज़र') भक्ति रस को और अधिक सघन बनाती हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
इस भजन से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती हैं:
- अटूट विश्वास (Unshakable Faith): परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि ईश्वर हमारे साथ हैं और वे सब कुछ ठीक कर देंगे।
- अहंकार का त्याग: "तू जो करे बस वही तो सही है" - यह पंक्ति हमें अपने अहंकार को त्यागकर ईश्वर की इच्छा (Divine Will) को स्वीकार करने की प्रेरणा देती है।
- सकारात्मक दृष्टिकोण: जब हम ईश्वर के साथ का अनुभव करते हैं, तो हमारा जीवन के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक हो जाता है और हम हर हाल में प्रसन्न रहना सीख जाते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| मोरछड़ी | मोर के पंखों से बनी झाड़ू या चंवर | खाटू श्याम जी का पवित्र प्रतीक जो भक्तों के कष्टों को दूर करता है। |
| मेहर | कृपा, दया, अनुकंपा | ईश्वर की वह अकारण दया जो भक्त पर बरसती है। |
| शिप्रा / शिखर | पवित्र नदी या मंदिर का शिखर | दिव्य स्थान जहां से प्रभु की दृष्टि भक्त पर पड़ती है। |
| सीढ़ी नज़र / तिरछी नज़र | कृपा दृष्टि, तिरछी चितवन | भगवान कृष्ण की वह मनमोहक दृष्टि जो भक्त का कल्याण करती है। |
| पग डगमगाए | कदम बहकना या विचलित होना | जीवन के कठिन समय में जब मनुष्य का धैर्य टूटने लगता है। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है, मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है।"
हे प्रभु! जब आपका दिव्य साथ मेरे साथ है, तो मुझे इस संसार में किसी भी भौतिक सुख या साधन की कोई कमी महसूस नहीं होती। आपके संरक्षण में मेरा जीवन अत्यंत आनंदपूर्वक और बिना किसी चिंता के व्यतीत हो रहा है।
"मेरे सर पे हर पल मोरछड़ी है, मज़े में मेरी कट रही ज़िन्दगी है।"
मेरे सिर पर सदैव आपकी कृपा रूपी मोरछड़ी की शीतल छाया बनी रहती है। यह मोरछड़ी मुझे सभी प्रकार की बाधाओं, नजर दोष और संकटों से बचाती है, जिससे मेरा जीवन सुरक्षित और सुखी है।
"मैंने पुकारा या ना पुकारा, तूने दिया है मुझे हर पल सहारा।"
कई बार मैं अपनी अज्ञानता या संकट की व्याकुलता में आपको पुकारना भी भूल जाता हूँ, लेकिन आप इतने दयालु हैं कि बिना पुकारे ही मेरे सहायक बन जाते हैं। आपकी सहायता और सहारा मुझे हर क्षण प्राप्त होता है।
"पग डगमगाए मेरे जो कहीं हैं, थामा मुझे तेरे हाथों ने ही है।"
जब भी इस संसार रूपी कठिन मार्ग पर चलते हुए मेरे कदम डगमगाए हैं या मैं सही मार्ग से भटकने लगा हूँ, तब आपने अपने कृपालु हाथों से मुझे थाम लिया और गिरने से बचा लिया।
"तेरी कृपा हो तेरी मेहर हो, शिप्रा पे तेरी सीढ़ी नज़र हो।"
मुझ पर सदैव आपकी कृपा और दया बनी रहे। आपकी वह दिव्य और करुणामयी दृष्टि मुझ पर हमेशा रहे जो मेरे जीवन के समस्त अंधकार को दूर कर दे।
"मुझको ज़माने की परवाह नहीं है, तू जो करे बस वही तो सही है।"
अब मुझे इस संसार के लोगों की बातों, उनकी आलोचनाओं या उनकी परवाह नहीं है। मेरा आप पर ऐसा अटूट विश्वास है कि आप मेरे जीवन में जो भी करेंगे या जो भी परिस्थिति लाएंगे, वही मेरे लिए परम कल्याणकारी होगी।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के शरणागति के भाव को पुष्ट करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का यह प्रसिद्ध श्लोक अत्यंत प्रासंगिक है:
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुचः॥
(श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 18, श्लोक 66)
अर्थ: सभी धर्मों (कर्तव्यों और आश्रयों) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सभी पापों और कष्टों से मुक्त कर दूंगा, शोक मत करो।
इसके साथ ही, भगवान श्री कृष्ण का यह महामंत्र भी भक्त को निरंतर स्मरण रखना चाहिए:
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है |
| समर्पित देवता | श्री खाटू श्याम जी / भगवान श्री कृष्ण |
| मुख्य भाव (Bhava) | समर्पण, कृतज्ञता, अनन्य भक्ति (Sharanagati) |
| भाषा | सरल हिंदी (खड़ी बोली) |
| प्रमुख प्रतीक | मोरछड़ी (Morschadi), कृपा दृष्टि |
| उपयुक्त अवसर | श्याम संध्या, एकादशी कीर्तन, दैनिक प्रार्थना, सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है" भजन के आध्यात्मिक, दार्शनिक और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस सामग्री को तैयार करने में सनातन धर्म के शरणागति सिद्धांत, श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों और खाटू श्याम जी की पारंपरिक कथाओं का संदर्भ लिया गया है। यह संपादकीय रूप से तैयार सामग्री भक्तों को न केवल भजन के शब्द प्रदान करती है, बल्कि उन्हें इसके गहरे अर्थ से जोड़कर उनकी साधना को समृद्ध करने का प्रयास करती है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 18 - मोक्षसंन्यासयोग)
- महाभारत - बर्बरीक की कथा और श्री कृष्ण वरदान प्रसंग
- पारंपरिक श्याम भजन संग्रह एवं सत्संग पद्धति
- खाटू श्याम मंदिर समिति, राजस्थान की आधिकारिक परंपराएं
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