भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग में मोक्ष और मानसिक शांति का सबसे सुलभ साधन माना गया है। "जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना" एक ऐसा ही अत्यंत भावुक और हृदयस्पर्शी भजन है, जो श्री खाटू श्याम जी (भगवान श्री कृष्ण के कलयुगी स्वरूप) के प्रति एक भक्त की अनन्य भक्ति, विरह वेदना और पूर्ण शरणागति को दर्शाता है। इस भजन में भक्त का वह विरह भाव प्रकट हुआ है, जिसमें वह स्वयं खाटू धाम जाने में असमर्थ होने के कारण, वहां जाने वाले अन्य तीर्थयात्रियों के माध्यम से अपने आराध्य देव सांवरे सरकार तक अपनी करुण पुकार और संदेश पहुंचाना चाहता है। यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक भक्त के आंसुओं और उसकी अटूट श्रद्धा का जीवंत दस्तावेज है, जो श्रोताओं के हृदय में भक्ति रस का संचार कर देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना

जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना,
खाटू आने को एक प्रेमी आपका तरसता है,
याद में तुम्हारी बाबा रोता और बिलखता है।
जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना...

दुनिया भर के सारे प्रेमी तुमसे मिलने जाते हैं,
ऐसी क्या हुई हमसे हम समझ न पाते हैं,
जब भी कोई खाटू जाता मेरा मन ललचता है,
खाटू आने को एक प्रेमी आपका तरसता है।
जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना...

बेक़रार आँखें हैं ये दीदार पाने को,
एक बार कह दो बाबा अपने धाम आने को,
जी भर के देखूं तुमको मन मेरा मचलता है,
खाटू आने को एक प्रेमी आपका तरसता है।
जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना...

सौंप दी तेरे चरणों में मैंने अपनी अर्ज़ी है,
राजी रखो जैसे बाबा आगे तेरी मर्ज़ी है,
हुक्म तेरा ही कुंदन का सांवरे सफलता है,
खाटू आने को एक प्रेमी आपका तरसता है।
जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन 'गोपी-भाव' और 'विरह-भक्ति' की पराकाष्ठा है। जब कोई भक्त सांसारिक बंधनों, आर्थिक तंगी या किसी अन्य विवशता के कारण अपने आराध्य के दर्शन के लिए उनके पावन धाम (खाटू धाम) नहीं जा पाता, तब उसके हृदय में उठने वाली तड़प इस भजन के माध्यम से व्यक्त होती है।

भजन की शुरुआत में भक्त खाटू जाने वाले यात्रियों से मनुहार करता है कि वे उसका एक छोटा सा संदेश सांवरे सरकार तक पहुंचा दें। संदेश यह है कि उनका एक अनन्य प्रेमी उनके दर्शन के लिए दिन-रात तरस रहा है और उनकी याद में अश्रु बहा रहा है। भक्त को इस बात की गहरी पीड़ा है कि दुनिया भर के लोग बाबा के दर्शन पा रहे हैं, लेकिन वह स्वयं वंचित है। वह आत्म-मंथन करता है कि आखिर उससे ऐसी क्या भूल हो गई जो बाबा ने उसे अब तक नहीं बुलाया। अंत में, भक्त अपनी इच्छा को बाबा की इच्छा में विलीन कर देता है। वह कहता है कि उसने अपनी अर्जी बाबा के चरणों में लगा दी है, अब जैसी बाबा की मर्जी होगी, उसी में वह सुखी रहेगा। यह पूर्ण शरणागति (प्रपत्ति) का सर्वोच्च उदाहरण है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • विरह और करुणा रस: यह भजन शांत और करुण रस से ओतप्रोत है, जो भक्त के हृदय को द्रवित कर देता है।
  • निष्कपट प्रार्थना: इसमें किसी भौतिक सुख की कामना नहीं है, बल्कि केवल और केवल प्रभु के दर्शन (दीदार) की लालसा है।
  • पूर्ण समर्पण (शरणागति): "राजी रखो जैसे बाबा आगे तेरी मर्ज़ी है" यह पंक्ति गीता के निष्काम कर्म और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण के सिद्धांत को दर्शाती है।
  • सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: इसकी लय और धुन इतनी सुगम है कि इसे सामूहिक रूप से गाकर भक्तगण भाव-विभोर हो जाते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए सभी समय उत्तम हैं, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यंत फलदायी मानी गई हैं:

  • एकादशी और द्वादशी तिथि: श्री खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी (विशेषकर फाल्गुन मास की आमलकी एकादशी) का अत्यधिक महत्व है। इस दिन इस भजन का गायन करने से बाबा श्याम अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
  • संध्या आरती के समय: घर में या मंदिर में संध्याकालीन आरती के पश्चात शांत चित्त से इस भजन को गाने से मानसिक शांति मिलती है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और आंखों में सांवरे की छवि होनी चाहिए। यदि संभव हो तो हाथ में मंजरी या करताल लेकर मंद गति से इसका संकीर्तन करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन महाभारत कालीन महान योद्धा बर्बरीक, जिन्हें कलयुग में भगवान श्री कृष्ण के वरदान स्वरूप श्री खाटू श्याम जी के नाम से पूजा जाता है, को समर्पित है। श्री कृष्ण ने बर्बरीक के महान बलिदान (शीश का दान) से प्रसन्न होकर उन्हें अपना नाम 'श्याम' दिया था और कहा था कि कलयुग में जो भी सच्चे मन से इनका स्मरण करेगा, उसके सभी कष्ट दूर होंगे और वह 'हारे का सहारा' बनेंगे। इस भजन के रचयिता 'कुंदन' जी हैं, जिन्होंने अपने काव्य के माध्यम से बाबा श्याम के प्रति अपनी अनन्य प्रीति को प्रकट किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना आधुनिक श्याम भजनों की परंपरा में की गई है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। जो भक्त किसी कारणवश वहां नहीं पहुंच पाते, उनके मन की व्यथा को समझकर इस भजन की रचना की गई है। यह भजन कलयुग के सबसे जाग्रत देव माने जाने वाले बाबा श्याम के प्रति जन-सामान्य के गहरे जुड़ाव और विश्वास को प्रदर्शित करता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'गीत' या 'पद' है, जिसमें गेयता (गाए जाने की योग्यता) का गुण कूट-कूट कर भरा है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का सहज प्रयोग हुआ है, जो इसके सौंदर्य को और बढ़ाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पाठ सिखाता है:

  1. धैर्य और विश्वास: जब हमारे जीवन में कठिनाइयां आएं या हमारी प्रार्थनाएं तुरंत स्वीकार न हों, तब भी हमें ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
  2. अहंकार का त्याग: भक्त जब कहता है "ऐसी क्या हुई हमसे हम समझ न पाते हैं", तो वह अपनी कमियों को स्वीकार करता है, जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक है।
  3. ईश्वरीय इच्छा का सम्मान: जीवन में सब कुछ हमारी इच्छा के अनुसार नहीं होता। ईश्वर की इच्छा को सहर्ष स्वीकार करना ही सच्ची शांति का मार्ग है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ भक्ति संदर्भ में महत्व
संदेसा संदेश / पैगाम भक्त की करुण पुकार जो वह दूसरों के माध्यम से भेजता है।
सांवरे श्री कृष्ण / खाटू श्याम जी सांवले रंग के मनमोहक प्रभु।
तरसता व्याकुल होना / लालायित होना दर्शन पाने की तीव्र इच्छा।
दीदार दर्शन / साक्षात देखना प्रभु की मनमोहक छवि को नयनों में बसाना।
अर्ज़ी प्रार्थना पत्र / निवेदन अपनी इच्छाओं को प्रभु के चरणों में समर्पित करना।
हुक्म आज्ञा / आदेश ईश्वरीय विधान जिसके बिना पत्ता भी नहीं हिलता।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना, खाटू आने को एक प्रेमी आपका तरसता है..."
भावार्थ: हे खाटू धाम जाने वाले भाग्यशाली यात्रियों! जब तुम मेरे सांवरे सरकार के सम्मुख जाओ, तो उनसे मेरा एक छोटा सा निवेदन कह देना कि तुम्हारा एक भक्त तुम्हारे दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल है।

पंक्ति: "दुनिया भर के सारे प्रेमी तुमसे मिलने जाते हैं, ऐसी क्या हुई हमसे हम समझ न पाते हैं..."
भावार्थ: हे प्रभु! पूरी दुनिया से लोग आपके दर्शन के लिए आ रहे हैं, लेकिन मुझे अभी तक आपका बुलावा नहीं मिला। मुझसे ऐसी क्या खता हो गई है, मुझे समझ नहीं आ रहा।

पंक्ति: "बेक़रार आँखें हैं ये दीदार पाने को, एक बार कह दो बाबा अपने धाम आने को..."
भावार्थ: मेरी ये आंखें आपके दर्शन के लिए बेचैन हैं। हे बाबा! बस एक बार मुझे अपने धाम आने की अनुमति दे दीजिए ताकि मैं आपको जी भरकर निहार सकूं।

पंक्ति: "सौंप दी तेरे चरणों में मैंने अपनी अर्ज़ी है, राजी रखो जैसे बाबा आगे तेरी मर्ज़ी है..."
भावार्थ: मैंने अपनी प्रार्थना आपके श्रीचरणों में रख दी है। अब आप मुझे जिस हाल में भी रखें, मैं उसी में खुश हूँ, क्योंकि आपकी इच्छा ही सर्वोपरि है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्री खाटू श्याम जी की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

ॐ श्री श्याम देवाय नमः

अर्थ: हम भगवान श्री श्याम देव को नमस्कार करते हैं, जो सभी के कष्टों को हरने वाले हैं।

इसके अतिरिक्त, महाभारत के इस प्रसिद्ध श्लोक का स्मरण किया जाता है जो बर्बरीक के शीश दान के प्रसंग से जुड़ा है:

"हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे,
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जाने वाले एक संदेसा सांवरे से कह देना
समर्पित देवता श्री खाटू श्याम जी (भगवान श्री कृष्ण)
मुख्य भाव विरह भाव, समर्पण, करुणा रस
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
रचयिता / कवि कुंदन जी
उपयुक्त अवसर एकादशी, श्याम संकीर्तन, दैनिक संध्या वंदन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन के रचयिता प्रसिद्ध श्याम भक्त और कवि 'कुंदन' जी हैं। उन्होंने इस भजन में एक भक्त की विरह वेदना को बहुत ही सुंदर शब्दों में पिरोया है।

यह भजन राजस्थान के सीकर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध मंदिर के अधिष्ठाता देव श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) को समर्पित है, जिन्हें भगवान श्री कृष्ण का कलयुगी अवतार माना जाता है।

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु एकादशी तिथि, फाल्गुन मेले के दौरान और प्रतिदिन संध्या काल में बाबा श्याम की आरती के बाद इसे गाना विशेष रूप से फलदायी और शांतिदायक होता है।

इस भजन का मुख्य संदेश है 'पूर्ण शरणागति'। भक्त अपनी सभी इच्छाओं और दर्शन की लालसा को प्रभु के चरणों में सौंप देता है और उनकी मर्जी में ही अपनी खुशी ढूंढता है।

महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक ने प्रतिज्ञा की थी कि जो पक्ष हारेगा, वे उसकी ओर से लड़ेंगे। भगवान कृष्ण ने उनके इस जज्बे और शीश दान की महिमा को देखकर उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे हारने वाले और निराश लोगों के रक्षक बनेंगे।

हाँ, आप प्रतिदिन अपने घर के मंदिर में श्री खाटू श्याम जी की मूर्ति या चित्र के सम्मुख धूप-दीप जलाकर अत्यंत श्रद्धापूर्वक इस भजन का गायन कर सकते हैं।

भजन की अंतिम पंक्तियों में आया 'कुंदन' शब्द इसके रचयिता के नाम को दर्शाता है। यह पारंपरिक काव्य शैली है जहां कवि अपना नाम भजन के अंत में जोड़ते हैं।

इस भजन के श्रवण से मन को असीम शांति मिलती है, अहंकार का नाश होता है, और भक्त का भगवान के प्रति प्रेम और विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस भजन के पाठ, इसके आध्यात्मिक अर्थ, और पौराणिक संदर्भों की गहन जांच की है। श्री खाटू श्याम जी के प्रति भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए, इस भजन के प्रत्येक शब्द के अर्थ को अत्यंत सरल और प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • स्कंद पुराण - कौमारिका खंड (बर्बरीक की कथा और माहात्म्य)
  • पारंपरिक श्याम भजन संग्रह एवं संकीर्तन मंडलियां
  • श्री खाटू श्याम मंदिर बोर्ड, सीकर (राजस्थान) की आधिकारिक परंपराएं

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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