भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मुझे दर पे बुला ले माँ मिल ने को तरस ता हु भजन इन हिंदी लिरिक्स

मुझे दर पे बुला ले माँ भजन के संपूर्ण लिरिक्स और भावार्थ हिंदी में पढ़ें। माता रानी के इस पावन भजन को गाकर अपनी भक्ति और श्रद्धा को व्यक्त करें।

TYPE 1: BHAJAN | भक्ति रस

मुझे दर पे बुला ले माँ मिलने को तरसता हूँ - संपूर्ण भजन लिरिक्स, भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

सनातन धर्म की महान संकीर्तन परंपरा में देवी माँ के प्रति अनन्य प्रेम, विरह, और पूर्ण शरणागति को व्यक्त करने वाले भजनों का विशेष स्थान है। "मुझे दर पे बुला ले माँ मिलने को तरसता हूँ" अत्यंत ही पावन, हृदयस्पर्शी और भक्ति रस से परिपूर्ण एक ऐसा ही लोकप्रिय भजन है, जो हर उस साधक और भक्त की आंतरिक पुकार को शब्द देता है जो संसार की भागदौड़ और दुखों से विरक्त होकर अपनी अम्बे, शेरावाली माता के चरणों में शांति पाना चाहता है। इस भजन का प्रत्येक शब्द एक जीवात्मा की अपनी मूल उद्गम स्थली यानी जगदम्बा के चरणों तक पहुँचने की व्याकुलता को दर्शाता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, शब्द-दर-शब्द भावार्थ, गायन की विधि और इसके गहरे आध्यात्मिक संदेशों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics


मुझे दर पे बुला ले माँ मिलने को तरसता हूँ,
जीता हूँ न मरता हूँ, मुझे दर पे बुला ले माँ मिलने को तरसता हूँ!

सांसो में है तू मैया नैनो में समाई है,
भीगी है मेरी पलके जब याद तू आई है।
कोई जाने न दर्द मेरा कितना मैं तड़पता हूँ,
मुझे दर पे बुला ले माँ मिलने को तरसता हूँ!

सुन के माँ सदा मेरी मेरे पास जो आ जाती,
दुनिया ही नहीं मेरी किस्मत भी बदल जाती।
बंजारों सा बेघर हूँ पागल सा भटकता हूँ,
मुझे दर पे बुला ले माँ मिलने को तरसता हूँ!

अब तू ही बता मैया कैसे मैं सहूँ दूरी,
जो मन की मुरादें हैं कर दे माँ सभी पूरी।
बड़ा गम दीन बलजीत मैं रोता हूँ बिलखता हूँ,
मुझे दर पे बुला ले माँ मिलने को तरसता हूँ!!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह एक भक्त और माँ के बीच के उस अटूट और शाश्वत संबंध का जीवंत दस्तावेज है जहाँ भक्त अपनी दीनता और विवशता को माँ के सामने प्रकट करता है।

प्रथम अंतरा का भाव:

भक्त माता से प्रार्थना करता है कि हे माँ! मुझे अपने दरबार में बुला ले। तेरे दर्शन के बिना मेरा जीवन थम सा गया है। मैं न तो पूरी तरह से जी पा रहा हूँ और न ही मृत्यु मुझे चैन दे रही है—अर्थात मेरा जीवन एक असहनीय पीड़ा बन गया है। मेरी साँसों में केवल तुम्हारा ही वास है और मेरी आँखें हर पल तुम्हारा ही स्मरण करती हैं। जब भी तुम्हारी याद आती है, मेरी पलकें आंसुओं से भीग जाती हैं। इस दुनिया में कोई भी मेरे इस आंतरिक दर्द को नहीं समझता कि मैं तुम्हारे वियोग में कितना तड़प रहा हूँ।

द्वितीय अंतरा का भाव:

भक्त आगे कहता है कि हे करुणामयी! यदि तू मेरी पुकार सुनकर मेरे पास आ जाती, तो केवल मेरी वर्तमान परिस्थिति ही नहीं बदलती, बल्कि मेरी पूरी सोई हुई किस्मत ही जाग जाती। तुम्हारे बिना मैं इस दुनिया में बंजारों की तरह बेघर हो गया हूँ और किसी पागल की भांति दर-दर भटक रहा हूँ। मुझे शांति केवल तुम्हारे चरणों में ही मिल सकती है।

अंतिम अंतरा का भाव:

रचनाकार 'बलजीत' जी अपने दीन और दुखी होने का उल्लेख करते हुए माता से विनती करते हैं कि हे मैया! अब तू ही मुझे रास्ता बता कि मैं इस वियोग की दूरी को और कैसे सहूँ? मेरे मन की सभी मनोकामनाएं और मुरादें अब तुम्हारे ही हाथों पूरी हो सकती हैं। मैं बहुत अधिक दुखी हूँ और तुम्हारे द्वार पर आने के लिए रो-बिलख रहा हूँ। अतः हे माँ, मुझ पर दया करो और मुझे अपने पावन दर पर बुला लो।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन सनातन भक्ति परंपरा में 'विरह भक्ति' (Divine Separation) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें माता दुर्गा, शेरावाली या वैष्णो देवी के प्रति एक बच्चे की अपनी माता जैसी सहज और सरल पुकार है। जब कोई साधक सांसारिक प्रपंचों से थक जाता है, तब इस प्रकार के भजन उसे मानसिक शांति और आत्मिक संबल प्रदान करते हैं। ऐसे भजनों का संकीर्तन करने से मन का अहंकार गलता है और चित्त शुद्ध होता है। सनातन धर्म में माता की उपासना शक्ति, चेतना और करुणा का प्रतीक है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय एकांत में, माता के मंदिर में, अथवा नवरात्रि, जागरण और साप्ताहिक सत्संग के दौरान पूरी तन्मयता के साथ गाया जा सकता है।

  • प्रातःकाल एवं संध्याकालीन वंदना: माता के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करके इसे गाने से विशेष मानसिक शांति मिलती है।
  • जागरण एवं चौकी: माता के रात्रि जागरण में जब इस भजन को करुण स्वर में गाया जाता है, तो पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब जाता है।
  • मानसिक स्मरण: जब भी जीवन में कठिनाइयां आएं, तब इस भजन की पंक्तियों का आंतरिक स्मरण करने से साधक को धैर्य और शक्ति प्राप्त होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी आदि शक्ति जगदम्बा, माता दुर्गा और शेरावाली हैं, जिन्हें संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी माना जाता है। इसके रचयिता 'बलजीत' जी ने अपनी लेखनी के माध्यम से एक सामान्य भक्त की आर्त पुकार को शब्द दिए हैं। सनातन संस्कृति में आदिशक्ति की स्तुति से साधक को भोग और मो दोनों की प्राप्ति होती है। आप माता की महिमा के अन्य रूपों को जानने के लिए श्री दुर्गा चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी तथा पंजाबी मिश्रित लोक-श शैली है, जो सीधे हृदय को स्पर्श करती है। इसमें वियोग श्रृंगार रस और शांत रस का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उपमा और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग इस भजन की साहित्यिक सुंदरता को और अधिक बढ़ाता है, जिससे श्रोता बिना किसी कठिनाई के इसके भाव से जुड़ जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर या माता के साथ हमारा संबंध किसी व्यापारी जैसा नहीं, बल्कि एक बच्चे और माँ जैसा होना चाहिए। जब जीवन में विपत्तियां आएं, तो अहंकार त्यागकर पूरी तरह से शरणागत हो जाना ही सबसे बड़ा उपाय है। ईश्वर से मिलने की तड़प ही साधक की सबसे बड़ी पूंजी है, क्योंकि यही तड़प भक्ति को परिपक्व बनाती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
दर पे द्वार पर / चरणों में माता का पावन दरबार या शरण
तरसता हूँ व्याकुल होना / तड़पना दर्शन की तीव्र उत्कंठा
बंजारों सा घुमंतू या बिना घर का व्यक्ति संसार में अकेलापन और भटकाव
मुरादें मनोकामनाएं / इच्छाएं भक्त की आंतरिक प्रार्थनाएं
दीन असहाय / दुखी भक्त की विनम्रता और लाचारी

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सांसो में है तू मैया नैनो में समाई है..." - इस पंक्ति का अर्थ है कि माता भक्त के प्राणों और दृष्टि में इस प्रकार बस चुकी है कि वह संसार में जिधर भी देखता है, उसे माता की ही ऊर्जा का अनुभव होता है।

"सुन के माँ सदा मेरी मेरे पास जो आ जाती..." - भक्त का विश्वास है कि माँ अपने बच्चे की एक पुकार पर सब कुछ छोड़कर उसकी सहायता के लिए दौड़ पड़ती है।

"अब तू ही बता मैया कैसे मैं सहूँ दूरी..." - यह माता से मिलने की परम असहाय अवस्था को दर्शाता है जहाँ भक्त वियोग को और अधिक सहन करने में असमर्थ महसूस करता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ-साथ आदिशक्ति की कृपा प्राप्ति के लिए निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी माना गया है:

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै నమో नमः॥"

आप भगवती की और अधिक स्तुति के लिए दुर्गा सप्तशती के पावन पाठ का भी अध्ययन कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मुझे दर पे बुला ले माँ मिलने को तरसता हूँ
आराध्य देवी माँ दुर्गा / आदिशक्ति जगदम्बा
रचयिता / गायक बलजीत जी एवं पारंपरिक लोक गायक
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधि मिश्रित
मुख्य थीम / भाव विरह, शरणागति, प्रेम और करुणा की पुकार
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, संध्या वंदना, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: "मुझे दर पे बुला ले माँ" भजन के मुख्य गायक या रचयिता कौन हैं?

इस भजन को विभिन्न प्रसिद्ध लोक कलाकारों और देवी जागरण गायकों द्वारा अपनी मधुर आवाज़ में गाया गया है, इसके मूल रचनाकार बलजीत जी हैं।

Q2: इस भजन को किस अवसर पर गाना सबसे अच्छा रहता है?

इसे नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, मंगलवार या शुक्रवार की संध्या आरती के समय तथा व्यक्तिगत साधना में विशेष रूप से गाया जाता है।

Q3: इस भजन का केंद्रीय भाव (Theme) क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव भक्त का माता के प्रति अनन्य प्रेम, उनके दर्शन के लिए व्याकुलता और पूर्ण शरणागति है।

Q4: क्या यह भजन शुरुआत करने वाले गायकों के लिए आसान है?

हाँ, इसकी लय बहुत सरल और सुरीली है, जिससे नए गायक और भक्त इसे आसानी से सुर में गा सकते हैं।

Q5: माता के दर्शन की तड़प को भक्ति में क्यों महत्वपूर्ण माना गया है?

सनातन दर्शन के अनुसार, ईश्वर प्राप्ति के लिए तीव्र उत्कंठा (विरह) ही साधक के मन के विकारों को दूर करती है और सच्ची भक्ति को जगाती है।

Q6: इस भजन से हमें क्या आध्यात्मिक प्रेरणा मिलती है?

यह भजन सिखाता है कि सांसारिक दुखों से मुक्ति पाने के लिए हमें अहंकार त्यागकर माता के चरणों में शरण लेनी चाहिए।

Q7: क्या इस भजन को घर पर अकेले में भी गाया जा सकता है?

अवश्य, एकांत में माता का स्मरण करते हुए इस भजन को गाने से मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

Q8: भक्ति लोग (Bhaktilok) पर ऐसे अन्य भजन कहाँ मिल सकते हैं?

आप हमारी वेबसाइट पर अन्य देवी भजन, चालीसा और स्तोत्र श्रेणियों में जाकर और भी पावन रचनाएं पढ़ सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन भक्ति परंपरा, लोक संकीर्तन और देवी उपासना के शास्त्रीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध लिरिक्स और सही भावार्थ उपलब्ध कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोक संकीर्तन और देवी भजन संग्रह
  • सनातन धर्म की भक्ति और शरणागति परंपरा के ग्रंथ
  • दुर्गा सप्तशती एवं उपनिषदों में वर्णित आदिशक्ति महिमा

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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