भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

माता का जगराता भैया भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें माता का जगराता भैया भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

"माता का जगराता भैया दर्शन देने आई मैया आज पूरी रात जागो रे" एक अत्यंत ही लोकप्रिय, ऊर्जावान और भक्ति रस से सराबोर भजन है। यह भजन मुख्य रूप से माता रानी के जगराते (जागरण), चौकी और नवरात्रि के पावन अवसरों पर गाया जाता है। इस भजन का मुख्य स्वर सामूहिक भक्ति, उल्लास और भगवती के प्रति पूर्ण समर्पण है। जब भक्त पूरी रात जागकर आदि शक्ति मां दुर्गा की आराधना करते हैं, तब यह भजन उनके भीतर एक नई ऊर्जा और श्रद्धा का संचार करता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति व्याख्या, कठिन शब्दों के अर्थ और जगराते के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। आइए, इस पावन संकीर्तन में डूबकर अपना जीवन धन्य बनाएं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

माता का जगराता भैया दर्शन देने आई मैया आज पूरी रात जागो रे |

अंबर वो धरती है चाँद वो तारे जय मैया जय मैया बोले सारे |
भगती में डूबा है आलम सारा भगतो लगा लो जरा जैकारा |
जिस ने भी मन से मैया को पुकारा शेरावाली मैया ने दिया है सहारा |
शेर पे सवार मैया जगराते में आई मैया मन से मुरादे मांगो रे |
माता का जगराता भैया दर्शन देने आई मैया आज पूरी रात जागो रे |

मन में शरदा ले कर आये हम बच्चे है तेरे माये |
मिल कर तेरी महिमा गाये अपना जीवन धन्य बनाये |
चुनरी बांधे सिर पे सारे भक्ति में डुबो सारे माँ की महिमा गाओ रे |
माता का जगराता भैया दर्शन देने आई मैया आज पूरी रात जागो रे |

चाँद चड़ेगा बारात चड़े गी दरबारे की शान बड़े गी |
जग मग ज्योत जले है नैनो को ये पावन लगे है |
गाऊ जब तक होए सवेरा दर्शन मिले न तेरा मैं तो रुक न पाऊ रे |
माता का जगराता भैया दर्शन देने आई मैया आज पूरी रात जागो रे |

माँ तुम से है इतनी विनती दुर्गा की भगतो में करलो गिनती |
दुःख सुख अपना माँ तुम से है जो अपना है याहा तुम से है |
दुखियो के दुःख हरने वाली भेरो मरधंन करने वाली माँ की भेट गाओ रे |
माता का जगराता भैया दर्शन देने आई मैया आज पूरी रात जागो रे !!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का केंद्रीय भाव देवी मां के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण है। "जगराता" शब्द का अर्थ केवल शारीरिक रूप से जागना नहीं है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ "आंतरिक चेतना का जागरण" है। जब हम अज्ञानता की नींद से जागकर ईश्वर की ओर उन्मुख होते हैं, वही वास्तविक जागरण है।

भजन की शुरुआत में भक्तों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि हे भाइयों! आज माता का जगराता है और स्वयं आदि शक्ति मैया हमें दर्शन देने आई हैं, इसलिए आज की रात आलस्य को त्यागकर पूरी रात मां के ध्यान में मग्न रहना है। संपूर्ण ब्रह्मांड—चाहे वह आकाश हो, धरती हो, या चांद-तारे—सभी माता रानी की जय-जयकार कर रहे हैं। जब पूरी प्रकृति मां की आराधना में लीन है, तो मनुष्य को भी अपनी सुध-बुध खोकर मां की भक्ति में डूब जाना चाहिए।

भजन के अंतरा में भक्त अपनी दीनता और मां की विशालता को प्रकट करते हैं। वे कहते हैं कि हम अबोध बालक हैं और अपने मन में सच्ची श्रद्धा लेकर मां के चरणों में आए हैं। मां की महिमा गाकर हम अपने इस मानव जीवन को सार्थक और धन्य बनाना चाहते हैं। भक्त मां से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें अपने अनन्य सेवकों में स्थान दें, क्योंकि उनके जीवन का हर सुख-दुख केवल मां के ही चरणों से जुड़ा हुआ है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह सामूहिक साधना का एक सशक्त माध्यम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सामूहिक ऊर्जा का संचार: इस भजन की लय और ताल इतनी तीव्र और मनमोहक है कि यह सुनने और गाने वालों में तुरंत ही उत्साह का संचार कर देती है।
  • शरणागति का भाव: भजन की हर पंक्ति में मां के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास झलकता है कि जो भी मां को सच्चे मन से पुकारता है, उसे मां का सहारा अवश्य मिलता है।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: यह भजन उत्तर भारतीय लोक संस्कृति और माता के जागरण की समृद्ध परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
  • मनोकामना पूर्ति का विश्वास: भजन में यह दृढ़ विश्वास व्यक्त किया गया है कि जगराते की इस पावन रात में मां शेर पर सवार होकर आती हैं और अपने भक्तों की झोली खुशियों से भर देती हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि मां भगवती की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण का विशेष महत्व निम्नलिखित अवसरों पर होता है:

  • शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान माता की चौकी या जागरण में इस भजन को गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • माता का जागरण (जगराता): रात के समय जब अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है, तब भक्तों में उत्साह बनाए रखने और मां का आह्वान करने के लिए यह भजन गाया जाता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को ढोलक, मंजीरा, और चिमटे की थाप पर ऊंचे स्वर में गाया जाना चाहिए। गाते समय भक्तों को अपने सिर पर लाल चुनरी बांधनी चाहिए और बीच-बीच में "जय माता दी" का जयकारा लगाना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन सर्वशक्तिमान मां दुर्गा (शेरावाली) को समर्पित है। मां दुर्गा हिंदू धर्म में शक्ति, करुणा, और दुष्टों के संहार की प्रतीक हैं। इस भजन में मां के "शेरावाली" और "दुर्गा" रूप का वंदन किया गया है। मां का शेर पर सवार होना इस बात का प्रतीक है कि वे संपूर्ण ब्रह्मांड की अनियंत्रित शक्तियों को अपने नियंत्रण में रखती हैं और अपने भक्तों को निर्भयता का वरदान देती हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक धुनों पर आधारित है। भारत में, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के क्षेत्रों में, माता के जागरण की एक बहुत पुरानी परंपरा रही है। इस परंपरा में भक्तों द्वारा रचित सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली गीतों को "भेंट" कहा जाता है। यह भजन भी इसी समृद्ध परंपरा का हिस्सा है, जिसे समय के साथ विभिन्न लोक कलाकारों ने गाकर जन-जन तक पहुंचाया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें लोक भाषा के शब्दों का सुंदर मिश्रण है। इसकी काव्य शैली "गेय" (गाए जाने योग्य) है। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं जैसे "अंबर वो धरती", "चाँद वो तारे", और "जग मग ज्योत" प्रकृति और परमात्मा के एकाकार होने को दर्शाती हैं। इसकी लयबद्धता इतनी सटीक है कि साधारण से साधारण व्यक्ति भी इसे आसानी से गा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

  1. सच्ची श्रद्धा का महत्व: ईश्वर की प्राप्ति के लिए किसी कठिन कर्मकांड की नहीं, बल्कि मन में सच्ची श्रद्धा और बच्चे जैसी मासूमियत की आवश्यकता होती है।
  2. सामूहिकता की शक्ति: जब सभी लोग मिलकर एक सुर में प्रार्थना करते हैं, तो वहां सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है जो मानसिक तनाव को दूर करती है।
  3. धैर्य और निरंतरता: "गाऊ जब तक होए सवेरा दर्शन मिले न तेरा" पंक्ति हमें सिखाती है कि जब तक हमें अपने लक्ष्य (ईश्वर) की प्राप्ति न हो जाए, तब तक हमें अपनी साधना में डटे रहना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
जगराता रात भर जागकर की जाने वाली पूजा अज्ञानता की नींद से जागकर ईश्वर की आराधना करना।
आलम संसार / दुनिया संपूर्ण सृष्टि का मां की भक्ति में लीन होना।
जैकारा जय-जयकार का नारा मां की विजय और महिमा का सामूहिक उद्घोष।
शरदा (श्रद्धा) आस्था और विश्वास भक्ति का मूल आधार जिसके बिना पूजा अधूरी है।
ज्योत दीपक की लौ ज्ञान और दिव्यता का प्रतीक जो अंधकार को दूर करता है।
भैरो मर्दन भैरव का उद्धार/दमन करने वाली मां का वह रूप जो अहंकार और तामसिक प्रवृत्तियों का नाश करता है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"माता का जगराता भैया दर्शन देने आई मैया आज पूरी रात जागो रे..."
हे भक्तों! आज माता रानी का जगराता है। स्वयं करुणामयी मां हमें अपने दिव्य दर्शन देने के लिए पधारी हैं। इसलिए आज आलस्य को छोड़कर पूरी रात जागकर मां की आराधना करनी है।

"अंबर वो धरती है चाँद वो तारे जय मैया जय मैया बोले सारे..."
आकाश, धरती, चंद्रमा और तारे—सृष्टि का कण-कण मां की जय-जयकार कर रहा है। पूरी प्रकृति मां के स्वागत में मग्न है।

"भगती में डूबा है आलम सारा भगतो लगा लो जरा जैकारा..."
यह सारा संसार मां की भक्ति के रस में डूबा हुआ है। हे भक्तों! तुम भी शांत मत बैठो, ऊंचे स्वर में मां का जयकारा लगाओ।

"जिस ने भी मन से मैया को पुकारा शेरावाली मैया ने दिया है सहारा..."
इतिहास साक्षी है कि जिस किसी ने भी सच्चे हृदय से मां को पुकारा है, मां शेरावाली ने उसकी पुकार सुनी है और उसे अपना पावन सहारा दिया है।

"मन में शरदा ले कर आये हम बच्चे है तेरे माये..."
हे मां! हम अबोध बालक हैं, हमारे पास कोई ज्ञान नहीं है। हम केवल अपने मन में आपके प्रति अटूट श्रद्धा लेकर आपके चरणों में आए हैं।

"गाऊ जब तक होए सवेरा दर्शन मिले न तेरा मैं तो रुक न पाऊ रे..."
हे मां! जब तक सुबह नहीं हो जाती और जब तक मुझे आपके साक्षात दर्शन नहीं मिल जाते, मैं निरंतर आपकी महिमा गाता रहूंगा, मैं थकने वाला नहीं हूं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

जगराते के दौरान इस भजन के साथ-साथ मां दुर्गा के इस सिद्ध मंत्र का जाप करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है:

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: जो सभी मंगलों में मंगल रूप हैं, कल्याणमयी हैं, पुरुषार्थ को सिद्ध करने वाली हैं, शरणागतवत्सला हैं, उन तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणी को हमारा बारंबार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम माता का जगराता भैया दर्शन देने आई मैया
मुख्य देवी/देवता मां दुर्गा / शेरावाली माता
काव्य विधा भेंट / भजन (जागरण गीत)
भाषा सरल हिंदी (लोक शैली)
मुख्य रस/भाव भक्ति रस, उत्साह, समर्पण भाव
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, माता की चौकी, पारिवारिक उत्सव
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, चिमटा, हारमोनियम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन आदि शक्ति मां दुर्गा (शेरावाली माता) को समर्पित है। इसमें मां के ममतामयी और महिषासुर मर्दिनी रूप की वंदना की गई है।

जगराते में रात भर जागना इस बात का प्रतीक है कि हम संसार की मोह-माया और अज्ञानता रूपी नींद से जागकर ईश्वर की भक्ति रूपी प्रकाश की ओर बढ़ रहे हैं। यह आत्मा के जागरण का प्रतीक है।

इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय नवरात्रि के पावन दिन, माता का जागरण (रात के समय), या किसी भी शुभ अवसर पर आयोजित माता की चौकी के दौरान होता है।

हां, आप अपनी दैनिक संध्या आरती या विशेष पूजा के समय भी इस भजन को गा सकते हैं। यह घर के वातावरण को सकारात्मक और भक्तिमय बनाता है।

इसका अर्थ है भैरव के अहंकार का दमन करने वाली। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां वैष्णो देवी ने भैरवनाथ के अहंकार को नष्ट कर उसका उद्धार किया था। यह पंक्ति मां की असीम शक्ति और दयालुता को दर्शाती है।

अखंड ज्योति मां भगवती की साक्षात उपस्थिति का प्रतीक मानी जाती है। यह अंधकार पर प्रकाश की और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती है। जगराते के दौरान इसका प्रज्वलित रहना अनिवार्य माना जाता है।

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल और सुबोध खड़ी बोली हिंदी है। इसमें लोक संगीत के तत्वों का समावेश है, जिससे यह आम लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है।

गाते समय मन में शुद्धता, श्रद्धा और प्रसन्नता होनी चाहिए। यदि संभव हो तो सिर पर लाल चुनरी या पट्टी बांधकर और मां की ज्योति के सम्मुख बैठकर गाना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इस भजन के पाठ और भावार्थ को पारंपरिक शाक्त ग्रंथों, लोक मान्यताओं और प्रामाणिक भक्ति संकलनों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य भक्तों तक शुद्ध और प्रेरणादायक जानकारी पहुंचाना है ताकि वे अपनी साधना को और अधिक गहराई से समझ सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: मां दुर्गा की महिमा और उनके विभिन्न स्वरूपों का वर्णन।
  • पारंपरिक लोक भजन संग्रह: उत्तर भारत में गाए जाने वाले पारंपरिक जागरण गीतों का संकलन।
  • शाक्त परंपरा: देवी पूजा की प्राचीन पद्धतियां और जागरण का महत्व।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 29 Sep 2026

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