भक्ति और समर्पण से ओत-प्रोत 'है तमन्ना ये ही ज़िन्दगी में मेरी' एक बेहद लोकप्रिय और भावुक खाटू श्याम भजन है। इस भजन के माध्यम से एक सच्चा भक्त खाटू नरेश बाबा श्याम के प्रति अपनी अनन्य निष्ठा, प्रेम और बार-बार उनके दरबार में हाजिरी लगाने की अपनी तीव्र इच्छा को व्यक्त करता है। खाटू श्याम बाबा को कलयुग के अवतारी भगवान श्री कृष्ण का ही रूप माना जाता है, जो अपने भक्तों के सभी दुखों को हर लेते हैं और उन्हें असीम शांति प्रदान करते हैं। यह भजन न केवल बाबा श्याम के दरबार की भव्यता का गुणगान करता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि जीवन में सांसारिक मोह-माया से परे होकर केवल प्रभु चरणों में प्रेम और भक्ति की ज्योत कैसे जलाई जानी चाहिए। इस लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण हिंदी लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, गायन की विधि, इसके आध्यात्मिक महत्व और जीवन पर पड़ने वाले इसके गहरे प्रभाव की विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
शुद्ध उच्चारण और पूरे भक्ति भाव के साथ 'है तमन्ना ये ही ज़िन्दगी में मेरी' भजन का स्मरण करें:
स्थाई (मखड़ा):
है तमन्ना ये ही ज़िन्दगी में मेरी,
तेरे दरबार आता और जाता रहूं।
गाऊं तेरे भजन खाटू वाले प्रभु,
गाके भजनो से तुझको रिझाता रहूं,
|| है तमन्ना ये ही ज़िन्दगी में मेरी ||
अंतरा 1:
दर्दे दिल की मेरे पहचान ले,
तेरा प्रेमी हूँ बाबा ये तू जान ले।
बेखबर ले खबर सांवरे मुरलीधर,
नाचूं होक मगन खाटूवाले प्रभु,
तेरे चौखट पे सर को झुकता रहूं,
गाऊं तेरे भजन खाटू वाले प्रभु,
गा के भजनो से तुझको रिझाता रहूं,
|| है तमन्ना ये ही ज़िन्दगी में मेरी ||
अंतरा 2:
प्रेमी कितने हैं तेरे संसार में,
प्रेम मिलता नहीं है बाज़ार में।
प्रेम ही साधना प्रेम आराधना,
प्रेम पूजा तेरी प्रेम ही वन्दना।
प्रेम की ज्योत दिल में जगाता रहूं,
गाऊं तेरे भजन खाटू वाले प्रभु,
गा के भजनो से तुझको रिझाता रहूं,
|| है तमन्ना ये ही ज़िन्दगी में मेरी ||
अंतरा 3:
मेरे बाबा ना मेरा इम्तिहान ले,
तेरी चौखट पे रख दी है जान रे।
करके सेवा तेरी गुज़री है ज़िन्दगी,
तूने इतना दिया एहसान किया।
पिंटू कृपा की गाथा सुनाता रहूं,
गाऊं तेरे भजन खाटू वाले प्रभु,
गा के भजनो से तुझको रिझाता रहूं,
|| है तमन्ना ये ही ज़िन्दगी में मेरी ||
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस अद्भुत भजन की हर एक पंक्ति में भक्त की अपने आराध्य के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण झलकता है। भजन के मुखड़े में भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि उसकी एकमात्र यही अभिलाषा है कि वह बार-बार खाटू श्याम बाबा के दरबार में आता-जाता रहे और उनके पवित्र भजनों का गुणगान करके उन्हें प्रसन्न करता रहे। खाटू नरेश का दरबार वह पावन स्थल है जहाँ पहुँचते ही भक्तों के सारे कष्ट और संताप दूर हो जाते हैं।
पहले अंतरे में भक्त अपने दिल की पुकार रखते हुए कहता है कि हे सांवरे मुरलीधर! आप मेरे हृदय के दर्द और पीड़ा को भली-भांति पहचानते हैं। मैं आपका अनन्य प्रेमी हूँ, इस बात से आप अनजान नहीं हैं। भक्त की यह तीव्र इच्छा है कि वह सुध-बुध खोकर मस्ती में नाचते हुए बाबा की चौखट पर अपना सिर झुकाता रहे। यह भाव जीव और ब्रह्म के मिलन की पराकाष्ठा को दर्शाता है जहाँ भक्त पूरी तरह अपने इष्ट में लीन हो जाना चाहता है।
दूसरे अंतरे में प्रेम के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डाला गया है। भक्त कहता है कि इस संसार में भगवान के चाहने वाले तो अनेक हैं, परंतु सच्चा और निस्वार्थ प्रेम किसी बाजार में बिकने वाली वस्तु नहीं है जो आसानी से मिल जाए। प्रेम ही जीवन की सबसे बड़ी साधना, आराधना, पूजा और वंदना है। भक्त अपने भीतर इसी प्रेम की दिव्य ज्योत को हमेशा प्रज्वलित रखने की कामना करता है, क्योंकि केवल प्रेम के मार्ग से ही भगवान को वश में किया जा सकता है।
अंतिल चरण या तीसरे अंतरे में रचनाकार (पिंटू जी) अपने इष्ट से विनती करते हैं कि हे बाबा! अब मेरी और परीक्षा मत लीजिए, मैंने अपने जीवन को आपकी चौखट पर ही समर्पित कर दिया है। मेरी सम्पूर्ण आयु आपकी सेवा करते हुए ही गुजरी है और आपने मुझ पर जो असीम कृपा की है, मैं जीवनभर उसी कृपा और करुणा की गाथा संसार को सुनाता रहूं। यह पंक्तियां पूर्ण शरणागति (आत्म-समर्पण) का उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन खाटू श्याम भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। इसकी कुछ मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- भक्ति रस प्रधान: यह भजन माधुर्य और दास्य भक्ति का अद्भुत संगम है, जो श्रोताओं के मन में भगवान के प्रति प्रेम जगाता है।
- सरल और सहज भाषा: आम बोलचाल की हिंदी और उर्दू के सहज शब्दों का प्रयोग होने के कारण इसे कोई भी आसानी से याद और गा सकता है।
- मानसिक शांति: इस भजन को सुनने या गुनगुनाने से मानसिक तनाव दूर होता है और एक अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
- नियमित स्मरण: खाटू श्याम जी के भक्तों द्वारा कीर्तन, जागरण और संध्या फेरियों में इस भजन को विशेष रूप से गाया जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
किसी भी पवित्र भजन का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए उसे उचित समय और विधि से गाना या सुनना चाहिए:
- सर्वोत्तम समय: प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में या संध्याकालीन बेला में जब आप पूजा कक्ष में दीपक प्रज्वलित करते हैं, इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
- स्थान: अपने घर के मंदिर, खाटू श्याम जी के पावन धाम में, अथवा किसी भी सामूहिक सत्संग और कीर्तन के दौरान।
- विधि: स्नान आदि से निवृत्त होकर, स्वच्छ वस्त्र धारण कर, बाबा श्याम को धूप-दीप अर्पित करने के पश्चात भावपूर्ण स्वर में इस भजन का पाठ करें।
- अन्य पावन प्रसंग: फाल्गुनी लक्खी मेला, एकादशी, द्वादशी या किसी भी विशेष धार्मिक उत्सव के अवसर पर इस भजन का गान भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से हारे के सहारे, तीन बाण धारी खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक जी) को समर्पित है। बर्बरीक जी महाभारत काल के एक महान योद्धा थे जिन्होंने अपनी महान तपस्या और भगवान श्री कृष्ण को अपना शीश दान देने के कारण यह वरदान पाया कि कलयुग में वे उनके ही नाम 'श्याम' से पूजे जाएंगे। इस भजन के रचयिता 'पिंटू' जी ने अपनी कला और भक्ति के माध्यम से इस पावन संबंध को अत्यंत सुंदर शब्दों में पिरोया है। भगवान श्री कृष्ण और श्याम बाबा की महिमा से जुड़े अन्य प्रसंगों के लिए आप श्री खाटू श्याम चालीसा का भी पाठ कर सकते हैं, जो भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
खाटू श्याम जी के दरबार में अनगिनत भजन गाए जाते हैं, परंतु 'है तमन्ना ये ही ज़िन्दगी में मेरी' भजन की रचना अत्यंत मार्मिक और हृदयस्पर्शी है। इसके रचनाकार ने एक आम भक्त के मन की पीड़ा, उसकी आकांक्षा और उसकी अनन्य भक्ति को बहुत ही सटीक तरीके से शब्दों का रूप दिया है। इस भजन की पृष्ठभूमि इस विश्वास पर आधारित है कि खाटू का दरबार ही एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ भक्त बिना किसी संकोच के अपने दिल का हाल अपने बाबा को सुना सकता है और असीम शांति पा सकता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, प्रवाहमयी और हृदयग्राही हिंदी है। इसमें लयबद्धता (Rhyme Scheme) का विशेष ध्यान रखा गया है जो इसे गाते समय एक विशेष प्रकार की ताल और आनंद प्रदान करती है। 'दरबार', 'दीदार', 'बाज़ार', 'इम्तिहान' जैसे शब्दों का सुंदर प्रयोग इसे गजलनुमा भाव देता है जो आधुनिक संकीर्तन प्रेमियों को बहुत आकर्षित करता है। इस शैली के अन्य सुंदर भजनों के लिए आप विशेष भजन संग्रह का भी अवलोकन कर सकते हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल मनोरंजन या गायन का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के लिए एक गहरा दार्शनिक संदेश देता है:
- निस्वार्थ प्रेम: भगवान को पाने का मार्ग केवल और केवल प्रेम है, किसी दिखावे या अहंकार का नहीं।
- पूर्ण शरणागति: जीवन में कितनी भी परीक्षाएं आएं, अपनी डोर भगवान के हाथों में सौंप देनी चाहिए।
- कृतज्ञता (Gratitude): भगवान ने हमें जो जीवन और सांसें दी हैं, उसके लिए हमेशा आभार व्यक्त करना चाहिए।
- नियमित स्मरण: सांसारिक भागदौड़ के बीच भी अपने इष्टदेव का स्मरण कभी नहीं भूलना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| तमन्ना | इच्छा, अभिलाषा | भक्त की बाबा के दरबार जाने की तीव्र इच्छा |
| रिझाता | प्रसन्न करना, मोहना | भजनों के माध्यम से भगवान को प्रसन्न करना |
| दर्दे दिल | हृदय की पीड़ा या पीड़ाएं | जीवन के दुखों और संतापों का उल्लेख |
| बेखबर | जिसे सुध न हो, ध्यान न देना | भक्त का बाबा से अपनी सुधि लेने की गुहार |
| इम्तिहान | परीक्षा | कठिन परिस्थितियों में भक्त की भगवान से विनय |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"है तमन्ना ये ही ज़िन्दगी में मेरी, तेरे दरबार आता और जाता रहूं" - इस पंक्ति में भक्त की सबसे बड़ी जीवन-इच्छा झलकित होती है कि उसका जीवन खाटू श्याम बाबा के दरबार की यात्रा करते-करते ही बीते।
"प्रेम ही साधना प्रेम आराधना, प्रेम पूजा तेरी प्रेम ही वन्दना" - यहाँ प्रेम को ही सब कुछ माना गया है। भगवान को किसी कर्मकांड से ज्यादा भक्त का सच्चा प्रेम और भाव प्रिय है।
"मेरे बाबा ना मेरा इम्तिहान ले, तेरी चौखट पे रख दी है जान रे" - भक्त अपनी सीमाओं को स्वीकार करते हुए भगवान से प्रार्थना करता है कि अब उसकी और परीक्षा न ली जाए क्योंकि उसने अपना जीवन पूरी तरह उनके चरणों में अर्पित कर दिया है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
खाटू श्याम बाबा के स्मरण के समय उनके मूल मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। श्याम बाबा के पूजन के समय निम्नलिखित मंत्र का स्मरण करना चाहिए:
ॐ श्याम देवाय नमः
इसके साथ ही, भगवान श्री कृष्ण के स्मरण के बिना खाटू श्याम की आराधना अधूरी मानी जाती है। अधिक जानकारी और स्तोत्र पाठ के लिए आप श्री कृष्ण स्तोत्रम का पाठ कर सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन गुण | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | है तमन्ना ये ही ज़िन्दगी में मेरी (Hai Tamanna Ye Hi Zindagi Hai Meri) |
| आराध्य देव | खाटू श्याम बाबा (श्री बर्बरीक जी) |
| रचनाकार / गायक | पिंटू एवं पारंपरिक लोक कलाकार |
| भाषा | सरल हिंदी एवं उर्दू मिश्रित भाव |
| मुख्य थीम | भक्ति, प्रेम, शरणागति और दर्शन |
| उपयुक्त अवसर | कीर्तन, जागरण, एकादशी और दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तित्सलोक पर प्रकाशित यह सामग्री खाटू श्याम बाबा के भक्तों की भावनाओं और पारंपरिक संकीर्तन परंपरा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य श्रोताओं को सटीक शब्द, सरल भावार्थ और आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान करना है। यह सामग्री पूरी तरह से लोक-भक्ति और पारंपरिक ग्रंथों के संदर्भ पर आधारित है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक खाटू श्याम संकीर्तन एवं भजन डायरी संग्रह
- श्री श्याम महापुराण एवं लोक कथाएं
- भक्त शिरोमणि बर्बरीक गाथा एवं संकीर्तन परंपरा
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