भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

ऊँची चढ़ाई तेरा लम्बा रस्ता भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें ऊँची चढ़ाई तेरा लम्बा रस्ता भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

भजन एवं संकीर्तन (Bhajan & Sankirtan)

ऊँची चढ़ाई तेरा लम्बा रस्ता भजन इन हिंदी लिरिक्स - अर्थ एवं भावार्थ सहित

सनातन धर्म और शाक्त परंपरा में माँ भगवती जगदम्बा की उपासना का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। जब भक्त अपनी आराध्य माँ वैष्णो देवी, माँ चामुंडा, या किसी भी सिद्ध शक्तिपीठ की यात्रा पर निकलता है, तो उसका मार्ग केवल भौगोलिक यात्रा नहीं बल्कि उसकी आंतरिक आध्यात्मिक साधना बन जाता है। प्रस्तुत भजन "ऊँची चढ़ाई तेरा लम्बा रस्ता" एक ऐसा ही अत्यंत पावन, भाव-विभोर कर देने वाला माता का भजन है, जो हर श्रद्धालु के हृदय में माँ के प्रति अगाध प्रेम, समर्पण और अनन्य निष्ठा का संचार करता है। इस भजन में दुर्गम चढ़ाई और लंबे रास्ते का रूपक देते हुए जीवात्मा की परमात्मा तक पहुँचने की उस व्याकुलता को दर्शाया गया है जहाँ तमाम बाधाओं के बावजूद भक्त केवल अपनी मैया के दर्शन की लालसा में आगे बढ़ता जाता है। माता रानी के दरबार में आयोजित होने वाले माता का जगराता, संध्या कालीन संकीर्तन और देवी भागवत कथाओं के दौरान इस मधुर भजन को बड़े ही उत्साह, नृत्य और श्रद्धा के साथ गाया जाता है। यह संकीर्तन न केवल मन को शांति प्रदान करता है बल्कि जीवन की हर कठिन परिस्थिति में माता पर पूर्ण विश्वास रखने की प्रेरणा भी देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| मूकड़ा (स्थाई) ||

ऊँची चढ़ाई तेरा लम्बा रस्ता |

और चढ़ा नहीं जाता |
इसी लिए करवाया मैंने |
घर में तेरा जगराता माँ |

|| अंतरा 1 ||

नाचू गा मैं गाऊँगा माँ |

चुनरी लाल चढ़ाऊँगा माँ |
आज नहीं मन मेरा वश में बड़ी ख़ुशी मुझे माता |
इसी लिए करवाया मैंने |
घर में तेरा जगराता माँ |

|| अंतरा 2 ||

सबको भेजा है माँ भुलावा |

जो भी आएगा माँ चढ़ावा |
किसी गरीब की कन्या को दान करूँगा मैं माता |
इसी लिए करवाया मैंने |
घर में तेरा जगराता माँ |

यह पावन भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि एक भक्त की अपनी माँ के प्रति आंतरिक पुकार है। आइए इस भजन के गहरे आध्यात्मिक अर्थ और भावार्थ को समझें:

स्थाई भाव: "ऊँची चढ़ाई तेरा लम्बा रस्ता, और चढ़ा नहीं जाता..." यहाँ ऊँची चढ़ाई और लंबा रस्ता मनुष्य के जीवन के उस कठिन मार्ग का प्रतीक है जहाँ सांसारिक मोह-माया, बाधाएं और कष्टों को पार करते हुए जीवात्मा को परमात्मा तक पहुँचना होता है। भौतिक रूप से भी माता वैष्णो देवी के त्रिकूट पर्वत की चढ़ाई अत्यंत कठिन मानी जाती है। वृद्ध या असमर्थ भक्त जब शारीरिक रूप से असमर्थ महसूस करते हैं, तो वे माता को अपने घर पर ही आमंत्रित कर लेते हैं और अपने घर में ही माँ का दरबार सजाकर जगराता करते हैं।

नृत्य और आनंद का भाव: "नाचू गा मैं गाऊँगा माँ, चुनरी लाल चढ़ाऊँगा माँ..." भक्त का मन माता के दरबार में पहुँचकर या घर में माता का जागरण करवाकर इतना प्रफुल्लित हो उठता है कि वह सारे संकोच छोड़कर नाचने और गाने लगता है। लाल चुनरी माँ को अत्यंत प्रिय है, जो सौभाग्य, शक्ति और विजय का प्रतीक है। भक्त अपनी प्रसन्नता को नृत्य और संगीत के माध्यम से प्रकट करता है।

सेवा और परोपकार का संदेश: "सबको भेजा है माँ भुलावा, जो भी आएगा माँ चढ़ावा, किसी गरीब की कन्या को दान करूँगा मैं माता..." यह पंक्ति इस भजन का सबसे महत्वपूर्ण और मानवीय संदेश देती है। जब भक्त माता के दरबार में भेंट या चढ़ावा चढ़ाता है, तो वह उसे समाज के किसी जरूरतमंद या कन्यादान जैसे पवित्र कार्यों में उपयोग करने की भावना रखता है। सच्ची भक्ति वही है जो दीन-दुखियों की सेवा से जुड़े। आप माँ दुर्गा की कृपा प्राप्ति के लिए दुर्गा सप्तशती पाठ विधि का भी अनुसरण कर सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • देवी उपासना का स्वरूप: यह भजन माँ दुर्गा, माँ वैष्णो देवी और शेरावाली माँ के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
  • जगराता संस्कृति: उत्तर भारत में घरों और मंदिरों में रातभर माता के जागरण (Jagrata) की प्राचीन परंपरा को यह भजन जीवंत करता है।
  • शरणागति भाव: भक्त अपनी विवशता और माता के प्रति पूर्ण समर्पण को बड़े ही सरल शब्दों में व्यक्त करता है।
  • परोपकार की भावना: व्यक्तिगत भक्ति के साथ-साथ समाज के गरीबों और कन्याओं की सहायता करने का महान संदेश देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को गाने और सुनने के लिए किसी विशेष समय की पाबंदी नहीं है, फिर भी कुछ अवसरों पर इसका प्रभाव अत्यंत अलौकिक होता है:

  • नवरात्रि के पावन दिन: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में जब घर-घर घटस्थापना और माता की चौकी होती है, तब यह भजन मुख्य रूप से गाया जाता है।
  • माता के जागरण की रात: जगराता या संध्या कालीन चौकी के दौरान मध्य रात्रि के समय जब माहौल भक्तिमय होता है, तब इस भजन को गाने से विशेष ऊर्जा मिलती है।
  • माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग: त्रिकूट पर्वत की चढ़ाई के दौरान थकने पर कई श्रद्धालु इस भजन को गुनगुनाकर अपनी थकान मिटाते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी माँ दुर्गा / माँ वैष्णो देवी (शेरावाली माँ) हैं, जो आदि शक्ति, प्रकृति और ब्रह्मांड की संचालिका हैं। सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि माँ अपने हर बच्चे की पुकार सुनती हैं। इस भजन के रचयिता 'बलजीत' जी ने अपनी पंक्तियों में अपने नाम का उल्लेख करते हुए माँ से यह प्रार्थना की है कि उनका माँ के चरणों से जन्मो-जन्म का नाता कभी न टूटे। शक्ति साधना के लिए आप नवदुर्गा स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

पारंपरिक लोक भजनों और आधुनिक माता के जागरण गीतों की श्रृंखला में यह रचना बहुत लोकप्रिय हुई है। लोक गायकों द्वारा इसे विभिन्न धुनों और संगीत उपकरणों (ढोलक, मंजीरा, कीबोर्ड) के साथ गाया जाता है। इसकी रचना आम बोलचाल की भाषा में की गई है ताकि हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके और गा सके।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और लोक-बोली (पंजाबी-हिन्दी मिश्रित लोक शैली) में रचा गया है। इसमें उपमा और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है, जहाँ चढ़ाई को जीवन की कठिनाई और माता के दरबार को अंतिम शांति का केंद्र माना गया है। शब्दों की सरलता ही इस भजन की सबसे बड़ी शक्ति है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

भजन हमें यह सिखाता है कि जब बाहरी रास्ते कठिन हो जाएं और भौतिक रूप से मंदिर या तीर्थ तक पहुँचना संभव न हो, तो भक्त अपने सच्चे भाव से अपने भीतर ही भगवान का दरबार सजा सकता है। ईश्वर बाह्य आडंबरों से अधिक भक्त के सच्चे प्रेम और समर्पण को देखते हैं। साथ ही, परोपकार और दान की भावना धार्मिक अनुष्ठानों का अनिवार्य अंग होनी चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भीय अर्थ
ऊँची चढ़ाई ऊँचा पहाड़ या रास्ता जीवन के कठिन संघर्ष और आध्यात्मिक साधना मार्ग
जगराता रात्रि जागरण माता की महिमा में रातभर जागकर भजन-कीर्तन करना
चुनरी लाल ओढ़नी माता को अर्पित किया जाने वाला पवित्र वस्त्र
भुलावा बुलावा / निमंत्रण माता का बुलावा आना (यात्रा का योग बनना)
नाता संबंध / रिश्ता जीवात्मा और परमात्मा का शाश्वत संबंध

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"ऊँची चढ़ाई तेरा लम्बा रस्ता, और चढ़ा नहीं जाता..."
भक्त अपनी शारीरिक और मानसिक सीमाओं का जिक्र करते हुए कहता है कि हे माँ! तेरे दरबार तक पहुँचने का मार्ग बहुत दुर्गम और लंबा है, और अब मुझसे यह चढ़ाई अकेले नहीं चढ़ी जाती।

"इसी लिए करवाया मैंने घर में तेरा जगराता माँ..."
चूँकि मैं पहाड़ों पर चलकर तेरे दरबार तक नहीं पहुँच सका, इसलिए मैंने अपने ही घर में तेरा भव्य जगराता करवा लिया है ताकि तू स्वयं मेरे द्वार पर आ जाए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

अर्थ: हे सभी प्रकार का मंगल करने वाली मंगला, कल्याणकारी शिवे, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरण में आए हुए भक्तों की रक्षा करने वाली और तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणि देवी! आपको हमारा बार-बार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ऊँची चढ़ाई तेरा लम्बा रस्ता भजन (Unchi Chadhai Tera Lamba Rasta)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / माँ वैष्णो देवी (शेरावाली माँ)
रचयिता / कवि बलजीत जी (पारंपरिक लोक भजन शैली)
भाषा हिंदी / लोक बोली
मुख्य थीम भक्ति, समर्पण, जगराता और शरणागति
गायने अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, संध्या चौकी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा और माँ वैष्णो देवी को समर्पित है।

इसे नवरात्रि के दिनों में, माता के जागरण (जगराता) के दौरान और देवी पूजन की संध्या चौकियों में विशेष रूप से गाया जाता है।

भजन में माता के प्रति अटूट प्रेम, घर पर ही जागरण कराने की परंपरा और गरीबों व कन्याओं की सहायता करने का परोपकारी संदेश दिया गया है।

हाँ, इसकी धुन बहुत सरल और लोक-संगीत पर आधारित है, जिसे कोई भी आसानी से याद करके गा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म की लोक-भक्ति परंपरा, माता के जागरण अनुष्ठानों और पारंपरिक भजनों के संकलन पर आधारित है। इसे पाठकों की आध्यात्मिक रुचि और प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन संग्रह
  • देवी भागवत पुराण एवं शाक्त परंपरा के ग्रंथ
  • उत्तर भारतीय माता जागरण संस्कृति एवं लोकगीत परंपरा

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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