भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

रंग भरा है जी फूलो में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलो में भजन इन हिंदी लिरिक्स

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"रंग भरा है जी फूलों में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलों में" यह अत्यंत ही पावन, मधुर और मनमोहक भजन आदि शक्ति माँ दुर्गा के प्रति भक्त के अनन्य प्रेम, वात्सल्य और पूर्ण समर्पण को प्रदर्शित करता है। सनातन धर्म की समृद्ध भजन परंपरा में देवी भगवती की आराधना के लिए गीतों और भजनों का विशेष महत्व रहा है। यह भजन विशेष रूप से शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि, जगराता, माता की चौकी और सावन के पावन महीनों में गाया जाता है। इस भजन में प्रकृति के सौंदर्य और माँ शेरावाली के दिव्य स्वरूप का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। जब भक्त अपनी आराध्य मैया को सोने-चांदी के झूलों में झूलते हुए देखता है, तो उसका अंतःकरण भक्ति के परम आनंद से सराबोर हो जाता है। यह भजन न केवल श्रोताओं के कानों को प्रिय लगता है, बल्कि उनके हृदय में माँ के प्रति अगाध श्रद्धा और विश्वास का संचार भी करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ रंग भरा है जी फूलों में ॥

रंग भरा है जी फूलों में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलों में।
रंग भरा है जी फूलों में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलों में॥

आई खुशबू बहारों में, रंगों संग खेल रही मेरी मैया पहाड़ों में।
रंग भरा है जी फूलों में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलों में॥

पत्ता पत्ता है जी झूम रहा, कण कण धरती का माँ के चरणों को चूम रहा।
रंग भरा है जी फूलों में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलों में॥

पत्ता पत्ता है जी हरष रहा, मैया जी से मिलने को बच्चा है तरस रहा।
रंग भरा है जी फूलों में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलों में॥

लाल चुनरिया सोहे सिर पे, मैया का रूप निराला भाए मन मंदिर में।
रंग भरा है जी फूलों में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलों में॥

भक्त पुकारें मैया आओ, अपनी दया की शीतल छाया हम पे बरसाओ।
रंग भरा है जी फूलों में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलों में॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस दिव्य भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और हृदयस्पर्शी है। यहाँ भक्त प्रकृति के माध्यम से माँ भगवती की सर्वव्यापकता और उनकी दिव्य लीलाओं का वर्णन कर रहा है।

प्रथम अंतरा (प्रकृति का उल्लास): भजन की शुरुआत में भक्त कहता है कि संपूर्ण सृष्टि में जो रंग-बिरंगे फूल खिले हैं, वे वास्तव में माँ की ही कृपा का परिणाम हैं। माँ भगवती सोने और चांदी से निर्मित दिव्य झूले पर विराजमान होकर झूल रही हैं। यह झूला केवल भौतिक झूला नहीं है, बल्कि यह भक्त के हृदय रूपी सिंहासन का प्रतीक है, जहाँ माँ सदैव आनंदित रहती हैं।

द्वितीय अंतरा (पहाड़ों की बहार): जब पहाड़ों में बहार आती है और चारों ओर सुगंध फैलती है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि मैया स्वयं पहाड़ों में रंगों के साथ खेल रही हैं। माँ का निवास स्थान पर्वत (हिमालय और विंध्याचल) हैं, जहाँ प्रकृति अपने चरम सौंदर्य पर होती है।

तृतीय अंतरा (समर्पण और व्याकुलता): प्रकृति का प्रत्येक पत्ता और धरती का कण-कण माँ के चरणों का स्पर्श पाकर धन्य हो रहा है। भक्त का मन अपनी करुणामयी माँ से मिलने के लिए व्याकुल है, ठीक उसी प्रकार जैसे एक छोटा बच्चा अपनी माँ की गोद में जाने के लिए तरसता है। यह वात्सल्य और भक्ति रस की पराकाष्ठा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • प्रकृति और परमात्मा का मिलन: यह भजन दर्शाता है कि प्रकृति का कण-कण ईश्वर की ही अभिव्यक्ति है। फूलों के रंग, पहाड़ों की खुशबू और पत्तों का झूमना माँ की उपस्थिति का जीवंत प्रमाण हैं।
  • भक्ति रस की प्रधानता: इसमें 'मधुर भाव' और 'वात्सल्य भाव' का सुंदर मिश्रण है, जहाँ भक्त स्वयं को बालक मानकर माँ से लाड लड़ा रहा है।
  • सांस्कृतिक धरोहर: यह भजन उत्तर भारत के पारंपरिक देवी गीतों का प्रतिनिधित्व करता है, जो पीढ़ियों से हमारी आस्था का केंद्र बने हुए हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि माँ की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यंत फलदायी मानी गई हैं:

  • शुभ समय: नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह या संध्या काल की आरती के पश्चात इस भजन का गायन सामूहिक रूप से करना अत्यंत शुभ होता है।
  • गायन विधि: इस भजन को ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की मधुर थाप पर ऊंचे स्वर में गाना चाहिए। सामूहिक कीर्तन में इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
  • मानसिक स्थिति: गाते समय मन में यह भाव होना चाहिए कि माँ वास्तव में आपके सम्मुख सोने-चांदी के झूले पर झूल रही हैं और आपकी पुकार सुन रही हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन आदि शक्ति, जगदम्बा, शेरावाली माँ दुर्गा को समर्पित है। सनातन परंपरा में माँ दुर्गा को शक्ति, करुणा और ममता की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। इस भजन के रचयिता पारंपरिक लोक कवि रहे हैं, जिन्होंने लोकमानस की सरल भाषा में माँ के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा को पिरोया है। माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों जैसे शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा की आराधना में भी इस भजन का प्रयोग किया जाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि ग्रामीण और पहाड़ी अंचलों की लोक संस्कृति से जुड़ी है। भारत में सावन के महीने में झूला झूलने की प्राचीन परंपरा रही है, जिसे 'कजली' या 'झूला गीत' कहा जाता है। जब यही परंपरा देवी भक्ति से जुड़ती है, तो वह "मैया के झूले" के रूप में परिणत हो जाती है। पहाड़ों में स्थित माँ के पावन धामों (जैसे वैष्णो देवी, कांगड़ा देवी) की यात्रा के दौरान भक्तों के जत्थे इस भजन को गाते हुए आगे बढ़ते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोक-प्रचलित हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें ब्रज और अवधी भाषा का पुट भी देखने को मिलता है।

  • काव्य शैली: यह एक गेय पद है, जिसे आसानी से गुनगुनाया जा सकता है।
  • अलंकार योजना: इसमें 'अनुप्रास' और 'पुनरुक्ति प्रकाश' अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है (जैसे पत्ता-पत्ता, कण-कण)।
  • बिम्ब विधान: "सोने चांदी के झूले" और "लाल चुनरिया" जैसे शब्द श्रोता के मन में एक अत्यंत सुंदर दृश्य बिम्ब (Visual Imagery) का निर्माण करते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल आनंद ही नहीं देता, बल्कि गहरे आध्यात्मिक संदेश भी प्रदान करता है:

  1. सृष्टि में ईश्वर के दर्शन: हमें प्रकृति का सम्मान करना चाहिए क्योंकि प्रकृति के हर रूप में माँ भगवती का ही वास है।
  2. निश्छल प्रेम: ईश्वर को पाने के लिए किसी कठिन कर्मकांड की नहीं, बल्कि एक बच्चे जैसी निश्छल और व्याकुल पुकार की आवश्यकता होती है।
  3. संतोष और आनंद: भौतिक सुखों से परे, माँ के चरणों में ही वास्तविक शांति और परम आनंद निहित है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मैया माता / जननी जगत जननी आदि शक्ति माँ दुर्गा
झूला हिंडोला भक्त के हृदय का प्रेम रूपी आसन
हरष रहा प्रसन्न हो रहा है ईश्वरीय सानिध्य पाकर आत्मा का हर्षित होना
तरस रहा व्याकुल होना दर्शन के लिए भक्त की तड़प
चुनरिया दुपट्टा / ओढ़नी सौभाग्य और सुरक्षा का दिव्य आवरण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"रंग भरा है जी फूलों में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलों में..."
सृष्टि के समस्त पुष्पों का सौंदर्य और उनके रंग माँ की ही चेतना से जीवंत हैं। भक्त कल्पना करता है कि उसकी परम कृपालु माँ सोने और चांदी के दिव्य हिंडोले पर विराजमान होकर मंद-मंद मुस्कुराते हुए झूल रही हैं।

"आई खुशबू बहारों में, रंगों संग खेल रही मेरी मैया पहाड़ों में..."
वसंत ऋतु की सुगंध और बहारें माँ के आगमन की सूचना देती हैं। पर्वतों की कंदराओं में माँ प्रकृति के विविध रंगों के साथ क्रीड़ा कर रही हैं, जो उनकी लीला का ही एक हिस्सा है।

"पत्ता पत्ता है जी झूम रहा, कण कण धरती का माँ के चरणों को चूम रहा..."
जब हवा चलती है और पत्ते हिलते हैं, तो ऐसा लगता है मानो वे माँ की स्तुति में नृत्य कर रहे हैं। धरती की धूल भी माँ के पावन चरणों का स्पर्श पाकर स्वयं को धन्य मानती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात माँ दुर्गा के इस सिद्ध मंत्र का जाप करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है:

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं, आपको नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम रंग भरा है जी फूलों में मेरी मैया झूल रही सोने चांदी के झूलों में
समर्पित देवी/देवता माँ दुर्गा / शेरावाली मैया
मुख्य पर्व/अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, सावन, जगराता, माता की चौकी
भाषा सरल हिंदी (लोक शैली)
भक्ति का भाव वात्सल्य, माधुर्य और पूर्ण समर्पण भाव
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम, चिमटा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन आदि शक्ति माँ दुर्गा (शेरावाली माता) को समर्पित है, जो अपने भक्तों पर ममता और करुणा की वर्षा करती हैं।

इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय नवरात्रि के पावन दिन, सावन का महीना और संध्या काल की आरती के बाद का समय माना जाता है।

आध्यात्मिक रूप से, "सोने चांदी का झूला" भक्त के शुद्ध, निर्मल और बहुमूल्य प्रेम से भरे हृदय रूपी सिंहासन को दर्शाता है, जहाँ माँ सदैव निवास करती हैं।

हाँ, यह भजन किसी भी पारिवारिक मांगलिक कार्य, कीर्तन, माता की चौकी या दैनिक पूजा के समय अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

सनातन धर्म में प्रकृति को आदि शक्ति का ही साक्षात रूप माना गया है। फूलों का खिलना, खुशबू और पत्तों का झूमना माँ की दिव्य उपस्थिति और उनकी आनंदमयी लीला को प्रदर्शित करता है।

इस भजन को गाते समय एक अबोध बालक की भांति निश्छल प्रेम, वात्सल्य और माँ के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना रखनी चाहिए।

यह भजन लोक-परंपरा और भक्ति आंदोलन के सिद्धांतों पर आधारित है, जहाँ ईश्वर को अत्यंत सुलभ और करुणामयी माता के रूप में पूजा जाता है।

इसका मुख्य संदेश यह है कि सच्ची श्रद्धा और प्रेम से पुकारने पर माँ अपने भक्तों के दुखों को दूर कर उन्हें अपनी दया की शीतल छाया प्रदान करती हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी विद्वत मंडली ने इस भजन के पाठ, इसके आध्यात्मिक अर्थ और लोक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का गहन विश्लेषण कर इसे तैयार किया है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त के हृदय में सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य शांति का संचार करती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - माँ भगवती की लीलाएं एवं महिमा।
  • पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं उत्तर भारतीय नवरात्रि कीर्तन परंपरा।
  • सनातन धर्म की स्तुति एवं प्रार्थना पद्धतियां।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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