भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई भजन इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई भजन इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

Murali Wale Pe Duniya Diwani Ho Gayi Bhajan

सनातन धर्म और भक्ति परंपरा में संकीर्तन, भजन और प्रभु नाम स्मरण को जीवात्मा का परमात्मा से मिलन का सबसे सुगम और आनंददायक मार्ग माना गया है। भगवान श्री कृष्ण की मधुर मुरली की तान और उनकी अलौकिक छवि पर न केवल ब्रज के गोपी-गोप और ग्वाल-बाल मुग्ध थे, बल्कि सम्पूर्ण चराचर जगत आज भी उनकी मोहिनी मूरत का दीवाना है। प्रस्तुत पावन भजन "मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई" श्रीकृष्ण और राधा रानी के अगाध प्रेम, अनन्य भक्ति और पूर्ण शरणागति (Surrender) का एक अत्यंत हृदयस्पर्शी और आनंददायक संकीर्तन गीत है। इस विस्तृत लेख में हम इस भजन के सम्पूर्ण हिंदी लिरिक्स, शब्द-दर-शब्द भावार्थ, गायन की विधि, आध्यात्मिक महत्व और जीवन पर इसके प्रभाव का गहन अध्ययन करेंगे।


सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ स्थायी / मुखड़ा ॥

मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई,
हो बंसी वाले पे दुनिया दीवानी हो गई!
प्रेम की दीवानी राधा रानी हो गई,
मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई।

॥ प्रथम अंतरा ॥

मुरली अधरन धर मुस्कावे री,
बिन देखे तोहे चैन ना आवे री!
साँवरिया सुरतिया दिल लुभानी हो गई,
मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई।

॥ द्वितीय अंतरा ॥

बेदर्दी तोहे तरस ना आवे,
व्याकुल मन मेरा चैन ना पावे!
श्याम बिन जिंदगी बेगानी हो गई,
मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई।

॥ तृतीय अंतरा ॥

लट घुघराली नज़र कजरारी रे,
तिरछी नज़र ने घायल कर डारी रे!
मेरी जिंदगानी तेरे नाम हो गई,
मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह एक भक्त के हृदय की वह पुकार है जो भगवान श्री कृष्ण के प्रति उसके अनन्य प्रेम और विरह की पराकाष्ठा को दर्शाती है।

स्थाई का भाव: भजन के मुखड़े में यह स्पष्ट किया गया है कि भगवान श्री कृष्ण की मोहक मुरली और उनके सांवले स्वरूप पर केवल कोई एक व्यक्ति नहीं, अपितु सम्पूर्ण सृष्टि मुग्ध हो चुकी है। इस दिव्य प्रेम में सबसे प्रमुख नाम श्री राधा रानी का है, जो प्रेम की अधिष्ठात्री देवी हैं। जब राधा रानी जैसी महाभाव स्वरूपा भी श्याम सुंदर के प्रेम में दीवानी हो जाती हैं, तो फिर साधारण मनुष्य की तो बात ही क्या है!

प्रथम अंतरे का भाव: भक्त गोपियों के भाव से कहती है कि जब कान्हा अपने अधरों (होंठों) पर बांसुरी रखकर मंद-मंद मुस्कुराते हैं, तो उनकी वह मुस्कान और सांवली सूरत देखकर भक्तों का हृदय सुध-बुध खो बैठता है। प्रभु के दर्शन के बिना जीवन में शांति और चैन का अनुभव ही नहीं होता।

द्वितीय और तृतीय अंतरे का भाव: यहाँ विरह रस (Seperation Bhava) की प्रधानता है। भक्त अपने प्रियतम श्याम से अनुनय-विनय करती है कि हे प्रभु! तुम्हें मेरे रोने पर तरस क्यों नहीं आता? तुम्हारे बिना यह जीवन पराया (बेगाना) सा प्रतीत होता है। उनके घुंघराले बाल, कजरारी आँखें और वह तिरछी चितवन भक्त के अहंकार और हृदय को पूरी तरह घायल कर देती है, जिसके पश्चात भक्त अपनी सम्पूर्ण जिंदगानी श्याम सुंदर के चरणों में समर्पित कर देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • मधुर प्रेम रस (Madhurya Bhava): यह भजन माधुर्य भक्ति और सख्य भाव का अद्भुत संगम है जहाँ जीवात्मा अपने आपको प्रियतम कृष्ण की प्रेमिका या अनन्य भक्त मानती है।
  • संकीर्तन की महिमा: कलयुग में नाम संकीर्तन को भवसागर से पार उतरने का सबसे सरल साधन बताया गया है। इस भजन का सामूहिक गायन मन को अपार शांति और दिव्यता प्रदान करता है।
  • राधा-कृष्ण का अद्वैत प्रेम: भजन में राधा रानी और कृष्ण के शाश्वत प्रेम को रेखांकित किया गया है जो जीव और ब्रह्म के मिलन का प्रतीक है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परन्तु इसके गायन और श्रवण का विशेष आनंद निम्नलिखित अवसरों पर प्राप्त होता है:

  • ब्रह्ममुहूर्त एवं संध्याकालीन वंदना: सुबह उठकर या संध्या के समय मंदिर में दीपक प्रज्वलित करते समय इसका गायन चित्त को शुद्ध करता है।
  • जन्माष्टमी एवं रासलीला उत्सव: श्री कृष्ण जन्माष्टमी, गोवर्धन पूजा, और होली के पावन पर्वों पर इस भजन के बिना उत्सव अधूरा माना जाता है।
  • साप्ताहिक सत्संग एवं कीर्तन: घर में होने वाले संकीर्तन, एकादशी व्रत जागरण और भागवत कथा के दौरान इस भजन को विशेष रूप से गाया जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के आराध्य भगवान श्री कृष्ण हैं, जिन्हें 'मुरली वाला', 'बंसी वाला', 'श्याम' और 'साँवरिया' जैसे नामों से संबोधित किया गया है। सनातन परंपरा में ब्रज के संतों, अष्टछाप के कवियों और चैतन्य महाप्रभु के अनुयायियों द्वारा इस प्रकार की प्रेम लक्षणा भक्ति का व्यापक प्रचार किया गया है, जहाँ भगवान के रूप माधुरी पर सर्वस्व न्योछावर करने का संदेश दिया जाता है। इसी परंपरा से जुड़कर हमारे श्री कृष्ण भजन संग्रह में ऐसे कई दिव्य पद सम्मिलित किए गए हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोकप्रिय भजन परंपरा और पारंपरिक लोक धुनों पर आधारित यह गीत पीढ़ियों से भक्तों के मुख से गुनगुनाया जाता रहा है। इसकी सरल शब्दावली और प्रवाहमयी लय इसे हर उम्र के श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाती है। ब्रजभाषा और खड़ी बोली के सुंदर समन्वय से रचित यह गीत सीधे श्रोताओं के हृदय को स्पंदित करता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और लोक-प्रिय हिंदी-ब्रज मिश्रित है। इसमें रूपक और मानवीकरण अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। "तिरछी नज़र ने घायल कर डारी रे" जैसी पंक्तियाँ लोकगीतों की शैली का स्मरण कराती हैं, जो श्रोताओं को तुरंत झूमने पर विवश कर देती हैं। इसी प्रकार के अन्य पारंपरिक पदों के लिए आप भक्ति गीत संग्रह का अवलोकन कर सकते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि:

  • अहंकार का त्याग करके भगवान के चरणों में पूर्ण शरणागति अपनानी चाहिए।
  • संसार के मोह-माया से ऊपर उठकर परम सत्ता से सच्चा प्रेम करना ही मानव जीवन का चरम लक्ष्य है।
  • भगवान की रूप-माधुरी में मन को लीन करने से सांसारिक दुखों और चिंताओं से मुक्ति मिलती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ
अधरन धर होंठों पर रखना वंशी को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपने अधरों पर धारण करना
साँवरिया सुरतिया श्याम सुंदर का सांवला रूप भक्त के हृदय में बसी भगवान की छवि
बेगानी पराया या अनजान ईश्वर के प्रेम के बिना जीवन का अर्थहीन होना
कजरारी नज़र काजल लगी मोहक आँखें भक्तों को अपने प्रेमपाश में बांधने वाली प्रभु की चितवन

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई..." - इस पंक्ति का तात्पर्य है कि भगवान की मुरली की हर एक तान में वह सम्मोहन है जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड आकर्षित हो जाता है।

"प्रेम की दीवानी राधा रानी हो गई..." - राधा रानी प्रेम की प्रतीक हैं; जब वे श्री कृष्ण के प्रेम में सर्वस्व समर्पित कर चुकी हैं, तो भक्त भी उसी मार्ग का अनुसरण करते हैं।

"मेरी जिंदगानी तेरे नाम हो गई..." - यह भक्त का अपने आराध्य के प्रति अंतिम समर्पण है, जहां उसका व्यक्तिगत अस्तित्व समाप्त होकर केवल प्रभुमय हो जाता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणातः क्लेशनाशाय गोविंदाय నమో नमः॥

अर्थ: भगवान वासुदेव, कृष्ण और परमात्मा रूपी श्री हरि को बारंबार नमस्कार है, जो भक्तों के समस्त क्लेशों का नाश करने वाले हैं।

भगवान श्रीकृष्ण के ध्यान और स्मरण से जुड़ी महिमा के लिए आप श्री कृष्ण स्तोत्रम एवं वंदना का पाठ भी कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई भजन इन हिंदी लिरिक्स
आराध्य देव भगवान श्री कृष्ण एवं श्री राधा रानी
संगीत परंपरा लोकप्रिय पारंपरिक संकीर्तन शैली
भाषा सरल हिंदी एवं ब्रजभाषा के शब्द
भक्ति का प्रकार माधुर्य एवं विरह रस प्रधान प्रेम भक्ति
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, सत्संग, एकादशी एवं दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मुख्य आराध्य लीलापुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी हैं।

इस भजन को जन्माष्टमी, श्री कृष्ण भक्तों के सत्संग, संकीर्तन कार्यक्रमों और दैनिक संध्या वंदना के समय अत्यंत प्रेम के साथ गाया जाता है।

इसका अर्थ है कि जिस प्रकार महाभाव स्वरूपा श्री राधा रानी का सम्पूर्ण जीवन और प्रेम कृष्ण को समर्पित है, उसी प्रकार हर भक्त को अपने आराध्य से अनन्य प्रेम करना चाहिए।

हाँ, इसकी लय बहुत सरल और तालबद्ध है, जिससे इसे संगीत सीखने वाले नए बच्चे और गायक बहुत आसानी से याद कर सकते हैं।

संकीर्तन से मन की चंचलता शांत होती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान के प्रति भक्ति भाव दृढ़ होता है।

निश्चित रूप से, हारमोनियम, ढोलक, मंजीरे और करताल के साथ इस भजन का सामूहिक गायन इसका आनंद कई गुना बढ़ा देता है।

भक्त का भगवान के दर्शन के बिना व्याकुल होना और स्वयं को उनके बिना अधूरा महसूस करना विरह भाव कहलाता है, जो प्रेम की तीव्रता को बढ़ाता है।

आप इस पृष्ठ को बुकमार्क कर सकते हैं ताकि जब भी आपको सत्संग या कीर्तन के लिए इन लिरिक्स की आवश्यकता हो, आप सरलता से इनका पाठ कर सकें।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिलोकि पर प्रकाशित यह भजन सामग्री सनातन परंपरा, लोक संस्कृति और वैष्णव भक्ति साहित्य के विभिन्न प्रसिद्ध संकीर्तनों के संकलन पर आधारित है। इसे पाठकों की सुविधा और प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को शुद्ध और भक्तिमय पाठ उपलब्ध कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन धर्म की पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन परंपरा
  • ब्रज क्षेत्र के भक्ति संगीत और पद संग्रह
  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं राधा-कृष्ण लीला प्रसंग

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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