भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

खोल भवन दे द्वार नि भजन इन हिंदी

पढ़ें खोल भवन दे द्वार नि भजन इन हिंदी का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

"खोल भवन दे द्वार नि माये खोल भवन दे द्वार" अत्यंत ही पावन और हृदय को स्पर्श करने वाला एक भक्तिपूर्ण भजन है, जो मुख्य रूप से माता रानी (दुर्गा माँ) की आराधना में गाया जाता है। यह भजन साधक की उस व्याकुलता को दर्शाता है जहाँ भक्त अपनी आराध्या के दर्शन के लिए द्वार खोलने की प्रार्थना करता है। भक्ति परंपरा में 'द्वार खोलना' केवल भौतिक मंदिर के कपाट खोलने का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह जीवात्मा के हृदय में स्थित अज्ञान के पर्दों को हटाकर परमात्मा के प्रकाश को भीतर आने देने का एक आध्यात्मिक आह्वान है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण, और माता के चौकी के कार्यक्रमों में अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है, जो भक्तों के मन में भक्ति रस का संचार करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

खोल भवन दे द्वार नि माये खोल भवन दे द्वार,
खोल भवन दे द्वार नि माये खोल भवन दे द्वार।
मैं आया तेरे द्वार नि माये खोल भवन दे द्वार॥

ऊँचे पहाड़ां वाली माये, मेहरां कर दे तू,
भटका खाया जग सारा, राह दिखा दे तू।
तेरी महिमा अपरम्पार, नि माये खोल भवन दे द्वार॥

कष्ट मिटा दे माँ भवानी, झोली भर दे तू,
दुखिया मन की पीर समझ ले, संकट हर ले तू।
तेरा ही है आधार, नि माये खोल भवन दे द्वार॥

श्रद्धा के मैं फूल चढ़ाऊं, ज्योत जगाऊं मैं,
तेरी भक्ति में खो जाऊं, गुण तेरे गाऊं मैं।
स्वीकार कर ले प्यार, नि माये खोल भवन दे द्वार॥

खोल भवन दे द्वार नि माये खोल भवन दे द्वार,
मैं आया तेरे द्वार नि माये खोल भवन दे द्वार॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त यहाँ माता से प्रार्थना कर रहा है कि वह अपने दिव्य भवन के द्वार खोल दे। यहाँ 'भवन' का अर्थ उस दिव्य लोक से है जहाँ माता का वास है, और 'द्वार' का अर्थ है वह मार्ग जो भक्त को ईश्वर से जोड़ता है। संसार के दुखों और मोह-माया में भटकने के बाद, भक्त को केवल माता की शरण ही एकमात्र सहारा दिखाई देता है।

भजन की पंक्तियों में भक्त अपनी विवशता और माता की करुणा का वर्णन करता है। वह कहता है कि हे माँ, मैंने इस संसार में बहुत भटकन देखी है, अब आप ही मुझे सही राह दिखा सकती हैं। 'झोली भर दे' का अर्थ केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति नहीं है, बल्कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य रूपी धन से मन को तृप्त करने की प्रार्थना है। यह भजन साधक को सिखाता है कि पूर्ण समर्पण ही मोक्ष का मार्ग है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन माता दुर्गा की शक्ति और वात्सल्य का प्रतीक है। इसके गायन से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सनातन धर्म में माता को 'शक्ति' का स्वरूप माना गया है, और यह भजन उस शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक माध्यम है। जागरण और नवरात्रि के दौरान इसे गाने से वातावरण में दिव्यता आती है और भक्तों का मन एकाग्र होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में इसका गायन विशेष फलदायी होता है। इसे माता की चौकी, नवरात्रि के नौ दिनों में, या किसी भी शुभ अवसर पर पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है। गाते समय मन में माता की प्रतिमा का ध्यान करना चाहिए और भावपूर्ण होकर शब्दों का उच्चारण करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
भवन मंदिर/आवास माता का दिव्य स्थान
मेहरां कृपा/दया माता की करुणा
अपरम्पार जिसका कोई अंत न हो माता की महिमा
पीर पीड़ा/दुख मन की व्याकुलता
आधार सहारा ईश्वर पर निर्भरता

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम खोल भवन दे द्वार
आराध्य माता दुर्गा/शेरावाली
भाषा हिंदी/पंजाबी मिश्रित
मुख्य भाव समर्पण एवं याचना
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, जागरण, पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को घर पर पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ गाया जा सकता है।

इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय क्या है?

नवरात्रि के दौरान या सुबह-शाम की आरती के समय इसे गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

क्या यह भजन किसी विशेष देवी के लिए है?

यह मुख्य रूप से माता दुर्गा (शेरावाली माँ) के लिए समर्पित है।

क्या इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है?

हाँ, भक्तिपूर्ण भजनों को सुनने से मन को असीम शांति और सकारात्मकता प्राप्त होती है।

क्या इसे बिना वाद्य यंत्रों के गाया जा सकता है?

भक्ति में भाव प्रधान है, इसलिए इसे बिना वाद्य यंत्रों के भी गाया जा सकता है।

माता की भक्ति के लिए और कौन से भजन गाए जा सकते हैं?

आप दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

क्या इस भजन का कोई विशेष नियम है?

कोई कठोर नियम नहीं है, बस मन में श्रद्धा और पवित्रता होनी चाहिए।

क्या यह भजन जागरण में गाया जाता है?

जी हाँ, यह माता के जागरण का एक अत्यंत लोकप्रिय भजन है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्ति परंपराओं और लोक भजनों के आधार पर संकलित की गई है। इसका उद्देश्य भक्तों को माता की भक्ति से जोड़ना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

सनातन धर्म की भक्ति परंपरा, लोक भजन संग्रह एवं पौराणिक स्तोत्र।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 07 Oct 2026

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