तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये - सम्पूर्ण भजन परिचय एवं भक्ति भाव
प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश जी की आराधना में समर्पित यह अत्यंत लोकप्रिय भजन "तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये" सनातन धर्म की अटूट निष्ठा, श्रद्धा और समर्पण का एक अद्भुत प्रतीक है। जब भी भक्त अपने जीवन में किसी नए कार्य का शुभारंभ करते हैं या किसी अनुष्ठान, पूजा, विवाह या मांगलिक उत्सव का आयोजन होता है, तो सबसे पहले विघ्नहर्ता गजानन का स्मरण किया जाता है। यह भजन साधक के उस आंतरिक भाव को व्यक्त करता है जहाँ वह दीन-भाव से अपने आराध्य के द्वार पर उपस्थित होकर अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति और विघ्नों के नाश की प्रार्थना करता है। इस भजन की लय, इसका सरल और हृदयस्पर्शी संगीत तथा इसके बोल भगवान गणेश के साथ भक्त के अत्यंत निकट और मधुर संबंध को दर्शाते हैं। भगवान शिव और माता पार्वती के नंदन लंबोदर गजानन रिद्धि-सिद्धि के दाता हैं, और जब भक्त उनके चरणों में हाजिरी लगाते हैं, तो उनका जीवन धन्य हो जाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, गायन की विधि, जीवन में इसके महत्व और गणेश साधना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि पाठकगण गणेश कृपा का पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकें।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये
|| तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये ||
मिल कर तुझे मनाना है मेवा बेट (भेंट) चडाना है
दूध का भोग लगाना है
|| तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये ||
तेरे मस्तक चड़े सिंदूर चरणों में श्रदा के फूल
सचे भगती वाले मोती देदो चरण कमल की धुल
मुह मांगा फल पाना है मेवा बेट चडाना है
दूध का भोग लगाना है
|| तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये ||
माँ गोरा (गौरी) के लाल पूरण शक्ति दीन दयाल
तेरे दर पे खड़े सवाली पुरे करदो सभी सवाल
ना खाली लौट के जाना है मेवा बेट चडाना है
दूध का भोग लगाना है
|| तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये ||
रिधि सीधी का वरदान देदो गणपति हे भगवान
फानी (फानी/प्राणी) सारा ही संसार तेरा चाहे प्रभु दीदार
तेरा प्यार सुहाना है मेवा बेट चडाना है
दूध का भोग लगाना है
|| तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये ||
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
भगवान श्री गणेश के इस पावन भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और भक्ति से ओत-प्रोत है। भजन की पंक्तियों में भक्त भगवान गणेश के दरबार में आकर अपनी हाजिरी लगा रहा है। भक्त कहता है कि हे गजानन! आपके सभी भक्त आपके द्वार पर अत्यंत श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने के लिए उपस्थित हुए हैं। हमारा उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि प्रेम और समर्पण के साथ आपको मनाना है। हम अपनी श्रद्धा के अनुसार मेवा, मिष्ठान और मोदक का भोग लेकर आए हैं, जिसे आप प्रेमपूर्वक स्वीकार करें।
आगे भक्त भगवान गणेश के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहता है कि हे प्रभु! आपके मस्तक पर हमेशा सिंदूर का लेपन शोभा पाता है और आपके चरण कमलों में हमारे श्रद्धा रूपी फूल अर्पित हैं। भक्त भौतिक धन-दौलत नहीं मांगता, बल्कि सच्ची भक्ति रूपी मोती और आपके चरण कमलों की धूल मांगਦਾ है, जो मनुष्य के जीवन को तारने के लिए पर्याप्त है। भक्त का विश्वास है कि आपके दर पर आने वाले को उसकी पात्रता के अनुसार नहीं, बल्कि उसकी आवश्यकता के अनुसार मुंह मांगा फल प्राप्त होता है।
भजन के अगले चरण में माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव के पुत्र गजानन को 'दीन दयाल' और 'पूर्ण शक्ति' कहकर पुकारा गया है। भक्त कहता है कि हम सब आपके दर पर हाथ फैलाए सवाली बनकर खड़े हैं, हे विघ्नहर्ता! हमारे सभी दुखों और संकटों का निवारण कर दीजिए। हम यह विश्वास रखते हैं कि आपके दरबार से कोई भी भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता। अंत में भक्त रिद्धि और सिद्धि के प्रदाता से यह वरदान मांगता है कि संपूर्ण संसार आपकी कृपा और दीदार का भूखा है। आपका यह अहेतुक प्रेम और सानिध्य ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा संबल है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन सनातन संस्कृति में गणेशोपासना का एक अनूठा और सरस माध्यम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- विघ्ननाशक स्वरूप का स्मरण: भजन के माध्यम से भगवान गणेश के उस स्वरूप का स्मरण होता है जो सभी बाधाओं को दूर करने वाला है।
- सरल और सहज भाषा: आम बोलचाल की भाषा में रचित होने के कारण यह भजन बच्चों, युवाओं और वृद्धों सभी द्वारा आसानी से गाया और याद किया जा सकता है।
- समर्पण का भाव: यह भजन भौतिक इच्छाओं के साथ-साथ भगवान के चरणों में सच्ची भक्ति और चरण-धूल प्राप्ति की आध्यात्मिक कामना का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है।
- पारिवारिक और सामूहिक गायन: किसी भी अनुष्ठान, गणेश चतुर्थी, सत्यनारायण कथा या साप्ताहिक सत्संग के दौरान इस भजन को सामूहिक रूप से पूरी ऊर्जा के साथ गाया जा सकता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
किसी भी देव भजन का पूर्ण आध्यात्मिक फल प्राप्त करने के लिए उसका गायन उचित विधि और समय पर किया जाना चाहिए:
- प्रातःकाल और संध्या वंदन: सुबह स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित करके गणेश जी के समक्ष इस भजन का गान करने से दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
- बुधवार का दिन: भगवान गणेश को समर्पित बुधवार के दिन विशेष रूप से इस भजन का पाठ और श्रवण अत्यंत फलदायी माना गया है।
- गणेश चतुर्थी एवं उत्सव: गणेश उत्सव, संकष्टी चतुर्थी तथा मांगलिक कार्यों (जैसे गृह प्रवेश, विवाह, नया व्यापार आरंभ) के समय इस भजन का गायन वातावरण को पवित्र कर देता है।
- गायन विधि: भजन गाते समय मन को एकाग्र रखें, हाथ जोड़कर गजानन का ध्यान करें और संभव हो तो मोदक या बेसन के लड्डू का भोग अर्पित करें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के आराध्य देव प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश हैं, जिन्हें वेदों और पुराणों में 'गणपति', 'विघ्नराज', 'गजानन', 'एकदंत' और 'हेरंब' जैसे नामों से संबोधित किया गया है। शिव पुराण और मुद्गल पुराण के अनुसार, सृष्टि के सृजन, पालन और संहार के चक्र में किसी भी कार्य के निर्विघ्न संपादन के लिए गणेश जी की पूजा अनिवार्य है। इस भजन की रचना लोक परंपरा और संतों की भक्तिधारा से प्रेरित है, जहां आम जनमानस ने अपनी सरल भाषा में गजानन की महिमा का गुणगान किया है। आप भगवान गणेश के साथ-साथ श्री हनुमान चालीसा का पाठ भी संकट मोचन के रूप में कर सकते हैं, जो समान रूप से विघ्ननाशक माने जाते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
लोक भजनों की यह परंपरा भारतीय संस्कृति की वह थाती है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से आगे बढ़ती रही है। "तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये" जैसी रचनाएं किसी एक विशिष्ट कवि की रचना न होकर जन-मानस की भक्ति की अभिव्यक्ति हैं। जब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं और भक्तगण मिलकर गणेश जी की चौकी या संकीर्तन करते हैं, तब ऐसे भावपूर्ण भजनों का जन्म होता है। इन भजनों का मुख्य उद्देश्य भगवान और भक्त के बीच के औपचारिकता के पर्दे को हटाकर एक अत्यंत आत्मीय और सरल संबंध स्थापित करना है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल हिंदी, अवधी और खड़ी बोली का एक सुंदर मिश्रण है, जिसे पारंपरिक लोक शैली में ढाला गया है। इसमें तुकबंदी (जैसे- राये, मनाना है, चढ़ाना है, लगाना है) का विशेष ध्यान रखा गया है जो इसे गाने में अत्यंत लयबद्ध और आनंददायक बनाती है। 'सिंदूर', 'चरण कमल', 'दीन दयाल', 'रिधि सीधी' जैसे पारंपरिक प्रतीकों और उपमाओं का प्रयोग करके इसे अत्यधिक प्रभावशाली बनाया गया है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि जीवन के लिए एक गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है:
- अहंकार का त्याग: भगवान के द्वार पर सवाली बनकर जाना यह सिखाता है कि मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार का त्याग करके विनीत भाव से जीवन जीना चाहिए।
- प्रथम स्मरण का संस्कार: जीवन के हर नए कार्य की शुरुआत में विघ्नहर्ता का स्मरण करने से हमारे मानसिक संशय दूर होते हैं और कार्य में सफलता मिलती है।
- सच्चे प्रेम की प्रधानता: भगवान को महंगे उपहारों से अधिक भक्त का प्रेम और सच्ची भावना (मेवा और दूध का साधारण भोग) प्रिय होती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| गणपति राये | गणों के स्वामी भगवान गणेश | समस्त देवताओं में प्रथम पूज्य भगवान गजानन |
| मेवा भेंट | सूखे मेवे और मिष्ठान का उपहार | भक्त द्वारा श्रद्धा से अर्पित किया जाने वाला भोग |
| चरण कमल की धुल | भगवान के चरणों की पवित्र रज | परम पवित्र आशीर्वाद और मुक्ति का प्रतीक |
| दीन दयाल | गरीबों और भक्तों पर दया करने वाले | भगवान गणेश की करुणाशील प्रकृति |
| रिधि सीधी | समृद्धि और सफलता की देवियां | गणेश जी की दोनों पत्नियां और वरदान स्वरूप |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
पंक्ति: तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये...
भावार्थ: हे गणेश जी! आपके सभी भक्त आपके पवित्र दरबार में आपकी पूजा-अर्चना करने के लिए उपस्थित हुए हैं। हम पूरी श्रद्धा से आपको मनाना चाहते हैं।
पंक्ति: तेरे मस्तक चड़े सिंदूर चरणों में श्रदा के फूल...
भावार्थ: आपके मस्तक पर सिंदूर की चमक सुशोभित है और हम आपके चरणों में अपनी अटूट श्रद्धा के पुष्प अर्पित करते हैं। हमें भौतिक वस्तुओं की लालसा नहीं, हमें तो आपके चरणों की धूल और सच्ची भक्ति चाहिए।
पंक्ति: माँ गोरा के लाल पूरण शक्ति दीन दयाल...
भावार्थ: हे माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव के नंदन! आप सभी शक्तियों के स्वामी और दिनों पर दया करने वाले हैं। हमारे सभी सवाल और संकट आपके दर पर आकर समाप्त हो जाते हैं।
पंक्ति: रिधि सीधी का वरदान देदो गणपति हे भगवान...
भावार्थ: हे भगवान गणेश! हमें रिद्धि-सिद्धि (बुद्धि और समृद्धि) का वरदान प्रदान कीजिए। यह संपूर्ण संसार आपके दर्शन और आपकी कृपा का प्रार्थी है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ-साथ निम्नलिखित पौराणिक मंत्र का स्मरण करने से गणेश साधना पूर्ण होती है:
"वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥"
इस श्लोक का अर्थ है कि हे हाथी के मुख वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान कांतिवान भगवान गणेश! मेरे सभी कार्यों को बिना किसी विघ्न के हमेशा के लिए संपन्न कीजिए। इसके साथ ही आप शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं क्योंकि भगवान गणेश शिव परिवार के प्रमुख सदस्य हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | तेरे भगत द्वारे आये पूजा करने गणपति राये |
|---|---|
| आराध्य देव | भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता) |
| संगीत परंपरा | पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज-खड़ी बोली मिश्रित |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, विघ्न निवारण और आशीर्वाद प्राप्ति |
| उपयुक्त अवसर | गणेश चतुर्थी, बुधवार पूजा, गृह प्रवेश, नई शुरुआत |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन धर्म की पारंपरिक लोक कथाओं, भजन परंपरा और पुराणों के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक, सरल और आत्मीय भक्ति सामग्री प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत इस भजन के मूल भाव और सांस्कृतिक महत्व को पूरी गरिमा के साथ प्रस्तुत किया गया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- शिव पुराण - कोट रुद्र संहिता एवं गणेश खंड
- मुद्गल पुराण एवं गणेश पुराण
- पारंपरिक भारतीय लोक भजन एवं संकीर्तन संग्रह
- सनातन संस्कृति एवं व्रत-पर्व लोक परंपराएं
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