भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हम सब पे तेरा एहसान है भजन इन हिंदी

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"हम सब पे तेरा एहसान है" भजन सनातन धर्म की शरणागति परंपरा का एक अत्यंत भावपूर्ण और रूहानी गीत है। यह भजन जीवात्मा और परमात्मा के उस अटूट संबंध को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपने सद्गुरु या इष्ट के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है। इस भजन का भाव 'आत्म-समर्पण' (Surrender) है, जो यह स्वीकार करता है कि मनुष्य का अस्तित्व ईश्वर की कृपा पर ही टिका है। भक्ति मार्ग में इसे 'विनय' का भजन माना जाता है, जिसे गाते समय भक्त का हृदय करुणा, प्रेम और कृतज्ञता से भर जाता है। यह भजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक को यह अहसास भी कराता है कि जीवन की हर सांस और हर खुशी प्रभु की ही देन है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

हम सब पे तेरा एहसान है
तेरी मीठी सी रूहानी मुस्कान है
मेरी रूह का तू सकूँ है
तेरे संग चलने का सकूँ है
मेरी रूह का तू सकूँ है

तू है तो हम है सतगुरु बिन तेरे हम कुछ भी नहीं
कुछ भी के हम कुछ भी नहीं
ये है हम को यकीन के हम कुछ भी नहीं

तू ही इबादत मेरी तू ही मेरा खुदा
आँखों की मसरत तू ही रूह की सदा
तेरे बिन जिंदगी बेजान तू सब के लिए वरदान है
हम सब पे तेरा एहसान है

तू ही रहनुमा तू ही राहबर तेरी इक नजर मूतझर
तू है तो हम है सतगुरु बिन तेरे हम कुछ भी नहीं

अल्ल्हा मेरे मोला तेरे नाल मौज बहारा
जीवन मेरे दिया शहंशाह तेरे हथ मुहारा
अल्ल्हा मेरे मोला तेरे नाल मौज बहारा

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव 'कृतज्ञता' (Gratitude) है। भक्त कहता है कि हे प्रभु, हम पर आपका अनंत उपकार है। आपकी वह दिव्य और रूहानी मुस्कान ही हमारे जीवन का आधार है। भक्त स्वीकार करता है कि उसके अस्तित्व का कोई स्वतंत्र मूल्य नहीं है; वह केवल अपने गुरु या ईश्वर की कृपा से ही जीवित है। "तू है तो हम हैं" - यह पंक्ति अद्वैत और द्वैत के उस मिलन बिंदु को दर्शाती है जहाँ भक्त स्वयं को मिटाकर ईश्वर में विलीन कर लेता है। भजन में 'इबादत' और 'खुदा' जैसे शब्दों का प्रयोग यह दर्शाता है कि भक्ति की भाषा प्रेम की भाषा है, जो किसी भी संप्रदाय की सीमाओं से परे है। जीवन की हर खुशी, हर राह और हर सांस प्रभु की ही देन है, यही इस भजन का सार है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति का स्वरूप: यह भजन 'दास्य भाव' और 'सख्य भाव' का मिश्रण है।
  • आध्यात्मिक शांति: इसके शब्द मन को एकाग्र करने और ध्यान (Meditation) में सहायक हैं।
  • समर्पण का संदेश: यह अहंकार को त्यागने और प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • सार्वभौमिकता: इसमें प्रयुक्त शब्द सभी धर्मों के प्रेमियों को ईश्वर के प्रति एक समान भाव से जोड़ते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल में इसका प्रभाव अधिक होता है। इसे एकांत में बैठकर या सामूहिक सत्संग में भावपूर्ण स्वर में गाना चाहिए। गायन से पूर्व दीप प्रज्वलित करें और मन को शांत कर प्रभु का स्मरण करें।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
एहसान उपकार / कृपा ईश्वर की दया
रूहानी आध्यात्मिक / दिव्य ईश्वर का स्वरूप
मसरत खुशी / आनंद भक्ति का सुख
रहनुमा मार्गदर्शक गुरु / ईश्वर
मुहारा बागडोर जीवन का नियंत्रण

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हम सब पे तेरा एहसान है
विषय ईश्वर के प्रति कृतज्ञता
भाव समर्पण एवं प्रेम
भाषा हिंदी / उर्दू मिश्रित
उपयुक्त अवसर सत्संग, ध्यान, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन किसी एक विशिष्ट देवता के बजाय निराकार ईश्वर या अपने सद्गुरु को समर्पित है, जो भक्त के जीवन का मार्गदर्शक है।

क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?

हाँ, इसे घर पर दैनिक पूजा या ध्यान के समय गाना अत्यंत फलदायी है।

'रूह' का अर्थ क्या है?

आध्यात्मिक संदर्भ में रूह का अर्थ 'आत्मा' है।

क्या यह भजन किसी विशेष संप्रदाय का है?

नहीं, यह भजन प्रेम और भक्ति पर आधारित है, जो सभी के लिए है।

इस भजन को गाने से क्या लाभ होता है?

इसे गाने से मन में शांति आती है और अहंकार का नाश होता है।

क्या इसे बच्चों को सिखाया जा सकता है?

हाँ, यह बच्चों में कृतज्ञता और भक्ति के संस्कार डालने के लिए उत्तम है।

'सतगुरु' का क्या महत्व है?

सतगुरु वह है जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ईश्वर का मार्ग दिखाता है।

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

ईश्वर के प्रति पूर्ण शरणागति और उनके उपकारों को स्वीकार करना।

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संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्ति परंपरा के विभिन्न भजनों और आध्यात्मिक ग्रंथों के सार पर आधारित है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 01 Oct 2026

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