भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे भजन इन हिंदी

चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे भजन लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संकटमोचन श्री हनुमान जी के इस पावन भजन से पाएं असीम कृपा, संदर्भ एवं व्याख्या सहित।

"चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे" यह अत्यंत पावन, ऊर्जावान और भक्ति रस से परिपूर्ण भजन कलयुग के प्रत्यक्ष देवता, संकटमोचन श्री हनुमान जी (बाल रूप बालाजी महाराज) को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय संकीर्तन गीत है। सनातन धर्म में संकीर्तन, सामूहिक गान और प्रभु नाम का स्मरण मन के मैल को धोने और अंतःकरण को पावन करने का सर्वोच्च साधन माना गया है। राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी, सालासर बालाजी और देश के कोने-कोने में स्थित सिद्ध पीठों पर गूंजने वाले इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा की अपनी मूल परम सत्ता यानी महावीर हनुमान जी के चरणों में पूर्ण शरणागति का अनूठा भाव झलकता है। इस भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार की भागदौड़ और दुखों से संतापग्रस्त मनुष्य यदि सच्चे हृदय से बालाजी के दरबार में हाजिरी लगाता है, तो उसके सारे संकट स्वतः दूर हो जाते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे,
चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे,
होती है सुनवाई यहाँ, सबकी पुकार पे,
चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे।

दुखिया जो आता है, सुख पाके जाता है,
बालाजी का नाम जो भी, दिल से लगाता है,
मिट जाते हैं संकट, प्रभु के प्यार पे,
चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे।

मेहंदीपुर धाम की महिमा है न्यारी,
सालासर बालाजी की सूरत है प्यारी,
झुकते हैं सब शीश, इनके द्वार पे,
चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे।

भूत-प्रेत बाधा, सब दूर हो जाती है,
हनुमत की भक्ति, खुशहाली लाती है,
होती है कृपा, इनके दरबार पे,
चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे।

भक्तों की टोली, जयकारे लगाती है,
बालाजी की शक्ति, सबको जगाती है,
न्योछावर हैं हम, इनके उपकार पे,
चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। "चलो सारे चलो बालाजी के दरबार पे" केवल एक आह्वान नहीं, बल्कि एक निमंत्रण है उस शक्ति के पास जाने का जो कलयुग में भक्तों के दुखों को हरने के लिए तत्पर है। भजन कहता है कि बालाजी के दरबार में किसी की भी पुकार अनसुनी नहीं रहती। जो व्यक्ति दुखी होकर वहां जाता है, वह प्रभु की कृपा से सुख और शांति लेकर लौटता है।

भजन में मेहंदीपुर और सालासर जैसे सिद्ध पीठों का उल्लेख है, जो हनुमान जी की शक्ति के केंद्र माने जाते हैं। यहाँ 'संकट' मिटने की बात कही गई है, जो न केवल भौतिक दुखों के निवारण का संकेत है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक बाधाओं से मुक्ति का भी प्रतीक है। यह भजन हमें सिखाता है कि हनुमान जी की भक्ति में वह सामर्थ्य है जो मनुष्य के भीतर के अंधकार को मिटाकर उसे प्रभु के प्रेम के प्रकाश से भर देती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन हनुमान जी के 'बाल रूप' और 'संकटमोचन' स्वरूप को उजागर करता है। इसकी लयबद्धता और सरल शब्द इसे जन-जन के कंठ में बसाने में सहायक हैं। इसका महत्व इस बात में है कि यह भक्तों को सामूहिक रूप से प्रभु की शरण में जाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे 'सत्संग' का वातावरण निर्मित होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। हनुमान जयंती या किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में इसे गाकर प्रभु का आशीर्वाद लिया जा सकता है। इसे गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और हनुमान जी के प्रति समर्पण का भाव होना आवश्यक है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
दरबार प्रभु का स्थान/मंदिर जहाँ भक्त अपनी अर्जी लगाते हैं
संकटमोचन दुखों को दूर करने वाला हनुमान जी का विशेषण
पुकार सच्ची प्रार्थना भक्त की आंतरिक आवाज
सिद्ध पीठ जागृत स्थान जहाँ प्रभु की शक्ति का वास हो

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: बालाजी के दरबार में जाने का सबसे अच्छा दिन कौन सा है?
    उत्तर: मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
  • प्रश्न: क्या यह भजन घर पर गाया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, इसे घर पर, मंदिर में या किसी भी सत्संग में पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।
  • प्रश्न: मेहंदीपुर बालाजी का क्या महत्व है?
    उत्तर: मेहंदीपुर बालाजी को नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली सिद्ध पीठ माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह भजन हनुमान भक्ति परंपरा के लोक-साहित्य का हिस्सा है। संदर्भ हेतु श्री हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का अध्ययन भी अनुशंसित है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

सनातन धर्म की भक्ति परंपरा, हनुमान जी के सिद्ध पीठों की मान्यताएं एवं लोक-भजन संग्रह।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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