पावन देवस्थान एवं तीर्थ दर्शन

तुंगनाथ मंदिर, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड)

92 दर्शनार्थी
चोपता, उत्तराखंड
प्रकाशित: 30 Sep 2026
दर्शन व इतिहास पढ़ें
मुख्य आराध्य देव
भगवान शिव
दर्शन समय सारिणी
सुबह 06:00 बजे से शाम 07:00 बजे तक (मई से अक्टूबर)
नित्य आरती समय
मंगला आरती: 06:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 06:30 PM
स्थान / नगर
चोपता, उत्तराखंड
आराध्य देव
भगवान शिव
दर्शन समय
सुबह 06:00 बजे से शाम 07:00 बजे तक (मई से अक्टूबर)
आरती समय
मंगला आरती: 06:30 AM | भोग आरती: 12:00 PM | संध्या आरती: 06:30 PM
स्थान / धाम
तुंगनाथ मंदिर, चोपता-दुग्गल बिट्टा मार्ग, रुद्रप्रयाग जिला, उत्तराखंड - 246419
अक्षर आकार:
पठन थीम:

तुंगनाथ मंदिर: एक परिचय

तुंगनाथ मंदिर विश्व का सबसे ऊँचा शिव मंदिर है, जो उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। यह पंच केदार मंदिरों में से तीसरा मंदिर है। समुद्र तल से 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि ट्रेकिंग करने वालों के लिए भी एक स्वर्ग है।

पौराणिक इतिहास और महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के युद्ध के बाद पांडव भगवान शिव से क्षमा मांगने के लिए हिमालय आए थे। भगवान शिव ने उन्हें दर्शन देने से बचने के लिए बैल का रूप धारण कर लिया था। जब पांडवों ने उन्हें पहचान लिया, तो वे भूमि में अंतर्ध्यान हो गए और उनके शरीर के अंग अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। तुंगनाथ में भगवान शिव की 'भुजाएं' प्रकट हुई थीं।

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

वास्तुकला

तुंगनाथ मंदिर की वास्तुकला 'नागर शैली' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर का निर्माण काले पत्थरों से किया गया है। मंदिर का गर्भगृह छोटा है और इसमें भगवान शिव की स्वयंभू प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के चारों ओर छोटे-छोटे अन्य मंदिर भी हैं, जो देवी पार्वती और अन्य देवताओं को समर्पित हैं।

यात्रा गाइड

तुंगनाथ तक पहुंचने के लिए चोपता से 4 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है। यह रास्ता बेहद खूबसूरत है और हिमालय की चोटियों के अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है।

कैसे पहुंचें

साधन विवरण
हवाई मार्ग निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है।
रेल मार्ग निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है।
सड़क मार्ग ऋषिकेश से चोपता के लिए बस और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं।

महत्वपूर्ण नियम

  • मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखें।
  • प्लास्टिक का उपयोग वर्जित है।
  • ट्रेकिंग के दौरान अपने साथ पर्याप्त पानी और गर्म कपड़े रखें।
तीर्थ यात्रा विधि

मंदिर दर्शन व पूजा के 4 सरल चरण

प्रभु के अलौकिक दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त करने हेतु आवश्यक नियम

१. शुद्ध भाव व स्नान

दर्शन से पूर्व पवित्र भाव से स्नान कर सात्विक वस्त्र धारण करें।

२. आरती समय ज्ञान

मंगला, भोग अथवा शयन आरती के समय उपस्थित होकर दर्शन करें।

३. नैवेद्य व अर्पण

तुलसी, पुष्प, धूप, दीप व नैवेद्य श्रद्धापूर्वक प्रभु चरणों में अर्पित करें।

४. परिक्रमा व ध्यान

गर्भगृह की विधिवत परिक्रमा कर शांत भाव से प्रभु का ध्यान करें।

संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

भक्तिलोक पर उपलब्ध सभी मंदिर दर्शन समय, आरती सारिणी व इतिहास की जानकारी संबंधित देवस्थानम ट्रस्ट, प्रमाणिक धार्मिक पुस्तकों एवं तीर्थ यात्रियों के अनुभवों के आधार पर निरंतर अद्यतन की जाती है।

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