वैदिक मंत्र संग्रह · पावन जप
178 पावन मंत्र उपलब्ध
१०८ जप विधि व भावार्थ

Mantra

Mantra के सभी शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, १०८ जप विधि, साधना नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ।

१०८ जप माला विधि
संस्कृत व हिंदी शुद्ध उच्चारण संदर्भ
बीज मंत्र ऊर्जा चक्र जागरण
संपादकीय संदर्भ-आधारित सामग्री

Mantra सूची

नित्य साधना, मन की शांति एवं मनोकामना पूर्ति हेतु संपूर्ण मंत्र संकलन

कुल 178 मंत्र
भगवान श्री राम १०८ जप विधि

श्री राम तारक मंत्र - ॐ रां रामाय नमः एवं राम नाम की अनंत महिमा व जप रहस्य

श्री राम तारक मंत्र भवसागर से पार लगाने वाला महामंत्र है। ॐ रां रामाय नमः के जप से मानसिक शांति, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति …

भगवान विष्णु १०८ जप विधि

श्री विष्णु द्वादशाक्षर मंत्र - ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सम्पूर्ण अर्थ, मोक्ष फल व विधि

श्री विष्णु द्वादशाक्षर मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) सनातन संस्कृति का एक महामुक्तिदायक और सर्वसिद्धिकारक महामंत्र है। इस दि…

भगवान कुबेर एवं माता महालक्ष्मी १०८ जप विधि

श्री कुबेर मंत्र - ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः अष्ट लक्ष्मी व धन वृद्धि

श्री कुबेर मंत्र के अनुष्ठान से साधক के जीवन में अष्ट लक्ष्मी की कृपा बरसती है और समस्त प्रकार के आर्थिक संकटों का निवारण होत…

माता महालक्ष्मी १०८ जप विधि

श्री महालक्ष्मी बीज मंत्र - ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः धन-वैभव प्राप्ति विधान

सनातन संस्कृति में मां महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः' बीज मंत्र को अत्यंत प्रभ…

भगवान गणेश १०८ जप विधि

श्री गणेश मूल मंत्र - ॐ गं गणपतये नमः सम्पूर्ण जप रहस्य, सिद्धि विधि एवं विघ्ननाश

भगवान गणेश के मूल मंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः' का संपूर्ण शास्त्रीय विधान, पद-दर-पद अर्थ, ध्यान विधि और साधना के रहस्य जानें।

श्री हनुमान जी १०८ जप विधि

श्री हनुमान मूल मंत्र - ॐ हं हनुमते नमः सम्पूर्ण सिद्ध जप विधि, लाभ एवं भय निवारण

श्री हनुमान मूल मंत्र (ॐ हं हनुमते नमः) भगवान हनुमान की साधना का सबसे शक्तिशाली और अचूक मंत्र है। इसके नियमित जाप से सभी प्रक…

माता गायत्री / सवितृ देव १०८ जप विधि

गायत्री महामंत्र - ॐ भूर्भुवः स्वः सम्पूर्ण 24 अक्षर शक्ति, अर्थ, जप विधि व वैज्ञानिक महत्व

सनातन धर्म के सर्वोच्च गायत्री महामंत्र के 24 अक्षरों की आध्यात्मिक शक्ति, सटीक अर्थ, ध्यान विधि और जप के चमत्कारी प्रभावों क…

भगवान शिव १०८ जप विधि

महामृत्युंजय मंत्र - ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सम्पूर्ण शुद्ध उच्चारण, हिंदी अर्थ, जप विधि एवं लाभ

सनातन वैदिक संस्कृति में महामृत्युंजय मंत्र को वेदों का प्राण रक्षक महामंत्र माना गया है। ऋग्वेद और यजुर्वेद से प्राप्त इस शक…

भगवान शिव १०८ जप विधि

महामृत्युंजय मंत्र - ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सम्पूर्ण शुद्ध उच्चारण, हिंदी अर्थ, जप विधि एवं लाभ

सनातन धर्म में महामृत्युंजय मंत्र को वेदों का हृदय तथा भगवान शिव का सबसे शक्तिशाली और प्राण-रक्षक मंत्र माना जाता है। जानिए इ…

Pratipada Shakti (प्रतिपदा शक्ति) १०८ जप विधि

ॐ प्रतिपदाशक्त्यै नमः मंत्र | Om Pratipadashaktyai Namah Mantra

ॐ प्रतिपदाशक्त्यै नमः एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है जो प्रतिपदा तिथि की दिव्य ऊर्जा का आह्वान करता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार…

मंत्र साधना एवं 108 जप के सार्वभौमिक नियम

शास्त्रसम्मत विधि से जप करने पर ही मंत्र की पूर्ण ऊर्जा एवं मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है

1. ब्रह्ममुहूर्त एवं समय

सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्ममुहूर्त, प्रातः 4:00 से 6:00 बजे) अथवा संध्याकाल में जप करने से मन स्वतः एकाग्र व शांत रहता है।

2. आसन एवं दिशा

कुशा, ऊनी अथवा स्वच्छ सूती आसन पर बैठें। जप के समय साधक का मुख सदैव पूर्व (East) अथवा उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।

3. 108 जप माला विधि

रुद्राक्ष, तुलसी अथवा स्फटिक माला से 108 बार जप करें। माला फेरते समय सुमेरु (शीर्ष दाने) को कभी लांघा नहीं जाता।

4. भाव एवं एकाग्रता

मंत्र के अर्थ का ध्यान करते हुए उपांशु (होंठ हिलें पर आवाज न आए) या मानस जप करना शास्त्रों में सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

Mantra का आध्यात्मिक महत्व

सनातन परंपरा में Mantra का पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मबल की प्राप्ति का सशक्त माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने प्रत्येक मंत्र में ध्वनि कंपन (Sound Frequency) का ऐसा संयोजन किया है जो साधक की चेतना को उच्चतम स्तर पर प्रतिष्ठित करता है।

१. बीज मंत्र और उनकी दिव्य शक्ति

इस श्रेणी के मंत्रों में निहित बीज मंत्र शरीर के ऊर्जा चक्रों (Chakra System) को सक्रिय करते हैं। जब साधक एकाग्रचित्त होकर नित्य जप करता है, तो उसके भीतर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और दैवीय अनुकंपा का अनुभव होता है।

संपादकीय सुझाव: मंत्र जप के समय मन में किसी प्रकार का संशय न रखें। पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध आसन और नियत समय पर जप करने से मंत्र सिद्धि शीघ्र प्राप्त होती है।

२. जप के उपरांत क्षमा प्रार्थना

मंत्र जप पूर्ण होने के बाद कम से कम २ मिनट मौन ध्यान करें और अंत में ईश्वर से अनजाने में हुई किसी भी त्रुटि (मात्रा, स्वर अथवा उच्चारण) के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

Mantra – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शास्त्रसम्मत संदर्भों के आधार पर तैयार महत्वपूर्ण जिज्ञासाएं एवं समाधान

शास्त्रों के अनुसार प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त अथवा संध्याकाल में शुद्ध आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके 108 बार रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला से जप करना सर्वोत्तम माना गया है।

हाँ, शुद्ध भाव, पवित्रता और श्रद्धा के साथ कोई भी साधक इन पावन वैदिक स्तुति मंत्रों का जप कर सकता है।

भारतीय ज्योतिष और खगोल शास्त्र में 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। 108 बार मंत्र जप करने से ब्रह्मांड की समस्त सकारात्मक ऊर्जा हमारे शरीर और मन के साथ संरेखित होती है।

🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!