मंत्र का उद्गम एवं ऋषि-छंद-देवता
सनातन वैदिक परंपरा में भगवान श्री हनुमान जी को अजर-अमर, संकटमोचन और साक्षात रुद्रवतार माना गया है। हनुमान जी केवल कलयुग के जागृत देवता ही नहीं हैं, अपितु वेदों, पुराणों, रामायण और महाभारत काल से लेकर आज तक भक्तों के रक्षक के रूप में पूजित हैं। श्री हनुमान जी की उपासना के लिए विभिन्न वैदिक और तांत्रिक मंत्रों का विधान है, जिनमें श्री हनुमान मूल मंत्र (ॐ हं हनुमते नमः) को अत्यंत संक्षिप्त, शक्तिशाली और बीज मंत्रात्मक माना गया है।
यह मंत्र अपने आप में पूर्ण चैतन्य और ऊर्जा से भरपूर है। इसमें 'हं' बीज मंत्र का प्रयोग हुआ है, जिसे हनुमान जी का हृदय बीज कहा जाता है। इस बीज मंत्र के उच्चारण मात्र से सूक्ष्म जगत की नकारात्मक शक्तियां भयभीत होकर दूर भाग जाती हैं। वेदों के अनुसार, किसी भी मंत्र के सफल जप के लिए उसके ऋषि, छंद और देवता का स्मरण अनिवार्य है। श्री हनुमान मूल मंत्र के ऋषि वामदेव जी हैं, इसका छंद 'अनुष्टुप' या 'गायत्री' है, और इसके देवता स्वयं महाबली पवनसुत हनुमान जी हैं।
मूल शुद्ध मंत्र
साधना के मार्ग में मंत्र का उच्चारण और उसकी वर्तनी अत्यंत शुद्ध होनी चाहिए। अशुद्ध उच्चारण से साधना का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। श्री हनुमान मूल मंत्र का मूल स्वरूप नीचे दिया गया है:
ॐ हं हनुमते नमः
फोनोटिक अंग्रेजी ट्रांसलिटरेशन : Om Ham Hanumate Namah
यह मंत्र दिखने में अत्यंत सरल प्रतीत होता है, परंतु इसके भीतर ब्रह्मांडीय ऊर्जा का असीम भंडार छिपा हुआ है। इसमें प्रयुक्त 'ॐ' प्रणव मंत्र है, जो ब्रह्मांड की आदि ध्वनि है। 'हं' अग्नि तत्व और रक्षा का बीज मंत्र है। 'हनुमते' चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग यह दर्शाता है कि यह समर्पण भाव का मंत्र है, और 'नमः' का अर्थ साधक के अहंकार का विसर्जन और प्रभु के चरणों में पूर्ण शरणागति है।
पद-दर-पद अर्थ एवं भावार्थ
किसी भी मंत्र का यथार्थ अर्थ जानने से जप के दौरान ध्यान एकाग्र होता है और साधक की भावना मंत्र के साथ तदाकार हो जाती है। इस महामंत्र का पद-दर-पद विश्लेषण इस प्रकार है:
- ॐ : यह सर्वोच्च ब्रह्म, परमात्मा, और समस्त ब्रह्मांड की मूल ध्वनि है। इसके उच्चारण से शरीर के चक्र जागृत होते हैं और चित्त शांत होता है।
- हं : यह हनुमान जी का बीज मंत्र है। 'ह' वर्ण आकाश और अग्नि तत्व का प्रतीक है, जो सभी प्रकार की आंतरिक और बाहरी बाधाओं को भस्म करने की क्षमता रखता है।
- हनुमते : इसका अर्थ है 'हनुमान जी के लिए'। संस्कृत व्याकरण के अनुसार चतुर्थी विभक्ति का यह रूप समर्पण को इंगित करता है, यानी 'मैं हनुमान जी को समर्पित हूँ'।
- नमः : इसका अर्थ है प्रणाम या नमस्कार। यह साधक के भीतर के अहंकार को समाप्त कर विनम्रता का भाव उत्पन्न करता है।
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:00 बजे से 6:00 बजे तक) या सूर्यास्त के पश्चात का समय इस मंत्र के जप के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
- दिशा: साधक को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठना चाहिए।
- आसन: लाल रंग का ऊनी आसन या कुशा का आसन साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
- माला: इस मंत्र के जप के लिए लाल चंदन, रुद्राक्ष या स्फटिक की माला का प्रयोग करना चाहिए। माला हमेशा गोमुखी के भीतर रखकर जपनी चाहिए ताकि माला की संख्या और पवित्रता बनी रहे।
- जप संख्या: प्रतिदिन कम से कम 108 बार (1 माला) का जप आवश्यक है। विशेष सिद्धि या संकट काल में प्रतिदिन 5, 11 या 21 माला का संकल्प लिया जा सकता है।
- संकल्प: पूजा के आरंभ में हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपने नाम, गोत्र और कामना का उच्चारण करते हुए संकल्प लें।
- भय निवारण: किसी भी प्रकार का अज्ञात भय, भूत-प्रेत बाधा, शत्रु भय या मानसिक अवसाद इस मंत्र के प्रभाव से तुरंत दूर हो जाते हैं।
- संकट मोचन: जीवन में आने वाले अचानक बड़े संकट, कर्ज का बोझ, कानूनी मुकदमे या दुर्घटनाओं के योग टल जाते हैं।
- आरोग्य प्राप्ति: हनुमान जी को आरोग्य का दाता भी माना जाता है। इस मंत्र के निरंतर जप से शारीरिक दुर्बलता, गंभीर रोग और प्राणघातक बीमारियां दूर होती हैं।
- आत्मबल और साहस: साधक के भीतर अद्भुत आत्मविश्वास, वीरता और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है।
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश: घर और कार्यस्थल की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा सकारात्मकता, शांति और समृद्धि का वास होता है।
- साधक को साधना काल में ब्रह्मचर्य का कठोरता से पालन करना चाहिए।
- खान-पान में पूरी तरह सात्विकता होनी चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का त्याग अनिवार्य है।
- जप के दौरान मन को भटकने न दें और पूर्ण श्रद्धा व विश्वास रखें।
- महिलाएं इस मंत्र का मानसिक जप कर सकती हैं, परंतु मासिक धर्म के दौरान शारीरिक स्पर्श या अनुष्ठान से दूर रहें।
- क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या से दूर रहें, क्योंकि हनुमान जी विनम्र और राम भक्त सेवकों पर ही अपनी कृपा बरसाते हैं।
संपूर्ण भावार्थ: हे ब्रह्मांड के संचालक प्रभु! हे संकटमोचन पवनसुत हनुमान जी! मैं अपने प्राणों और मन को आपके चरणों में समर्पित करते हुए आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। आप मेरे जीवन के समस्त भयों, संकटों और बाधाओं का निवारण करें तथा मुझे अपनी अतुल्नीय शक्ति और भक्ति प्रदान करें।
विनियोग, न्यास एवं ध्यान श्लोक
मंत्र साधना को वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रूप से पुष्ट करने के लिए विनियोग और ध्यान का अत्यधिक महत्व है। जप आरंभ करने से पूर्व साधक को मानसिक रूप से विनियोग करना चाहिए:
विनियोग
अस्य श्री हनुमान मूल मंत्रस्य वामदेव ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, हनुमान देवता, हं बीजं, स्वाहा शक्तिः, मम सर्वापद्व्यसनमुक्तिपूर्वक-सर्वसम्पदवाप्त्यर्थे जपे विनियोगः।
ध्यान श्लोक
मंत्र जप से पूर्व श्री हनुमान जी के इस दिव्य स्वरूप का मानसिक ध्यान करना चाहिए:
बालार्क कोटि प्रतिमं त्रिनेत्रं गदाम्बुजं च दधतं कराभ्याम्।
तड़ित्सवर्णाम्बरसुन्दरङ्गं नमामि वातातजमन्तकस्थम्॥
यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम्।
बाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं मारुतिं नमामि राक्षससंहरकम्॥
इस ध्यान श्लोक का अर्थ है कि जो करोड़ों सूर्य के समान तेजस्वी हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो हाथों में गदा और कमल धारण किए हुए हैं, जो बिजली के समान स्वर्ण आभूषणों से सुशोभित हैं, और जहाँ-जहाँ श्री रामचंद्र जी की कथा होती है, वहाँ-वहाँ जो हाथ जोड़े नेत्रों में प्रेम के आंसुओं के साथ उपस्थित रहते हैं, उन पवनसुत हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूँ।
जप विधि व नियम
श्री हनुमान मूल मंत्र की साधना अत्यंत फलदायी है, बशर्ते इसे विधि-विधान और अनुशासन के साथ किया जाए।
विशिष्ट लाभ एवं फलश्रुति
श्री हनुमान मूल मंत्र का नियमित और अनुशासित जप करने से साधक को अलौकिक लाभ प्राप्त होते हैं:
सावधानियां एवं नियम
हनुमान साधना अत्यंत सात्विक और उग्र दोनों रूपों में की जा सकती है, परंतु मूल मंत्र की साधना पूर्णतः सात्विक होनी चाहिए।
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| प्रश्न: क्या महिलाएं श्री हनुमान मूल मंत्र का जप कर सकती हैं? | उत्तर: हाँ, महिलाएं इस मंत्र का मानसिक जप पूरी श्रद्धा के साथ कर सकती हैं। वे हनुमान जी की पूजा और मानस सेवा कर सकती हैं, किंतु अनुष्ठानिक हवन आदि में विशेष नियमों का पालन होता है। |
| प्रश्न: इस मंत्र के जप के लिए कौन सी माला सबसे उत्तम है? | उत्तर: लाल चंदन की माला या रुद्राक्ष की माला इस मंत्र के लिए सबसे उत्तम मानी गई है, क्योंकि यह हनुमान जी की ऊर्जा और उग्र-सात्विक स्वरूप के अनुकूल है। |
| प्रश्न: यदि जप संख्या पूरी न हो पाए तो क्या करें? | उत्तर: संकल्पित जप संख्या को हमेशा पूरा करने का प्रयास करें। यदि किसी कारणवश बीच में उठना पड़े, तो भगवान से क्षमा मांगकर पुनः संकल्प पूरा करें। अनियमिता से साधना का पूर्ण फल नहीं मिलता। |
| प्रश्न: क्या इस मंत्र का जप कोई भी साधारण व्यक्ति कर सकता है? | उत्तर: हाँ, कोई भी बालक, वृद्ध, स्त्री या पुरुष जो सनातन धर्म और हनुमान जी में आस्था रखता है, इस मंत्र का सरल जप करके लाभ उठा सकता है। इसके लिए किसी जटिल दीक्षा की अनिवार्यता नहीं है। |