देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी) व्रत कथा एवं तुलसी विवाह सम्पूर्ण पावन विधि परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रबोधिनी एकादशी का सनातन धर्म में परम विशेष महत्व है। इसी दिन भगवान श्रीहरि विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं और माता तुलसी व शालिग्राम जी का दिव्य विवाह रचाया जाता है।
आध्यात्मिक लाभ एवं नित्य पाठ विधि
देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी) व्रत कथा एवं तुलसी विवाह सम्पूर्ण पावन विधि का श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
यह पावन पौराणिक कथा एवं व्रत विधान उपलब्ध धार्मिक शास्त्रों (पद्म पुराण, स्कंद पुराण, भविष्य पुराण, श्रीमद्भागवत एवं अन्य प्रामाणिक संदर्भों) के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा शोध एवं समीक्षा उपरांत सरल हिंदी भाषा में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य सनातन धर्म की अमूल्य परंपराओं एवं नैतिक शिक्षाओं का जन-जन तक प्रसार करना है।
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