पावन आरती संग्रह · स्तुति पाठ
श्री माँ सरस्वती आरती
6 पाठ

श्री सरस्वती माता की पावनआरती - जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

सम्पूर्ण आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल भावार्थ, शास्त्रीय विधि, गायन नियम एवं नित्य पाठ के आध्यात्मिक लाभ।

राग कल्याण / यमन शास्त्रीय राग / ताल
5 पठन अवधि
Hindi आरती भाषा
Vivek.Kumar रचनाकार / स्रोत
अक्षर आकार:

॥ श्री सरस्वती माता की पावनआरती - जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि ॥

★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★

हिन्दू सनातन धर्म में माँ सरस्वती को विद्या, कला, संगीत, बुद्धि और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और वीणावादिनी के रूप में पूजित भगवती सरस्वती अज्ञानता के अंधकार को दूर कर साधक के जीवन में विवेक और ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। बसंत पंचमी के पावन पर्व पर और दैनिक पूजा-अर्चना के दौरान 'जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता' आरती का गान करने से साधक की बुद्धि तीव्र होती है और विद्या का अपार वरदान प्राप्त होता है। Bhaktilok.in के इस विशेष पावन आलेख में हम माँ सरस्वती की इस परम पवित्र आरती के संपूर्ण बोल, शब्द-दर-शब्द भावार्थ, शास्त्रीय पूजा विधि, आवश्यक सामग्री और इसके अनंत आध्यात्मिक लाभों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण आरती मूल बोल (Lyrics in Hindi)

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ टेक॥

चंद्रवदनी पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अनुपम छवि न्यारी॥
जय सरस्वती माता...॥

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट सोहे, गल मोतियन माला॥
जय सरस्वती माता...॥

देव गण पूजा वन्दित, ऋषि मुनि जन ध्यावैं।
ऋद्धि सिद्धि दात्री, ज्ञान गुन पावैं॥
जय सरस्वती माता...॥

चन्द्रणि प्रभा तुम्हारी, तीनों लोक समाई।
कमल आसन विराजे, जग की उत्पति भाई॥
जय सरस्वती माता...॥

तुम्ही हो सर्वस्वरूपा, सब गुण की दाता।
जो जन ध्यान लगावै, पावे वर ज्ञाता॥
जय सरस्वती माता...॥

मुनि जन के दुःख हारिणि, व्याधि को मिटावति।
सेवक जो नित गावै, सुख संपति पावति॥
जय सरस्वती माता...॥

या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
जय सरस्वती माता...॥

आरती का सरल हिंदी भावार्थ एवं प्रत्येक पंक्ति का अर्थ

माँ सरस्वती की यह आरती केवल कुछ पंक्तियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उनके दिव्य स्वरूप, अनंत गुणों और ब्रह्मांडीय शक्तियों का जीवंत वर्णन है। इस आरती के भावार्थ को समझकर जप करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है:

  • प्रथम पद: 'जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥' - हे माता सरस्वती, आपकी जय हो! आप सभी उत्तम गुणों और ऐश्वर्य से संपन्न हैं तथा आपकी कीर्ति तीनों लोकों (स्वर्ग, लोक, पाताल) में सर्वत्र विख्यात है।
  • द्वितीय पद: 'चंद्रवदनी पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अनुपम छवि न्यारी॥' - आपका मुख चंद्रमा के समान कांतिमय और शीतल है। आप कमल के आसन पर विराजमान हैं और आपकी कांति सभी का कल्याण करने वाली है। आपके वाहन श्वेत हंस की सवारी आपकी इस अनोखी और अलौकिक छटा को और अधिक मनमोहक बनाती है।
  • तृतीय पद: 'बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट सोहे, गल मोतियन माला॥' - आपके एक हाथ में ब्रह्मांडीय नाद की प्रतीक वीणा और दूसरे हाथ में जपमाला शोभायमान है। आपके मस्तक पर दिव्य मुकुट और गले में मोतियों की सुंदर माला सुशोभित हो रही है।
  • चतुर्थ पद: 'देव गण पूजा वन्दित, ऋषि मुनि जन ध्यावैं। ऋद्धि सिद्धि दात्री, ज्ञान गुन पावैं॥' - सभी देवता आपकी वंदना और पूजा करते हैं, तथा बड़े-बड़े ऋषि-मुनि एकाग्र चित्त से आपका ध्यान करते हैं। आप साधकों को ऋद्धि-सिद्धि और अलौकिक ज्ञान प्रदान करती हैं।
  • पंचम पद: 'तुम्ही हो सर्वस्वरूपा, सब गुण की दाता। जो जन ध्यान लगावै, पावे वर ज्ञाता॥' - संपूर्ण जगत में जो कुछ भी है, वह आपका ही स्वरूप है। आप ही सभी गुणों को प्रदान करने वाली हैं। जो भी सच्चा साधक आपका ध्यान करता है, वह महान ज्ञानी और विद्वान बन जाता है।
  • षष्ठ पद: 'या देवी सर्वभूतेषु...' - हे देवी! आप संपूर्ण प्राणियों में विद्या के रूप में निवास करती हैं। आपको बारंबार नमस्कार है, कोटि-कोटि नमन है।

आरती का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

सनातन संस्कृति में माँ सरस्वती को 'वाग्देवी' (वाणी की देवी) भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में जब ब्रह्मा जी ने संसार की रचना की, तो उन्होंने देखा कि चारों ओर मूक शांति छाई हुई है, कहीं कोई ध्वनि या चेतना नहीं है। तब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़क कर माँ सरस्वती का प्रकट किया। माँ सरस्वती के वीणा बजाते ही संसार के कण-कण में स्वर, संगीत और चेतना का संचार हो गया। तभी से उन्हें विद्या और कला की अधिष्ठात्री माना गया। बसंत पंचमी के दिन विशेष रूप से माँ सरस्वती की पूजा और इस आरती का गान किया जाता है। विद्यार्थियों, कलाकारों, संगीतकारों, शोधकर्ताओं और लेखकों के लिए यह आरती अत्यंत फलदायी और चमत्कारी मानी गई है। इसके नित्य पाठ से स्मरण शक्ति तीव्र होती है और वाणी में मधुरता तथा ओज का आगमन होता है।

आरती करने की सही विधि एवं नियम

माँ सरस्वती की आरती को विधि-विधान के साथ करने से माता अतिशीघ्र प्रसन्न होती हैं:

  1. प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ, पीले या श्वेत वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल या अध्ययन कक्ष को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  3. लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर माँ सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  4. माता को श्वेत या पीले पुष्प, रोली, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
  5. नैवेद्य के रूप में श्वेत मिष्ठान, खीर या फलों का भोग लगाएं।
  6. हाथ में कपूर की आरती की थाल या दीपक लेकर श्रद्धा भाव से 'जय सरस्वती माता' आरती का गान करें।
  7. आरती के पश्चात आरती को अपनी आंखों से लगाएं और परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।

आरती के समय आवश्यक सामग्री (थाल, दीपक, कपूर, घंटी, शंख)

माँ सरस्वती की पूजा और आरती को संपन्न करने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:

  • पूजा की थाल: पीतल, तांबे या चांदी की स्वच्छ थाली।
  • दीपक: शुद्ध घी का दीपक (मिट्टी का दीया या पीतल का दीप)।
  • कपूर: आरती को प्रज्वलित करने और वातावरण को शुद्ध करने के लिए कपूर।
  • घंटी (घंटियाल): आरती के दौरान सकारात्मक ऊर्जा के संचार और नकारात्मकता को दूर भगाने के लिए।
  • शंख: पूजा के आरंभ और अंत में नाद करने के लिए पवित्र शंख।
  • पुष्प और अक्षत: माता को अर्पित करने के लिए पीले गेंदे के फूल या श्वेत कमल तथा साबुत चावल।
  • धूपबत्ती और अगरबत्ती: सुगंधित वातावरण बनाने के लिए।

राग, ताल एवं गायन समय

संगीत और कला की देवी सरस्वती की आरती का गायन शास्त्रीय धुनों पर करने से उसका आध्यात्मिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। इस आरती को मुख्य रूप से राग कल्याण या राग यमन की सुमधुर धुनों में गाया जाता है। इसकी ताल त्रिताल या दादरा हो सकती है। गायन का सबसे उत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय के पश्चात) और संध्याकाल का होता है। बसंत पंचमी, विद्यारंभ संस्कार, परीक्षा के दिनों और शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को इस आरती का सामूहिक गायन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

दैनिक जीवन में आध्यात्मिक लाभ एवं फलश्रुति

नियमित रूप से माँ सरस्वती की इस पावन आरती का गान करने वाले साधक को जीवन में अनेक आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • बुद्धि का विकास: विद्यार्थियों के लिए यह आरती एकाग्रता और स्मरण शक्ति में वृद्धि करती है।
  • वाणी की सिद्धि: वक्ताओं, कवियों और गायकों की वाणी में सरस्वती का वास होता है, जिससे उनकी कला और ख्याति बढ़ती है।
  • अज्ञान का नाश: मन से संशय, मूर्खता और आलस्य दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • शांति और संतुलन: यह आरती मानसिक अशांति को दूर कर आंतरिक शांति और बौद्धिक स्थिरता प्रदान करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

श्री सरस्वती माता की आरती किस दिन विशेष रूप से करनी चाहिए?

श्री सरस्वती माता की आरती वैसे तो प्रतिदिन करनी चाहिए, परंतु बसंत पंचमी, बुधवार, गुरुवार और प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को इसका विशेष महत्व है। विद्यार्थियों के लिए परीक्षा के दिनों में यह आरती नित्य करना अत्यंत फलदायी है।

सरस्वती माता की आरती के समय कौन से रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है?

माता सरस्वती को पीला और श्वेत रंग अतिप्रिय है। अतः उनकी पूजा और आरती के समय पीले या सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ और अनुकूल माना जाता है।

क्या घर पर विद्यार्थी अकेले सरस्वती माता की आरती कर सकते हैं?

हाँ, विद्यार्थी या कोई भी साधक अपने अध्ययन कक्ष या घर के मंदिर में एकाग्रचित्त होकर श्रद्धा के साथ यह आरती अकेले भी कर सकते हैं। भाव और भक्ति सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

सरस्वती माता की आरती गाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

आरती गाते समय पवित्रता, स्पष्ट उच्चारण और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आरती के अंत में शंख और घंटी बजाकर आरती को पूरे विधि-विधान से संपन्न करना चाहिए।

१. श्री सरस्वती माता की पावनआरती - जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि का सरल भावार्थ

यह पावन आरती भगवान श्री माँ सरस्वती के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक लीलाओं और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का गुणगान करती है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा, भक्ति और एकाग्रता के साथ इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में ईश्वरीय चेतना, सात्विक भाव और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
अर्थात्: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, उन भगवान शिव और माता भवानी को मैं अपने हृदय कमल में नमन करता हूँ।

२. आरती की शास्त्रीय पूजा विधि एवं थाली घुमाने के नियम

आरती सदैव शुद्ध, पवित्र और एकाग्र चित्त होकर करनी चाहिए। शास्त्रों में आरती की थाली घुमाने का विशेष वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियम निर्धारित किया गया है:

  • चरणों में ४ बार: भगवान के श्री चरणों में ४ बार आरती की थाली घुमाकर प्रणाम करें।
  • नाभि मंडल में २ बार: भगवान की नाभि में २ बार घुमाकर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता को नमन करें।
  • मुखारविंद पर १ बार: भगवान के दिव्य मुख के सम्मुख १ बार घुमाकर उनके दर्शन करें।
  • सम्पूर्ण विग्रह पर ७ बार: सम्पूर्ण श्री विग्रह पर ७ बार 'ॐ' की आकृति बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

३. नित्य आरती गायन के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती करने से घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख, घंटी और कपूर की दिव्य सुगंध से मन शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त प्रकार के अनिष्ट व कष्ट दूर होते हैं।

४. आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हाँ, भगवान के प्रति पूर्ण आदर, सत्कार और विनम्रता प्रकट करने के लिए आरती खड़े होकर दोनों हाथों से थाली पकड़कर ही करनी चाहिए। अस्वस्थ होने की स्थिति में बैठकर भी आरती की जा सकती है।
आरती संपन्न होने पर थाली के चारों ओर जल का एक घेरा बनाकर अग्नि को शांत किया जाता है, जिसके पश्चात सभी भक्त दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा (आशीर्वाद व तेज) ग्रहण करते हैं।
कपूर जलते समय कोई अवशेष नहीं छोड़ता, जो अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध, पवित्र और जीवाणुरहित बनाती है।

संबंधित पावन आरतियाँ

समस्त आरतियाँ देखें →

भक्त विचार एवं टिप्पणियां (0)

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। सर्वप्रथम अपने भक्ति विचार साझा करें!

भगवान श्री माँ सरस्वती जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

श्री माँ सरस्वती की समस्त आरतियाँ
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!