भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मंगलवार हनुमान व्रत कथा, मंगल दोष निवारण, विधि एवं सम्पूर्ण पाठ

मंगलवार हनुमान व्रत कथा एवं मंगल दोष निवारण की शास्त्रीय विधि, सम्पूर्ण मूल पाठ, हिंदी अर्थ, नियम और लाभ पढ़ें। Bhaktilok.in पर सम्पूर्ण जानकारी।

मंगलवार हनुमान व्रत कथा एवं मंगल दोष निवारण का पौराणिक आख्यान नित्य पाठ की शास्त्रीय विधि एवं नियम - आध्यात्मिक परिचय एवं पौराणिक पृष्ठभूमि

सनातन धर्म में हनुमान जी को अष्टचिरंजीवी, संकटमोचन और भक्तों के समस्त दुखों का नाश करने वाला महाबली देवता माना जाता है। मंगलवार का दिन पूर्णतः भगवान हनुमान और ग्रहों के सेनापति मंगल ग्रह को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष (मांगलिक दोष) होता है, उन्हें वैवाहिक जीवन में कठिनाइयों, भूमि-भवन संबंधी विवादों, और ऊर्जा की कमी या क्रोध की अधिकता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मंगलवार का हनुमान व्रत और कथा का नियमित पाठ इन सभी बाधाओं को दूर करने का सबसे अचूक और शक्तिशाली शास्त्रीय उपाय है।

पौराणिक आख्यानों के अनुसार, मंगलवार का व्रत रखने और हनुमान जी की आराधना करने से न केवल मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव (अंगारक योग, भौम दोष आदि) शांत होते हैं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में अद्भूत साहस, पराक्रम, और आत्मविश्वास का संचार होता है। हनुमान जी रुद्रावतार हैं, जो भगवान शिव के एकादश रुद्र रूप में रावण वध और राम काज को सिद्ध करने के लिए प्रकट हुए थे। वे बाल ब्रह्मचारी होने के साथ-साथ ज्ञानियों में अग्रगण्य (अग्रगण्य ज्ञानानाम) हैं। मंगलवार के दिन विधि-विधान से व्रत रखकर हनुमान जी की कथा सुनने और हनुमान चालीसा या संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ करने से भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

इस लेख के माध्यम से हम आपको मंगलवार हनुमान व्रत की कथा, मंगल दोष निवारण के अचूक उपाय, सम्पूर्ण पाठ, और इसकी शास्त्रीय पूजा विधि से अवगत करा रहे हैं, ताकि आप अपने जीवन को क्लेशमुक्त और मंगलमय बना सकें।

मंगलवार हनुमान व्रत कथा एवं मंगल दोष निवारण का पौराणिक आख्यान नित्य पाठ की शास्त्रीय विधि एवं नियम - सम्पूर्ण प्रामाणिक मूल पाठ एवं लिरिक्स

मंगलवार व्रत के समय पढ़ी जाने वाली पौराणिक कथा और हनुमान स्तुति का सम्पूर्ण पाठ नीचे दिया गया है:

मंगलवार व्रत की पौराणिक कथा

एक नगर में मंगला नाम का एक अत्यंत धर्मपरायण और निश्छल ब्राह्मण रहता था। वह प्रतिदिन सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर हनुमान जी की पूजा करता था और उसके बाद ही अन्न ग्रहण करता था। ब्राह्मण दग्धीभूत निःसंतान था, जिसके कारण वह और उसकी पत्नी अत्यंत दुखी रहते थे। संतान प्राप्ति की लालसा में वह हर मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर जाता और उनकी विधिवत पूजा-अर्चना करता था।

एक दिन उस ब्राह्मण ने हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए पूरे विधि-विधान से मंगलवार का व्रत रखने का संकल्प लिया। उसने दिनभर निर्जल या फलाहार रहकर उपवास किया और संध्याकाल में हनुमान जी के मंदिर जाकर चोला चढ़ाया, दीपक प्रज्वलित किया तथा हनुमान चालीसा का पाठ किया। व्रत के समापन पर उसने गरीबों को भोजन कराया और प्रसाद बांटा।

इस प्रकार उस ब्राह्मण ने निरंतर कई मंगलवार तक नियमपूर्वक व्रत रखा। एक मंगलवार को जब वह व्रत की सामग्री तैयार कर रहा था और भोजन बनाने में थोड़ी देर हो गई, तो उसने मन में विचार किया कि आज का व्रत पूरा होने ही वाला है और वह सूर्यास्त के बाद ही भोजन करेगा। उसने अपने मन में अटूट निष्ठा बनाए रखी।

उसकी इस दृढ़ भक्ति और निष्ठा को देखकर पवनपुत्र हनुमान अति प्रसन्न हुए। हनुमान जी ने उस ब्राह्मण को स्वप्न में दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया कि हे भक्त, तेरी निष्ठा से मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ। जा, तुझे एक तेजस्वी और गुणवान पुत्र की प्राप्ति होगी जो तेरा नाम रोशन करेगा।

कुछ ही समय पश्चात उस ब्राह्मण की पत्नी ने एक सुंदर और स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया। ब्राह्मण दम्पति अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने उसका नाम 'मंगल' रखा। बालक बड़ा होकर अत्यंत पराक्रमी और धर्मात्मा बना। जो भी व्यक्ति इस कथा को सुनता या मंगलवार के दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखता है, हनुमान जी उसके जीवन के सभी संकटों का नाश करते हैं और उसके घर में सुख-समृद्धि तथा मंगल का वास होता है।

संकटमोचन हनुमान अष्टक

बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों।
ताहि सो त्रास भयो जग को, यह संकट काहु से जात न टारों।।<
देवन आनि करी बिनती तब, छोड़ी ताहि सातरो जारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।१।।

बालि की त्रास कपीश बसै गिरि, मの間 महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि शाप दियो तब, चाहिए कौन विचार विचारो।।
द्वैत तुरन्त महाप्रभु आहि, सदा के लिए सब काज सुधारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।२।।

अंगद के संग गए खोजबीन को, सब सुधि आनि बिसारो।
सिंधु लघाय गए हनुमान महाप्रभु, सिधि किन्हें अपारो।।
मेघनाद के वार से मूरछित, लछिमन प्राण उबारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।३।।

रावण जुद्ध अपार कियो तब, नाग फांस सिर डारो।
श्री रघुनाथ समेत सब दल पर, संकट मेघ उतारो।।
आनि संजीवन प्रान उबार्यो, तब मुख शांति सुधारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।४।।

बन्य असुर जब प्रकम्प भयो तब, सुरन सु सुमन डारो।
ऐसी कृपा रामचन्द्र की, तब सब काज सँवारो।।
रावण सैन समेत संघारयो, जय जयकार पुकारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।५।।

ऐहि विधि काम कियो कपि ने, तब नाम परयो सुकुमारो।
जो यह पाठ करे मन लाके, ताको संकट टारो।।
अंत काल भवसागर तारण, मोक्षधाम पधारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।।६।।

प्रत्येक पद / श्लोक का सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक रहस्य

संकटमोचन हनुमान अष्टक और मंगलवार व्रत कथा का आध्यात्मिक मर्म अत्यंत गहरा है। प्रथम पद में गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज हनुमान जी के बाल्यकाल का स्मरण कराते हैं जब उन्होंने बाल्यावस्था में सूर्य को मीठा फल समझकर निगल लिया था और तीनों लोकों में अंधकार छा गया था। देवताओं की विनती पर उन्होंने सूर्य देव को मुक्त किया। यह इस बात का प्रतीक है कि हनुमान जी के भीतर असीम ऊर्जा और ब्रह्मांडीय शक्ति समाहित है, जिसे केवल भक्ति और विनम्रता से ही शांत किया जा सकता है।

द्वितीय और तृतीय पदों में सुग्रीव की सहायता, किष्किंधा कांड के प्रसंग और समुद्र लांघकर लंका जाने का वर्णन है। लंका में माता सीता की खोज, अशोक वाटिका का विध्वंस और रावण के पुत्रों का संहार कर लक्ष्मण जी के प्राण बचाना इस बात का द्योतक है कि हनुमान जी अपने भक्तों के प्राणों की रक्षा के लिए हर असंभव कार्य को संभव बना देते हैं। रावण के युद्ध में संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को पुनर्जीवित करना यह सिद्ध करता है कि मृतप्राय जीवन में भी आशा और प्राणों का संचार करने की सामर्थ्य केवल बजरंगबली की कृपा से संभव है।

अंतिम पदों में तुलसीदास जी स्पष्ट करते हैं कि जो भी मनुष्य सच्चे मन से इस संकटमोचन स्तोत्र का पाठ करता है, उसके जीवन के सभी क्लेश, भय, रोग और ग्रह बाधाएं (विशेषकर मंगल दोष) स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं। उसे अंत समय में परमधाम की प्राप्ति होती है।

शास्त्रीय पाठ व गायन विधि, शुभ मुहूर्त, नियम एवं सावधानियां

मंगलवार व्रत और हनुमान जी की आराधना को विधि-विधान से करने पर ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। इसके निम्नलिखित शास्त्रीय नियम हैं:

विषय शास्त्रीय नियम एवं निर्देश
शुभ मुहूर्त एवं दिन मंगलवार का दिन इसके लिए सर्वश्रेष्ठ है। प्रातःकाल ब्रह्म बेला में या प्रदोष काल (संध્યા समय) में पूजा करना अत्यंत फलदायी है।
आसन और वस्त्र पूजा के समय लाल रंग के ऊनी आसन का प्रयोग करें। लाल या केसरिया रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
दिशा पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
दीप प्रज्वलन चमेली के तेल का दीपक या शुद्ध घी का दीपक हनुमान जी के सामने जलाएं। दीपक में लाल सूत की बत्ती का उपयोग करें।
नैवेद्य एवं भोग हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, गुड़-चने या पान का बीड़ा अर्पित करें। तुलसी दल भी अर्पित किया जा सकता है।

सावधानियां: मंगलवार के व्रत में तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा) का पूर्णतः त्याग करना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करें और किसी के प्रति मन में द्वेष या क्रोध न रखें। व्रत के दिन अपशब्द बोलने से बचें।

नित्य पाठ के 11 अलौकिक दिव्य फल, लाभ एवं फलश्रुति

नियमित रूप से मंगलवार व्रत कथा, हनुमान चालीसा और संकटमोचन अष्टक का पाठ करने से साधक को जीवन में निम्नलिखित 11 अलौकिक लाभ प्राप्त होते हैं:

  1. मंगल दोष शांति: कुंडली में उपस्थित मांगलिक दोष, अंगारक योग और भूमि-ऋण संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
  2. साहस और पराक्रम में वृद्धि: भय, फोबिया, और अज्ञात डर का नाश होता है तथा जातक में सिंह के समान निर्भीकता आती है।
  3. शत्रु विजय: गुप्त शत्रुओं और विरोधियों की चालें विफल होती हैं तथा कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय मिलती है।
  4. स्वास्थ्य लाभ: गंभीर रोगों, शारीरिक दुर्बलता, रक्तचाप और दुर्घटनाओं के योग टल जाते हैं।
  5. कर्ज मुक्ति: आर्थिक तंगी दूर होती है और कर्ज के जाल से मुक्ति पाने के नए मार्ग खुलते हैं।
  6. संतान सुख: निसंतान दंपत्तियों को योग्य, आज्ञाकारी और तेजस्वी संतान की प्राप्ति होती है।
  7. नकारात्मक ऊर्जा का नाश: घर से भूत-प्रेत बाधा, बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों का स्थायी निवारण होता है।
  8. मन की शांति: मानसिक तनाव, डिप्रेशन और उग्र स्वभाव नियंत्रित होता है, जिससे आत्मिक शांति मिलती है।
  9. कार्य सिद्धि: अटके हुए सरकारी और निजी कार्य हनुमान जी की कृपा से शीघ्र संपन्न होते हैं।
  10. पारिवारिक सुख-शांति: घर-परिवार में आपसी प्रेम बढ़ता है और कलह-क्लेश का सर्वनाश होता है।
  11. मोक्ष प्राप्ति: अंत समय में भगवान राम के चरणों में स्थान और भवसागर से मुक्ति मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: मंगलवार का व्रत कितने महीनों तक रखना चाहिए?

उत्तर: सामान्यतः मंगलवार का व्रत 21 मंगलवार तक रखने का विधान है। इसके पूर्ण होने पर उद्यापन करना चाहिए। संकट विशेष में इसे अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार भी किया जा सकता है।

प्रश्न 2: मंगलवार व्रत में भोजन का क्या नियम है?

उत्तर: इस व्रत में एक समय ही भोजन करना चाहिए। भोजन में नमक का त्याग करना उत्तम माना जाता है। फलाहार या गेहूं और गुड़ से बनी मीठी रोटी अथवा दलिया का सेवन किया जाता है। सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 3: क्या महिलाएं मंगलवार का व्रत रख सकती हैं?

उत्तर: हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों ही मंगलवार का व्रत रख सकते हैं। यह व्रत सभी के लिए समान रूप से फलदायी है, विशेषकर संतान प्राप्ति, साहस और मंगल दोष की शांति के लिए।

प्रश्न 4: मंगल दोष निवारण के लिए मंगलवार को क्या विशेष उपाय करना चाहिए?

उत्तर: मंगल दोष निवारण हेतु मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर और चोला चढ़ाएं, सुंदरकांड का पाठ करें, और लाल मसूर की दाल तथा लाल वस्त्र का दान करें। हनुमान मंदिर में दीपक जलाना अति शुभ होता है।

प्रश्न 5: व्रत के दिन किस रंग के वस्त्र पहनना चाहिए?

उत्तर: मंगलवार के दिन लाल या केसरिया रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह रंग हनुमान जी और मंगल ग्रह दोनों को ही अत्यंत प्रिय है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 07 Oct 2026

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