भक्ति काव्य व भजन शनिवार विशेष (भगवान शनिदेव व श्री महाकाल)

अश्विनौ सूक्तम् एवं स्वास्थ्य मंत्र (Ashwini Suktam Lyrics in Hindi)

अश्विनौ सूक्तम् (Ashwini Suktam) के संपूर्ण संस्कृत श्लोक, हिंदी अर्थ, पद-विच्छेद, और स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए दिव्य वैदिक मंत्र पढ़ें।

अश्विनौ सूक्तम् एवं स्वास्थ्य मंत्र का उद्गम एवं वैदिक संदर्भ

वैदिक सनातन संस्कृति में स्वास्थ्य, दीर्घायु और आरोग्यता को सबसे बड़ा धन माना गया है। 'शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्' अर्थात् स्वस्थ शरीर ही सभी धर्मों और पुरुषार्थों को सिद्ध करने का प्रथम साधन है। ऋग्वेद के मण्डलों में देवभाइयों, देवताओं के वैद्य और प्रकाशपुंज के रूप में प्रतिष्ठित श्री अश्विनी कुमारों को समर्पित सूक्तों का विशेष स्थान है। अश्विनौ कुमार द्वय—नासत्य और दस्र—ब्रह्मांडीय चिकित्सा विज्ञान के आधिपत्य देवता हैं। वे न केवल भौतिक शरीर की व्याधियों का शमन करते हैं, बल्कि आंतरिक ऊर्जा, ओज, तेज और प्राणशक्ति का संवर्धन भी करते हैं।
ऋग्वेद में अश्विनौ सूक्तों का गान महर्षियों द्वारा बार-बार किया गया है क्योंकि वे उषा काल के आगमन के साथ ही अंधकार, अज्ञान और रोग रूपी तमस का नाश करने वाले माने गए हैं। सूर्यपुत्र होने के नाते वे चक्षु, श्रवण, त्वच और संपूर्ण अंग-प्रत्यंग में प्राण का संचार करते हैं। आधुनिक युग की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां मानसिक तनाव, शारीरिक शिथिलता और नई-नई बीमारियां मानव जीवन को ग्रस्त कर रही हैं, वहां अश्विनौ सूक्तम् का नियमित पाठ एवं श्रवण एक अचूक आध्यात्मिक और मानसिक औषधि का कार्य करता है। यह सूक्त केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि वेदों का वह प्राणतत्व है जो साधक को अमृतत्व और अजर-अमरता की ओर अग्रसर करता है।

मूल शुद्ध संस्कृत पाठ (Complete Sanskrit Shlokas / Suktam Text)

यहाँ ऋग्वेद से उद्गीत प्रमुख अश्विनौ सूक्त के श्लोक प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इनके उच्चारण से साधक के सूक्ष्म शरीर और चक्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है:
युवांकुवन्तं पुनरन्तमस्य यं ववृधुः प्रथमानं पृथिव्याम्।
तं वां रथं वय आ बभ्रुवाणा दशस्यन्तो अश्विना जुजुजुः ॥

हिरण्यपाणी ऊर्ध्वनूती दुरोणे नरा धत्तं निषदि षीदताम् नः।
मधु मन्तमश्विना वाचं अस्मभ्यं धत्तं सुव्रताया सुकृतः ॥

एवं अन्य प्रसिद्ध स्वास्थ्यवर्धक मंत्र:
ॐ अश्विनीभ्यां नमः।
युवामीवया विसृजाथः पृतनासु युवां शम्भूभिरवथः शचीभिः।
युवां बभ्रुः परि ववृते रथं वां तिग्मं तेजो धत्तं अस्मिन् शरीरे ॥

पद-दर-पद अन्वय एवं सरल हिंदी अर्थ (Word-by-Word Breakdown & Translation)

वैदिक मंत्रों के गहरे अर्थ को समझने के लिए उनका पद-च्छेद और शब्दशः अर्थ जानना अत्यंत आवश्यक है। नीचे प्रमुख मंत्र का पद-दर-पद विश्लेषण दिया गया है:

  • युवाम् (Yuvaam): हे अश्विनी कुमार द्वय! आप दोनों।
  • कुवन्तम् (Kuvantam): गतिशील, ब्रह्मांड में भ्रमण करने वाले।
  • पुनः अन्तमस्य (Punar Antamasya): पुनरावृत्ति करने वाले, पुनः जीवन का संचार करने वाले।
  • हिरण्यपाणी (Hiranyapaani): जिनके हाथों में स्वर्ण (दिव्य औषधियां) सुशोभित हैं।
  • ऊर्ध्वनूती (Oordhvanootee): ऊपर की ओर प्रेरणा देने वाले, उत्थान करने वाले।
  • दुरोणे (Durone): हमारे गृह में, यज्ञशाला में या शरीर रूपी घर में।
  • मधुमन्तम् (Madhumantam): मिठास, ओज, और अमृत से युक्त।
  • वाचम् (Vaacham): वाणी को, चेतना को।
  • अस्मभ्यम् (Asmabhyam): हमारे लिए।
  • धत्तम् (Dhattam): धारण कराइए, प्रदान कीजिए।

सरल हिंदी अर्थ: हे स्वर्णमयी औषधियों से युक्त हाथों वाले, ब्रह्मांड में प्रकाश और गति का संचार करने वाले अश्विनी कुमारो! आप हमारे इस शरीर रूपी घर में विराजमान हों। हे नर-श्रेष्ठाओ! हमारे जीवन में, हमारी वाणी में और हमारी चेतना में ओज, आरोग्यता और अमृत रूपी माधुर्य की स्थापना कीजिए। हमें दीर्घायु और पूर्ण स्वास्थ्य का वरदान दीजिए।

गूढ़ आध्यात्मिक एवं दार्शनिक भावार्थ (Deep Philosophical & Spiritual Meaning)

वेदांत दर्शन और आयुर्वेद के समन्वय से देखा जाए तो अश्विनी कुमार केवल दो चिकित्सक देवता नहीं हैं, बल्कि वे हमारे शरीर के भीतर सक्रिय 'प्राण' और 'अपान' या 'इड़ा' और 'पिंगला' नाड़ियों के प्रतीक हैं। सूर्य (आत्मा) के पुत्र होने के कारण वे जीव की चेतना को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। अश्विनी कुमारों का रथ तीन पहियों वाला कहा गया है, जो सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण, अथवा त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) के संतुलन का द्योतक है।

जब साधक अश्विनौ सूक्त का पाठ करता है, तो उसका सूक्ष्म मन ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ जुड़ जाता है। दार्शनिक दृष्टि से रोग केवल शरीर का अस्वस्थ होना नहीं है, बल्कि आत्मा का अपनी मूल दिव्यता से विच्छेद होना है। अश्विनी कुमार इस विच्छेद को समाप्त कर पुनः साधक को उसकी पूर्णता, दिव्यता और आरोग्य से जोड़ते हैं। उनके आह्वान से शरीर के सातों चक्र जागृत होते हैं और कुण्डलिनी शक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

शुद्ध उच्चारण विधि व फलश्रुति (Proper Recitation Protocol & Chanting Benefits)

किसी भी वैदिक सूक्त के पूर्ण फल की प्राप्ति के लिए उसकी विधि और नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

  1. समय: प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) या संध्याकाल का समय इसके पाठ के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
  2. आसन एवं दिशा: कुश या ऊनी आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  3. शुद्धता: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन को शांत रखें।
  4. संकल्प: अपने आरोग्यता, मानसिक शांति और परिवार के कल्याण का संकल्प लेकर पाठ प्रारंभ करें।
  5. संख्या: नित्यप्रति कम से कम 11 या 21 बार इस सूक्त या इसके मंत्रों का जप करना चाहिए।

पाठ के चमत्कारी लाभ (Benefits of Chanting):

  • शारीरिक व्याधियों, विशेषकर वात-पित्त-कफ जनित विकारों का शमन होता है।
  • दीर्घायु, ओज, तेज और कांति की प्राप्ति होती है।
  • मानसिक अवसाद, चिंता और भय दूर होकर आत्मबल बढ़ता है।
  • अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं के भय से रक्षा होती है।

आधुनिक जीवन व मानसिक शांति में महत्व (Psychological & Scientific Relevance)

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी अब यह स्वीकार करने लगा है कि ध्वनि कंपन (Sound Frequency) और मंत्रोच्चार से मानव शरीर की कोशिकाओं (Cells) में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। अश्विनी सूक्त के छंदों की लय (Meter) मस्तिष्क की तरंगों (Brain Waves) को अल्फा स्टेट में ले जाती है, जो कि हीलिंग (Healing) और रिलैक्सेशन के लिए आवश्यक है।

तनाव भरी इस जीवनशैली में जब व्यक्ति अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) की कमी से जूझ रहा है, तब प्राचीन वैदिक मंत्रों का उच्चारण एक प्राकृतिक औषधि का कार्य करता है। यह न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है बल्कि आंतरिक ऊर्जा को संचित कर व्यक्ति को कार्यकुशल और ऊर्जस्वी बनाता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!