भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ उपर घी की बाटकी (Thali bhar ke layi re khichdo upar ghi ki baatki Lyrics in Hindi)

इस भजन में श्याम बाबा की भक्ति और श्रद्धा की भावना को व्यक्त किया गया है जो भक्तों को मानसिक शांति और शक्ति देती है।

प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम बाबा की भक्ति: भक्ति का अमृत मंत्र

श्याम बाबा की कृपा से जीवन की सभी कठिनाइयों का समाधान संभव है। भक्ति से जुड़ें और आनंद पाएं।
थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ, उपर घी की बाटकी,जीमो म्हारो श्याम धणी, जिमावै बेटी जाट की।बाबो म्हारो गांव गयो है, ना जाने कद आवैलो,ऊके भरोसे बैठयो रहयो तो, भूखो ही रह जावैलो।आज जिमाऊं तैने रे खीचड़ो, काल राबड़ी छाछ की,थाली भरकर ल्यार्इ रै
.बार-बार मंदिर न जुड़ती, बार-बार में खोलती,कर्इया कोइनी जीमे रे मोहन, करडी- बोलती।तू जीमे तो जद मैं जिमूं, मानू ना कोर्इ लाट की,जीमो म्हारो श्याम धणी, जिमावै बेटी जाटी की।।थाली भरकर ल्यार्इ रै
.परदो भूल गर्इ सांवरियो, परदो फेर लगायो जी,सा परदो की ओट बैठ के, श्याम खीचड़ौ खायो जी,भोला-भाला भगता सूं, सांवरिया कइंया आंट की।थाली भरकर ल्यार्इ रै

.भकित हो तो करमा जैसी सावरियों घर आवेलो,भकित भाव से पूर्ण होकर हर्ष- गुण गावेलो।सांचो प्रेम प्रभु से होतो मूरत बोले काठ की, 
साझा करें:
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ इस भजन में भक्त अपने प्रिय देवता, श्याम बाबा, से समर्पण की भावना व्यक्त कर रहे हैं। ‘थाली भरकर ल्याइै रै खीचड़ौ, उपर घी की बाटकी’ के माध्यम से भक्त यह दर्शा रहे हैं कि वे श्रद्धा पूर्वक भोजन का भोग उनके सामने रखकर उनकी कृपा की याचना कर रहे हैं। भक्त का विश्वास है कि श्याम बाबा ही उनके जीवन में उनकी सभी इच्छाओं और जरूरतों की पूर्ति करेंगे। ‘बाबो म्हारो गांव गयो है, ना जाने कद आवैलो’, इस पंक्ति में भक्त अपने इष्ट को गांव से दूर जाने का अनुभव बताकर उसकी अनुपस्थिति में अपने आँसू भी व्यक्त कर रहे हैं। यह लय न केवल एक साधारण भक्ति की भावना है, बल्कि यह दर्शाता है कि जब भगवान दूर होते हैं, तो भक्त की भूख और तृष्णा भी बढ़ जाती है। यहाँ खीचड़ो और राबड़ी छाछ का उल्लेख भूखे भक्त के भाव को स्पष्ट करता है।
भजन में ‘बरबर मंदिर न जुड़ती’ की पंक्ति में भक्त अपने अंतर्मन की व्याकुलता को दर्शा रहे हैं, जो कि इष्ट से जुड़ने के लिए तरस रहा है। ‘भकित हो तो करमा जैसी सावरियों घर आवेलो’ यह विचार भक्ति की भावना को प्रधानता देता है। इसके माध्यम से भक्त यह बताते हैं कि आत्मा की अभिव्यक्ति भक्ति के मार्ग में ही संभव है। यहाँ यह भी कहा गया है कि जब भक्त वास्तव में अपने प्रभु के प्रति प्रेम करते हैं, तो उनके भाव की गहराई उनके भावनात्मक साहस को दिखाती है। ‘सांचो प्रेम प्रभु से होतो मूरत बोले काठ की’ में यह दार्शनिक सच्चाई निहित है कि सच्चे प्रेम का मूल्य अद्वितीय व अमूल्य होता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) की अद्वितीयता दिखाई देती है। जो व्यक्ति सच्चे मन से अपने प्रभु की सेवा करता है, उसकी प्रेम और विश्वास पर आधारित भक्ति ही उसे अपने इच्छित फल की ओर ले जाती है। ‘तू जीमे तो जद मैं जिमूं’ में यह महसूस होता है कि जब भक्त अपने इष्ट से एकाकार होता है, तब वह अपने स्वार्थ को भुलाकर केवल प्रभु की भक्ति में लीन होता है। यहाँ भक्ति केवल प्राथना का साधन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा जरिया है जिसके माध्यम से भक्त अपने ईश्वर से असीम प्रेम एवं श्रद्धा व्यक्त करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ इस भजन का उल्लेख सिर्फ भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में भगवान कृष्ण के प्रति असीम प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक है। हिन्दू धर्म की पुरानी प्रणाली में भगवान कृष्ण को श्याम कहकर बुलाया जाता है। श्याम को न केवल भक्ति का, बल्कि सुरक्षा एवं रहमो-करम का देवरूप माना जाता है। महाभारत और पुराणों में भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन मिलता है, जो भक्ति के स्वरूप को न केवल समझाते हैं, बल्कि भक्तों को प्रेरित भी करते हैं। यह भजन भक्ति के माध्यम से आत्मा के उद्धार और मोक्ष की ओर ले जाने वाली शक्ति का प्रतिबिंब है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का श्रवण और जप करने से मानसिक शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। भक्तों में भगवान के प्रति सच्चे प्रेम और भक्ति की भावना को जागृत किया जाता है। इसका मानसिक बोझ और तनाव को कम करने में योगदान है, जिससे व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दैनिक जीवन की कठिनाइयों का सामना करने का साहस भी मिलता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि यह भजन सुबह या शाम के समय सुनना सर्वोत्तम होता है। विशेष रूप से पूजा के समय दीया और अगरबत्ती लगाना चाहिए। भक्त को साफ और सज्जित स्थान पर शांति के साथ बैठकर, ध्यान मुद्रा में बंध कर भजन का पाठ करना चाहिए। मानसिक एकाग्रता बनाए रखने से भक्ति की गहराई बढ़ती है।

�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) क्या इस भजन का कोई विशेष समय है?इस भजन का जाप सुबह और शाम के समय करना अच्छा रहता है, जब घर के सभी सदस्य एकत्रित हो सकें।
क्या खीचड़ो का विशेष महत्व है?हां, खीचड़ो एक पारंपरिक व्यंजन है जो भक्ति में अर्पित किया जाता है, जो शुद्धता और ताजगी का प्रतीक है।
इस भजन को कैसे स्मरण करें?इस भजन को नियमित रूप से सुनकर मानसिक रूप से ध्यान केंद्रित करना उचित रहेगा, जिससे भक्ति की भावना में वृद्धि होगी।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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