सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया (Sawali Surat Pe Mohan Dil Diwana Ho Gaya) - भजन लिरिक्स एवं भावार्थ
श्री बांके बिहारी, गोपाल और कन्हैया की सांवली सलोनि सूरत पर सर्वस्व न्योछावर कर देने वाले इस लोकप्रिय भजन 'सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया' (Sawali Surat Pe Mohan Dil Diwana Ho Gaya) का भक्ति जगत में एक विशेष और अद्वितीय स्थान है। ब्रज की गलियों, रासलीलाओं, संकीर्तन मंडलियों और हर एकादशी या जन्माष्टमी के पावन उत्सव पर यह भजन अत्यंत प्रेम और तन्मयता के साथ गाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के त्रिभंग मुद्रा, मोरपंख, घुंघराले बाल, तिरछे नैन और अधरों पर सजी मुस्कान भक्त के चित्त को किस प्रकार आकृष्ट करती है, इसका जीवंत वर्णन इस रचना में मिलता है।
URL Slug: 2025/12/sawali-surat-pe-mohan-dil-diwana-ho.html | श्रेणी: कृष्ण भजन एवं संकीर्तन
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया ।
दिल दीवाना हो गया, दिल दीवाना हो गया ॥
एक तो तेरे नैन तिरछे, दूसरा काजल लगा ।
तीसरा नज़रें मिलाना, दिल दीवाना हो गया ॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....
एक तो तेरे होंठ पतले, दूसरा लाली लगी ।
तीसरा तेरा मुस्कुराना, दिल दीवाना हो गया ॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....
एक तो तेरे हाथ कोमल, दूसरा मेहँदी लगी ।
तीसरा मुरली बजाना, दिल दीवाना हो गया ॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....
एक तो तेरे पाँव नाज़ुक, दूसरा पायल बंधी ।
तीसरा घुंगरू बजाना, दिल दीवाना हो गया ॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....
एक तो तेरे भोग छप्पन, दूसरा माखन धरा ।
तीसरा खिचडे का खाना, दिल दीवाना हो गया ॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....
एक तो तेरे साथ राधा दूसरा रुक्मण खड़ी ।
तीसरा मीरा का आना, दिल दीवाना हो गया ॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....
एक तो तुम देवता हो, दूसरा प्रियतम मेरे ।
तीसरा सपनों में आना, दिल दीवाना हो गया ॥
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया....
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया ।
दिल दीवाना हो गया, दिल दीवाना हो...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण और माधुर्य भाव की पराकाष्ठा को दर्शाता है। भक्त अपनी आराध्य के रूप-सौंदर्य और उनकी लीलाओं पर इस प्रकार मुग्ध है कि उसका मन सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर केवल श्यामसुंदर की चरणों में लीन हो गया है।
भजन की हर पंक्ति में तीन प्रमुख विशेषताओं (जैसे तिरछे नैन और काजल, पतले होंठ और लाली, कोमल हाथ और मुरली) के माध्यम से श्याम की दिव्यता का वर्णन किया गया है। भक्त कहता है कि हे मोहन! आपकी सांवली सलोनि काया पर मेरा मन पूरी तरह से मोहित हो चुका है। चाहे वह आपके नैनों का तिरछापन हो, आपके अधरों की मुस्कान हो, आपके हाथों की कोमलता हो या आपके चरणों की पायल की झनकार—प्रत्येक अदा मेरे हृदय को मोह लेती है। छप्पन भोग और माखन के साथ-साथ सुदामा के प्रेम का खिचड़ा हो या मीरा, राधा और रुक्मिणी का सानिध्य—यह सब श्रीकृष्ण के विशाल और करुणापूर्ण स्वरूप को उजागर करता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
श्रीकृष्ण भक्ति परंपरा में माधुर्य भाव (जिसमें भक्त भगवान को अपना प्रियतम, सखा या सर्वस्व मानता है) का विशेष स्थान है। यह भजन उसी माधुर्य भक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे गाने और सुनने से मन को असीम शांति, आनंद और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह भजन विशेषकर उन भक्तों के लिए प्रेरणास्रोत है जो भगवान के रूप-ध्यान में अपने चित्त को एकाग्र करना चाहते हैं। नियमित रूप से ऐसे संकीर्तन का गान करने से मानसिक तनाव दूर होता है और हृदय में भक्ति रस का संचार होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी समय पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है, परंतु इसका आनंद विशेष अवसरों पर और बढ़ जाता है:
- ब्रह्ममुहूर्त एवं संध्याकालीन पूजा: सुबह उठकर या शाम की आरती के पश्चात इसे गुनगुनाने से पूरा दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है।
- सत्संग एवं संकीर्तन: एकादशी, जन्माष्टमी, गोपाष्टमी और होली जैसे पावन पर्वों पर मंडली के साथ सामूहिक गान के लिए यह भजन अत्यंत लोकप्रिय है।
- एकांत साधना: जब भी मन विचलित हो, आंखें बंद करके इस भजन की पंक्तियों का स्मरण करने से चित्त को स्थिरता मिलती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र बिंदु स्वयं भगवान श्रीकृष्ण (बांके बिहारी, मोहन) हैं। साथ ही इस रचना में राधा रानी, महारानी रुक्मिणी और कृष्ण भक्त मीराबाई का स्मरण किया गया है जो अनन्य भक्ति और प्रेम की त्रिवेणी का प्रतीक हैं। इन महापुरुषों और देवियों का स्मरण इस भजन को साधारण गीत से ऊपर उठाकर एक उच्चकोटि का आध्यात्मिक साधन बना देता है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव और श्रीमद्भागवत गीता सार के पावन लेखों का अध्ययन कर सकते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन पारंपरिक लोकधुनों और ब्रज संकीर्तन परंपरा से उपजा है। इसे संतों और महात्माओं ने अपने इष्ट के प्रति प्रेम को अभिव्यक्ति देने के लिए रचा था। पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह भजन संकीर्तन मंडलियों के माध्यम से मौखिक और लिखित रूप में आगे बढ़ा है। इसकी सरलता और लयात्मकता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसके कारण बच्चा-बच्चा इसे आसानी से गुनगुना सकता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी-ब्रज मिश्रित शब्दावली है। इसमें रूपक अलंकार और अनुप्रास का सुंदर प्रयोग किया गया है (जैसे 'नैन तिरछे, काजल लगा', 'होंठ पतले, लाली लगी')। यह शैली श्रोता के मन में भगवान के एक-एक अंग का सजीव चित्र खींच देती है, जिससे ध्यान लगाना अत्यंत सहज हो जाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें सिखाता है कि:
- ईश्वर के रूप में अपनी सुध-बुध खो देना ही सच्ची भक्ति है।
- भौतिक मोह-माया से ऊपर उठकर अपने मन को परमात्मा के चरणों में लगाना ही जीवन का परम लक्ष्य है।
- भक्ति में छल-कपट नहीं, बल्कि मीरा, राधा और रुक्मिणी जैसा निश्छल समर्पण होना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| सांवली सूरत | श्याम वर्ण का सुंदर रूप | श्रीकृष्ण का मोहक सांवला रंग |
| नैन तिरछे | आंखों का कटाक्ष या कजरारी दृष्टि | भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करने की अदा |
| छप्पन भोग | अनेक प्रकार के उत्तम व्यंजन | प्रभु को अर्पित किए जाने वाले विशेष पकवान |
| खिचड़े का खाना | साधारण प्रेम का भोजन | सुदामा और भक्तों के प्रति भगवान की सरलता |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
भजन की प्रत्येक कड़ी त्रिभंगि माधव के सौंदर्य को क्रमिक रूप से प्रस्तुत करती है। सबसे पहले उनके मुखमंडल (नैन, काजल, होंठ, मुस्कान) का वर्णन होता है, फिर उनके कोमल अंगों (हाथ, पाँव, पायल, मुरली) की चर्चा की जाती है। इसके पश्चात उनके खान-पान (छप्पन भोग, माखन, खिचड़ा) और उनके साथ जुड़े दिव्य भक्तों व प्रेमियों (राधा, रुक्मिणी, मीरा) का स्मरण करते हुए अंत में उन्हें अपना सर्वस्व प्रियतम स्वीकार किया गया है। यह क्रमबद्ध वर्णन मन को गहराई से स्पर्श करता है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के गान से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण के पावन महामंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणातः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥
भगवान श्रीकृष्ण के अन्य स्तोत्रों के पाठ के लिए आप श्री कृष्ण स्तोत्रम का भी पाठ कर सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया |
|---|---|
| आराध्य देवता | भगवान श्रीकृष्ण / बांके बिहारी |
| भाषा | हिंदी / ब्रज मिश्रित |
| भक्ति भाव | माधुर्य भाव एवं अनन्य प्रेम समर्पण |
| गायन अवसर | कीर्तन, सत्संग, एकादशी, जन्माष्टमी, उत्सव |
| मुख्य संदेश | ईश्वर के रूप सौंदर्य पर मन का पूर्ण समर्पण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. 'सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया' भजन किस देवता को समर्पित है?
यह भजन भगवान श्रीकृष्ण (बांके बिहारी / गोपाल) को समर्पित है।
Q2. इस भजन को कब और कहां गाया जा सकता है?
इसे किसी भी समय, विशेषकर संध्याकालीन आरती, सत्संग, एकादशी और जन्माष्टमी के पावन अवसरों पर गाया जा सकता है।
Q3. इस भजन में किन-किन देवियों और भक्तों का उल्लेख है?
इस भजन में श्री राधा रानी, महारानी रुक्मिणी और कृष्ण भक्त मीराबाई का उल्लेख मिलता है।
Q4. भजन में 'खिचड़े का खाना' का क्या तात्पर्य है?
यह भगवान श्रीकृष्ण की सरलता और सुदामा जैसे भक्तों के प्रति उनके अगाध प्रेम को दर्शाता है।
Q5. माधुर्य भक्ति क्या होती है?
जब भक्त भगवान को अपना प्रियतम, सखा या सर्वस्व मानकर उनसे अनन्य प्रेम करता है, उसे माधुर्य भक्ति कहते हैं।
Q6. इस भजन के निरंतर श्रवण से क्या लाभ होता है?
इसके श्रवण से मानसिक शांति मिलती है, तनाव दूर होता है और हृदय में भक्ति भाव जाग्रत होता है।
Q7. क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?
हाँ, एकांत में या सामूहिक रूप से दोनों ही प्रकार से इस भजन का गान अत्यंत आनंददायक और फलदायी है।
Q8. भजन में किन सौंदर्य अंगों का वर्णन है?
इसमें भगवान के नैन, होंठ, हाथ, पाँव, मुरली, पायल और उनकी मनमोहक मुस्कान का सुंदर वर्णन है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तशिरोमणि संतों की वाणी और पारंपरिक संकीर्तन परंपरा पर आधारित यह आलेख पाठकों के लिए प्रामाणिक और भावपूर्ण रूप से प्रस्तुत किया गया है। सामग्री की पवित्रता और भक्ति रस का पूर्ण ध्यान रखा गया है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक ब्रज संकीर्तन एवं लोक भजन संग्रह
- श्रीमद्भागवत पुराण एवं कृष्णलीला प्रसंग
- भक्ति साहित्य और मीराबाई के पद
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