भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ (sainath tere hazaron haath lyrics in hindi)

साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ भजन के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत है यह पावन रचना।

"साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ" शिरडी के परम पूज्य संत श्री साईं बाबा को समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय, भावपूर्ण और कालजयी भजन है। यह भजन न केवल साईं भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखता है, बल्कि यह संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में सर्वधर्म समभाव, मानवीय एकता और अटूट श्रद्धा का एक अनुपम प्रतीक है। इस भजन का मुख्य स्वर पूर्ण शरणागति, अगाध विश्वास और ईश्वर की सर्वव्यापकता पर आधारित है। जब कोई भक्त अपने जीवन के कठिन क्षणों में अत्यंत व्याकुलता और निष्कपट भाव से साईं बाबा को पुकारता है, तो उसे बाबा के "हज़ारों हाथों" अर्थात् उनकी अनंत कृपा, सुरक्षा और दिव्य संरक्षण का साक्षात् अनुभव होता है। यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर एक है—"सबका मालिक एक"—और वह हर रूप में अपने भक्तों की पुकार सुनने के लिए सदैव तत्पर रहता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी पावन कथाओं का गहराई से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तू ही फकीर तू ही है राजा
तू ही है साईं तू ही है बाबा
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ
जिस जिस ने तेरा नाम लिया
तू हो लिया उसके साथ
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ।


इत् देखूं तो तू लागे कन्हैय्या
उत् देखूं तो दुर्गा मैय्या
नानक की मुस्कान है मुख पर
शान-ए-मोहम्मद भी है मुख पर
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ।

राम नाम की है तू माला
गौतम वाला तुझ में उजालानीम तेरे की मीठी छाया
बदले हर चोले की काया
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ।

तेरा दर है दया का सागर
सब मजहब भरते है गागर
पावन पारस तेरी आग
तेरा पत्थर कण कण राग
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ।

तेरा मंदिर सब का मदीना
जो भी आये सीखे जीनातू चाहे तो टल जाये घात
तू ही भोला तू ही नाथ
साईनाथ, साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द और पंक्ति साईं बाबा के विराट स्वरूप और उनकी असीम अनुकंपा को प्रकट करती है। भजन की शुरुआत में ही बाबा को "फकीर" और "राजा" दोनों कहा गया है। यह विरोधाभास वास्तव में उनके आध्यात्मिक साम्राज्य को दर्शाता है। वे भौतिक रूप से एक फकीर की तरह शिरडी की एक जीर्ण-शीर्ण मस्जिद (द्वारकामाई) में रहे, लेकिन आध्यात्मिक रूप से वे ब्रह्मांड के अधिपति थे। उनके पास आने वाले राजा-महाराजा भी उनके चरणों में शीश झुकाते थे।

भजन का मुख्य संदेश यह है कि जो भी भक्त सच्चे मन से साईं का नाम लेता है, बाबा तुरंत उसके सहायक बन जाते हैं। "हज़ारों हाथ" का अर्थ केवल शारीरिक हाथों से नहीं है, बल्कि यह बाबा की उस सर्वव्यापी शक्ति का प्रतीक है जो एक ही समय में अनंत स्थानों पर अपने अनगिनत भक्तों की रक्षा और सहायता करने में सक्षम है। यह वैदिक सूक्त "सहस्रशीर्षा पुरुषः" की याद दिलाता है, जहाँ परमेश्वर को अनंत सिरों, आँखों और हाथों वाला बताया गया है।

आगे की पंक्तियों में सर्वधर्म समभाव की पराकाष्ठा दिखाई देती है। भजनकार कहता है कि जब वह दाईं ओर देखता है तो उसे साईं में भगवान कृष्ण (कन्हैय्या) के दर्शन होते हैं, और बाईं ओर देखने पर साक्षात् आदि शक्ति दुर्गा मैय्या का रूप दिखाई देता है। उनके चेहरे पर गुरु नानक देव जी की शांत और पवित्र मुस्कान है, तो साथ ही पैगंबर मोहम्मद साहब की दिव्य आभा (शान-ए-मोहम्मद) भी सुशोभित है। यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि साईं बाबा किसी एक धर्म या संप्रदाय की सीमाओं में बंधे नहीं थे; वे सभी धर्मों के समन्वय और मानवता के साक्षात् स्वरूप थे।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह व्यावहारिक वेदांत और भक्ति मार्ग का एक उत्कृष्ट दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सर्वधर्म समभाव का संदेश: यह भजन हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और बौद्ध धर्म के प्रतीकों को एक ही स्थान पर समाहित करके धार्मिक सद्भाव का सबसे बड़ा संदेश देता है।
  • अनंत सुरक्षा का आश्वासन: "जिस जिस ने तेरा नाम लिया, तू हो लिया उसके साथ" यह पंक्ति भक्तों में यह विश्वास जगाती है कि वे कभी भी अकेले नहीं हैं। बाबा हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े हैं।
  • कायाकल्प की शक्ति: भजन में शिरडी के प्रसिद्ध नीम के पेड़ का उल्लेख है, जिसकी कड़वी पत्तियां बाबा के आशीर्वाद से मीठी हो गई थीं। यह इस बात का प्रतीक है कि बाबा के संपर्क में आने से मनुष्य के कड़वे कर्म और स्वभाव भी मधुरता में बदल जाते हैं।
  • समर्पण भाव की जागृति: यह भजन गाते समय भक्त का अहंकार पूरी तरह से विलीन हो जाता है और वह स्वयं को बाबा के चरणों में समर्पित कर देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं होता, परंतु पारंपरिक रूप से इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष नियम और समय निर्धारित हैं:

  • गुरुवार का विशेष दिन: गुरुवार (बृहस्पतिवार) को गुरु की उपासना का दिन माना जाता है। शिरडी के साईं बाबा को परम गुरु माना गया है, इसलिए इस दिन सुबह या शाम को इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
  • साईं संध्या और सत्संग: सामूहिक रूप से जब भक्त एकत्रित होते हैं, तब इस भजन को गाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण शांति और श्रद्धा होनी चाहिए। बाबा की मूर्ति या चित्र के समक्ष एक शुद्ध घी का दीपक या धूपबत्ती जलाएं। यदि संभव हो तो बाबा को उबले हुए चने या हलवे का भोग लगाएं। भजन को ताली बजाकर और भावविभोर होकर गाना चाहिए ताकि मन पूरी तरह से एकाग्र हो सके।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से शिरडी के साईं बाबा को समर्पित है। साईं बाबा 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरुआत के एक महान भारतीय आध्यात्मिक गुरु, योगी और फकीर थे। उनके चमत्कारों और उनकी शिक्षाओं ने लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया। वे अपने भक्तों को "श्रद्धा" (विश्वास) और "सबूरी" (धैर्य) का पालन करने की सीख देते थे।

इसके अतिरिक्त, इस भजन में हिंदू धर्म के आराध्य भगवान कृष्ण, माता दुर्गा, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी, इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद साहब, सनातन धर्म के मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध का स्मरण किया गया है। यह दर्शाता है कि साईं बाबा इन सभी दिव्य विभूतियों के एकीकृत स्वरूप थे।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस कालजयी भजन की रचना प्रसिद्ध गीतकार मनोज कुमार की फिल्म "शिरडी के साईं बाबा" (1977) के लिए की गई थी। इस फिल्म में महान गायक मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई और भक्तिपूर्ण आवाज से इस भजन को अमर बना दिया। इस गीत का संगीत पांडुरंग दीक्षित ने तैयार किया था। फिल्म के रिलीज होने के बाद से ही यह भजन हर घर और मंदिर में गूंजने लगा। आज भी जब शिरडी में काकड़ आरती या मध्याह्न आरती होती है, तो इस भजन की गूंज भक्तों को भाव-विभोर कर देती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और लोक-भाषा के निकट है। इसमें खड़ी बोली हिंदी के साथ-साथ उर्दू और पंजाबी के शब्दों का बहुत ही सुंदर समन्वय किया गया है। जैसे "शान-ए-मोहम्मद", "मदीना", "मजहब" जैसे उर्दू शब्दों का प्रयोग "कन्हैय्या", "दुर्गा मैय्या", "राम नाम" जैसे पारंपरिक हिंदू शब्दों के साथ किया गया है।

काव्य शैली की दृष्टि से इसमें 'अनुप्रास' और 'रूपक' अलंकार का प्रचुर मात्रा में प्रयोग हुआ है। "दया का सागर" और "पावन पारस" जैसे रूपक बाबा के दिव्य गुणों को बहुत ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हैं। इसकी लयबद्धता और गेयता इतनी सरल है कि एक छोटा बच्चा भी इसे आसानी से सीख और गा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन के माध्यम से हमें दैनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक सीख मिलती हैं:

  1. धार्मिक सहिष्णुता: हमें सभी धर्मों का आदर करना चाहिए क्योंकि सभी मार्ग अंततः एक ही परमेश्वर की ओर ले जाते हैं।
  2. अहंकार का त्याग: जब हम स्वीकार करते हैं कि बाबा के "हज़ारों हाथ" हमारी रक्षा कर रहे हैं, तो हमारा यह भ्रम टूट जाता है कि हम स्वयं सब कुछ कर रहे हैं।
  3. सकारात्मक परिवर्तन: जैसे पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है, वैसे ही बाबा की शरण में आने से पापी से पापी व्यक्ति का भी उद्धार हो जाता है।
  4. विपत्ति में धैर्य: "तू चाहे तो टल जाये घात" यह पंक्ति हमें सिखाती है कि यदि बाबा की कृपा हो, तो बड़े से बड़ा संकट भी टल सकता है। इसलिए हमें संकट के समय घबराना नहीं चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द/वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
हज़ारों हाथ अनंत हाथ / असीम शक्ति ईश्वर की सर्वव्यापकता और हर जगह सहायता करने की क्षमता।
इत् / उत् यहाँ / वहाँ (इधर / उधर) सृष्टि के कण-कण में ईश्वर की उपस्थिति का दर्शन।
चोला शरीर / वस्त्र आत्मा का विभिन्न योनियों में जन्म लेना (पुनर्जन्म)।
पारस एक काल्पनिक पत्थर जिसके स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है गुरु की वह कृपा जो साधारण मनुष्य को महान बना देती है।
घात संकट / विपत्ति / हमला जीवन में आने वाले अचानक कष्ट या दुर्घटनाएं।
गागर मिट्टी का घड़ा भक्त का हृदय जो ईश्वर की कृपा से भर जाता है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तू ही फकीर तू ही है राजा, तू ही है साईं तू ही है बाबा..."
हे साईं! आप बाह्य रूप से एक साधारण फकीर की भांति जीवन व्यतीत करते हैं, परंतु आंतरिक रूप से आप संपूर्ण ब्रह्मांड के राजा हैं। आप ही हमारे रक्षक साईं हैं और आप ही हमारे परम पूज्य बाबा (पिता) हैं।

"जिस जिस ने तेरा नाम लिया, तू हो लिया उसके साथ..."
संसार के किसी भी कोने से जिस किसी भक्त ने भी आपको सच्चे मन और निष्कपट भाव से पुकारा है, आप तुरंत उसकी सहायता के लिए उसके साथ खड़े हो गए हैं। आपकी कृपा के लिए किसी विशेष पात्रता की आवश्यकता नहीं, केवल सच्ची पुकार ही पर्याप्त है।

"इत् देखूं तो तू लागे कन्हैय्या, उत् देखूं तो दुर्गा मैय्या..."
जब मैं अपनी दृष्टि इधर घुमाता हूँ, तो मुझे आपमें मुरलीधर भगवान कृष्ण के दर्शन होते हैं। और जब मैं उधर देखता हूँ, तो मुझे आपमें सिंहवाहिनी माता दुर्गा का भव्य रूप दिखाई देता है। आपमें पुरुष और प्रकृति दोनों का पूर्ण समन्वय है।

"नानक की मुस्कान है मुख पर, शान-ए-मोहम्मद भी है मुख पर..."
आपके मुखमंडल पर गुरु नानक देव जी जैसी परम शांति और पवित्र मुस्कान सुशोभित है, और साथ ही आपके चेहरे पर पैगंबर मोहम्मद साहब जैसी दिव्य आभा और गरिमा भी चमक रही है। आप सभी धर्मों के पूज्यों के साक्षात् विग्रह हैं।

"राम नाम की है तू माला, गौतम वाला तुझ में उजाला..."
आप निरंतर राम नाम का जप करने वाली पवित्र माला के समान हैं, और आपके भीतर महात्मा बुद्ध जैसा परम ज्ञान, करुणा और शांति का दिव्य प्रकाश (उजाला) विद्यमान है।

"नीम तेरे की मीठी छाया, बदले हर चोले की काया..."
शिरडी में आपके मंदिर के पास स्थित नीम का वृक्ष, जिसकी पत्तियां आपके आशीर्वाद से मीठी हो गईं, वह आपकी असीम कृपा का प्रतीक है। आपकी शरण में आने वाले हर जीव का कायाकल्प हो जाता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे नया जीवन मिलता है।

"तेरा दर है दया का सागर, सब मजहब भरते है गागर..."
आपका दरबार दया और करुणा का एक अनंत महासागर है। यहाँ किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय का कोई भेदभाव नहीं है। सभी धर्मों के लोग आपके पास आते हैं और अपनी श्रद्धा रूपी गागर को आपकी कृपा से भरकर ले जाते हैं।

"पावन पारस तेरी आग, तेरा पत्थर कण कण राग..."
आपकी धुनी (पवित्र अग्नि) पारस के समान पावन है जो भक्तों के विकारों को जलाकर उन्हें कुंदन बना देती है। शिरडी की पावन भूमि का एक-एक पत्थर और कण-कण आपके प्रेम और भक्ति के राग से गुंजायमान है।

"तेरा मंदिर सब का मदीना, जो भी आये सीखे जीना..."
आपका मंदिर (द्वारकामाई) सभी के लिए मक्का-मदीना और काशी-काबा के समान पवित्र है। जो भी व्यक्ति आपकी शरण में आता है, वह जीवन जीने की सही कला, प्रेम और मानवता का पाठ सीखकर जाता है।

"तू चाहे तो टल जाये घात, तू ही भोला तू ही नाथ..."
हे साईं! यदि आपकी तनिक भी कृपा हो जाए, तो मनुष्य के जीवन पर आने वाला बड़े से बड़ा संकट और मृत्युतुल्य कष्ट (घात) भी टल जाता है। आप स्वभाव से अत्यंत भोले (शिव स्वरूप) हैं और आप ही हमारे परम नाथ (स्वामी) हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

साईं बाबा की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों का जप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

ॐ शिरडी वासाय विद्महे, सचिदानंदाय धीमहि, तन्नो साईं प्रचोदयात।

अर्थ: हम शिरडी के निवासी सच्चिदानंद स्वरूप साईं बाबा को जानते हैं। हम उनका ध्यान करते हैं। वे साईं बाबा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।

इसके अतिरिक्त, बाबा का सबसे सरल और प्रभावशाली महामंत्र है:

"अनंतकोटि ब्रह्मांडनायक राजाधिराज योगीराज परब्रह्म श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय!"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम साईनाथ तेरे हज़ारों हाथ (Sainath Tere Hazaron Haath)
समर्पित देवी-देवता शिरडी के साईं बाबा (Shirdi Sai Baba)
मूल गायक महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi)
गीतकार / रचयिता मनोज कुमार (फिल्म: शिरडी के साईं बाबा - 1977)
मुख्य संगीतकार पांडुरंग दीक्षित
भजन की भाषा सरल हिंदी (उर्दू और पंजाबी शब्दों के सुंदर मिश्रण के साथ)
मुख्य भाव पूर्ण शरणागति, सर्वधर्म समभाव, अगाध श्रद्धा और सबूरी
उपयुक्त अवसर गुरुवार की पूजा, साईं संध्या, दैनिक प्रार्थना, गुरु पूर्णिमा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मूल गायक भारत के महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफी हैं। उन्होंने अपनी अत्यंत सुरीली और भावपूर्ण आवाज से इस भजन को गाकर अमर बना दिया।

यह भजन वर्ष 1977 में रिलीज हुई अत्यंत लोकप्रिय हिंदी फिल्म "शिरडी के साईं बाबा" से लिया गया है। इस फिल्म के मुख्य निर्माता और अभिनेता मनोज कुमार थे।

शिरडी में बाबा के गुरुस्थान के पास एक नीम का पेड़ है। सामान्यतः नीम की पत्तियां बहुत कड़वी होती हैं, लेकिन बाबा के आशीर्वाद और उनकी दिव्य उपस्थिति के कारण इस पेड़ की पत्तियां मीठी हो गईं। यह पंक्ति दर्शाती है कि बाबा की शरण में आने से मनुष्य के जीवन की कड़वाहट भी मिठास में बदल जाती है।

साईं बाबा का मुख्य संदेश था "सबका मालिक एक" और "श्रद्धा और सबूरी"। इस भजन में भी सर्वधर्म समभाव को दर्शाते हुए कन्हैय्या, दुर्गा मैय्या, नानक और मोहम्मद साहब का एक साथ उल्लेख किया गया है, जो इसी संदेश को पुष्ट करता है।

यद्यपि इस भजन को प्रतिदिन गाया जा सकता है, परंतु गुरुवार (बृहस्पतिवार) का दिन साईं बाबा की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित है। इस दिन इस भजन को गाने से विशेष मानसिक शांति और बाबा की कृपा प्राप्त होती है।

यहाँ 'आग' का तात्पर्य शिरडी की द्वारकामाई मस्जिद में बाबा द्वारा जलाई गई पवित्र "धुनी" से है। यह धुनी आज भी निरंतर जल रही है। इसकी राख को 'उदी' कहा जाता है, जिसे भक्त अपने माथे पर लगाते हैं और जो अनेक रोगों व कष्टों का निवारण करती है।

हाँ, भजन की पंक्ति "तू चाहे तो टल जाये घात" स्पष्ट करती है कि बाबा की इच्छा से बड़े से बड़ा संकट भी टल सकता है। सच्चे मन से इस भजन का पाठ करने से मन से भय दूर होता है और सुरक्षा का अनुभव होता है।

इस भजन में भगवान कृष्ण (कन्हैय्या), माता दुर्गा, गुरु नानक देव जी, पैगंबर मोहम्मद साहब, भगवान राम, महात्मा बुद्ध (गौतम) और भगवान शिव (भोला नाथ) का नाम आया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ, अर्थ और ऐतिहासिक संदर्भों को विभिन्न प्रामाणिक स्रोतों, जैसे कि 'श्री साईं सच्चरित्र' और पारंपरिक साईं भजनों के इतिहास से सत्यापित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक पूरी तरह से शुद्ध, त्रुटिहीन और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुंचाना है ताकि उनकी भक्ति यात्रा और अधिक सुगम हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री साईं सच्चरित्र: श्री हेमाडपंत (अण्णासाहेब दाभोलकर) द्वारा रचित साईं बाबा का प्रामाणिक जीवन चरित्र।
  • शिरडी साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट: शिरडी मंदिर की आधिकारिक आरती और भजन संग्रह।
  • भारतीय सिनेमा का इतिहास: फिल्म "शिरडी के साईं बाबा" (1977) के गीत और संगीत का विवरण।

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन और इसका भावार्थ पसंद आया हो, तो आप हमारी वेबसाइट पर निम्नलिखित पावन भजनों और लेखों को भी पढ़ सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!