भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो मदानी ले गया, लै गया नन्द किशोर लै गया लिरिक्स (nee doodh main kaahe naal ridaka chaatee cho madanee le gaya la nand kishor la gaya lyrics in hindi)

नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो मदानी ले गया भजन लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीला का सुंदर वर्णन।

नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो मदानी ले गया - परिचय एवं भक्ति भाव

भक्ति और वात्सल्य रस से ओत-प्रोत यह पावन भजन भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और उनकी नटखट हरकतों का अत्यंत मनमोहक वर्णन प्रस्तुत करता है। ब्रज भूमि की गोपियों और यशोदा मैया के घर मटकियां फोड़ने, माखन चुराने तथा नटखट कान्हा के साथ नित्य प्रति होने वाली प्रेम भरी नोकझोंक को इस भजन में बहुत ही सरल, सुंदर और लोक-भाषा की शैली में पिरोया गया है। 'नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो मदानी ले गया' शीर्षक से प्रसिद्ध यह भजन ब्रज की लोक संस्कृति, राधा-कृष्ण के बाल प्रेम और यशोदा के घर के आंगन की जीवंत झांकी प्रस्तुत करता है। इस भजन को गाते और सुनते समय भक्तजन पूरी तरह से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप में तल्लीन हो जाते हैं। ब्रजभाषा और पंजाबी लोकगीतों की शैली के सम्मिश्रण से सजा यह संकीर्तन संतों, कीर्तनकारों और भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। इसे प्रातःकालीन बेला में, संध्या वंदन के दौरान, घर-गृहस्थी के कार्यों के बीच या किसी भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान एवं श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर गाए जाने से मन में अद्भुत शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो मदानी ले गया,
लै गया नन्द किशोर लै गया लिरिक्स,
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो मदानी ले गया,
लै गया नन्द किशोर लै गया,
नन्दबाबा तो पेन गिया झिरका,
चाटी चो मदानी ले गया,
आधी आधी राती मेरा कुंडा खडकवे,
माखन देदे मेनू शोर माचवे,
जदों मै माखन नही दिता मेरा पुट के परांदा ले गया,
चाटी को मदानी ले गया........

गई सी राधा कोल मै श्याम नु मनाले,
श्याम तेरा प्यारा प्यारा एह्नु समजा ले,
राधा रानी गुस्सा होगी, बिना गल तो ही रोला पे गया,
चाटी को मदानी ले गया.........

गई सी यशोदा कोल श्याम नु मनान,
तुही सिर चाडिया तू ही समजा ले,
ओ वाली सी तीना लोका दा जाके माँ दी गोदी च बह गया,
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो मदानी ले गया,
लै गया नन्द किशोर लै गया!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस अत्यंत सुंदर भजन में एक गोपी की व्यथा और वात्सल्यमयी शिकायत का वर्णन किया गया है। गोपी कहती है कि हे सखी! नंदकिशोर (श्रीकृष्ण) मेरी चाटी (दही मथने का पात्र) से मदानी ही उठाकर ले गए हैं, अब मैं दूध किस चीज से रिड़कूँ (मथूँ)? कन्हाई की ऐसी नटखट हरकतों के कारण मुझे नंदबाबा से भी डाँट और झिड़की सुननी पड़ती है। वह आधी-आधी रात को आकर मेरे घर का दरवाजा खटखटाते हैं और माखन न देने पर शोर मचाते हैं। एक बार जब मैंने उन्हें माखन नहीं दिया, तो वे गुस्से में मेरा परांदा (बालों में गूंथने वाला आभूषण या फीता) ही खींचकर ले गए।

जब गोपी अपनी इस समस्या को लेकर राधा रानी के पास जाती है और कहती है कि हे राधिके! तुम अपने इस प्यारे श्याम को समझा लो, इसके कारण मुझे बिना किसी बात के राधा रानी के गुस्से और लोगों के रोले का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद जब गोपी यशोदा मैया के पास शिकायत लेकर पहुँचती है और कहती है कि मैया! तुमने ही इसे सिर पर चढ़ा रखा है, तुम ही इसे समझाओ। तब तीनों लोकों के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण चुपचाप जाकर मैया यशोदा की गोद में बैठ जाते हैं और सभी शिकायतें धरी की धरी रह जाती हैं। यह भाव दर्शाता है कि भगवान के बाल स्वरूप के आगे सारे उलाहने प्रेम में विलीन हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप और ब्रज की गोपियों के साथ उनके मधुर संबन्धों का सजीव चित्रण करता है। इसमें भक्ति और प्रेम का एक अनोखा संगम देखने को मिलता है जहाँ भगवान और भक्त के बीच कोई दूरी नहीं बल्कि एक सहज अपनत्व होता है। यह रचना न केवल मनोरंजन करती है बल्कि मन को भगवान के बाल रूप के प्रति आकर्षित करती है। ऐसे भजनों का पाठ करने से साधक के मन में वात्सल्य भाव जागृत होता है और वह संसार के तमाम दुखों को भूलकर भगवत प्रेम में मग्न हो जाता है। नियमित रूप से ऐसे पदों का स्मरण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पारिवारिक जीवन में प्रेम एवं सौहार्द बढ़ता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष रूप से श्री कृष्ण जन्माष्टमी, राधा अष्टमी, गोपाष्टमी और किसी भी सत्संग या कीर्तन के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है। इसे प्रातःकाल उठकर स्नान के पश्चात अथवा संध्या बेला में भगवान लड्डू गोपाल के समक्ष दीपक प्रज्वलित करके गाया जाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस भजन को गाते समय वाद्य यंत्रों जैसे ढोलक, मंजीरा और चिमटा का प्रयोग करने से वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय और ऊर्जावान बन जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में ब्रज के प्राणधन भगवान श्रीकृष्ण, बृजराज नंदबाबा, मैया यशोदा और वृषभाननंदिनी श्री राधा रानी हैं। ब्रज की लोक संस्कृति में इन सभी का अत्यधिक महत्व है। संत कवियों और लोक रचनाकारों ने अपनी मधुर वाणी से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को अमर कर दिया है, जिससे आज भी घर-घर में कन्हाई की माखन चोरी और नटखट लीलाओं का स्मरण किया जाता है.

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक शैली और पंजाबी-ब्रज मिश्रित भाषा में रचा गया है। लोक परंपराओं में सदियों से गोपियों के उलाहने और कान्हा की नटखट लीलाओं को गीतों के माध्यम से गाया जाता रहा है। इस रचना की पृष्ठभूमि ब्रज के ग्रामीण जीवन, दूध-मखन मथने की पारंपरिक विधि (चाटी और मदानी) और माँ यशोदा के आंगन की उस नित्य लीला पर आधारित है जहाँ भगवान अपनी भक्तजनों के साथ बाल-लीला का आनंद लेते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और हृदयस्पर्शी है, जिसमें ब्रजभाषा के शब्दों के साथ-साथ पंजाबी लोकगीतों के लहजे (जैसे रिडका, चाटी, मदानी, कुंडा) का सुंदर प्रयोग किया गया है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज सौंदर्य झलकता है, जो श्रोताओं को तुरंत अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। लोक शैली में रची गई यह रचना आम जनमानस के हृदय में आसानी से उतर जाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि भगवान के साथ हमारा संबंध केवल डर या औपचारिकता का नहीं, बल्कि प्रेम, अधिकार और बाल-सुलभ अपनापन का होना चाहिए। जिस प्रकार गोपियां कान्हा से शिकायत भी करती हैं और मन ही मन उनसे अगाध प्रेम भी करती हैं, उसी प्रकार एक सच्चे भक्त का भगवान के साथ अनन्य संबंध होता है। भगवान भक्तों के सभी उलाहनों और प्रेम भरे तर्कों को अत्यंत प्रसन्नता से स्वीकार करते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
नी मैं दूध काहे नाल रिडका मैं दूध किस उपकरण से मथूँ? जब कन्हाई मदानी चुराकर ले जाते हैं
चाटी दही मथने का मिट्टी का बड़ा बर्तन पारंपरिक ब्रज रसोई का पात्र
मदानी रई या बिलौनी (दूध-दही मथने की छड़ी) माखन निकालने का साधन
नंद किशोर भगवान श्रीकृष्ण नंदबाबा के पुत्र
कुंडा दरवाजे की कुंडी या सांकल रात के समय दरवाजा खटखटाना
परांदा बालों में गूंथने वाला सजावटी फीता गोपी का श्रृंगारिक आभूषण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की पहली पंक्ति में गोपी अपनी असमर्थता जताती है कि हे सखी! जब नंदनंदन मेरी चाटी से मदानी ही ले गए, तो मैं अब दूध कैसे रिडकुंगी? अगली पंक्तियों में वह बताती है कि नंदबाबा के सामने मुझे ही झिड़की सुननी पड़ती है क्योंकि कन्हाई मेरा सारा माखन हड़प जाते हैं। आधी रात को आकर दरवाजा खटखटाना और माखन न मिलने पर गोपी का परांदा छीनकर ले जाना भगवान की परम बाल-लीला का परिचायक है। अंत में, जब गोपी राधा रानी और मैया यशोदा के पास शिकायत लेकर जाती है, तो तीनों लोकों के स्वामी बांकेबिहारी मैया की गोद में जाकर छिप जाते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम के आगे हमेशा नतमस्तक रहते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं के स्मरण के लिए निम्नलिखित लोकप्रिय श्लोक का स्मरण किया जा सकता है:

कस्तूरी तिलकं लालच फलकं वासास्थले कौस्तुभम्,
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणुं करे कंकणम्।

सर्वांग हरि सुन्दरम्, नमामि तं कृष्णम् ॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी चो मदानी ले गया
आराध्य देव भगवान श्रीकृष्ण (नंदकिशोर)
संगीत शैली ब्रज लोक भजन / पारंपरिक लोकगीत
भाषा लोक भाषा (ब्रज और पंजाबी मिश्रित)
मुख्य भाव वात्सल्य, प्रेम और बाल-लीला
उपयुक्त अवसर श्री कृष्ण जन्माष्टमी, सत्संग, कीर्तन
संबंधित पावन स्थल श्री धाम वृंदावन, गोकुल, बरसाना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन लीलाधारी भगवान श्रीकृष्ण (नंदकिशोर) के बाल रूप और उनकी माखन चोरी की लीलाओं को समर्पित है।

चाटी दही बिलोने का मिट्टी का बर्तन होता है और मदानी (रई) वह लकड़ी का उपकरण है जिससे दूध या दही को मथकर माखन निकाला जाता है।

इसे श्री कृष्ण जन्माष्टमी, गोपाष्टमी, राधा अष्टमी या किसी भी धार्मिक सत्संग, भजन संध्या और पारिवारिक उत्सव के दौरान गाया जा सकता है।

गोपी कान्हा की शिकायत लेकर पहले राधा रानी के पास और फिर यशोदा मैया के पास जाती है, किंतु अंत में कन्हाई मैया की गोद में जाकर छिप जाते हैं, जो उनके अद्भुत बाल प्रेम को दर्शाता है।

हाँ, इसकी भाषा बहुत सरल और लोक-संगीत पर आधारित है, जिसे महिलाएं और भक्तजन ताली बजाकर आसानी से गा सकते हैं।

इस भजन के गायन से हृदय में वात्सल्य, भगवान के प्रति निश्चल प्रेम और आनंद का भाव जाग्रत होता है।

हाँ, यह ब्रज और उत्तर भारत के लोक अंचलों में पीढ़ियों से गाए जाने वाले पारंपरिक संकीर्तन और लोक भजनों में से एक है।

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संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भों को पूरी प्रामाणिकता और भक्ति भाव के साथ संकलित किया गया है ताकि पाठकों को शुद्ध और आनंददायक धार्मिक सामग्री प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

पारंपरिक ब्रज लोकगीत संकलन, श्रीमद्भागवत महापुराण के बाल-लीला प्रसंग, तथा उत्तर भारतीय लोक संगीत परंपरा पर आधारित संदर्भ।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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