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छप्पन भोग लगालो माँ (Chappan Bhog Laga Lo Maa Lyrics in Hindi) - Sunil Sarvottam Mata Bhajan

सुनील सर्वोत्तम द्वारा गाए प्रसिद्ध भजन 'छप्पन भोग लगालो माँ' के संपूर्ण लिरिक्स और भावार्थ पढ़ें। कैला मैया की भक्ति में डूबें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित।

हिंदू सनातन धर्म में ईश्वर को नैवेद्य या भोग अर्पित करना केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि परम भक्ति, समर्पण और वात्सल्य भाव की अभिव्यक्ति है। प्रसिद्ध भजन गायक सुनील सर्वोत्तम द्वारा गाया गया मधुर भजन "छप्पन भोग लगालो माँ" (Chappan Bhog Laga Lo Maa) करौली की अधिष्ठात्री देवी श्री कैला मैया के प्रति भक्तों के अनन्य अनुराग को दर्शाता है। यह भजन न केवल देवी माँ को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने की पारंपरिक प्रथा को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि भगवान भौतिक वस्तुओं के नहीं, अपितु श्रद्धा और प्रेम के भूखे होते हैं। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, कठिन शब्दों के अर्थ और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं, जो पाठकों को भक्ति रस में सराबोर कर देगा।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

छप्पन भोग लगालो माँ (Chappan Bhog Laga Lo Maa Lyrics in Hindi)

छप्पन भोग लगा के लाये खा लो कैला मैया जी
बड़े भाव से माँ लाये भोग लगा लो मैया जी

जयपुर ते बेसन मँगवायो हरयाणे ते घी
भोग लागले मैया तेरो नहीं भरेगो जी
भरे रखे भंडार खालो कैला मैया जी
छप्पन भोग लगा के लाये खा लो कैला मैया जी

भक्ति भाव के रंग मंगा के जा में DJ डार
भक्तजनो ने डाला मैया इसमें अपना प्यार
बड़ी दूर से आये खालो कैला मैया जी
छप्पन भोग लगा के लाये खा लो कैला मैया जी

प्रेम प्यार को मीठो लाके जा में दियो मिलाए
भोग लगा लो कैला मैया भर भर थाली लाये
मेवा डारी जा में भर भर खा लो मैया जी
छप्पन भोग लगा के लाये खा लो कैला मैया जी

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस मधुर भजन का मूल भाव पूर्णतः समर्पण और निष्कपट प्रेम पर आधारित है। भक्त अपनी आराध्या कैला मैया के सम्मुख उपस्थित होकर अत्यंत आदर और मनुहार के साथ प्रार्थना कर रहे हैं कि हे जगत जननी! हम आपके लिए छप्पन प्रकार के दिव्य और स्वादिष्ट व्यंजनों की थाली सजाकर लाए हैं, आप कृपा करके इसे स्वीकार करें।

भजन के प्रथम अंतरे में भक्त अपनी श्रद्धा की भौतिक और भौगोलिक सीमाओं को लांघते हुए कहते हैं कि उन्होंने माँ के प्रिय व्यंजनों को तैयार करने के लिए विशेष रूप से जयपुर से उत्तम कोटि का बेसन और हरियाणा से शुद्ध देसी घी मंगवाया है। यह इस बात का प्रतीक है कि भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार सर्वश्रेष्ठ वस्तु ही अपनी आराध्या को अर्पित करना चाहता है। भक्त मैया से लाड़ लड़ाते हुए कहता है कि हे माँ! यद्यपि आपके भंडार सदैव भरे रहते हैं और आपको किसी वस्तु की कमी नहीं है, फिर भी हमारी संतुष्टि और प्रसन्नता के लिए आप इस तुच्छ भेंट को स्वीकार करें।

द्वितीय अंतरे में आधुनिक युग की सामूहिक उत्सवधर्मिता का सुंदर चित्रण है। भक्त कहते हैं कि इस भोग में केवल खाद्य सामग्रियां ही नहीं हैं, बल्कि इसमें भक्ति भाव के रंग और संगीत (DJ) का आनंद भी समाहित है। भक्तों ने इसमें अपना अगाध प्रेम उड़ेल दिया है। वे बहुत दूर-दूर से यात्रा करके मैया के दरबार में पहुंचे हैं, इसलिए वे मैया से मनुहार करते हैं कि वे निराश न करें और भोग ग्रहण करें।

अंतिम अंतरे में भक्त स्पष्ट करते हैं कि इस थाली में जो मिठास है, वह किसी कृत्रिम चीनी की नहीं, बल्कि उनके हृदय के सच्चे प्रेम और स्नेह की है। उन्होंने थाली को सूखे मेवों और मिष्ठानों से भर दिया है और अब वे अश्रुपूर्ण नेत्रों और गद्गद कंठ से मैया से इसे स्वीकार करने की याचना कर रहे हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि इसके कई गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयाम हैं:

  • वात्सल्य और सख्य भाव का मिश्रण: इस भजन में भक्त और भगवान का संबंध अत्यंत आत्मीय है। भक्त अपनी देवी माँ को एक माता और सखा दोनों रूपों में देखता है, जिससे वह प्रेमपूर्वक हठ कर सकता है।
  • छप्पन भोग की महिमा: सनातन धर्म में छप्पन भोग का विशेष महत्व है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक अपनी उंगली पर उठाया था, जिसके दौरान उन्होंने भोजन नहीं किया था। इसके बाद ब्रजवासियों ने उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए आठ प्रहर के हिसाब से सात दिनों के कुल 56 (7 x 8) व्यंजन बनाकर उन्हें अर्पित किए थे। यही परंपरा शक्ति संप्रदाय में भी देवी माँ को प्रसन्न करने के लिए अपनाई जाती है।
  • सामूहिक भक्ति का संदेश: भजन में प्रयुक्त शब्द "भक्तजनों ने डाला मैया इसमें अपना प्यार" यह दर्शाता है कि भक्ति एकाकी नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से अधिक आनंदमयी हो जाती है। जब अनेक भक्त मिलकर कीर्तन करते हैं, तो वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन और श्रवण भक्तों के हृदय में उत्साह और आनंद का संचार करता है। इसे गाने और सुनने के लिए निम्नलिखित अवसर सर्वोत्तम माने जाते हैं:

  1. नवरात्रि महोत्सव: चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि के पावन दिनों में, विशेष रूप से जब देवी माँ को महाप्रसाद या छप्पन भोग अर्पित किया जाता है, तब इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
  2. कैला देवी मेला और यात्रा: राजस्थान के करौली में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध कैला देवी मेले के दौरान भक्त जत्थों में गाते हुए मंदिर की ओर बढ़ते हैं।
  3. पारिवारिक कीर्तन और जागरण: घर में आयोजित होने वाले माता के जागरण, चौकी या विशेष पूजा-अर्चना के समय भोग आरती से ठीक पहले इस भजन को गाने से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से श्री कैला देवी (कैला मैया) को समर्पित है। कैला देवी को आदि शक्ति दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वे राजा कंस के कारागार में देवकी और वसुदेव के घर जन्मी वही कन्या (योगमाया) हैं, जो कंस के हाथों से छूटकर आकाश में विलीन हो गई थीं और जिन्होंने कंस के वध की भविष्यवाणी की थी। बाद में वे राजस्थान के करौली क्षेत्र में त्रिकूट पर्वत पर कैला देवी के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। कैला मैया को ममता, करुणा और रक्षण की देवी माना जाता है, और उनके दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस लोकप्रिय भजन की रचना और गायन आधुनिक भक्ति संगीत के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है। इसके मुख्य विवरण इस प्रकार हैं:

  • गायक: सुनील सर्वोत्तम (Sunil Sarvottam), जिन्होंने अपनी सुरीली और ऊर्जावान आवाज से इस भजन को जन-जन तक पहुंचाया है।
  • गीतकार: सुनील कुमार (Sunil Kumar), जिन्होंने अत्यंत सरल और बोलचाल की भाषा का प्रयोग करते हुए गहरे भक्ति भाव को पिरोया है।
  • संगीतकार: संजय पाल और बंटी बृजेश (Sanjay Pal, Bunty Brijesh), जिन्होंने पारंपरिक ढोलक, मंजीरे के साथ आधुनिक वाद्य यंत्रों का बेहतरीन मिश्रण तैयार किया है।
  • प्रस्तुति: युकी (Yuki) लेबल के अंतर्गत जारी इस भजन ने यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाखों भक्तों का दिल जीता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा मुख्य रूप से खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी, हरियाणवी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, "जयपुर ते बेसन मँगवायो हरयाणे ते घी" में क्षेत्रीय बोलियों का प्रभाव स्पष्ट है, जो इसे स्थानीय संस्कृति से जोड़ता है।

काव्य शैली की दृष्टि से यह एक अत्यंत सरल, गेय और लयबद्ध रचना है। इसमें अंत्यानुप्रास अलंकार का प्रचुर प्रयोग हुआ है (जैसे: घी-जी, डार-प्यार, मिलाए-लाए), जिससे इसे याद रखना और सामूहिक रूप से गाना बेहद आसान हो जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन की सीख देता है:

आध्यात्मिक सीख व्यावहारिक जीवन में महत्व
निष्कपट समर्पण ईश्वर को किसी बहुमूल्य वस्तु की आवश्यकता नहीं है, वे केवल हमारे शुद्ध भाव और प्रेम के भूखे हैं।
सर्वश्रेष्ठ का अर्पण हमें अपने जीवन की सबसे अच्छी ऊर्जा, समय और संसाधन समाज और ईश्वर की सेवा में लगाने चाहिए।
सामूहिकता और एकता मिलजुलकर उत्सव मनाना और कीर्तन करना सामाजिक समरसता और आपसी प्रेम को बढ़ावा देता है।
कृतज्ञता का भाव ईश्वर ने हमें जो कुछ भी दिया है, उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका उन्हें धन्यवाद स्वरूप भोग लगाना है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

कठिन शब्द/वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ भजन के संदर्भ में महत्व
छप्पन भोग 56 प्रकार के व्यंजन पूर्णता और अगाध श्रद्धा का प्रतीक महाप्रसाद।
कैला मैया देवी कैला देवी करौली, राजस्थान की अधिष्ठात्री ममतामयी देवी।
जा में जिसमें / इसके अंदर भोग और थाली के भीतर छिपे भाव को दर्शाने के लिए।
भंडार अन्न और धन का खजाना देवी माँ की अनंत समृद्धि और पूर्णता का सूचक।
मनुहार प्रेमपूर्वक मनाना या हठ करना भक्त द्वारा माँ को भोग ग्रहण करने के लिए की जाने वाली प्रार्थना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "छप्पन भोग लगा के लाये खा लो कैला मैया जी, बड़े भाव से माँ लाये भोग लगा लो मैया जी"
भावार्थ: हे कैला मैया! हम आपके लिए अत्यंत श्रद्धापूर्वक छप्पन प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों की थाली सजाकर लाए हैं। हम आपसे सविनय प्रार्थना करते हैं कि आप हमारे इस प्रेमपूर्ण नैवेद्य को स्वीकार करें और इसे ग्रहण करें।

2. "जयपुर ते बेसन मँगवायो हरयाणे ते घी, भोग लागले मैया तेरो नहीं भरेगो जी, भरे रखे भंडार खालो कैला मैया जी"
भावार्थ: हे माँ! हमने इस भोग को अत्यंत शुद्धता और विशिष्टता देने के लिए जयपुर से विशेष बेसन और हरियाणा से शुद्ध देसी घी मंगवाया है। यद्यपि हम जानते हैं कि आपके दिव्य भंडार हमेशा भरे रहते हैं और आपको किसी भौतिक वस्तु की आवश्यकता नहीं है, फिर भी हमारी संतुष्टि के लिए आप इस भोग को स्वीकार करें।

3. "भक्ति भाव के रंग मंगा के जा में DJ डार, भक्तजनो ने डाला मैया इसमें अपना प्यार, बड़ी दूर से आये खालो कैला मैया जी"
भावार्थ: इस भोग की थाली में केवल भोजन ही नहीं है, बल्कि इसमें भक्तों के उल्लास, संगीत और नृत्य का रंग भी घुला हुआ है। सभी भक्तों ने मिलकर इसमें अपना अनन्य प्रेम मिलाया है। हम बहुत दूर-दूर से आपके दर्शनों की अभिलाषा लेकर आए हैं, कृपया हमें निराश न करें।

4. "प्रेम प्यार को मीठो लाके जा में दियो मिलाए, भोग लगा लो कैला मैया भर भर थाली लाये, मेवा डारी जा में भर भर खा लो मैया जी"
भावार्थ: हे मैया! हमने इस थाली में सूखे मेवों की प्रचुरता के साथ-साथ अपने हृदय के मधुर प्रेम को भी मिला दिया है। हम आपके लिए यह भरी हुई थाली लेकर आए हैं, आप इसे ग्रहण कर हमें कृतार्थ करें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

देवी माँ को भोग लगाते समय या उनकी स्तुति करते समय निम्नलिखित मंत्रों का उच्चारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

"ॐ देवी कैलादेव्यै नमः।"

"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते॥"

भोग अर्पित करते समय इस श्लोक का पाठ करें:

"त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण बिंदु भजन संबंधी जानकारी
भजन का नाम छप्पन भोग लगालो माँ (Chappan Bhog Laga Lo Maa)
समर्पित देवी-देवता श्री कैला देवी (कैला मैया), करौली
मुख्य गायक सुनील सर्वोत्तम (Sunil Sarvottam)
गीतकार (Lyrics) सुनील कुमार (Sunil Kumar)
संगीत (Music) संजय पाल, बंटी बृजेश
भाषा हिंदी (क्षेत्रीय बोलियों के प्रभाव सहित)
मुख्य भाव (Bhava) वात्सल्य, समर्पण, सख्य और आनंद भाव
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, कैला देवी मेला, माता का जागरण, कीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय और कर्णप्रिय भजन के मुख्य गायक प्रसिद्ध भक्ति संगीत कलाकार सुनील सर्वोत्तम (Sunil Sarvottam) हैं।

कैला मैया का भव्य और ऐतिहासिक मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के करौली जिले में त्रिकूट पर्वत की सुरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित है।

छप्पन भोग भगवान को अर्पित किया जाने वाला महाप्रसाद है, जिसमें 56 प्रकार के व्यंजन होते हैं। यह पूर्ण समर्पण, प्रचुरता और ईश्वर के प्रति अगाध कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है।

भजन में देवी माँ के भोग की शुद्धता और विशेषता को दर्शाने के लिए जयपुर के बेसन और हरियाणा के शुद्ध देसी घी का उल्लेख किया गया है।

ये भजन मुख्य रूप से चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि, करौली के वार्षिक मेले, माता की चौकी, जागरण और पारिवारिक कीर्तन के अवसरों पर गाए जाते हैं।

कैला मैया को भगवान कृष्ण की बहन और देवकी-वसुदेव की संतान योगमाया (महामाया) का साक्षात अवतार माना जाता है, जो कंस के कारागार से अंतर्ध्यान हो गई थीं।

हाँ, इस भजन को घर की दैनिक संध्या आरती या विशेष पूजा के समय भोग लगाते समय अत्यंत श्रद्धापूर्वक गाया जा सकता है। इससे घर का वातावरण सकारात्मक और भक्तिमय बनता है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि ईश्वर केवल बाहरी आडंबरों से नहीं, बल्कि सच्चे हृदय से अर्पित किए गए प्रेम, श्रद्धा और समर्पण के भाव से ही प्रसन्न होते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के मूल पाठ, इसकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और आध्यात्मिक महत्व का संकलन प्रामाणिक धार्मिक ग्रंथों, स्थानीय लोक परंपराओं और संगीतकारों के आधिकारिक विवरणों के आधार पर किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और त्रुटिहीन जानकारी प्रदान करना है ताकि वे भक्ति भाव के साथ इसका आनंद ले सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण: देवी दुर्गा और योगमाया के प्राकट्य की कथा।
  • स्थानीय लोक मान्यताएं: करौली (राजस्थान) के श्री कैला देवी मंदिर की ऐतिहासिक परंपराएं।
  • युकी भक्ति (Yuki Bhakti): आधिकारिक संगीत रिलीज और गीतकार सुनील कुमार के मूल बोल।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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