भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

शंकर जी का डमरू बाजे लिरिक्स (Shankarji Ka Damroo Lyrics In Hindi) - Ganesh Bhajan

शंकर जी का डमरू बाजे भजन शिव और गणेश की भक्ति, सुख, शांति और संकट मोचन का प्रतीक है।

प्रस्तावना एवं परिचय

शंकर जी का डमरू: भक्ति का स्वरूप

हर भक्त के दिल में बसी भक्ति का प्रतिक यह भजन, गणेशजी और शिवजी की महिमा का गुणगान करता है।

 शंकर जी का डमरू बाजे लिरिक्स (Shankarji Ka Damroo Lyrics In Hindi) - शंकर जी का डमरू बाजेपार्वती का नंदन नाचेबर्फीले कैलाशिखर पर,जय गणेश की धूमओ जय हो…शंकर जी का डमरू बाजेपार्वती का नंदन नाचेबर्फीले कैलाशिखर पर,जय गणेश की धूमनाचे धिन धिन धिन्तक धिननाचे धिन धिन, नाचे धिन धिन,धिन्तक धिन्तक नाचेमनमोहक, मनभावन, नटखटमूषक गण भागे सरपटविघ्न विनायक, संकट मोचनवक्रतुंड कजरारे लोचनझूमे गए बल गणेशभक्तजनो की कटे कलेशनाचे धिन धिन धिन्तक धिननाचे धिन धिन, नाचे धिन धिन,धिन्तक धिन्तक नाचेसुनकर इतना ज्यादा शोर,पार्वती आई उस औरडरकर माता उमा के आगे,दुम दबाकर मूषक भागेपर अपनी धुन में मस्त गजाननथिरक रहे है भूलके तन मैंगणपति बाप्पा मोरया,मंगल मूर्ति मोरया*** Singers: Kailash Kher ***
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान शिव और उनके पुत्र गणेश के विभिन्न गुणों और खेलों का वर्णन है। 'शंकर जी का डमरू बाजे' की रचना में भगवान शिव के डमरू की ध्वनि का महत्व है, जो सृष्टि के निर्माण और विनाश का प्रतीक है। भजन के आरंभ में, 'पार्वती का नंदन नाचे' प्रदर्शित करता है कि भगवान गणेश, जो पार्वती का पुत्र हैं, कैलाश पर्वत की बर्फीली चोटी पर नृत्य कर रहे हैं। ध्वनि के माध्यम से भक्त शिवजी की कृपा और गणेशजी के साथ भक्ति का अनुभव करते हैं। 'नाचे धिन धिन धिन्तक धिन' जैसे सूक्ष्म संगीत के छंद, भक्तों के हृदय में उत्साह, आनंद और भक्ति का संचार करते हैं। यह भजन सिर्फ एक गायन नहीं है, बल्कि भक्तों के मन में श्रद्धा एवं प्रेम का संचार करता है।

भावार्थ के संदर्भ में, 'विघ्न विनायक, संकट मोचन' का उल्लेख भक्तों को यह प्रेरणा देता है कि गणेशजी हर बाधा और संकट के नाशक हैं। माता पार्वती का शीर्षक सजगता से दर्शाता है कि शिव-पार्वती का संबंध कितना मधुर और अद्भुत है। 'मूषक भागे' वाक्यांश, मूषक को दर्शाता है जो गणेशजी का वाहन है, और उसकी खुशी का संकेत है। यह दर्शाता है कि जब भक्त गणेशजी की स्तुति करते हैं, तब उनकी सारी विपत्तियां और संकट दूर हो जाते हैं। 'गणेश भक्तजनो की कटे कलेश' वाक्यांश भक्तों के बीच एक सामंजस्य स्थापित करता है, जिससे वे अपनी अडिग विश्वास के साथ भक्ति करते हैं।

यह भजन भक्ति मार्ग की महत्ता को भी दर्शाता है। भक्तिपूर्वक गाए जाने वाले इस भजन में श्री गणेश के प्रति एक गहरे प्रेम और श्रद्धा की भावना है। भगवान शिव और गणेश का संबंध, धर्म, आस्था, और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रकार का भजन, भक्ति में गहराई लाने के साथ-साथ अनुशासन और समर्पण की भावना भी विकसित करता है। यह भजन न केवल धार्मिक बल्कि दार्शनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सृष्टि के सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को समझाता है। भक्तों को आनंद और शांति प्रदान करने वाला यह भजन, शिव और गणेश के आशीर्वाद का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का शास्त्रीय संदर्भ भगवान शिव और गणेशजी की उपासना में निहित है। भगवान शिव का डमरू, समस्त सृष्टि की उत्पत्ति और लय का प्रतीक होता है। पुराणों में, शिवजी की उपासना के दौरान उनके डमरू की ध्वनि को ध्यान में रखकर ध्यान करने का महत्व बताया गया है। गणेश जी, जिन्हें 'विघ्न विनायक' कहा जाता है, हर प्रकार की बाधाओं को दूर करने के लिए पूजे जाते हैं। यह भजन भक्तों के बीच उत्साह और प्रोत्साहन उत्पन्न करके शिवजी की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का प्रतिदिन जाप करने से मानसिक शांति, समर्पण की भावना और भक्ति में वृद्धि होती है। यह भक्तों को मानसिक तनाव से राहत प्रदान करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसके अलावा, संकट और बाधाओं को दूर करने में गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे भक्तों के जीवन में सुख और शांति आती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रातः काल या संध्या के समय किया जाना चाहिए। पूजा करते समय एक दीया जलाना, पवित्र फल और पुष्प अर्पित करना चाहिए। भक्ति भाव से बैठकर अपने मन को एकाग्र कर इस भजन का गायन करना चाहिए, जिससे ध्यान में स्थिरता और श्रद्धा बढ़े।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शंकर जी का डमरू कैसे महत्वपूर्ण है?

शंकर जी का डमरू सृष्टि की उत्पत्ति और विनाश का प्रतीक है, जो शिव की अनंत शक्ति को दर्शाता है। इसका ध्वनि संकल्प पूरे सृष्टि को प्रभावित करता है।

इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय कब है?

इस भजन का जप प्रातः या संध्या के समय करना श्रेष्ठ है, क्योंकि यह शांति और ध्यान की स्थिति में सबसे अधिक प्रभावी होता है।

गणेश जी की उपासना के क्या लाभ हैं?

गणेश जी की उपासना से मानसिक तनाव दूर होता है, बाधाएं समाप्त होती हैं, और समग्र जीवन में आनंद एवं शांति प्राप्त होती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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