भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

गजानना (Gajanana Lyrics in Hindi) - Sukhwinder Singh Ganesh Bhajan - Bhajan

सुखविंदर सिंह का प्रसिद्ध गणेश भजन गजानना लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित गणेश भक्ति का आनंद लें।

प्रस्तावना एवं परिचय

गजानना: गणेश की कृपा के लिए भक्ति गीत

गणेश जी की कृपा प्राप्त करने के लिए यह भजन समूह में भक्ति भाव से गाया जाता है।

गजानना (Gajanana Lyrics in Hindi) - सुखकर्ता दुखहर्ता करता विघ्नाची नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची सर्वांगी सुन्दर उठी शेंदुराची कंठी झलके मार मुक्ताफळांची जय देव जय देव जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति हो श्री मंगल मूर्ति दर्शन मात्रे मन कामना पूर्ति जय देव जय देव लम्बोदर तू विनायका तू बल्लाळेशवर मोरेया विग्नेश्वर तू एकदन्त तू मयूरेश्वरा मोरेयालम्बोदर तू विनायका तू बल्लाळेशवर मोरेया विग्नेश्वर तू एकदन्त तू मयूरेश्वरा मोरेया  वक्रतुंड तू गजमुखा तू सिध्विनायका गजानना गजानना गजानना गनरायागजानना गजानना गजानना गनरायागजानना गजानना गजानना गनरायागजानना गजानना गजानना गनरायारत्नखचित फर तुझ गौरीकुमरा चंदनाची उठी कुमकुम के सहारा हीरे जड़ित मुकुट शोभतो बारे रनझुनाती नुपुर चरणी घागरिया जय देव जय देव लम्बोदर पीताम्बर फणिवर वंदना सरल साउंड वक्रतुंडा त्रिनयना संकटी पव्वे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना जय देव जय देव विगणराज तू महाताज तू महेशाय तू मोरेया चिंतामणि तू शद्धिविनायका गणाधीशाये मोरया वक्रतुंड तू गजामखा तू सिध्विनायकावक्रतुंड तू गजामखा तू सिध्विनायकागजानना गजानना गजानना गनरायागजानना गजानना गजानना गनरायागजानना गजानना गजानना गनरायागजानना गजानना गजानना गनरायाहरे राम हरे राम  राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा  कृष्णा कृष्णा हरे हरेहे राम हरे राम  राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा  कृष्णा कृष्णा हरे हरेहे राम हरे राम  राम राम हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा  कृष्णा कृष्णा हरे हरे
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

गजानना भजन, गणेश जी की महिमा और विभिन्न रूपों का गुणगान करता है। इसके आरंभ में कहा जाता है कि 'सुखकर्ता दुखहर्ता' अर्थात्, गणेश जी सुख देने वाले और दुख दूर करने वाले हैं। इस तरह, भक्त गणेश जी से विशेष कृपा की कामना करते हैं। 'लम्बोदर तू विनायका तू' जैसे शब्द उनके अद्भुत आकार और बुद्धि का वर्णन करते हैं। कलाकार गणेश जी के प्रति प्रेम और श्रद्धा को उभारते हैं, उनकी छवि को दर्शाते हुए शेंदुर की महक और चंद्र प्रकाश का उल्लेख करते हैं। 'जय देव जय देव' का उच्चारण करते हुए, भक्त गणेश जी की आराधना में अपने मन के संकल्प को जोड़ते हैं। इस भजन का हर भाग गणेश जी की शक्ति और उनके प्रति अटूट श्रद्धा दर्शाता है।

इस भजन में भक्तों की भावनाएं अत्यधिक स्पष्ट होती हैं। जब भक्त 'जय मंगल मूर्ति' का उच्चारण करते हैं, तो यह उन समस्याओं और विघ्नों से मुक्त होने की कामना को प्रदर्शित करता है जो जीवन में आने वाली बाधाओं का संकेत है। गणेश जी की पहचान 'विग्नेश्वर' तथा 'एकदन्त' के रूप में की जाती है, जिससे चुनौतियों का साहस और आत्मविश्वास के साथ सामना किया जा सके। ध्याननीय है कि गणेश जी केवल विघ्नों को हटाने वाले नहीं हैं, बल्कि वे अपने भक्तों के हृदय में नवीनता और सकारात्मकता का संचार भी करते हैं। ऐसे में, भजन का प्रत्येक अंतरा भक्तों को आत्मिक शांति और मन का संतुलन देने वाला बनता है।

इस भजन के द्वारा आस्था, भक्ति और निष्ठा की जो परंपरा अद्भुत है, वह हमारे अंदर की समर्पित भावना को प्रकट करती है। गणेश जी का पूजन 'भक्ति मार्ग' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें भक्त सरलता और विनम्रता के साथ अपनी प्रार्थनाएं रखते हैं। भजन में 'वक्रतुंड तू गजमुखा' का संदर्भ गणेश जी के स्वरूप की गहराई को दर्शाता है, जो हमारे जीवन की जटिलताओं को सरल बनाते हैं। भक्तों की यह धारणा होती है कि भक्ति से न केवल भौतिक चुनौतियां दूर होती हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती है। हर भक्त अपनी पूजा में प्रेम और समर्पण के साथ जुड़ता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गजानना भजन की संदर्भित ग्रंथों में गणेश जी की आराधना का अद्वितीय स्थान है। इसे अक्सर 'वेद' और 'पुराण' में गणेश जी के विभिन्न नामों के साथ पहचाना जाता है। गणेश जी को 'विनायक' और 'गणेश' कहा गया है, जो कि समूहों और समाज की बाधाओं को दूर करते हैं। इस भजन का विशेष महत्व है विशेषकर 'गणेश चतुर्थी' के अवसर पर, जब भक्त गणेश जी के स्वागत की तैयारी करते हैं। भक्तों का मानना है कि इस प्रकार की भक्ति से सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गजानना भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि, और समस्याओं में समाधान की प्राप्ति होती है। यह भजन व्यक्तियों के बीच सकारात्मकता और आत्म-विश्वास का संचार करता है। इसे गाने से ध्यान की स्थिति में भी वृद्धि होती है, जो मस्तिष्क की गतिविधियों को संतुलित करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

गजानना भजन का संकल्प सुबह या शाम के समय रखना उत्तम होता है। पूजा स्थल को स्वच्छ करके, दीया जलाने और पुष्प अर्पित करने से वातावरण में शुभता आती है। भक्त को ध्यान मुद्रा में बैठना चाहिए और मन को गणेश जी की भक्ति में एकाग्र करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गजानना भजन किस देवता को समर्पित है?

गजानना भजन भगवान गणेश को समर्पित है, जो विघ्नों को दूर करने वाले और सुख प्रदान करने वाले देवता हैं।

क्या गजानना भजन का कोई विशेष अवसर है?

यह भजन मुख्यत: गणेश चतुर्थी और अन्य धार्मिक आयोजनों पर गाया जाता है, जब भक्त गणेश जी की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं।

गजानना भजन का लाभ क्या है?

इस भजन का पाठ मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होता है, जिससे समाज में भी खुशहाली आती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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