बन ठन के लीले चढ़ के (Ban Than Ke Leele Chadh Ke Lyrics in Hindi) | Kirty Gupta - Bhaktilok
श्री खाटू श्याम बाबा की अलौकिक महिमा, उनकी अद्वितीय छटा और उनके परम प्रिय लीले घोड़े की सवारी का वर्णन करता यह अत्यंत लोकप्रिय भजन "बन ठन के लीले चढ़ के" (Ban Than Ke Leele Chadh Ke) भक्तों के हृदय में एक विशेष स्थान रखता है। कोलकाता की प्रसिद्ध भजन गायिका कीर्ति गुप्ता (Kirty Gupta) द्वारा स्वरबद्ध और मनीष अग्रवाल 'माही' (Manish Agrawal Mahi) द्वारा रचित यह भजन हारे के सहारे खाटू श्याम जी के दरबार की भव्यता, उनके मनमोहक श्रृंगार और भक्तों पर लुटाए जाने वाले अहेतुक प्रेम को अत्यंत जीवंत रूप से प्रस्तुत करता है। जब भी श्याम प्रेमी अपने आराध्य के दरबार में हाजिरी लगाने जाते हैं या अपने घर पर कीर्तन का आयोजन करते हैं, तो इस तर्ज और ऊर्जा से भरे भजन को सुनकर हर कोई भक्ति के रंग में सराबोर हो जाता है। इस लेख में आपको इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल (Lyrics), सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, रचना की पृष्ठभूमि और श्याम बाबा की आराधना से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होंगी।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
शीर्षक: बन ठन के लीले चढ़ के (Ban Than Ke Leele Chadh Ke Lyrics in Hindi)
गायिका एवं कलाकार: कीर्ति गुप्ता (Kolkata)
संगीतकार: दीपांकर साहा
गीतकार: मनीष अग्रवाल (माही)
लेबल: युकी (Yuki)
मोटा मोटा नैणा माहि सुरमो खूब सजायो
चाँद सो मुखडो देख के थारो मन म्हारो हरषायो
सतरंगी है बागो थारो खुशबू इत्तर की न्यारी
मस्तक पर मलयगिरि चन्दन मोर मुकुट लगवायो
हाँ मोर मुकुट लगवायो .......
बन ठन के रे यो लीले चढ़ के
ज़रा देखो म्हारो सांवरो कइयाँ मुल्के
सजधज बैठ्यो दरबार लगावे
बैठ्यो सिंहासन ऊपर खातिरी करावे
जी भर भगतां पे प्यार लुटावे
मोरछड़ी से सबका काम बनावे
लागे हटके रे........लागे हटके रे यूँ ससु मटके
ज़रा देखो म्हारो सांवरो कइयाँ मुल्के
बन ठन के रे...........
छवि अनुपम शोभा अति प्यारी
श्याम धणी की हर बात ही न्यारी
हारयोडा को साथ निभावे
जो भी आवे झोली भर जावे
कलयुग के अवतारी श्याम की महिमा अपरंपार है,
इनके चरणों में ही तो तीनों लोक का सार है!
बन ठन के रे यो लीले चढ़ के
ज़रा देखो म्हारो सांवरो कइयाँ मुल्के!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भगवान श्री खाटू श्याम (जिन्हें कलयुग का अवतारी और 'हारे का सहारा' कहा जाता है) के भौतिक स्वरूप और उनके राजाधिराज रूप का अत्यंत सुंदर चित्रण करता है। गीतकार मनीष अग्रवाल ने बाबा के श्रृंगार का ऐसा सजीव वर्णन किया है जिसे पढ़कर और गाकर भक्त सीधे खाटू धाम की अनुभूति करने लगते हैं।
प्रथम पद का भाव: भजन की शुरुआत बाबा के नैन-नक्श और उनके आकर्षक श्रृंगार से होती है। भक्त कहता है कि हे सांवरिया! तुम्हारे बड़े-बड़े नयनों में सुरमा बहुत ही सुंदर ढंग से सजा हुआ है, और तुम्हारे चंद्रमा जैसे मुखड़े को देखकर मेरा मन हर्षित हो जाता है। तुम्हारा पहना हुआ सतरंगी बागा (पोशाक) और उसमें से आती इत्तर की भीनी-भीनी खुशबू सबसे निराली है। तुम्हारे मस्तक पर मलयगिरि का सुगंधित चंदन और उस पर सजा मोर मुकुट तुम्हारी शोभा में चार चांद लगा रहा है।
मुखड़ा व अंतरा का भाव: जब श्याम बाबा अपने नीले घोड़े (लीले) पर सवार होकर सज-धज कर निकलते हैं, तो उनका वह रूप देखते ही बनता है। वे अपने भव्य दरबार में सिंहासन पर विराजमान होकर अपने भक्तों की खातिरदारी करते हैं और उन पर जी भरकर अपना प्रेम लुटाते हैं। उनके हाथ में मौजूद मोरछड़ी भक्तों के सभी संकटों को दूर कर उनके बिगड़े काम बना देती है। बाबा की यह निराली अदा और उनका मुस्कुराना भक्तों के मन को मोह लेता है। अंत में यह संदेश दिया गया है कि बाबा हारे हुए इंसानों का साथ निभाते हैं और उनके दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- इष्ट देव: भगवान श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक जी), जो कलयुग में हारे के सहारे के रूप में पूजे जाते हैं।
- भक्ति का भाव: इस भजन में सख्य भाव, दास्य भाव और उत्सव का आनंद समाहित है, जो श्याम कीर्तन के समय भक्तों को झूमने पर विवश कर देता है।
- सांस्कृतिक महत्व: मारवाड़ी और राजस्थानी लोक धुनों के संलयन के साथ आधुनिक संगीत का यह मिश्रण खाटू श्याम के भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।
- नकारात्मकता का नाश: बाबा के दरबार की महिमा और मोरछड़ी का स्मरण मात्र से भक्तों के जीवन के सभी कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
खाटू श्याम जी के भजनों का गान और श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इनका महत्व और अधिक बढ़ जाता है:
- श्याम संकीर्तन एवं जागरण: रात्रि के समय जब श्याम बाबा का भव्य दरबार सजाया जाता है, तब मुख्य आकर्षण के रूप में इस भजन को गाया जाता है।
- द्वादशी और एकादशी व्रत: शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी तिथि खाटू श्याम जी को समर्पित होती है। इस दिन घर में धूप-दीप जलाकर इस भजन का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- खाटू धाम यात्रा के दौरान: जब भक्त सीकर (राजस्थान) स्थित खाटू धाम की यात्रा पर जाते हैं, तब बस या गाड़ियों में यह भजन यात्रा को और भी आनंदमय बना देता है।
- नित्य पूजा: प्रातः काल स्नान के पश्चात बाबा के दर्शन करते समय इस भजन को सुनने से पूरे दिन सकारात्मकता बनी रहती है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में महाभारत काल के वीर योद्धा और भगवान श्री कृष्ण से वरदान प्राप्त महाबली बर्बरीक यानी हमारे अपने श्री खाटू श्याम बाबा हैं। बर्बरीक जी ने अपनी माता मोरवी के वचनों और अपनी वीरता का परिचय देते हुए भगवान श्री कृष्ण को अपना शीश दान कर दिया था। उनकी इस परम त्याग और महान भक्ति से प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें कलयुग में अपने 'श्याम' नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। आज राजस्थान के खाटू कस्बे में उनका विश्व प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जहाँ दुनिया भर से करोड़ों श्याम प्रेमी शीश के दानवीर के दर्शन करने आते हैं।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन हिंदी और राजस्थानी-मारवाड़ी लोकभाषा के सुंदर शब्दों का मिश्रण है। गीतकार मनीष अग्रवाल (माही) ने इसमें 'नैणा', 'मुखड़ो', 'हरषायो', 'बागो', 'कइयाँ मुल्के' जैसे प्यारे शब्दों का प्रयोग किया है जो खाटू श्याम की संस्कृति और राजस्थान की माटी की महक को सीधे श्रोता के दिल तक पहुंचाते हैं। इसकी काव्य शैली लयात्मक और ऊर्जावान है, जो ढोलक, चंग और आधुनिक सिंथेसाइज़र की धुनों पर बहुत खूबसूरती से बैठती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- निस्वार्थ शरणागति: जिस प्रकार श्याम बाबा अपने भक्तों पर बिना किसी भेदभाव के स्नेह लुटाते हैं, हमें भी जीवन में निष्काम भाव से कर्म करना चाहिए।
- हारे हुए का संबल: यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न आ जाए, ईश्वर पर भरोसा रखने वाले को कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि श्याम बाबा हमेशा 'हारे का सहारा' बनते हैं।
- आनंद और उत्सव का मार्ग: भक्ति केवल रोने या विलाप करने का नाम नहीं है, बल्कि अपने आराध्य की सुंदरता और महिमा पर झूमने, गाने और उत्सव मनाने का पावन मार्ग है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| लीले चढ़ के | नीले रंग के घोड़े पर सवार होकर | श्याम बाबा के प्रिय नीले घोड़े 'लीलड़' की सवारी |
| बागो | राजसी पोशाक / वस्त्र | बाबा का सतरंगी सुंदर पहनावा |
| मलयगिरि चन्दन | सुगंधित उत्तम चंदन | बाबा के मस्तक पर लगाया जाने वाला तिलक |
| कइयाँ मुल्के | कैसे मुस्कुरा रहे हैं | बाबा की मोहक मुस्कान का वर्णन |
| मोरछड़ी | मोर के पंखों से बना पवित्र डंडा | जिससे बाबा भक्तों के संकट झाड़ते हैं |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | बन ठन के लीले चढ़ के (Ban Than Ke Leele Chadh Ke) |
|---|---|
| इष्ट देव | श्री खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक जी) |
| गायिका एवं कलाकार | कीर्ति गुप्ता (कोलकाता) |
| गीतकार | मनीष अग्रवाल (माही) |
| संगीतकार | दीपांकर साहा |
| संगीत लेबल | युकी (Yuki) |
| भाषा | हिंदी एवं राजस्थानी लोक मिश्रित |
| भक्ति भाव | उल्लास, प्रेम, श्रृंगार एवं शरणागति |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
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स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्री खाटू श्याम जी की लोक कथाएं एवं प्रचलित संकीर्तन परंपरा।
- युकी कैसेट्स (Yuki Music) आधिकारिक ऑडियो-विजुअल रिलीज़ डेटा।
- भक्तजनों द्वारा संकलित पारंपरिक श्याम भजन संग्रह।
- राजस्थानी लोक संगीत एवं संत वाणी कोश।
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