शेरांवाली माँ मेहरांवाली माँ लिरिक्स - Sherawali Maa Mehrawali Maa Lyrics in Hindi
माँ दुर्गा की असीम कृपा, शक्ति और वात्सल्य से परिपूर्ण 'शेरांवाली माँ मेहरांवाली माँ' भजन सनातन धर्म के अनुयायियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय और मन को शांति प्रदान करने वाला भक्ति गीत है। यह पावन भजन आदि शक्ति माँ जगदम्बा के उस स्वरूप का गुणगान करता है जो अपने भक्तों के सभी संकटों का नाश करती हैं और उन्हें अपनी छत्रछाया में सुरक्षित रखती हैं। 'शेरांवाली' का अर्थ है वह महाशक्ति जो सिंह पर सवार होकर दुष्टों का संहार करती हैं और 'मेहरांवाली' का अर्थ है वह कृपालु जननी जो अपने बच्चों पर निरंतर अपनी करुणा और मेहर बरसाती हैं। नवरात्रि के पावन अवसरों पर, जागरण में, माता के चौकी कार्यक्रमों में तथा दैनिक संध्या वंदन के दौरान इस भजन का गान करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आरोग्य का संचार होता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस दिव्य भजन के सम्पूर्ण बोल, हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन विधि और जीवन में इसके प्रभाव पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि साधक माता की भक्ति में तल्लीन हो सकें।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मुखड़ा:
शेरांवाली माँ, मेहरांवाली माँ,
सबकी झोली भरने वाली, मेरी शेरांवाली माँ!
ऊँचे पर्वत तेरा धाम, जय माता दी बोल सुबह शाम।
अंतरा 1:
लाल चुनरिया सोहे तन पे, माथे पे बिंदिया चमके,
सिंह सवारी रूप निराला, भक्त जनन के मन को भाये।
जो भी दर पे तेरे आता, खाली हाथ न वापस जाता,
चरणों की धूल जो माथे लगा ले, उसका भाग जगा जाता।
अंतरा 2:
दुखियों के दुःख दूर करती, भक्तों के संकट हरती,
ममता की मूरत है माता, सबका जीवन रोशन करती।
शेर पे चढ़कर माँ जब आती, सारी दुनिया झूम जाती,
जयकारे गूंजे अंबर में, माँ की महिमा गाती जाती।
अंतरा 3:
दीनों की तू सुनती पुकार, नैया लगा दे पार उतार,
तेरी कृपा का आंचल पाया, जीवन हुआ मेरा गुलज़ार।
शीश झुका के तुझको ध्याएं, चरणों में हम शीश नवाएं,
'भक्तलोक' की अर्जी माता, दर्शन पाकर हम तृप्त हो जाएं।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस सुंदर भजन का प्रत्येक शब्द माँ दुर्गा के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण और विश्वास की भावना को जागृत करता है। मुखड़े में माता को 'शेरांवाली' और 'मेहरांवाली' कहकर उनके दो प्रमुख गुणों को उजागर किया गया है—उनकी अदम्य शक्ति (सिंह सवारी) और उनकी अकारण करुणा (मेहर)। ऊंचे पर्वतों पर विराजमान माता का दरबार त्रिकूट या शिवालिक पहाड़ियों पर स्थित वैष्णोदेवी और अन्य शक्तिपीठों की याद दिलाता है, जहाँ भक्त कठिन यात्रा करके अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं।
अन्तरों में माँ के श्रृंगार और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है। लाल चुनरी और माथे की चमक यह दर्शाती है कि देवी मंगल और उल्लास की प्रतीक हैं। 'जो भी दर पे तेरे आता, खाली हाथ न वापस जाता' यह पंक्ति इस अकाट्य सत्य को रेखांकित करती है कि शरणागत कभी निराश नहीं होता। माता अपने बालकों के सभी दुखों और संतापों को हर लेती हैं। इस प्रकार यह भजन साधक के भीतर यह विश्वास पैदा करता है कि जीवन की हर विषम परिस्थिति में माँ दुर्गा का वात्सल्यपूर्ण हाथ हमारे सिर पर है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह जीव और जगदम्बा के बीच के आध्यात्मिक संबंध का जीवंत दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- शक्तितत्व की उपासना: यह भजन सनातन धर्म के शाक्त संप्रदाय और दुर्गा उपासना पद्धति का सुंदर प्रतिनिधित्व करता है।
- भय मुक्ति: 'शेरांवाली' रूप साधक को निर्भय बनाता है, क्योंकि सिंह पर आसीन माता हर प्रकार के भय और नकारात्मकता का नाश करती हैं।
- करुणा और कृपा: 'मेहरांवाली' संबोधन यह प्रमाणित करता है कि ईश्वर अपने भक्तों के कर्मों से अधिक उनकी सच्ची पुकार और भाव को देखते हैं।
- सामूहिक गान की क्षमता: इसकी लयबद्धता और सरल शब्दावली इसे जागरण, कीर्तन और कन्या पूजन जैसे आयोजनों में गाने के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन का गान और श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों और समय पर इसके गान से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं:
- दैनिक पूजा के समय: प्रातःकाल स्नान के पश्चात या संध्या कालीन आरती के समय धूप-दीप प्रज्वलित करके माँ के सम्मुख इस भजन का गान करना चाहिए।
- नवरात्रि के नौ दिन: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान घटस्थापना के बाद नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और देवत्व का वास होता है।
- माता की चौकी और जागरण: रात्रि जागरण के दौरान जब वातावरण भक्तिमय होता है, तब इस भजन को गाने से संपूर्ण पंडाल झूम उठता है।
- व्रत और अनुष्ठान: शुक्रवार को संतोषी माता या मंगलवार/अष्टमी को माँ दुर्गा के व्रत के दिन विशेष रूप से इसका स्मरण करना फलदायी है। श्री दुर्गा चालीसा का पाठ करने के उपरांत इस भजन को गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की मुख्य आराध्य देवी माँ दुर्गा (आदि शक्ति, भवानी, जगदम्बा) हैं, जो ब्रह्मांड की सृजनकर्ता, पालनकर्ता और संहारक शक्ति का प्रतीक हैं। वे त्रिगुणात्मिका (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का समन्वित रूप) हैं। सनातन परंपरा में आदि शंकराचार्य से लेकर आधुनिक संतों और लोक गायकों (जैसे गुलशन कुमार, अनुराधा पौडवाल आदि) ने माता के इन रूपों का अपने भजनों के माध्यम से विस्तार किया है। लोक परंपरा में गाए जाने वाले ये भजन पीढ़ियों से मौखिक और लिखित रूप से सनातन संस्कृति को जीवंत रखे हुए हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
'शेरांवाली माँ मेहरांवाली माँ' भजन लोक परंपरा और समकालीन भक्ति संगीत का एक उत्कृष्ट मिश्रण है। इसे किसी एक विशेष रचनाकार के नाम से बांधना कठिन है क्योंकि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोककंठ से प्रसारित होता रहा है। माता रानी के दरबारों (जैसे वैष्णो देवी, ज्वाला देवी, चिंतपूर्णी) की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों ने अपनी यात्रा की थकान मिटाने और उत्साह बनाए रखने के लिए ऐसे भजनों की रचना की है। यह लोक संस्कृति की उस धारा से जुड़ा है जहाँ आम जनमानस अपने इष्ट के साथ एक पारिवारिक और आत्मीय संबंध महसूस करता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली मिश्रित ब्रज-अवधि के पुट वाली लोक भाषा) है। इसकी काव्य शैली गेय और तुकांत (Rhyming) है, जो संगीत के ताल और सुर में आसानी से बैठ जाती है।
- छंद एवं लय: भजन की पंक्तियाँ मात्रिक अनुप्रास और लयबद्ध प्रवाह से युक्त हैं, जिससे बिना किसी कठिन संगीत प्रशिक्षण के भी कोई आम भक्त इसे सरलता से गा सकता है।
- प्रतीक योजना: 'लाल चुनरिया', 'सिंह सवारी', 'ऊंचे पर्वत तेरा धाम' जैसे बिंब (Imagery) भक्तों के मानस पटल पर माता के भव्य स्वरूप का सजीव चित्र अंकित कर देते हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें जीवन के गहरे आध्यात्मिक और व्यावहारिक पाठ सिखाता है:
- अटूट विश्वास: कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर और माता की शक्ति पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
- शरणागति (Surrender): जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर माता के चरणों में समर्पण कर देता है, तो उसके सारे संकट स्वतः टल जाते हैं।
- कृतज्ञता का भाव: जीवन में मिलने वाली हर सफलता और सुख के लिए माँ का धन्यवाद करना चाहिए, क्योंकि वही सभी सत्कर्मों और फलों की दात्री हैं। श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश की तरह ही यह भजन भी निष्काम भाव से कर्म करने और अंततः शरण में जाने की प्रेरणा देता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| शेरांवाली | सिंह पर सवार रहने वाली | माया और प्रकृति पर नियंत्रण रखने वाली आदिशक्ति |
| मेहरांवाली | कृपा और अनुकंपा बरसाने वाली | भक्तों पर अहेतुत दया करने वाली करुणामयी माता |
| धाम | पवित्र निवास स्थान या तीर्थ | दिव्य ऊर्जा का केंद्र, जैसे शक्तिपीठ |
| चुनरिया | लाल वस्त्र / ओढ़नी | सौभाग्य, पवित्रता और ऊर्जा का प्रतीक |
| नैया पार लगाना | संकट से मुक्ति दिलाना | भवसागर से पार उतारना, मोक्ष मार्ग प्रशस्त करना |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"शेरांवाली माँ, मेहरांवाली माँ, सबकी झोली भरने वाली..."
इस शुरुआती पंक्ति में भक्त माता को उनके दो सबसे प्यारे रूपों से पुकार रहा है। 'झोली भरने वाली' का अर्थ है कि भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से माँ अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। उनके दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता।
"लाल चुनरिया सोहे तन पे, माथे पे बिंदिया चमके..."
यहाँ माता के भौतिक स्वरूप का बहुत ही प्यारा आलंकारिक वर्णन है। लाल रंग ऊर्जा, साहस और उल्लास का प्रतीक है। माथे की बिंदिया माँ के सौम्य और मातृवत्सल रूप को दर्शाती है जो अपनी संतानों पर स्नेह बरसाती हैं।
"दुखियों के दुःख दूर करती, भक्तों के संकट हरती..."
यह पंक्ति माता के करुणामयी स्वभाव को स्पष्ट करती है। जैसे एक माँ अपने रोते हुए बच्चे को चुप कराती है, वैसे ही जगदम्बा अपने भक्तों के दुखों को पलभर में दूर कर देती हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
तथा माता के बीज मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै' का जप करने से भजन की ऊर्जा और अधिक प्रबल हो जाती है। आप चाहें तो नवरात्रि पूजा विधि एवं विधान के बारे में भी विस्तार से पढ़ सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| भजन का नाम | शेरांवाली माँ मेहरांवाली माँ लिरिक्स (Sherawali Maa Mehrawali Maa Lyrics) |
| आराध्य देवी | माँ दुर्गा / आदि शक्ति जगदम्बा |
| रचना परंपरा | लोक भजन एवं पारंपरिक भक्ति संगीत |
| भाषा | सरल हिंदी / लोक भाषा |
| मुख्य थीम | भक्ति, शक्ति, संरक्षण और मातृवत्सलता |
| मुख्य भाव | प्रेम, समर्पण, शरणागति और विश्वास |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, मंगलवार/शुक्रवार पूजा, जागरण, माता की चौकी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह मार्गदर्शिका 'भक्तलोक' (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन परंपरा, लोक साहित्य और धार्मिक मान्यताओं के गहन अध्ययन के पश्चात तैयार की गई है। सामग्री की प्रामाणिकता और पठनीयता का विशेष ध्यान रखा गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- सनातन लोकगीत एवं पारंपरिक दुर्गा भजन संग्रह
- श्रीमद्देवीभागवत पुराण - आदि शक्ति महिमा प्रसंग
- पारंपरिक श्री दुर्गा सप्तशती एवं स्तोत्र संग्रह
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