"सर को झुका लो शेरावाली को मना लो" एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण देवी भजन है, जो माँ शेरावाली अर्थात माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान करता है। यह भजन विशेष रूप से माँ के भक्तों के बीच अत्यधिक प्रचलित है और इसे प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा की दिव्य आवाज़ में गाया गया है। इस भजन का मुख्य भाव यह है कि मनुष्य को अपना अहंकार त्यागकर माँ के चरणों में समर्पण कर देना चाहिए, क्योंकि माँ शेरावाली अपने भक्तों की सभी विपत्तियों को हर लेती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं। भजन में माँ के दरबार की महिमा, उनकी लीला, और उनकी कृपा का वर्णन अत्यंत मार्मिक ढंग से किया गया है। यह भजन नवरात्रि, दुर्गा पूजा, और अन्य मंगल अवसरों पर विशेष रूप से गाया जाता है। भक्त जब इस भजन को श्रद्धा और भक्ति भाव से गाते हैं, तो उन्हें माँ की उपस्थिति का अनुभव होता है और उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भजन न केवल एक धार्मिक गीत है, बल्कि आत्म-समर्पण और भक्ति का एक सशक्त माध्यम भी है, जो साधक को आंतरिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
सर को झुका लो शेरावाली को मना लो
चलो दर्शन पालो चल के
करती मेहरबानीयाँ करती मेहरबानियां
गुफा के अन्दर मन्दिर के अन्दर
माँ की ज्योतां है नुरानियाँ…
सर को झुका लो शेरावाली को मान लो
चलो दर्शन पालो चल के
करती मेहरबानीयाँ करती मेहरबानियां…
मैया की लीला देखो पर्बत है नीला
गरजे शेर छबीला रंग जिसका है पीला
गरजे शेर छबीला रंग जिसका है पीला रंगीला
कठिन चढाईयां माँ सीढ़ियाँ लाईआंय
यह है मैया की निशानियां…
सर को झुका लो शेरावाली को मना लो
चलो दर्शन पालो चल के
करती मेहरबानीयाँ करती मेहरबानियां…
कष्टों को हरती मैया मंगल है करती
मैया शेरों वाली का दुनिया पानी है भरती
मैया शेरों वाली का दुनिया पानी है भरती दुःख हरती
अजब नज़ारे माते के द्वारे और रुत्ता मस्तानीय…
सर को झुका लो शेरावाली को मना लो
चलो दर्शन पालो चल के
करती मेहरबानीयाँ करती मेहरबानियां…
कोढ़ी को काया देवे निर्धन को माया
करती आचल की छाया भिखारी बन के जो आया
करती आचल की छाया भिखारी बन के जो आया
चला चल माँ के द्वारे कटे संकट सारे मिट जाए परशानियाँ…
सर को झुका लो शेरावाली को मना लो
चलो दर्शन पालो चल के
करती मेहरबानीयाँ करती मेहरबानियां…
Singer - Lakhbir Singh Lakhha
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपने अहंकार को त्यागकर माँ शेरावाली के चरणों में अपना सिर झुकाना चाहिए। "सर को झुका लो" का अर्थ है कि हमें विनम्रता और समर्पण का भाव अपनाना चाहिए। जब हम माँ के सामने अपना सिर झुकाते हैं, तो यह हमारे अहंकार के त्याग का प्रतीक है। "शेरावाली को मना लो" का अर्थ है कि हमें माँ को प्रसन्न करने के लिए उनकी भक्ति और स्तुति करनी चाहिए। "चलो दर्शन पालो चल के" का अर्थ है कि हमें माँ के दर्शन के लिए चलना चाहिए, क्योंकि उनके दर्शन मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है। "करती मेहरबानीयाँ" का अर्थ है कि माँ अपने भक्तों पर सदैव कृपा करती हैं।
"गुफा के अन्दर मन्दिर के अन्दर, माँ की ज्योतां है नुरानियाँ" का अर्थ है कि माँ की ज्योति हर जगह प्रकाशित है, चाहे वह गुफा हो या मंदिर। यह माँ की सर्वव्यापकता का प्रतीक है। "मैया की लीला देखो पर्बत है नीला" में कवि माँ के पर्वत रूपी स्वरूप का वर्णन कर रहे हैं, जो नीले रंग में प्रकाशित है। "गरजे शेर छबीला रंग जिसका है पीला" में माँ के वाहन सिंह का वर्णन है, जो अत्यंत सुंदर और पीले रंग का है। "कठिन चढाईयां माँ सीढ़ियाँ लाईआंय" का अर्थ है कि माँ के दरबार तक पहुँचने का मार्ग कठिन है, लेकिन माँ स्वयं अपने भक्तों के लिए सीढ़ियाँ बना देती हैं।
"कष्टों को हरती मैया मंगल है करती" का अर्थ है कि माँ अपने भक्तों के सभी कष्टों को हर लेती हैं और उनका मंगल करती हैं। "मैया शेरों वाली का दुनिया पानी है भरती" का अर्थ है कि माँ पूरे संसार को जल से भर देती हैं, अर्थात वे सभी को जीवन प्रदान करती हैं। "कोढ़ी को काया देवे निर्धन को माया" का अर्थ है कि माँ कोढ़ी को स्वस्थ शरीर और निर्धन को धन प्रदान करती हैं। "करती आचल की छाया भिखारी बन के जो आया" का अर्थ है कि जो भी भिखारी बनकर माँ के दरबार में आता है, माँ उसे अपनी आचल की छाया में शरण देती हैं। "चला चल माँ के द्वारे कटे संकट सारे मिट जाए परशानियाँ" का अर्थ है कि माँ के द्वार पर जाने से सभी संकट कट जाते हैं और सभी परेशानियाँ मिट जाती हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन माँ शेरावाली की महिमा का अद्भुत संगम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- देवी महिमा: यह भजन माँ दुर्गा के शेरावाली स्वरूप की महिमा का गुणगान करता है, जो भक्तों की रक्षा करती हैं।
- भक्ति भाव: भजन में पूर्ण समर्पण और विनम्रता का भाव है, जो साधक को आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाता है।
- आशा और विश्वास: यह भजन भक्तों में यह विश्वास जगाता है कि माँ सभी संकटों को हर लेती हैं।
- सांस्कृतिक महत्व: यह भजन भारतीय संस्कृति और देवी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- मानसिक शांति: इस भजन को सुनने और गाने से मन को अत्यंत शांति मिलती है।
इस भजन का आध्यात्मिक महत्व यह है कि यह साधक को अहंकार से मुक्ति दिलाता है और उसे माँ के चरणों में समर्पित करता है। यह भजन न केवल भक्ति का माध्यम है, बल्कि आत्म-शुद्धि का साधन भी है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से निम्नलिखित समय पर इसका गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है:
- नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों में माँ की विशेष पूजा के समय।
- दुर्गा पूजा: दुर्गा पूजा के अवसर पर।
- मंगलवार और शुक्रवार: ये दिन माँ दुर्गा की पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं।
- प्रातःकाल: सुबह के समय भजन गाने से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है।
- संध्या काल: शाम के समय आरती के बाद इस भजन का गायन अत्यंत शुभ माना जाता है।
भजन गाने की विधि: सर्वप्रथम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माँ की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। फूल, अक्षत, और प्रसाद अर्पित करें। फिर हाथ जोड़कर भक्ति भाव से इस भजन का गायन करें। भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण का भाव रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"सर को झुका लो शेरावाली को मना लो" भजन किसने लिखा है?
यह भजन पारंपरिक देवी भजनों में से एक है, जिसे विभिन्न भजन गायकों ने अपनी आवाज़ में प्रस्तुत किया है। इसका प्रसिद्ध संस्करण लखबीर सिंह लक्खा द्वारा गाया गया है।
इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अहंकार त्यागकर माँ शेरावाली के चरणों में समर्पण करना चाहिए, क्योंकि माँ अपने भक्तों की सभी विपत्तियों को हर लेती हैं।
यह भजन कब गाया जाता है?
यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा, मंगलवार और शुक्रवार के दिनों में गाया जाता है। इसके अतिरिक्त किसी भी शुभ अवसर पर इसका गायन किया जा सकता है।
क्या इस भजन को सुनने से मन को शांति मिलती है?
हाँ, इस भजन को श्रद्धा और भक्ति भाव से सुनने से मन को अत्यंत शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
क्या इस भजन का गायन करने से माँ प्रसन्न होती हैं?
यदि इस भजन का गायन पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और समर्पण भाव से किया जाए, तो माँ शेरावाली अवश्य प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति और आध्यात्मिक परंपरा के गहन अध्ययन के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। इस भजन के बोल पारंपरिक देवी भजनों से लिए गए हैं और इसका भावार्थ सरल हिंदी में समझाया गया है। हमारा उद्देश्य है कि भक्तों को माँ शेरावाली की महिमा और उनके भजनों का सही अर्थ समझने में सहायता मिले। यह सामग्री केवल भक्ति और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है।
संदर्भ: पारंपरिक देवी भजन संग्रह, लोक भक्ति परंपरा।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें