"कहा आता कहा जाता लागे नहीं पाता" यह अत्यंत ही मर्मस्पर्शी और वैराग्यपूर्ण भजन है, जो मानव जीवन की क्षणभंगुरता और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की आवश्यकता को रेखांकित करता है। भक्ति परंपरा में ऐसे भजनों का विशेष स्थान है जो आत्मा को मोह-माया के बंधनों से मुक्त होकर प्रभु के चरणों में लीन होने का मार्ग दिखाते हैं। इस भजन का मुख्य भाव 'अनित्यता' (Transience) है—अर्थात यह संसार नश्वर है और मनुष्य का यहाँ आना-जाना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसे केवल प्रभु की कृपा और कर्मों के शुद्धिकरण से ही विराम दिया जा सकता है। यह भजन विशेष रूप से उन साधकों के लिए है जो संसार के मायाजाल में उलझकर अपने वास्तविक लक्ष्य को भूल चुके हैं।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
प्रभु जी, प्रभु जी, प्रभु जी
कहा आता कहा जाता, लागे नहीं पाता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
कहा आता कहा जाता, कहा आता कहा जाता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
सपनो में खेला सब महल अटारी
रानी पुत्र से न साजे पालकी सवारी
नींद खुले सब, नींद खुले सब, हो जा लापता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
राइ राइ जोड़ी जोड़ी भरला खजाना
दान करने में करे बहुत बहाना
नींद में सोया जैसे सब छूट जाता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
कितना खिलावे चाहे खोवा मलाई
प्यार दुलार कुछ आम न आई
आवेला बुलावा जब प्रभु जी
आवेला बुलावा जब उड़ जायेला तोता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
कहा आता कहा जाता, कहा आता कहा जाता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
रघुराई हो… बंद करा कर्म का खाता
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त प्रभु से प्रार्थना कर रहा है कि हे रघुराई (श्री राम), यह जीवन का चक्र—आना और जाना—समझ से परे है। हम संसार में आकर कर्मों के ऐसे जाल में फंस गए हैं कि हमें यह नहीं पता कि हमारा अंतिम गंतव्य क्या है। भक्त कहता है कि हे प्रभु, अब मेरे कर्मों के इस संचित खाते को बंद कर दीजिए, ताकि मैं इस जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो सकूँ।
भजन में 'सपनो में खेला सब महल अटारी' के माध्यम से संसार की नश्वरता को दर्शाया गया है। जिस प्रकार स्वप्न में व्यक्ति स्वयं को राजा या धनी समझता है, लेकिन जागने पर सब शून्य हो जाता है, उसी प्रकार मृत्यु के समय यह भौतिक संसार और हमारे द्वारा जोड़े गए धन-संपत्ति सब छूट जाते हैं। 'उड़ जायेला तोता' का अर्थ है कि जब शरीर से प्राण-पक्षी उड़ जाता है, तब न तो खोवा-मलाई काम आती है और न ही सांसारिक मोह-माया। यह भजन हमें सचेत करता है कि समय रहते प्रभु का भजन करें और दान-पुण्य के माध्यम से अपने कर्मों को सुधारें।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- वैराग्य भाव: यह भजन मनुष्य को संसार की मोह-माया से विरक्त होकर ईश्वर की ओर उन्मुख होने की प्रेरणा देता है।
- कर्म सिद्धांत: 'कर्म का खाता' शब्द हमारे द्वारा किए गए पाप-पुण्य के लेखा-जोखा को दर्शाता है, जिसे केवल प्रभु की भक्ति ही मिटा सकती है।
- नश्वरता का बोध: यह भजन मृत्यु की वास्तविकता को स्वीकार करने और जीवन को सार्थक बनाने का संदेश देता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को एकांत में, संध्या के समय या सत्संग के दौरान गाना अत्यंत फलदायी होता है। इसे गाते समय मन में प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण और पश्चाताप का भाव होना चाहिए। यदि आप इसे पूजा के समय गाते हैं, तो दीप प्रज्वलित कर प्रभु के सम्मुख बैठकर इसका गायन करें।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| रघुराई | श्री राम (प्रभु) | ईश्वर को पुकारने का संबोधन |
| कर्म का खाता | संचित पाप-पुण्य | जन्म-मरण का कारण |
| महल अटारी | भौतिक सुख-सुविधाएं | संसार की नश्वरता |
| तोता | आत्मा (प्राण) | शरीर से आत्मा का निकलना |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | कहा आता कहा जाता |
| मुख्य आराध्य | श्री रघुराई (श्री राम) |
| भाषा | हिंदी/भोजपुरी मिश्रित |
| भाव | वैराग्य एवं समर्पण |
| मुख्य संदेश | संसार की नश्वरता और प्रभु भक्ति |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि संसार नश्वर है और मनुष्य को मोह-माया छोड़कर प्रभु की भक्ति करनी चाहिए ताकि वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो सके।
'कर्म का खाता' से क्या तात्पर्य है?
इसका अर्थ है हमारे द्वारा किए गए पाप और पुण्य का लेखा-जोखा, जो हमें बार-बार इस संसार में जन्म लेने के लिए बाध्य करता है।
क्या यह भजन किसी विशेष त्यौहार पर गाया जाता है?
इसे किसी भी समय गाया जा सकता है, विशेषकर जब मन में वैराग्य का भाव हो या प्रभु के प्रति समर्पण की भावना जागृत करनी हो।
'उड़ जायेला तोता' का क्या अर्थ है?
यह एक रूपक है, जिसका अर्थ है शरीर से प्राण (आत्मा) का निकल जाना या मृत्यु हो जाना।
क्या इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है?
जी हाँ, इस भजन का भावपूर्ण श्रवण मन को संसार की व्यर्थ चिंताओं से हटाकर ईश्वर की ओर ले जाता है, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ: यह लेख भक्ति साहित्य और पारंपरिक भजनों के अध्ययन पर आधारित है। सामग्री को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से तैयार किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
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