संकटनाशन गणेश स्तोत्र भगवान श्री गणेश की स्तुति का एक अत्यंत प्रभावशाली और दिव्य स्तोत्र है। 'प्रणम्य शिरसा देवं...' से प्रारंभ होने वाला यह स्तोत्र गणेश पुराण के उपासना खंड से लिया गया है। सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या अनुष्ठान के आरंभ में प्रथम पूज्य श्री गणेश का स्मरण अनिवार्य है। यह स्तोत्र न केवल विघ्नहर्ता की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि साधक के जीवन से सभी प्रकार के संकटों, बाधाओं और मानसिक क्लेशों का निवारण करने में सक्षम है। गौरीपुत्र विनायक की भक्ति में लीन होकर जब भक्त इस स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसे बुद्धि, विद्या, विवेक और रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से चतुर्थी तिथि और गणेशोत्सव के दौरान अत्यंत फलदायी माना जाता है।
सम्पूर्ण गणेश स्तोत्र लिरिक्स | Shri Sankat Nashan Ganesh Stotra Lyrics
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुष्कामार्थसिद्धये।।1।।
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम।।2।।
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम।।3।।
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्।।4।।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरः प्रभो।।5।।
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्।।6।।
जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः।।7।।
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत्।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः।।8।।
श्लोक का उच्चारण एवं पदच्छेद | Pronunciation & Padaccheda
इस स्तोत्र का शुद्ध उच्चारण अत्यंत आवश्यक है। 'प्रणम्य शिरसा देवं' का अर्थ है—मस्तक झुकाकर उस देव को प्रणाम करता हूँ। 'गौरीपुत्रं विनायकम' का अर्थ है—माता गौरी के पुत्र और बाधाओं को दूर करने वाले विनायक। उच्चारण करते समय दीर्घ स्वरों (आ, ई, ऊ) पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
विस्तृत शब्दार्थ | Word-by-word Meaning
| संस्कृत शब्द | पदच्छेद | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|
| प्रणम्य | प्र + नम्य | प्रणाम करके |
| वक्रतुण्ड | वक्र + तुण्ड | टेढ़ी सूंड वाले |
| विघ्नराजेन्द्र | विघ्न + राज + इन्द्र | बाधाओं के राजा |
| भालचन्द्र | भाल + चन्द्र | मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले |
सरल हिंदी भावार्थ एवं व्याख्या | Hindi Meaning & Explanation
संकटनाशन गणेश स्तोत्र के प्रथम श्लोक में भक्त भगवान गणेश को प्रणाम करता है और आयु, यश व अर्थ की सिद्धि के लिए उनका नित्य स्मरण करता है। अगले श्लोकों में गणेश जी के 12 दिव्य नामों का वर्णन है: वक्रतुण्ड, एकदन्त, कृष्णपिङ्गाक्ष, गजवक्त्र, लम्बोदर, विकट, विघ्नराजेन्द्र, धूम्रवर्ण, भालचन्द्र, विनायक, गणपति और गजानन।
स्तोत्र के उत्तरार्ध में इसके पाठ का फल बताया गया है। जो व्यक्ति तीनों संध्याओं (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में इन 12 नामों का पाठ करता है, उसे किसी भी प्रकार का विघ्न भय नहीं रहता। यह स्तोत्र विद्यार्थी को विद्या, धनार्थी को धन, पुत्रार्थी को संतान और मोक्ष की कामना रखने वाले को परम गति प्रदान करता है। छह महीने के निरंतर पाठ से साधक को फल की प्राप्ति होती है और एक वर्ष में वह पूर्ण सिद्धि प्राप्त कर लेता है।
शास्त्रीय एवं पौराणिक संदर्भ | Scriptural & Mythological Context
यह स्तोत्र 'गणेश पुराण' से उद्धृत है। गणेश पुराण में भगवान गणेश के विभिन्न अवतारों और उनकी महिमा का विस्तृत वर्णन है। यह स्तोत्र विशेष रूप से नारद मुनि द्वारा रचित माना जाता है, जो संकटों से घिरे मनुष्यों के लिए एक अचूक उपाय है। सनातन धर्म में गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वे सभी प्रकार के सांसारिक और आध्यात्मिक विघ्नों को नष्ट करने में समर्थ हैं।
दार्शनिक एवं आध्यात्मिक महत्व | Philosophical Significance
गणेश जी के 12 नाम केवल नाम नहीं, बल्कि उनके 12 स्वरूपों का प्रतीक हैं। 'वक्रतुण्ड' का अर्थ है कि ईश्वर की लीला टेढ़ी-मेढ़ी हो सकती है, जिसे समझना सामान्य बुद्धि के लिए कठिन है। 'एकदन्त' एकाग्रता का प्रतीक है। 'लम्बोदर' का अर्थ है कि ब्रह्मांड के समस्त सुख-दुःख को पचा लेने की क्षमता। यह स्तोत्र हमें सिखाता है कि भक्ति में निरंतरता (नित्य स्मरण) ही सफलता की कुंजी है।
साधना, पाठ विधि एवं शुभ मुहूर्त | Sadhana & Recitation Vidhi
इस स्तोत्र का पाठ करने के लिए बुधवार का दिन सर्वोत्तम है। प्रातःकाल स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें। गणेश जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और दूर्वा अर्पित करें। स्तोत्र का पाठ 11 या 21 बार करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
एक नजर में स्तोत्र की जानकारी | Quick Information
| स्तोत्र का नाम | संकटनाशन गणेश स्तोत्र |
|---|---|
| देवता | भगवान श्री गणेश |
| स्रोत | गणेश पुराण |
| मुख्य लाभ | संकटों का नाश, विद्या, धन और सिद्धि |
| शुभ दिन | बुधवार, चतुर्थी तिथि |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
उत्तर: इसका पाठ प्रतिदिन तीनों संध्याओं में करना सर्वोत्तम है, विशेषकर बुधवार को। - प्रश्न: क्या विद्यार्थी इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यह स्तोत्र विद्या और बुद्धि के लिए अत्यंत प्रभावी है। - प्रश्न: क्या इसके पाठ के लिए कोई विशेष नियम है?
उत्तर: शुद्धता और पूर्ण श्रद्धा के साथ पाठ करना ही मुख्य नियम है।
संबंधित लेख
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें