गणेश शरणम शरणम गणेशा भजन लिरिक्स - प्रिया सुभिक्षा रंगराजन | Ganesh Sharanam Sharanam Gaesha Lyrics
प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि के अधिष्ठाता भगवान श्री गणेश जी की महिमा भारतीय सनातन संस्कृति में सर्वोपरि है। किसी भी शुभ कार्य, अनुष्ठान, पूजन या मांगलिक उत्सव का आरंभ भगवान श्री गणेश के स्मरण और वंदना के बिना अधूरा माना जाता है। "गणेश शरणम शरणम गणेशा" भजन गणेश भक्ति की पराकाष्ठा और उनके चरणों में पूर्ण समर्पण का अत्यंत सुंदर व मधुर अभिव्यक्ति है। प्रसिद्ध गायिका प्रिया सुभिक्षा रंगराजन (Priya Subhiksha Rangarajan) की सुमधुर वाणी में गाया गया यह लोकप्रिय भजन श्रोताओं के मन को असीम शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक आनंद से भर देता है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में गजमुख, एकदंत, लंबोदर और भक्तों के सभी संकटों को हरने वाले भगवान गणेश की करुणा का जीवंत वर्णन मिलता है। जीवन के प्रत्येक चरण में जब भी कठिनाइयों या बाधाओं का सामना करना पड़े, तब विघ्ननाशक गणेश जी के चरणों में शरण लेने से मनुष्य को मानसिक संबल और मार्गदर्शन की प्राप्ति होती है। भक्तिलोकत (Bhaktilok.in) के इस पावन अंक में हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं इस अलौकिक भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, गायन विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन विश्लेषण।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
प्रिया सुभिक्षा रंगराजन द्वारा स्वरबद्ध गणेश शरणम भजन के मूल बोल (Devanagari Lyrics):
मुखड़ा (Refrain):
गणेश शरणम शरणम गणेशा,
गणेश शरणम शरणम गणेशा।
जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।
प्रथम अंतरा:
एकदंत दयावंता चारभुजा धारी,
मस्तक सोहे सिंदूर मूसा वाहन सवारी।
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा।
गणेश शरणम शरणम गणेशा,
गणेश शरणम शरणम गणेशा।
द्वितीय अंतरा:
अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया।
सूरन को श्याम देत भक्तों को पानी,
दीनन की लाज रखो हे चक्रपाणि।
गणेश शरणम शरणम गणेशा,
गणेश शरणम शरणम गणेशा।
तृतीय अंतरा:
संकट हरण मंगल करण जग वंदना,
चरण कमल में ध्यान धरे जो नित ही बंदना।
ऋद्धि-सिद्धि के दाता तुम हो सुखकारी,
भक्तों के कारज सारे संवारो त्रिपुरारी।
गणेश शरणम शरणम गणेशा,
गणेश शरणम शरणम गणेशा।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, अपितु यह एक भक्त की अपने आराध्य के प्रति अनन्य पुकार और पूर्ण शरणागति (Surrender) का प्रतीक है। "गणेश शरणम शरणम गणेशा" का सीधा अर्थ है— हे गणेश! मैं आपकी शरण में हूँ, मुझे अपनी छत्रछाया में लीजिए। जीवन की भागदौड़ और दुखों के सागर में घबराया हुआ मनुष्य जब भगवान गणेश के चरणों का आश्रय लेता है, तो उसके सारे भय स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
भजन की शुरुआत गणेश जी के माता-पिता के स्मरण से होती है— माँ पार्वती और देवों के देव महादेव के नंदन गणेश संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए वंदनीय हैं। प्रथम अंतरे में उनके भौतिक स्वरूप का अत्यंत मनोहारी चित्रण किया गया है। उनके चार हाथ, मस्तक पर सुशोभित सिंदूर का तिलक और उनका वाहन मूषक (चूहा) यह दर्शाता है कि भगवान गणेश कितने सरल और सुलभ हैं। उन्हें भोग में मोदक (लड्डू), पान और फल अत्यंत प्रिय हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि भगवान को आडंबर नहीं, बल्कि भक्त का शुद्ध भाव और प्रेम चाहिए।
द्वितीय और तृतीय अंतरे में गणेश जी की असीम कृपा और उनके आशीर्वाद का वर्णन है। विघ्नहर्ता केवल बाधाओं को ही दूर नहीं करते, बल्कि अज्ञान रूपी अंधकार में फंसे जीवों को ज्ञान का प्रकाश देते हैं। वे भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले, ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी और मंगलकर्ता हैं। इस भजन को नियमित रूप से सुनने या गाने से साधक के जीवन में आ रही समस्त बाधाएं दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
भारतीय संगीत परंपरा और भक्ति साधना में गणेश वंदना का विशेष स्थान है। प्रिया सुभिक्षा रंगराजन द्वारा गाए गए इस भजन की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- भक्ति भाव (Bhava): यह भजन पूर्ण शरणागति (विनीत भाव) और समर्पण की भावना से ओत-प्रोत है।
- सार्वभौमिक अपील: इसे किसी भी आयु वर्ग के लोग, बच्चे और वृद्ध अत्यंत आसानी से गा सकते हैं। इसकी लय और ताल मन को तुरंत एकाग्र कर देती है।
- निर्विघ्नता की प्राप्ति: हिंदू शास्त्रों के अनुसार, किसी भी नए कार्य, परीक्षा, गृह प्रवेश या व्यापार आरंभ से पूर्व गणेश स्तुति करने से कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं।
- मानसिक शांति: तनावपूर्ण जीवनशैली में इस भजन का श्रवण करने से मानसिक अशांति दूर होती है और मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए उचित समय और विधि का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:
- प्रातःकाल एवं संध्या वंदना: दिन की शुरुआत करते समय प्रातःकाल स्नान के पश्चात दीप प्रज्वलित कर इस भजन को सुनना या गाना अत्यंत फलदायी होता है।
- पूजा-अनुष्ठान के अवसर पर: गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी, दीपावली पूजन या किसी भी नए कार्य के आरंभ से पहले इस भजन का संकीर्तन करना शुभ माना जाता है।
- स्थान की पवित्रता: भजन का गायन हमेशा स्वच्छ स्थान, पूजा घर (मंदिर) या शांत वातावरण में करना चाहिए। गायन के दौरान मन में पवित्रता और आराध्य के प्रति अटूट विश्वास होना चाहिए।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के मुख्य आराध्य देव भगवान श्री गणेश हैं, जिन्हें वेदों और पुराणों में 'प्रणव स्वरूप' (ॐ कार) कहा गया है। भगवान गणेश आदि देव हैं, जिनकी पूजा सबसे पहले करने का वरदान उन्हें महादेव शिव और माता पार्वती से प्राप्त हुआ था। इस भजन को स्वरबद्ध करने वाली लोकप्रिय गायिका प्रिया सुभिक्षा रंगराजन ने अपनी शास्त्रीय और भावपूर्ण गायकी के माध्यम से इसे भक्ति रस से सिंच दिया है, जिससे श्रोता सीधे गणेश जी के चरणों से जुड़ जाते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
पारंपरिक गणेश भजनों की श्रृंखला में "गणेश शरणम शरणम गणेशा" एक अत्यंत लोकप्रिय धुन है जिसे देश-विदेश के लाखों भक्त प्रतिदिन स्मरण करते हैं। प्रिया सुभिक्षा रंगराजन ने इस पारंपरिक स्तुति को अपनी अनूठी संगीत शैली में पिरोया है। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को भगवान गणेश की सहज कृपा से जोड़ना और उन्हें विघ्नमुक्त जीवन का मार्ग दिखाना है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल हिंदी और ब्रज-अवधी मिश्रित लोकभाषा में रचित है, जिससे यह आम जनता के हृदय को सीधे स्पर्श करता है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'एकदंत', 'दयावंता', 'लंबोदर', और 'सिंदूर' गणेश जी के रूप का सटीक और काव्यात्मक चित्रण करते हैं। भजन की तुकबंदी (Rhyme Scheme) इसे गाने में बेहद आसान और संगीतमय बनाती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
गणेश वंदना हमें जीवन में कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक शिक्षाएं देती है:
- धैर्य और विनम्रता: विशालकाय शरीर और गजमुख होने के बावजूद भगवान गणेश का वाहन एक छोटा सा चूहा (मूषक) है, जो यह सिखाता है कि हमें कभी भी अपने बल या ज्ञान का अहंकार नहीं करना चाहिए।
- बाधाओं से न घबराना: जीवन में आने वाली हर कठिनाई को गणेश जी के स्मरण मात्र से पार किया जा सकता है। यह भजन हमें संकट के समय धैर्य रखने की प्रेरणा देता है।
- शरणागति का मार्ग: अहंकार को त्यागकर ईश्वर के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देना ही भक्त का सबसे बड़ा गुण है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | सांस्कृतिक / आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| शरणम | शरण में जाना, आश्रय लेना | भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण का भाव |
| एकदंत | जिसका एक दांत हो | महाभारत लिखते समय अपना एक दांत तोड़ने वाले गणेश जी का रूप |
| दयावंता | दयालु, कृपालु | भक्तों पर तुरंत कृपा करने वाले |
| मूसा वाहन | चूहे की सवारी करने वाले | चंचल मन पर नियंत्रण का प्रतीक |
| ऋद्धि-सिद्धि | सफलता और समृद्धि की देवियां | भगवान गणेश की दोनों पत्नियां जो शुभता लाती हैं |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"गणेश शरणम शरणम गणेशा..."
भावार्थ: हे विघ्नहर्ता गणेश! हम आपके चरणों में शरण लेते हैं। आप हमारे जीवन के सभी अंधकार और कष्टों को दूर कीजिए।
"एकदंत दयावंता चारभुजा धारी..."
भावार्थ: हे एकदंत! आप अत्यंत दयालु हैं और आपके चार हाथ भक्तों को अभयदान देने वाले हैं। आपके मस्तक पर सिंदूर सुशोभित है और आप मूषक की सवारी करते हैं।
"संकट हरण मंगल करण जग वंदना..."
भावार्थ: आप समस्त संकटों को हरने वाले और मंगल कार्यों को सिद्ध करने वाले हैं। संपूर्ण संसार आपकी वंदना करता है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
गणेश भजन के साथ निम्नलिखित पौराणिक मंत्र का स्मरण करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है:
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ: हे गजमुख (वक्रतुंड), विशाल शरीर वाले (महाकाय), करोड़ों सूर्यों के समान कांतिवान (सूर्यकोटि समप्रभ)! मेरे सभी कार्यों को बिना किसी बाधा के (निर्विघ्नं) हमेशा पूर्ण करें।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | गणेश शरणम शरणम गणेशा (Ganesh Sharanam Sharanam Gaesha) |
|---|---|
| आराध्य देव | भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता) |
| गायक / कलाकार | प्रिया सुभिक्षा रंगराजन (Priya Subhiksha Rangarajan) |
| भाषा | हिंदी / संस्कृत मिश्रित लोक शैली |
| भक्ति भाव | शरणागति, विनय और आनंद |
| उपयुक्त अवसर | प्रातःकालीन वंदना, गणेश चतुर्थी, पूजा, हवन, सत्संग |
| संबंधित लोकप्रिय लेख | श्री हनुमान चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तिलोकत (Bhaktilok.in) पर प्रकाशित यह सामग्री प्रामाणिक धार्मिक ग्रंथों, पारंपरिक लोक संगीत परंपराओं और विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन के आधार पर तैयार की गई है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, त्रुटिहीन और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुंचाना है। यह आलेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत सत्यापित है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- गणेश पुराण एवं मुद्गल पुराण (भारतीय पौराणिक ग्रंथ)
- सनातन धर्म की भजन परंपरा और लोकगीत संग्रह
- शास्त्रीय संगीत एवं देवotional म्यूजिक आर्काइव
संबंधित भजन एवं लेख
भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के बाद आप हमारे इन अन्य लोकप्रिय पावन स्तोत्रों और भजनों का भी पाठ कर सकते हैं:
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें