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इक तू सच्ची सरकार माँ झंडेयावाली (Ik Tu Sachhi Sarkar Maa Jhandewali Lyrics in Hindi) - Mahant Harbans Lal Bansi Mata Rani Bhajan

महांत Harbans Lal Bansi द्वारा रचित 'इक तू सच्ची सरकार माँ झंडेयावाली' भजन के लिरिक्स और हिंदी भावार्थ पढ़ें। माँ दुर्गा की भक्ति में डूबें | Bhaktilok

माँ भगवती आदिशक्ति जगदम्बा के चरणों में समर्पित महांत Harbans Lal Bansi जी द्वारा रचित अत्यंत लोकप्रिय एवं कर्णप्रिय माता रानी का भजन "इक तू सच्ची सरकार माँ झंडेयावाली (Ik Tu Sachhi Sarkar Maa Jhandewali)" माँ दुर्गा के दरबार की सच्ची महत्ता, अहैतुकी कृपा और शरणागत वत्सल स्वभाव का अद्भुत गुणगान करता है। पंजाब और उत्तर भारत के पारंपरिक देवी जागरणों, चैत्र एवं शारदीय नवरात्रों तथा माता के चौकी आयोजनों में इस भजन का स्मरण एवं गायन अनन्य भक्ति और आनंद की वर्षा करता है। 'झंडेयावाली' यानी त्रिकूट पर्वत पर विराजमान माँ वैष्णो देवी अथवा झंडेवालान मंदिर की अधिष्ठात्री माता महामाया का यह दरबार समस्त सांसारिक दुखों से मुक्ति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना जाता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पवित्र भजन के संपूर्ण लिरिक्स, पद-दर-पद हिंदी अर्थ, इसके आध्यात्मिक महत्व, गायन की परंपरा तथा जीवन में इसके संदेश पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भक्तलोक पर प्रस्तुत है महांत Harbans Lal Bansi जी द्वारा रचित माँ झंडेयावाली का यह पावन भजन, जिसे शुद्ध उच्चारण और पूर्ण श्रद्धा के साथ स्मरण करें:


ईक तू सच्ची सरकार माँ झंडेयावाली ॥
सच्चा तेरा दरबार माँ झंडेयावाली ॥

तेरीया दलीजा माई जीना आन मलिया,
फिर कदे मलिया ना ओना माई तालियां,
औ पावन तेरा प्यार माँ झंडेयावाली ॥
ईक तू सच्ची सरकार माँ झंडेयावाली ॥

दिल विच माई जेडे रुप तेरा तारदे,
नाल नाल अपने ओ होरा नु वी तारदे,
करदी सब ते उपकार माँ झंडेयावली ॥
ईक तू सच्ची सरकार माँ झंडेयावाली ॥

चरना च डिगाया नु भक्ति दा वर दे,
बच्चया निमानया दे सिर हाथ धर दे,
मेहरा दे छटे मार माँ झंडेयावली ॥
ईक तू सच्ची सरकार माँ झंडेयावाली ॥

ममता महान तेरी कृपा महान माँ,
गुण तेरे गनदा ऐ सारा जहान माँ,
बंसी साहिल बलिहार माँ झंडेयावली ॥
ईक तू सच्ची सरकार माँ झंडेयावाली ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

माँ झंडेयावाली के इस पावन भजन की हर एक पंक्ति में भक्त का अपनी आराध्य के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण समर्पण और अगाध विश्वास झलकता है। भजन के मुखड़े में कवि कहता है कि इस नश्वर संसार में और इस भौतिक जगत की झूठी हुकूमतों के बीच केवल और केवल हे माँ झंडेयावाली! तेरी ही सरकार (व्यवस्था) सच्ची है, क्योंकि तेरा दरबार ही एकमात्र ऐसा आश्रय है जहाँ किसी प्रकार का छल-कपट नहीं है, केवल सच्चा प्रेम और मोक्ष का विधान है।

आगे की पंक्तियों में भक्त माता के दरबार की महिमा का बखान करते हुए कहता है कि जो भी पुण्यात्मा या जिज्ञासु तेरी देहरी (दलीजा) पर आकर मत्था टेक लेता है, उसे जीवन में फिर कभी किसी और के द्वार पर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ती। माता की चौखट पर आते ही जीव को परम तृप्ति और अलौकिक प्रेम की प्राप्ति हो जाती है। भक्त उन पुण्यात्माओं का वर्णन करता है जो अपने हृदय में माता के रूप को बसा लेते हैं; माता न केवल उनका उद्धार करती है, बल्कि उनके संग-संग अन्य जरूरतमंदों और अनाथों को भी अपनी करुणा से तार देती है। माँ की यह कृपा सर्वव्यापक है जो बिना किसी भेदभाव के हर प्राणी पर बरसती है।

अंतिम चरणों में कवि महांत Harbans Lal Bansi जी ('बंसी साहिल') स्वयं को माता के चरणों में पूरी तरह समर्पित करते हुए प्रार्थना करते हैं कि हे माँ! जो भी तेरे चरणों में गिरता है या शरण में आता है, उसे भक्ति का महान वरदान प्रदान कर। दीन-दुखियों और निमार्ण बच्चों के सिर पर अपना वात्सल्यमय हाथ रख कर अपनी कृपा के ऐसे छींटे मार कि जीवन की सारी तपिश समाप्त हो जाए। अंत में वे कहते हैं कि हे माँ! तेरी ममता और तेरी कृपा की कोई सीमा नहीं है; संपूर्ण जहान तेरी महिमा का गुणगान कर रहा है और यह नाचीज दास तुझ पर अपना जीवन न्यौछावर करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति की उस अटूट परंपरा का हिस्सा है जहाँ भक्त अपनी माता (जगदम्बा) को ही अपना सर्वस्व मानता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति रस की प्रधानता: इस भजन में दास्य और सख्य भाव का सुंदर समन्वय है, जहाँ भक्त माता को अपनी सर्वोच्च संरक्षिका मानता है।
  • लोकप्रियता: पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के देवी जागरणों और नवरात्रोत्सवों में यह भजन अत्यंत चाव से गाया जाता है।
  • सरल एवं सहज भाषा: पंजाबी मिश्रित हिंदी और ब्रज-अवधि के शब्दों का सहज प्रयोग आम जनमानस के हृदय को तुरंत स्पर्श करता है।
  • आत्मिक शांति: इस भजन का निरंतर श्रवण करने से मन की व्यग्रता समाप्त होती है और माता के प्रति अगाध विश्वास दृढ़ होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

माँ भगवती के इस पावन भजन को गाने और सुनने के लिए किसी कठोर नियमों की आवश्यकता नहीं होती, अपितु भाव की शुद्धता सर्वोपरि है:

  • सर्वोत्तम समय: ब्रह्म बेला (प्रातःकाल) में अथवा संध्याकाल में माता की ज्योत प्रज्वलित करने के पश्चात इस भजन का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • विशेष अवसर: शारदीय और चैत्र नवरात्र, मंगलवार या शुक्रवार को माता की चौकी, जगराता अथवा नियमित पूजा के समय इसे सामूहिक या व्यक्तिगत रूप से गाया जा सकता है।
  • मानसिक स्थिति: भजन गाते समय मन में माता के भव्य स्वरूप, लाल चुनरी, स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित पिंड या मूर्ति का ध्यान करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की केंद्र बिंदु माँ झंडेयावाली (माँ दुर्गा, महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का समेकित स्वरूप) हैं। माता झंडेवालान का ऐतिहासिक मंदिर दिल्ली और पंजाब के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस भजन के रचयिता महांत Harbans Lal Bansi जी हैं, जिन्होंने अपनी सुमधुर वाणी और लेखन के माध्यम से माता की महिमा को घर-घर तक पहुँचाया है। संतों की इस परंपरा ने लोक-साहित्य और भक्ति आंदोलन को एक नई ऊर्जा प्रदान की है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

माता रानी के भजनों की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जहाँ लोक-कवियों और संतों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जनसामान्य को धर्म और भक्ति से जोड़ा। महांत Harbans Lal Bansi जी ने अपनी साधना के अनुभवों को सरल एवं लयबद्ध शब्दों में ढालकर इस भजन की रचना की। इसमें पहाड़ों वाली, झंडेयावाली और शेरावाली के उन सभी विशेषणों का समावेश है जो एक साधک के हृदय में माँ के प्रति उत्पन्न होते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन लोक-भाषा (पंजाबी और हिंदी के सुंदर मिश्रण) में रचित है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। 'सच्चा दरबार', 'मेहरा दे छटे', और 'दलीजा माई जीना आन मलिया' जैसे प्रयोग इसे ठेठ लोक-साहित्य की श्रेणी में रखते हैं जो सीधे श्रोता के दिल में उतर जाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें निम्नलिखित अमूल्य जीवन सीख मिलती हैं:

  1. एकनिष्ठ विश्वास: संसार में कई आश्रय स्थल मिल सकते हैं, परंतु परम सत्य और सच्ची सरकार केवल परमात्मा या आदिशक्ति की ही है।
  2. शरणागति का महत्व: माता के दरबार में अहंकार का कोई स्थान नहीं है; जो झुक जाता है, माँ उसे अपना बना लेती है।
  3. परोपकार की भावना: जिस प्रकार माता अपने भक्तों के साथ-साथ औरों का भी उद्धार करती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी दूसरों के कल्याण की भावना रखनी चाहिए।
  4. दीन-दुखियों की सहायता: निमान्या (निर्णयहीन या असहाय) के सिर पर हाथ रखना ही सच्ची मानवता और धर्म है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भावार्थ
सच्ची सरकार न्यायप्रिय और सत्य शासक माता का दरबार जहाँ किसी प्रकार का अन्याय या झूठ नहीं टिकता।
दलीजा देहरी या चौखट माता के मंदिर या दरबार की पवित्र सीमा।
मलिया प्राप्त कर लिया / अपना लिया जो माता की शरण में आ गया, उसे सब कुछ मिल गया।
तारदे उद्धार कर देना / भवसागर से पार करना भक्तों के संकटों का निवारण कर उन्हें मोक्ष देना।
निमान्या निराश्रित, गरीब या दीन-दुखी वे लोग जिनका इस संसार में माता के सिवा कोई नहीं होता।
मेहरा दे छटे कृपा की बौछार माता की अहैतुकी करुणा और आशीर्वाद का बरसना।
बलिहार न्यौछावर होना कवि द्वारा माता के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित करना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की प्रत्येक कड़ी का सूक्ष्म आध्यात्मिक विश्लेषण इस प्रकार है:

  • "ईक तू सच्ची सरकार माँ झंडेयावाली..." - यहाँ सांसारिक राजाओं और सरकारों की नश्वरता बताते हुए केवल आदिशक्ति को ही शाश्वत और सच्ची सत्ता माना गया है।
  • "तेरीया दलीजा माई जीना आन मलिया..." - एक बार जो जीव माँ के चरणों में आ गया, उसे फिर कभी दर-दर भटकने की आवश्यकता नहीं रहती।
  • "दिल विच माई जेडे रुप तेरा तारदे..." - जो भक्त अपने हृदय में माता की छवि बसा लेते हैं, वे दूसरों के लिए भी प्रेरणा और उद्धार का माध्यम बनते हैं।
  • "चरना च डिगाया नु भक्ति दा वर दे..." - साधक की सबसे बड़ी मांग धन-धान्य न होकर भगवद् भक्ति का वरदान होनी चाहिए, यही इस पंक्ति का सार है।
  • "बंसी साहिल बलिहार माँ झंडेयावली..." - रचयिता अंत में अपनी पूर्ण विनम्रता दर्शाते हुए माता के चरणों में नतमस्तक होते हैं।
  • भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

    माता झंडेयावाली की उपासना के संदर्भ में निम्नलिखित पावन श्लोक का स्मरण करना अति उत्तम माना जाता है:

    सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

    यह मंत्र माँ दुर्गा के तीनों रूपों का आह्वान करता है और साधक को भयमुक्त करता है। इसके साथ ही श्री दुर्गा चालीसा का नियमित पाठ करने से भी विशेष मानसिक शांति मिलती है।

    एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

    विवरण तथ्य / जानकारी
    भजन का नाम इक तू सच्ची सरकार माँ झंडेयावाली (Ik Tu Sachhi Sarkar Maa Jhandewali)
    समर्पित देवी माँ दुर्गा / माँ झंडेयावाली (आदिशक्ति)
    रचयिता / गायक महांत Harbans Lal Bansi (बंसी साहिल)
    भाषा हिंदी / पंजाबी मिश्रित लोक भाषा
    मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, शरणागति और अगाध विश्वास
    उचित अवसर नवरात्र, जगराता, माता की चौकी और दैनिक संध्या वंदन
    संग्रह भक्तिलोक देवी भजन संग्रह

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    इस पावन भजन के रचयिता और प्रसिद्ध गायक महांत Harbans Lal Bansi (जिन्होंने भजन में 'बंसी साहिल' नाम का प्रयोग किया है) हैं।

    'माँ झंडेयावाली' से तात्पर्य उस आदिशक्ति जगदम्बा से है जिनका दरबार झंडेवालान (दिल्ली) या त्रिकूट पर्वत पर स्थित है और जिनके दरबार में हमेशा धर्म एवं विजय की पताका (झंडा) लहराती रहती है।

    इस भजन को शारदीय एवं चैत्र नवरात्र, माता के जगराते, मंगलवार और शुक्रवार की माता की चौकी तथा दैनिक संध्या आरती के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि इस संसार में केवल माता का दरबार ही सच्चा और निष्कलंक आश्रय है। शरणागत होकर भक्ति का वरदान मांगना ही मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य होना चाहिए।

    हाँ, इस भजन को घर पर माता की चौकी सजाकर, ज्योत जलाकर या सामान्य पूजा के दौरान पूरे परिवार के साथ पूरी श्रद्धा और आनंद के साथ गाया जा सकता है।

    माता रानी की कृपा प्राप्त करने के लिए छल-कपट से रहित शुद्ध हृदय, दीनता, अगाध विश्वास और बच्चों जैसी निष्कपट पुकार की आवश्यकता होती है।

    हाँ, भक्तलोक पर आपको माता की भेंटें और लोकप्रिय भजन जैसे अनेक पावन गीत और स्तोत्र मिल जाएंगे।

    भजन के सकारात्मक शब्द और संगीतमय धुन मन की तरंगों को शांत करते हैं, जिससे तनाव कम होता है और चेतना ईश्वर की ओर केंद्रित होती है।

    संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

    यह आलेख पारंपरिक स्रोतों, लोक-साहित्य और प्रामाणिक devotional संदर्भों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को माता रानी के इस पावन भजन के अर्थ, भाव और आध्यात्मिक गहराई से परिचित कराना है। सभी पंक्तियों और भावार्थों को उच्च कोटि की धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है ताकि साधकों को पूर्ण संतोष मिल सके।

    स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

    • पारंपरिक देवी जागरण एवं लोक-साहित्य संग्रह
    • महांत Harbans Lal Bansi जी के संकीर्तन एवं भजन प्रकाशन
    • श्रीमद्देवीभागवत पुराण एवं दुर्गा सप्तशती (साधना संदर्भ)
    • उत्तर भारतीय भक्ति संगीत परंपरा एवं लोकगीतकोश

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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