Holi Bhajan

कोयलया कु कु गाई आई रुत मस्तानी आई (Koyalya Ku Ku Gaayi Aayi Rut Mastani Aayi Lyrics) - Bhaktilok

68 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें


खाटूवाले ने सबको बुलाया है - BhaktiLok

Song: कोयलया कु कु गाई आई रुत मस्तानी आई (Koyalya Ku Ku Gaayi Aayi Rut Mastani Aayi)
Singer : Shital Chandak Sharma (+91 8797770838)
Lyrics : Nitesh Sharma Golu
MUSIC : SOUNDCHEF THE BARBARIKA (PRITAM-NITESH)
Music Produced,Mixed and Mastered by Pritam Chowdhury @SOUNDCHEFTHEBARBARIKASTUDIO
Live Chorus Designed by Nitesh Sharma
Flute : Rupak Mukherjee
Special Thanks : Mr. Amit Sharma
Special Appearance : Nitesh Sharma Golu
Digitally Empowered & Reels Marketed By : Atalchatra 
Production By Atalchatra The Barbarika 
Project By Keshav Agrawal 
Video : Atalchatra Creations
DOP : Abhishek Chatterjee
Dance Group : Sumo Da And Team
Production Coordinator : Kushal Shah
Artist : Jishu Da And Group
DI : Nikhil Raj
Location Courtesy : Sumon Da (AP Studios)
Category: Hindi Devotional (Khatu Shyam Bhajan)
Producers: Amresh Bahadur, Ramit Mathur
Label: Yuki

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

कोयलया कु कु गाई आई रुत मस्तानी आई (Koyalya Ku Ku Gaayi Aayi Rut Mastani Aayi Lyrics in Hindi):

कोयलया कु कु गाई, आई रुत मस्तानी आई 
चहुँ दिशाओ से ये पुरवाई, श्याम संदेसा लाई
खाटू वाले ने सबको बुलाया है
फागण का प्यारा त्यौहार आया है 
श्याम प्रेमी की टोली आई है 
उनकी तो होली आई है
रंगो की क्या बात करना है
जहाँ देखो रंगोली छाई है 
श्याम दीवानो का चाव सवाया है 
फागण का प्यारा त्यौहार आया है 
बाबा ने मेला लगाया है 
सबको निमंत्रण भिजवाया है 
खाटू की गलियों को बाबा ने
स्वर्ग से सुन्दर सजाया है
देखो जिधर ही उधर आनंद छाया है 
फागण का प्यारा त्यौहार आया है 
हम मिलकर खाटू जाएंगे
हम भी  निशान चढ़ाएंगे
चंग की थाप पे हम सब भी 
झूमेंगे नाचेंगे गाएंगे
गोलू होकर के तैयार आया है 
फागण का प्यारा त्यौहार आया है 

कोयलया कु कु गाई आई रुत मस्तानी आई (Koyalya Ku Ku Gaayi Aayi Rut Mastani Aayi Lyrics in English) : 

Koyalya Ku Ku Gaayi, Aayi Rut Mastani Aayi
Chahun Dishaaon Se Ye Purvaai, Shyam Sandesha Laayi
Khatu Wale Ne Sabko Bulaya Hai
Fagan Ka  Pyara Tyohar Aaya Hai
Shyam Premi Ki Toli Aayi Hai
Unki To Holi Aayi Hai
Rango Ki Kya Baat Karna Hai
Jahan Dekho Rangoli Chhayi Hai
Shyjam Diwano Ka Chaav Sawaya Hai
Fagan Ka  Pyara Tyohar Aaya Hai
Baba Ne Mela Lagaya Hai
Sabko Nimantran Bhijwaya Hai
Khatu Ki Galiyon Ko Baba Ne
Swarg Se Sundar Sajaya Hai
Dekho Jidhar Hi Udhar Anand Chhaya Hai
Fagan Ka  Pyara Tyohar Aaya Hai
Hum Milkar Khatu Jayenge
Hum Bhi Nishaan Chadhayenge
Chang Ki Thaap Pe Hum Sab Bhi
Jhoomenge Nachenge Gayenge
Golu Hokar Ke Taiyar Aaya Hai
Fagan Ka  Pyara Tyohar Aaya Hai


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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "कोयलया कु कु गाई आई रुत मस्तानी आई (Koyalya Ku Ku Gaayi Aayi Rut Mastani Aayi Lyrics) - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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