shanidev bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

श्री शनि चालीसा (Shri Shani Chalisa Lyrics in Hindi) - Shani Mahatmyam MAHENDRA KAPOOR Shani Chalisa

संकटमोचन हनुमान भजन "श्री शनि चालीसा (Shri Shani Chalisa Lyrics in Hindi) - Shani Mahatmyam MAHENDRA KAPOOR Shani Chalisa" के लिरिक्स, भावार्थ और मंगलवार पूजा विधि। नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए हनुमान संकीर्तन पढ़ें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।
 श्री शनि चालीसा (Shri Shani Chalisa Lyrics in Hindi) - Shani Mahatmyam MAHENDRA KAPOOR Shani Chalisa -  
{ दोहा }जय-जय श्री शनिदेव प्रभु सुनहु विनय महराज।

करहुं कृपा हे रवि तनय राखहु जन की लाज।।
[ चौपाई ]जयति जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥

चारि भुजा तनु श्याम विराजै।
माथे रतन मुकुट छबि छाजै ॥

परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।
हिय माल मुक्तन मणि दमके ॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥

पिंगल कृष्णो छाया नन्दन।
यम कोणस्थ रौद्र दुखभंजन ॥

सौरी मन्द शनी दश नामा।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।
रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं ॥

पर्वतहू तृण होई निहारत।
तृणहू को पर्वत करि डारत ॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।
कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो ॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई।
मातु जानकी गई चुराई ॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।
मचिगा दल में हाहाकारा ॥

रावण की गति-मति बौराई।
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥

दियो कीट करि कंचन लंका।
बजि बजरंग बीर की डंका ॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।
चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी।
हाथ पैर डरवायो तोरी ॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो।
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों।
तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों ॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।
आपहुं भरे डोम घर पानी ॥

तैसे नल पर दशा सिरानी।
भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।
पारवती को सती कराई ॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा।
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।
बची द्रौपदी होति उघारी ॥

कौरव के भी गति मति मारयो।
युद्ध महाभारत करि डारयो ॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।
लेकर कूदि परयो पाताला ॥

शेष देव-लखि विनती लाई।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना ॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
हय ते सुख सम्पति उपजावैं ॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा।
सिंह सिद्धकर राज समाजा ॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
चोरी आदि होय डर भारी ॥

तैसहि चारि चरण यह नामा।
स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा ॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं ॥

समता ताम्र रजत शुभकारी।
स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी ॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।
दीप दान दै बहु सुख पावत ॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥

[ दोहा ]पाठ शनिश्चर देव को की हों 'भक्त' तैयार।
करत पाठ चालीस दिन हो भवसागर पार ॥


साझा करें:
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्री शनि चालीसा (Shri Shani Chalisa Lyrics in Hindi) - Shani Mahatmyam MAHENDRA KAPOOR Shani Chalisa - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।
भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।
🕒 साधना एवं गायन विधि हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।
शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!