भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

बजरंगी मुझे भव से पार लगा दो (BAJRANGI MUJHE BHAV SE PAAR LAGA DO ) - संकट हर्ता श्री बालाजी का भजन

संकट हर्ता श्री बालाजी का भजन 'बजरंगी मुझे भव से पार लगा दो' संकटों से मुक्ति और भक्ति का अद्भुत साधन है।

प्रस्तावना एवं परिचय

हर संकट से मुक्ति का अद्भुत मंत्र

श्री बालाजी का यह भजन संकटों से राहत पाने का सशक्त साधन है। इसका नियमित पाठ करें।
बजरंगी मुझे भव से पार लगा दो
मैं भक्त हूँ तुम्हारा, प्रभु सुख निधान लगा दो
बजरंगी मुझे भव से पार लगा दो।

जब संकट आरे, मैं रहूँ बेसहारा,
तुम तो हो संकट हर्ता, तू ही करुणा का निधान लगा दो।
बजरंगी मुझे भव से पार लगा दो।
दुखों में जब लिपटा, हृदय मेरा रोता,

तुमसे ही तो मिलता सच्चा सुख का आधार लगा दो।
बजरंगी मुझे भव से पार लगा दो।
जब मैं डूबने लगा, बीच सागर के जाल में,
तुमसे ही तो मेरे जीवन को उभार लगा दो।

बजरंगी मुझे भव से पार लगा दो।
साझा करें:
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ इस भजन की रचना भक्तों द्वारा संकट हर्ता श्री बालाजी की महिमा का बखान करने के लिए की गई है। भजन के आरंभ में भक्त भगवान से प्रार्थना करते हैं कि 'बजरंगी मुझे भव से पार लगा दो।' यहाँ 'भव' से तात्पर्य है जन्म-मृत्यु का संसार, जहाँ भक्त कष्टों और परेशानियों में घिरा हुआ है। भक्त अपने दुर्बलता को प्रकट करते हुए यह भाव व्यक्त करते हैं कि वह श्री बालाजी के बिना निराश और असहाय हैं, और यही कारण है कि वह प्रभु से shelter (सुरक्षा) की प्रार्थना कर रहे हैं। भजन में यह भी व्यक्त किया गया है कि जब भक्त संकट में होते हैं, तो उनके हृदय में दुःख और असहायता होती है, लेकिन यह विश्वास है कि प्रभु संकट हर्ता हैं, जो भक्त की सभी पीड़ाओं को दूर करते हैं।
भावार्थ में यह प्रतित होता है कि संकट के समय भक्त की प्रकृति कमजोर होती है, और वह पूरी तरह से प्रभु पर निर्भर हो जाता है। जैसे ही भक्त जीवन के संघर्षों में फंसते हैं, वह प्रभु से सहायता की याचना करता है। 'जब मैं डूबने लगा, बीच सागर के जाल में' से यह अर्थ निकलता है कि जीवन के तूफानों में फंसी परिस्थितियों में कोई भी सहारा नहीं मिलता। किन्तु भक्त की यह उम्मीद रहती है कि 'तुमसे ही तो मेरे जीवन को उभार लगा दो'। यहाँ भक्त की भक्ति और विश्वास की सच्चाई दिखती है। यह भजन भक्त को यह भी सिखाता है कि किस प्रकार संकटों का सामना करने के लिए आत्मसमर्पण आवश्यक है।

इस भजन का एक गहरा धार्मिक आधार भी है, जहाँ भक्त की भक्ति मार्ग की ओर संकेत है। भक्ति मार्ग का पालन करते हुए भक्त को अपने सभी दुख और कष्टों को प्रभु के चरणों में अर्पित करना चाहिए। इस भजन में यह भी आध्यात्मिक सत्य है कि ईश्वर हर क्षण भक्त के साथ है, और अगर भक्त सच में भक्ति करता है, तो प्रभु उसे सभी बुराइयों से पार लगा देते हैं। भक्ति और शरणागति का यह भाव भक्त के जीवन में एक नई दिशा प्रदान करता है जहाँ वह अपने अज्ञान और दुःख के अंधकार से निकलेगा।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ इस भजन का पौराणिक आधार उन शास्त्रों से जुड़ा है जहाँ श्री रामाचार्य और श्री हनुमान की महिमा का वर्णन है। हनुमान जी को संकट हर्ता माना जाता है और उनका भक्तिपूर्ण नाम 'बजरंगी' उन्हें न केवल बलशाली बनाता है, बल्कि भक्तों की रक्षा का भी आश्वासन देता है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान चालीसा और अन्य हनुमान भजनों का गायन भक्तों के लिए मानसिक और आध्यात्मिक शांति लाता है। इस प्रकार सें, यह भजन श्री हनुमान और उनके भक्तों के बीच अद्भुत संबंध को भी दर्शाता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक चिंता और तनाव को दूर किया जा सकता है। यह भजन भक्त को शांति और सुकून देने में सहायक होता है। इससे व्यक्ति के अंदर मजबूत आत्मविश्वास और संतुलन विकसित होता है। विधिपूर्वक गाने से मानसिकता में सकारात्मक परिवर्तन और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
🕒 साधना एवं गायन विधि इस भजन का पाठ सुबह के समय करना सबसे उत्तम होता है। इसे गाते समय एक दीया जलाना और कुछ मीठा या फल का भोग लगाना परंपरा है। भक्त को ध्यान लगाते हुए सही आसन में बैठकर भजन का गान करना चाहिए, जिससे ध्यान एकाग्रता और श्रवण शक्ति में बढ़ोतरी हो।

�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) बजरंगी मुझे भव से पार लगा दो भजन का मुख्य संदेश क्या है?इस भजन का मुख्य संदेश है संकटों में श्री बालाजी की शरण में जाना और उनकी कृपा से जीवन के दुखों से पार होना।
क्या इस भजन का कोई विशेष पूजा विधि है?इस भजन का पाठ करना सुबह का सबसे उत्तम समय है। इसे सुनने के बाद गुड़ या मिठाई का भोग लगाना अच्छा माना जाता है।
क्यों बजरंगी को संकट हर्ता समझा जाता है?बजरंगी श्री हनुमान जी का नाम है, जिन्हें संकटों को दूर करने की शक्ति के लिए पूजा जाता है। उनकी भक्ति सबसे बड़ी शक्ति है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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