Mahadev Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

शिव तांडव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram) - Shiv Storam Shankar Mahadevan

शंकर महादेवन द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्रम् का पाठ करें। रावण रचित इस स्तोत्र के अर्थ, लाभ और आध्यात्मिक महत्व को संदर्भ एवं व्याख्या सहित जानें।

स्तोत्र संग्रह (Stotram) • महादेव भजन

शिव तांडव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram) - शंकर महादेवन - Bhaktilok

सनातन धर्म, वेद-पुराणों और देवभूमि भारत की आध्यात्मिक परंपरा में भगवान शिव को संहार के देवता के साथ-साथ परम योगी, नटराज और समस्त कलाओं के आदि आदिशंकराचार्य के रूप में पूजा जाता है। लंकापति रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram) भगवान भोलेनाथ की स्तुति में गाया जाने वाला एक ऐसा अद्वितीय, ओजस्वी और ऊर्जावान स्तोत्र है, जिसके प्रत्येक शब्द में रुद्र की महाशक्ति, डमरू की नाद-ब्रह्म ध्वनि और तांडव नृत्य की विराट गतिशीलता समाहित है। जब इस पावन स्तोत्र को प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन (Shankar Mahadevan) की ऊर्जावान और मंत्रमुग्ध कर देने वाली वाणी में गाया जाता है, तो यह सुनने वाले के भीतर एक अलौकिक चेतना, भक्ति भाव और शिवत्व का संचार कर देता है। शिव तांडव स्तोत्र का पाठ और श्रवण न केवल मानसिक एकाग्रता को बढ़ाता है, बल्कि साधक को भवसागर के विकारों से मुक्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। भक्तालोक (Bhaktilok) के इस पावन आलेख में हम इस अद्भुत स्तोत्र के मूल संस्कृत पाठ, पदच्छेद, शब्दार्थ, विस्तृत भावार्थ और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

📌 इस लेख में आप क्या जानेंगे?
  • शिव तांडव स्तोत्रम् का संपूर्ण संस्कृत पाठ और शुद्ध उच्चारण नियम।
  • शंकर महादेवन द्वारा गाए गए इस स्तोत्र की लोकप्रियता और संगीत पक्ष।
  • रावण रचित प्रत्येक श्लोक का सरल हिंदी अर्थ एवं गहरा आध्यात्मिक भावार्थ।
  • दैनिक जीवन में इस स्तोत्र के पाठ से मिलने वाले मानसिक और आध्यात्मिक लाभ।

मूल संस्कृत श्लोक / पावन पाठ | Complete Shiv Tandav Stotram Lyrics

ਜਟਾटवीगलज्ज्लप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्गोर्वह चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्।।1।। जटाकटाहसभ्रमभ्रमन्निलीम्पनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि। धगद्धगद्धगज्ज्वल ललाटपट्टपावके किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम।।2।। धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधु बन्धुर स्फुरद्दिगंत संतति प्रमोद मानमानसे। कृपा कटाक्ष धोरणी निरुद्ध दुर्दरापदि क्वचिद्दिगंबरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि।।3।। जटा भुजङ्ग पिङ्गल स्फुरत्फणामणिप्रभा कदम्ब कुंकुम द्रव प्रलिप्त दिग्वधूमुखे। मदन्धा सिन्धुर स्फुरत्त्वगुत्तरीयमे मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि।।4।। सहस्र लोचन प्रभृत्य शेष लेख शेखर प्रसून धूली धोरणी विधूसराङ्घ्रि भूतलः। भुजङ्ग राज मालया बद्ध जटाजूट मयकः शियै चिराय जायतां चकोर बंधु शेखरः।।5।। ललाट चत्वरज्वलद्धनञ्जयेफुलिङ्गभा निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम्। सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपाली संपदः शिरो जयत्तनः सताम्।।6।। कराल भाल पट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुतीकृत प्रचण्डपञ्चसायके। धरेधरेन्द्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक प्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचने रतिर्गमम्।।7।। नवीन मेघ मण्डली निरुद्ध दुर्दुरस्फुरत्कुहुनिशिनीतमः प्रबंधबद्धकन्धरः। मदन्निन्दिरप्रदं प्रबन्धकंधरं शिनीतमः प्रबन्धकंधरं निबद्धकन्धरः श्रियाः।।8।। प्रफुल्लनीलपंकज प्रपंचकालिम प्रभा वलंबिकंठकंद रुचि प्रबद्धकंधरम्। स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदंधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे।।9।। अगत्त्वंद दृढप्रवाहमत्त्वहस्तमत्त्वदृढप्रवाहमत्त्वमाध्यमंजरी। अखंडचीरभंगसंवतिष्ठमानमूर्धनि धिग्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके।।10।। सुधा मयूख लेखया विराजमान शेखरं महाकपाली संपदः शिरो जयत्तनः सताम्। कराल भाल पट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुतीकृत प्रचण्डपञ्चसायके।।11।। प्रधान सर्वमङ्गला कलंब मंजरी रसीह चित्तवृत्तमदात्मकं सदाशिवम् भजे। ललाट पट्टिका धगद्धगज्जलद्धनञ्जयाहुतीकृत प्रचण्डपञ्चसायके रतिः प्रतिक्षणं मम।।12।। कराल भाल पट्टिका धगद्धगज्ज्वलद्धनञ्जयाहुतीकृत प्रचण्डपञ्चसायके। धरेधरेन्द्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक प्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचने रतिर्मम।।13।। नवीन मेघ मण्डली निरुद्ध दुर्दुरस्फुरत्कुहुनिशिनीतमः प्रबंधबद्धकन्धरः। प्रलंब बालगर्जद्मल्लिकावली कवलम्बलम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।।14।। इतं हि पांडवं प्रदीप्तवानलक्षितं प्रपंचचित्रचारितं त्रिलोचकंच तांडवम्। पठन् स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेति संतति हरे गुरौ सुभक्तिमाशु ಯಾति नाऽन्यथा गतिम्।।15।।

शिव तांडव स्तोत्रम् का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

शिव तांडव स्तोत्रम् लंका के राजा रावण द्वारा रचित एक अत्यंत ओजस्वी स्तोत्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार रावण को अपने बल और सोने की लंका पर बहुत अहंकार हो गया था। तब अपने भक्त के अहंकार को चूर करने और उसे धर्म का मार्ग दिखाने के लिए भगवान शिव ने कैलाश पर्वत को अपनी एक उंगली के नीचे दबा लिया था। कैलाश पर्वत के नीचे दबने पर जब रावण को अपनी भूल का अहसास हुआ, तो उसने भगवान शिव की स्तुति में इसी शिव तांडव स्तोत्र की रचना की और इसका गान किया। रावण की इस अनन्य भक्ति और डमरू की ताल पर रचे गए छंदों से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने न केवल उसे मुक्त किया, बल्कि उसे 'रावण' नाम और चंद्रहास तलवार भी प्रदान की।

श्लोकवार भावार्थ:

  • प्रथम श्लोक: जिनकी जटाओं से बहने वाला गंगा का पवित्र प्रवाह उनके कंठ को पावन करता है, जिनके गले में बड़े-बड़े सर्पों की मालाएं लिपटी हुई हैं और जिनके डमरू से 'डम-डम' की दिव्य ध्वनि गूंज रही है, वे भगवान शिव हमारे जीवन में मंगल (कल्याण) प्रदान करें।
  • द्वितीय श्लोक: जिनकी जटाओं रूपी कटाह में आकाशगंगा की लहरें वेग से भ्रमण कर रही हैं, जिनके ललाट पर प्रलयी अग्नि धधक रही है और जो अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करते हैं, ऐसे महादेव में मेरी अनन्य रति (प्रेम) हो।
  • तृतीय श्लोक: जो हिमालय पुत्री पार्वती के विलास के साथी हैं, जिनका मन संपूर्ण ब्रह्मांड और दिशाओं की सृष्टि देखकर प्रसन्न होता है, जिनके कृपा-कटाक्ष से भक्तों के बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते हैं, और जो दिगंबर (आकाश को वस्त्र मानने वाले) हैं, उन भगवान शिव में मेरा मन रम जाए।
  • चतुर्थ श्लोक: जिनकी जटाओं में लिपटे हुए सर्पों के फणों की मणियों की प्रभा दिशाओं को प्रकाशित करती है, जो हाथियों की चम्ड़ी का वस्त्र धारण करते हैं, उन समस्त भूतों के पालनहार भगवान शिव मेरे मन को अद्भुत आनंद प्रदान करें।
  • पंचम श्लोक: इंद्र और अन्य समस्त देवताओं के मुकुटों की धूल जिन शिव चरणों की वंदना करती है, जिनकी जटाओं में सर्पराज माला के रूप में सुशोभित हैं, वे चंद्रमौली शिव हमारे लिए चिरकाल तक कल्याणकारी हों।

इस प्रकार संपूर्ण स्तोत्र भगवान शिव के रौद्र और शांत दोनों स्वरूपों का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। यह हमें सिखाता है कि किस प्रकार समर्पित भाव और शुद्ध उच्चारण से महादेव को शीघ्र प्रसन्न किया जा सकता है।

शंकर महादेवन और शिव तांडव स्तोत्रम् की आधुनिक लोकप्रियता

संगीत जगत के दिग्गज गायक शंकर महादेवन (Shankar Mahadevan) ने अपनी ओजस्वी और तीव्र गति वाली गायन शैली (Fast-paced classical rendition) से शिव तांडव स्तोत्रम् को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। उनकी आवाज में गाए गए इस स्तोत्र ने आधुनिक युवा पीढ़ी को भी सनातन संस्कृति और शिव आराधना से जोड़ दिया है। शंकर महादेवन की गायकी में डमरू की थाप, संस्कृत के कठिन वर्णों का स्पष्ट उच्चारण और रुद्राक्ष जैसी ऊर्जा का आभास होता है। यही कारण है कि आज शिवरात्रि, सावन मास और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में उनके संस्करण का व्यापक रूप से श्रवण और गान किया जाता है।

🎵 गायन शैली की विशेषताएं:
  • संस्कृत के महाप्राण वर्णों और संयुक्त अक्षरों का सटीक उच्चारण।
  • शिव के तांडव नृत्य की गति के अनुसार स्वर का आरोह-अवरोह।
  • संगीत में आधुनिक शास्त्रीय वाद्य यंत्रों और पारंपरिक धुनों का अनूठा सम्मिश्रण।
  • भक्त के अंतःकरण में जोश, साहस और भक्ति का अद्भुत संचार।

शिव तांडव स्तोत्रम् पाठ के आध्यात्मिक लाभ एवं महत्व

शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव आदि योगी हैं। शिव तांडव स्तोत्रम् का नियमित पाठ या श्रवण करने से साधक को निम्नलिखित अलौकिक लाभ प्राप्त होते हैं:

🧘‍♂️ मानसिक एकाग्रता और ऊर्जा

इस स्तोत्र की लय और संस्कृत के श्लोक मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को जाग्रत करते हैं, जिससे स्मरण शक्ति, एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

🛡️ भय और संकटों का नाश

रुद्र रूप की स्तुति होने के कारण इसके नियमित पाठ से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन के सभी प्रकार के भय, अकाल मृत्यु और संकट दूर होते हैं।

🗣️ वाणी दोष निवारण

कठिन संस्कृत शब्दों के उच्चारण से वाणी शुद्ध होती है और वाक् सिद्धि प्राप्त होती है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो संगीत या भाषण के क्षेत्र में हैं।

✨ आध्यात्मिक उन्नति

यह स्तोत्र अहंकार का नाश कर साधक के भीतर समर्पण और विनम्रता का भाव जाग्रत करता है, जिससे भगवान शिव की कृपा सहज ही प्राप्त होती है।

एक नजर में शिव तांडव स्तोत्रम् की जानकारी | Quick Information

विवरण (Parameter) तथ्य (Information)
स्तोत्र का नाम शिव तांडव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram)
रचयिता लंकापति महाराज रावण
आराध्य देव भगवान शिव (महादेव / नटराज)
भाषा संस्कृत
प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन एवं अन्य शास्त्रीय गायक
मुख्य रस / भाव वीर रस, रुद्र रस एवं अनन्य भक्ति भाव
शुभ अवसर महाशिवरात्रि, सावन मास, प्रदोष व्रत और दैनिक पूजा
संबंधित पावन लेख श्री हनुमान चालीसा एवं शिव स्तोत्र संग्रह

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिव तांडव स्तोत्रम् की रचना लंका के राजा रावण ने की थी। जब उसने अपने बल के अहंकार में कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया, तब भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया था। अपनी भूल का अहसास होने पर रावण ने भगवान शिव की स्तुति में इस अद्भुत स्तोत्र की रचना की थी।

शंकर महादेवन ने अपनी असाधारण संगीत कला, तीव्र गति और ओजस्वी वाणी से इस स्तोत्र को गाया है। उनकी गायकी में डमरू की गूंज और रुद्र तांडव की ऊर्जा का अहसास होता है, जो श्रोताओं के मन में एक नया उत्साह और भक्ति भाव भर देता है।

इस स्तोत्र का पाठ प्रातः काल स्नान के बाद या प्रदोष काल (संध्या के समय) में करना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा सावन मास, महाशिवरात्रि और सोमवार के दिन इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।

हाँ, बिल्कुल। सनातन संस्कृति में भगवान शिव और माता पार्वती अर्धनारीश्वर के रूप में पूजे जाते हैं। कोई भी स्त्री या पुरुष पूरी श्रद्धा, पवित्रता और भक्ति भाव के साथ इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है।

इसके नियमित पाठ से मानसिक शांति, एकाग्रता, भय से मुक्ति, वाणी की शुद्धि और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह साधक के भीतर साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तालोक (Bhaktilok) पर प्रकाशित यह सामग्री सनातन ग्रंथों, पौराणिक कथाओं और पारंपरिक स्तोत्र संग्रहों के अध्ययन पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक धार्मिक सामग्री उपलब्ध कराना है। इस लेख की समस्त सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत मान्य है।


स्रोत एवं संदर्भ (Sources & References):

  • शिव पुराण - कोट रुद्र संहिता
  • रावण रचित मूल 'शिव तांडव स्तोत्रम्' ग्रंथ
  • भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं स्तोत्र परंपरा के ऐतिहासिक संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 04 Nov 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!