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करेली छठी माई के व्रत ( Kareli Chhathi Mayi Ke Karab Baratiyaa) - Nagin Chhath Geet

करेली छठी माई के व्रत (Kareli Chhathi Mayi Ke Karab Baratiyaa) नागिन छठ गीत के संपूर्ण बोल, भावार्थ और लोक संस्कृति में महत्व पढ़ें केवल Bhaktilok पर।

करेली छठी माई के व्रत (Kareli Chhathi Mayi Ke Karab Baratiyaa) - नागिन छठ गीत एवं आध्यात्मिक परिचय

लोक आस्था के महान पर्व छठ महापर्व की महिमा केवल भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में अपनी अनूठी संस्कृति और अनुशासन के लिए विख्यात है। लोकगीतों के बिना छठ पर्व की परिकल्पना भी अधूरी मानी जाती है। इसी पावन परंपरा को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय एवं कर्णप्रिय लोकगीत "करेली छठी माई के व्रत (Kareli Chhathi Mayi Ke Karab Baratiyaa) - Nagin Chhath Geet" भोजपुरी संगीत जगत की एक अनमोल धरोहर है। यह गीत न केवल छठी मैया के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण को व्यक्त करता है, बल्कि व्रत के नियमों, कठिनाइयों और उसके बाद मिलने वाले आत्मिक संतोष को भी अत्यंत सुंदर ढंग से पिरोता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन गीत के संपूर्ण बोल, इसके गहरे भावार्थ, संगीत पक्ष, और लोक संस्कृति में इसके महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। छठ व्रत कठिन अनुशासन, शुचिता और प्रकृति की आराधना का प्रतीक है, जहाँ सूर्य नारायण और छठी माता (उषा देवी) की संयुक्त उपासना से साधक के जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं। इस गीत के माध्यम से एक व्रती स्त्री की मनोदशा, उसकी अटूट निष्ठा और छठी मैया के प्रति उसका निर्मल प्रेम स्पष्ट रूप से झलकता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

Song :- Kareli Chhathi Mayi Ke Karab Baratiyaa
Music Director :- Rajesh-Rajnish
Movie Director :- Raj Kumar R. Pandey
Producer :- Raj Kumar R. Pandey
Company/ Label :- Wave


(स्थाई / मुखड़ा)
करेली छठी माई के व्रत, करब बरतिया...
सुनिहें छठी मइया हमार अरतिया,
जागि के जगइब भिनसरिया, करब बरतिया...
करेली छठी माई के व्रत, करब बरतिया...

(अंतरा - 1)
घाट पर जाइब धइके दउरा बहँगिया,
साथ में रहीहें सखिया संगहिया,
सोना के सुरुज देव भइले असवरिया,
पूरब दिशी खेले लाल चुनरिया...
करेली छठी माई के व्रत, करब बरतिया...

(अंतरा - 2)
निर्जला रहीब दिनवा रातिरिया,
पहिरी नईहर के भेजल साड़िया,
बाल-बच्चा सुख खातिर जोड़ब हथरिया,
मइया मोरी सुनीहें पुकार बतरिया...
करेली छठी माई के व्रत, करब बरतिया...

(अंतिम चरण / समापन)
राजेश-रajnish के सुरवा सुनावैं,
राजकुमार पाण्डेय महिमा गावैं,
भक्तन के भीड़ बाटे भारी नगरिया,
जय छठी मइया बोलैं सब नर-नारिया...
करेली छठी माई के व्रत, करब बरतिया...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह लोकगीत एक व्रती स्त्री के अंतर्मन की सच्ची पुकार और उसकी भक्ति भावना का जीवंत दस्तावेज है। गीत के मुखड़े में व्रती यह संकल्प लेती है कि वह पूरी निष्ठा के साथ छठी मैया का व्रत रखेगी और अपनी इस कठोर साधना से मैया को प्रसन्न करेगी। वह कहती है कि वह भोर में जागकर पूरी पवित्रता के साथ पूजा की तैयारी करेगी।

पहले अंतरे में छठ घाट के सुंदर दृश्य का वर्णन किया गया है। व्रती महिलाएँ सिर पर बांस की दउरा (दलिया) और बहंगी रखकर पारंपरिक गीतों को गाते हुए घाट की ओर प्रस्थान करती हैं। इस दौरान सखियों का साथ पर्व के उत्साह को और अधिक बढ़ा देता है। उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा का यहाँ अत्यंत मनमोहक उल्लेख है, जहाँ भगवान भास्कर को 'सोना के सुरुज देव' कहकर उनकी महत्ता को दर्शाया गया है।

दूसरे अंतरे में व्रत की कठोरता का वर्णन है। व्रती निर्जला (बिना जल के) रहकर दिन-रात माता का ध्यान करती है। वह नए वस्त्र पहनकर, अपने परिवार, संतान और पति की दीर्घायु तथा सुख-समृद्धि के लिए छठी मैया के चरणों में हाथ जोड़कर प्रार्थना करती है। उसे पूर्ण विश्वास है कि ममतामयी छठी मैया उसकी सूनी गोद भरेंगी और उसके परिवार की रक्षा करेंगी।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत का मूल भाव अनन्य समर्पण, कठिन साधना और पारिवारिक कल्याण है। छठ पर्व केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच के अटूट रिश्ते का उत्सव है। यह गीत हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ क्यों न हों, यदि ईश्वर पर अटूट विश्वास हो तो हर कठिन व्रत को सुगमता से पूरा किया जा सकता है। इसमें मातृशक्ति के त्याग, सहनशक्ति और परिवार के प्रति उनकी असीम ममता को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से उभारा गया है। इस प्रकार के लोकगीत हमारी संस्कृति को जीवित रखने और आने वाली पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण तथ्य / जानकारी
गीत का नाम करेली छठी माई के व्रत (Kareli Chhathi Mayi Ke Karab Baratiyaa)
शैली नागिन छठ गीत / पारंपरिक लोकगीत
संगीत निर्देशक राजेश-रajnish (Rajesh-Rajnish)
निर्देशक एवं निर्माता राज कुमार आर. पाण्डेय (Raj Kumar R. Pandey)
म्यूसिक लेबल वेव (Wave Music / Wave Company)
भाषा भोजपुरी / लोक भाषा
मुख्य विषय छठ महापर्व, भक्ति, व्रत और लोक संस्कृति

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस लोकप्रिय छठ गीत को संगीतबद्ध करने का श्रेय प्रतिष्ठित संगीतकार जोड़ी राजेश-रajnish को जाता है, जिन्होंने अपनी लोक-संगीत की धुनों से इस गीत को हर वर्ग के श्रोता के दिलों में उतार दिया है। इसके वीडियो निर्देशन और निर्माण की कमान जाने-माने फिल्मकार राज कुमार आर. पाण्डेय ने संभाली है। 'वेव' म्यूजिक लेबल के माध्यम से रिलीज होने के बाद यह गीत उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और देश-विदेश में बसे प्रवासियों के बीच छठ पर्व के दौरान अनिवार्य रूप से बजाया जाने वाला गीत बन गया है। इस प्रकार की रचनाएँ लोक कलाकारों की मेहनत और संस्कृति के प्रति उनकी निष्ठा का प्रमाण हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ
करेली करना (करती हूँ) व्रत का संकल्प लेते हुए
बरतिया व्रत / उपवास छठ का कठिन उपवास
अरतिया प्रार्थना / विनती मैया से मनोकामना मांगना
दउरा बहँगिया बांस की दलिया और कंधे पर रखने का साधन पूजा सामग्री ले जाने की टोकरी
असवरिया विराजमान / स्थापित होना सूर्य देव का आकाश में उदय होना
निर्जला बिना जल ग्रहण किए छठ व्रत का सबसे कठिन नियम

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व भारतीय सनातन संस्कृति में एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए सूर्य को भी प्रणाम किया जाता है, जो यह सिखाता है कि सफलता के साथ-साथ संघर्ष और पतन के समय भी बड़ों का आदर करना चाहिए। यह गीत उस सांस्कृतिक चेतना का विस्तार है। जब महिलाएँ घाट पर इन गीतों को गाती हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। यह लोकगीत समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और स्त्री शक्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति को मजबूत करता है। इसके श्रवण मात्र से मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। आप इस प्रकार की अन्य पावन प्रस्तुतियाँ पढ़ने के लिए हमारे भक्तिलok मुख्य पृष्ठ पर जा सकते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • कठिन अनुशासन: छठ व्रत जीवन में अनुशासन, साफ-सफाई और संयम का पाठ पढ़ाता है।
  • अटूट विश्वास: कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर और प्रकृति पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
  • परिवार और समाज की भलाई: अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं से ऊपर उठकर परिवार और समाज की मंगलकामना करना सच्ची भक्ति है।
  • प्रकृति प्रेम: सूर्य, जल और धरती के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारी संस्कृति का मूल आधार है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाए जाने वाले छठ महापर्व के दौरान सबसे अधिक सुना और गाया जाता है। इसके अलावा, जब भी महिलाएँ व्रत की तैयारी करती हैं, खरना के दिन या नहाय-खाय के अवसर पर, घरों और सखियों की बैठकों में इस गीत की गूंज सुनाई देती है। यह लोकगीत हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है जो अपनी संस्कृति से जुड़ा रहना चाहता है। पर्व से जुड़ी अन्य जानकारियों के लिए आप देवी आरती और भजन संग्रह का भी अवलोकन कर सकते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

घटक विवरण
गीत शीर्षक Kareli Chhathi Mayi Ke Karab Baratiyaa
विधा भोजपुरी लोकगीत / छठ गीत
प्रमुख देवी छठी मैया (माता उषा / षष्ठी देवी)
मुख्य संदेश छठ व्रत की महिमा और पारिवारिक कल्याण
सांस्कृतिक महत्व बिहारी एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति का प्रतीक

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस गीत को संगीतबद्ध राजेश-रajnish ने किया है और इसे वेव म्यूजिक लेबल के अंतर्गत रिलीज किया गया है। इसके निर्माता और निर्देशक राज कुमार आर. पाण्डेय हैं।

छठ पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों मेंारंभ हुआ था, लेकिन अब यह देश और दुनिया के हर कोने में जहाँ भी पूर्वांचल के लोग रहते हैं, अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है।

छठ पर्व में मुख्य रूप से भगवान सूर्य नारायण (सूर्य देव) और उनकी बहन अथवा शक्ति स्वरूपा छठी मैया (माता षष्ठी) की पूजा की जाती है।

छठ महापर्व कुल चार दिनों का होता है। पहला दिन नहाय-खाय, दूसरा दिन खरना, तीसरा दिन संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य) और चौथा दिन उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) के साथ व्रत का समापन होता है।

'दउरा' बांस से बनी हुई दलिया (टोकरी) होती है जिसमें पूजा के ठेकुआ, फल और पूजन सामग्री रखी जाती है, और 'बहंगी' लकड़ी या बाँस का वह उपकरण है जिसे कंधे पर रखकर दउरा को घाट तक ले जाया जाता है।

नागिन छठ गीत लोक संगीत की वह शैली है जिसमें पारंपरिक धुनों के साथ-साथ एक विशेष लयबद्धता होती है, जो श्रोताओं को झूमने और भक्ति में लीन होने के लिए प्रेरित करती है।

पारंपरिक रूप से यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा रखा जाता है, परंतु नियमों का पालन करते हुए कई पुरुष भी अपनी मन्नत और श्रद्धा के अनुसार छठ व्रत रखते हैं।

आप हमारी वेबसाइट पर देवी आरती, चालीसा, व्रत कथा और विभिन्न पारंपरिक लोकगीतों के संग्रह को देख सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए देवी आरती वर्ग देखें।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस आलेख को छठ पर्व की पारंपरिक मान्यताओं, लोकगीत के मूल बोलों और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठकों को पूर्ण भक्ति रस और सटीक जानकारी मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत संग्रह एवं लोक संस्कृति अध्ययन
  • वेव म्यूजिक (Wave Music) ऑफिशियल एल्बम एवं गीत संदर्भ
  • सूर्य उपासना और छठ महापर्व से जुड़ी पौराणिक एवं सांस्कृतिक परंपराएँ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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