kali mata bhajan गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

अम्बे तू है जगदम्बे काली (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali) - Palak Sharma Ambe Maa Aarti

अम्बे तू है जगदम्बे काली भजन, लिरिक्स और भावार्थ। पलक शर्मा की आवाज में माँ दुर्गा का यह लोकप्रिय स्तुति गान पढ़ें और सुनें केवल Bhaktilok पर।

अम्बे तू है जगदम्बे काली (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali) - भजन परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

आदिशक्ति माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के समन्वित स्वरूप को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय एवं ऊर्जावान भजन "अम्बे तू है जगदम्बे काली (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)" सनातन भक्ति परंपरा का एक ऐसा अमर रत्न है, जिसे सुनते ही साधक का अंतःकरण दिव्यता और ऊर्जा से भर उठता है। पलक शर्मा (Palak Sharma) की मधुर एवं भावपूर्ण आवाज में गाए गए इस भजन ने माँ अम्बे के दरबार में हाजिरी लगाने वाले भक्तों के बीच विशेष स्थान बनाया है। माता काली और दुर्गा का यह स्तुति गान केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह अज्ञान के अंधकार को चीरकर भीतर के आत्मबल को जगाने वाला एक महामंत्र है। नवरात्रि के पावन दिनों, दुर्गा पूजा, जागरण, और दैनिक संध्या वंदन के समय इस भजन का गान करने से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा, सुरक्षा कवच और माँ की असीम कृपा की प्राप्ति होती है।

सनातन संस्कृति में आदि शक्ति को चराचर जगत का मूल कारण माना गया है। जगत जननी जब अपने रौद्र रूप में प्रकट होती हैं, तो वे दुष्टों का संहार करने वाली माँ महाकाली बन जाती हैं और जब भक्तों पर ममता बरसाती हैं, तब वे करुणामयी माँ अम्बे और शेरावाली कहलाई जाती हैं। इस भजन के माध्यम से साधक अपनी सम्पूर्ण विनम्रता के साथ माता के चरणों में नतमस्तक होता है और अपने जीवन के दुखों, संकटों और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करता है। पलक शर्मा द्वारा गाए गए इस संस्करण में आधुनिक संगीत संयोजन के साथ-साथ पारंपरिक भक्ति का ऐसा अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है, जो युवा वर्ग से लेकर वृद्ध जनों तक सभी को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, गहन भावार्थ, गायन विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का सांगोपांग अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली!<तेरे चरणों में सिर झुकाएं, आये हैं हम शरण तिहारी।>

तू ही जग की माता भवानी, भक्तों की तू है महारानी!< निशिदिन जो तेरा नाम ध्यावे, संकट मोचन दर पे पावे।>

तू ही सिंह पे सवार विराजे, खप्पर खड्ग हाथ में साजे!< असुरन का तू नाश करे है, भक्तों का तू काज सरे है।>

रूठें जो ब्रह्मा, विष्णु, भोले, तेरी महिमा सब जन बोले!< दानव दल पर तू भारी है, तीनों लोक तिहारी धारी है।>

पान-सुपारी और ध्वजा-नारियल, लाते हैं भक्त अति निर्मल!< ध्यान तेरा जो जन लगावे, वह मनवांछित फल पावे।>

संकट हरणी मंगल करणी, जय महाकाली जग से तरणी!< जो कोई तेरी ज्योति जगावे, उसके घर में सुख छावे।>

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली!< तेरे चरणों में सिर झुकाएं, आये हैं हम शरण तिहारी।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस दिव्य भजन की प्रत्येक पंक्ति में माँ दुर्गा और महाकाली के प्रति अगाध प्रेम, समर्पण और पूर्ण शरणागति (Surrender) का भाव छिपा हुआ है। भजन के मुखड़े में ही साधक पुकार उठता है कि हे जगदम्बे अम्बे! हे खप्पर धारण करने वाली माँ दुर्गे! हम तुम्हारे चरणों में अपना मस्तक झुकाते हैं और तुम्हारी शरण में आए हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि भौतिक जगत की तमाम विपत्तियों से घबड़ाकर जब जीव त्रस्त हो जाता है, तब वह केवल और केवल आदिशक्ति की शरण में आकर ही शांति पाता है।

भजन की अगली पंक्तियों में माता के विराट स्वरूप का वर्णन किया गया है। वे ही इस अखिल ब्रह्मांड की जननी भवानी हैं और समस्त भक्तों की महारानी हैं। जो भी साधक दिन-रात (निशिदिन) सच्चे मन से माता का स्मरण करता है, माँ उसके सभी संकटों का नाश कर देती हैं। सिंह पर सवारी करने वाली, हाथों में खप्पर और खड्ग (तलवार) धारण करने वाली माँ दुर्गे दुष्टों और असुरों का संहार करती हैं तथा अपने भोले भाले भक्तों के सभी अटके हुए कार्यों को पूरा करती हैं। भजन यह भी संदेश देता है कि जब ब्रह्मा, विष्णु और महेश जैसी त्रिमूर्तियां भी जिनकी शक्ति के आगे नतमस्तक रहती हैं, ऐसी महाकाली की महिमा का गान तीनों लोकों में गूंजता है। जो भक्त श्रद्धापूर्वक पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल लेकर माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और ज्योति प्रज्वलित करते हैं, माँ उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक भक्ति गीत नहीं है, बल्कि यह साधक के भीतर आत्मबल, साहस और निर्भयता का संचार करने वाला एक शक्तिशाली स्रोत है। माँ काली और अम्बे का यह गान नकारात्मक ऊर्जा, भय, मानसिक तनाव और अवसाद को दूर करने में अत्यंत प्रभावी माना जाता है। इस भजन को सुनने मात्र से मन में एक अलौकिक शांति और सुरक्षा की अनुभूति होती है। सनातन परंपरा में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है, और यह भजन शक्ति के तीनों रूपों — दुर्गा (रक्षक), महालक्ष्मी (समृद्धि प्रदाता) और महासरस्वती (ज्ञान प्रदायिनी) — का आह्वान करता है।

पलक शर्मा की आवाज में इस भजन को रिकॉर्ड किए जाने के बाद से यह घर-घर में विशेष रूप से लोकप्रिय हो चुका है। इसकी लयबद्धता और सरल शब्द संरचना इसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के द्वारा आसानी से गाने योग्य बनाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में जब चारों तरफ माँ के जयकारे गूंजते हैं, तब इस भजन का गान वातावरण को पूरी तरह से ऊर्जावान और भक्तिमय बना देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय सुना या गाया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों और समय पर इसका पाठ करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है:

  • प्रातःकाल एवं संध्या वंदन: सुबह स्नान के पश्चात माता के सम्मुख दीपक प्रज्वलित करके इस भजन का श्रवण या गान दिनभर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
  • नवरात्रि के पावन दिन: शारदीय और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह और शाम की आरती के दौरान इस भजन को बजाना या गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • माता के जागरण और चौकी: देवी के जागरण, भंडारे या किसी भी मांगलिक अनुष्ठान में इस भजन को मुख्य वंदना के रूप में गाया जाता है।
  • शुक्रवार और मंगलवार की पूजा: माँ दुर्गा और महाकाली को समर्पित इन वारों पर विशेष रूप से इस भजन का पाठ करना लाभकारी होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा एवं महाकाली हैं। सनातन ग्रंथों के अनुसार, माँ काली समय, काल और परिवर्तन की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो अहंकार और अज्ञान का नाश करती हैं। वहीं माँ अम्बे और भवानी जगत के पालन-पोषण और भक्तों के कल्याण का उत्तरदायित्व संभालती हैं। यह पारंपरिक रचना सदियों से मौखिक और लिखित परंपरा के रूप में संत-महात्माओं और लोक गायकों द्वारा पीढ़ियों तक पहुंचाई गई है, जिसे समकालीन कलाकारों जैसे पलक शर्मा ने अपनी सुमधुर आवाज से आधुनिक तकनीक के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"अम्बे तू है जगदम्बे काली" भारतीय लोक संस्कृति और भक्ति साहित्य की एक अनमोल धरोहर है। इसके मूल रचयिता प्राचीन काल के संत और लोक कवि माने जाते हैं, जिन्होंने जन-मानस की भाषा में माँ शक्ति के सरल और प्रभावशाली स्वरूप का वर्णन किया है। समय के साथ इस आरती और भजन को विभिन्न संगीतकारों और गायकों ने अपने अंदाज में प्रस्तुत किया है। Saga Music के बैनर तले पलक शर्मा द्वारा प्रस्तुत यह संस्करण विशेष रूप से इसकी स्पष्टता, शुद्ध उच्चारण और भक्ति-रस से परिपूर्ण संगीत के कारण अत्यधिक सराहा गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी/अवधी-खड़ी बोली का मिश्रण है, जिसे हर आम और खास इंसान आसानी से समझ सकता है और गा सकता है। इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जैसे - "जगदम्बे काली", "खप्पर वाली", "शरण तिहारी", जो इसकी लय और ताल को और अधिक आकर्षक बनाते हैं। काव्य शैली गीत-प्रधान और स्तुति परक है, जिसमें साधक की आर्त पुकार और माँ के प्रति वात्सल्य व करुणा का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधाएं या संकट क्यों न आएं, मनुष्य को कभी भी धैर्य और विश्वास नहीं खोना चाहिए। जिस प्रकार एक बालक अपनी माता की गोद में सुरक्षित महसूस करता है, उसी प्रकार साधक को भी समस्त चिंताओं को त्यागकर आदिशक्ति के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाना चाहिए। माता कभी अपने बच्चों को दुखों में अकेला नहीं छोड़तीं; आवश्यकता है तो केवल सच्चे मन से पुकारने की। यह भजन अहंकार के त्याग और विनम्रता को अपनाने का महान संदेश देता है.

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक संदर्भ
जगदम्बे जगत की माता सम्पूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति और पालन करने वाली शक्ति
खप्पर वाली हाथ में खप्पर धारण करने वाली महाकाली का वह रूप जो दुष्टों का संहार करता है
तिहारी तुम्हारी माता के प्रति अनन्य समर्पण और प्रेम का भाव
निशिदिन रात-दिन, निरंतर अखंड भक्ति और स्मरण का प्रतीक
संकट मोचन दुखों को दूर करने वाला भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करने वाली शक्ति
मनवांछित मन की इच्छा के अनुसार भक्त की सच्ची मनोकामना की पूर्ति

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली!"
भावार्थ: हे माता अम्बे! आप ही संपूर्ण जगत की जननी जगदम्बे और महाकाली हैं। हे खप्पर धारण करने वाली माँ दुर्गे! आपकी जय हो, आपकी विजय हो।

"तेरे चरणों में सिर झुकाएं, आये हैं हम शरण तिहारी।"
भावार्थ: हम अपने सारे अहंकार और चिंताओं को छोड़कर आपके चरणों में मस्तक झुकाते हैं और आपकी शरण में आए हैं, अब हमारी रक्षा करना आपका दायित्व है।

"तू ही सिंह पे सवार विराजे, खप्पर खड्ग हाथ में साजे!"
भावार्थ: हे माँ! आप ही राजराजेश्वरी बनकर सिंह पर विराजमान होती हैं और आपके हाथों में खप्पर तथा तलवार (खड्ग) शोभा पाते हैं, जो अधर्म के विनाश का प्रतीक हैं।

"संकट हरणी मंगल करणी, जय महाकाली जग से तरणी!"
भावार्थ: आप हमारे सभी संकटों को हरने वाली और मंगल करने वाली हैं। हे महाकाली! इस भवसागर से पार उतारने वाली आपकी जय हो।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ-साथ निम्नलिखित पावन देवी मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थात: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल करने वाली हैं, आप कल्याणमयी हैं, पुरुषार्थों को साधने वाली हैं, शरणागत की रक्षा करने वाली तथा तीन नेत्रों वाली गौरी हैं। आपको बारम्बार नमस्कार है।

इसके अतिरिक्त आप माता की महिमा जानने के लिए श्री दुर्गा चालीसा पाठ एवं महाकाली आरती संग्रह का भी अध्ययन कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम अम्बे तू है जगदम्बे काली (Ambe Tu Hai Jagdambe Kali)
गायक / कलाकार पलक शर्मा (Palak Sharma)
संगीत लेबल Saga Music
आराध्य देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा एवं महाकाली
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-खड़ी बोली
भक्ति भाव (Bhava) समर्पण, विनय, करुणा और शक्ति स्तुति
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दैनिक पूजा, जागरण, संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भजन को युवा एवं प्रसिद्ध गायिका पलक शर्मा (Palak शर्मा) ने अपनी मधुर आवाज में Saga Music के बैनर तले गाया है।

यह भजन आदिशक्ति माँ दुर्गा, महाकाली और भवानी के पावन स्वरूप को समर्पित है, जो भक्तों के संकट दूर करती हैं और दुष्टों का नाश करती हैं।

इस भजन का गान प्रातःकाल पूजा के समय, संध्या आरती में, और विशेष रूप से शारदीय व चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में करना अत्यंत फलदायी होता है।

हाँ, इस भजन को प्रतिदिन घर पर पूजा के दौरान या संध्या वंदन के समय गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन को शांति मिलती है।

इस भजन के नियमित श्रवण से भय, मानसिक तनाव और नकारात्मक विचार दूर होते हैं तथा साधक के भीतर साहस, आत्मविश्वास और भक्ति भाव की वृद्धि होती है।

इसे माता की आरती और स्तुति भजन दोनों रूपों में गाया जाता है। आरती के समय दीप प्रज्वलित कर इस रचना का गान करना बहुत प्रचलित है।

पलक शर्मा द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय भजन को Saga Music लेबल के तहत रिलीज किया गया है।

माता की पूजा में लाल फूल, रोली, अक्षत, धूप, दीप, नारियल, पान, सुपारी, चुनरी और हलवा-पूरी का भोग मुख्य रूप से अर्पित किया जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के उच्च संपादकीय मानकों के अनुरूप सनातन धर्म, लोक परंपराओं और देवी स्तुति के ग्रंथों के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक, सुंदर और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जानकारी प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
  • सनातन भक्ति एवं लोक आरती संग्रह साहित्य
  • Saga Music ऑफिशियल ऑडियो-विजुअल रिलीज आर्काइव
  • पारंपरिक वैष्णव एवं शाक्त संप्रदाय की स्तुति पद्धतियां

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 04 Nov 2026

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