सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-अनुष्ठान या मांगलिक प्रसंग के शुभारंभ में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी की आराधना अनिवार्य मानी गई है। "तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश" एक अत्यंत लोकप्रिय, सुमधुर और भावपूर्ण गणेश भजन है, जो भक्तों के हृदय में श्रद्धा और समर्पण का संचार करता है। यह भजन विघ्नहर्ता, बुद्धि और विवेक के अधिष्ठाता देव श्री गणेश जी की महिमा का गुणगान करता है। इस भजन का मुख्य भाव 'विनय' और 'शरणागति' का है, जिसमें भक्त अपने जीवन के सभी दुखों, क्लेशों और विघ्नों को दूर करने के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना करता है। गणेश चतुर्थी के पावन उत्सव, नित्य सुबह की पूजा या किसी भी नए कार्य के प्रारंभ के समय इस भजन का गायन और श्रवण अत्यंत कल्याणकारी और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश ॥
(मुखड़ा)
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश।
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥
तुमको सुमिरन करते हैं हम,
काटो हमारे सारे क्लेश।
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥
(अंतरा - 1)
शीश मुकुट और कान में कुंडल,
गल सोहे फूलों का हार।
मस्तक पर सिंदूर विराजे,
मूषक की है सवारी यार।
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥
(अंतरा - 2)
एक दंत दयावंत कहाओ,
चार भुजा धारी कहलाओ।
लड्डूअन का तुम भोग लगाओ,
भक्तों के संकट दूर भगाओ।
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥
(अंतरा - 3)
रिद्धि-सिद्धि के दाता तुम हो,
विघ्न विनाशक तुम ही हो।
जो भी शरण में तुम्हारी आए,
उसकी नैया पार लगाते हो।
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥
(अंतरा - 4)
माता जिनकी पार्वती हैं,
पिता देवों के देव महादेव।
कार्तिकेय हैं भ्राता तुम्हारे,
सेवा करते सब सुर-देव।
तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस पावन भजन का मूल भाव भगवान श्री गणेश जी के प्रति पूर्ण समर्पण और उनकी दिव्य लीलाओं का स्मरण करना है। भजन के माध्यम से भक्त भगवान गणेश से प्रार्थना करता है कि हे विघ्नहर्ता! आपके चरणों में हमारा बारंबार प्रणाम है। हम अपने दिन की शुरुआत और प्रत्येक शुभ कार्य का आरंभ आपका ध्यान करके करते हैं, ताकि हमारे जीवन के सभी मानसिक और शारीरिक क्लेश समाप्त हो सकें।
भजन में गणेश जी के मनमोहक स्वरूप का वर्णन किया गया है। उनके मस्तक पर सुशोभित मुकुट, कानों में चमकते कुंडल, गले में पुष्पों की सुंदर माला और मस्तक पर लगा लाल सिंदूर उनके दिव्य तेज को दर्शाता है। उनका वाहन मूषक (चूहा) है, जो यह संदेश देता है कि ईश्वर की दृष्टि में कोई भी जीव छोटा या महत्वहीन नहीं है। भगवान गणेश अपनी चार भुजाओं में पाश, अंकुश, वरदमुद्रा और मोदक धारण करते हैं, जो जीवन को अनुशासित और समृद्ध बनाने के प्रतीक हैं।
भजन के अंतिम भाग में उनके दिव्य परिवार का स्मरण किया गया है। जगज्जननी माता पार्वती और देवाधिदेव महादेव के पुत्र होने के कारण वे समस्त शक्तियों के पुंज हैं। उनके भाई कार्तिकेय शौर्य के प्रतीक हैं। ऐसे मंगलकारी देव की आराधना करने से साधक को न केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली प्रार्थना है जो साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- विघ्न निवारण: भगवान गणेश को विघ्नेश्वर कहा जाता है। इस भजन के नियमित गायन से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं स्वतः ही दूर होने लगती हैं।
- सरलता और सुगमता: इस भजन की भाषा अत्यंत सरल और सुबोध है, जिससे बच्चे से लेकर वृद्ध तक सभी इसे आसानी से गा सकते हैं और आत्मसात कर सकते हैं।
- रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति: गणेश जी बुद्धि और समृद्धि के दाता हैं। इस भजन के माध्यम से रिद्धि (ज्ञान/बुद्धि) और सिद्धि (सफलता/समृद्धि) की कामना की जाती है।
- मानसिक शांति: भजन की लय और सुर इतने शांत और मधुर हैं कि इसके श्रवण मात्र से मानसिक तनाव दूर होता है और मन एकाग्र होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि भगवान का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु शास्त्रों के अनुसार कुछ विशेष अवसरों पर इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना गया है:
- प्रातः काल की पूजा: सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर धूप-दीप जलाकर इस भजन को गाने से पूरे दिन सकारात्मकता बनी रहती है।
- गणेश चतुर्थी उत्सव: भाद्रपद मास की गणेश चतुर्थी के दौरान इस भजन का संकीर्तन घरों और पंडालों में विशेष रूप से किया जाता है।
- नए कार्य का शुभारंभ: गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करते समय या विवाह आदि मांगलिक कार्यों के प्रारंभ में इस भजन का गायन विघ्नों को दूर रखता है।
- गायन विधि: शांत चित्त होकर, हाथ जोड़कर या करताल/मंजीरे की थाप पर सामूहिक रूप से इस भजन को गाना चाहिए। इससे भक्ति का वातावरण निर्मित होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री गणेश जी को समर्पित है। गणेश जी सनातन धर्म के पंचदेवों में से एक हैं। वे शिव-पार्वती के कनिष्ठ पुत्र और कार्तिकेय के अनुज हैं। भारतीय संस्कृति में उन्हें प्रथम पूज्य का स्थान प्राप्त है। इस भजन की रचना पारंपरिक भक्ति धारा के संतों द्वारा की गई है, जिन्होंने लोकभाषा में भगवान की महिमा को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया। इस भजन में भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय जी का भी सादर उल्लेख है, जो संपूर्ण शिव परिवार की वंदना को पूर्ण करता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन की पृष्ठभूमि भारतीय लोक-भक्ति परंपरा से जुड़ी हुई है। भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सदियों से भगवान गणेश की स्तुति लोकगीतों और भजनों के माध्यम से की जाती रही है। "तेरी जय हो गणेश" भजन भी इसी समृद्ध परंपरा का हिस्सा है। इसकी रचना कब और किसने की, इसका कोई लिखित ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता, परंतु यह मौखिक परंपरा और संकीर्तन मंडलियों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता रहा है। आज यह भजन देश के कोने-कोने में विभिन्न गायकों द्वारा नए-नए संगीत रूपों में गाया जाता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली 'पद' और 'संकीर्तन' शैली है। इसमें अंत्यानुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है (जैसे: गणेश-क्लेश, हार-यार, कहाओ-बहाओ)। यह गेयता (गाए जाने योग्य) के गुण से परिपूर्ण है। इसकी सरल शब्दावली के कारण यह जनमानस के कंठ में आसानी से बस जाता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:
- अहंकार का त्याग: गणेश जी का विशाल शरीर और उनका छोटा वाहन मूषक यह सिखाता है कि शक्ति और बुद्धि का उपयोग दूसरों पर प्रभुत्व जमाने के लिए नहीं, बल्कि विनम्रता के साथ सेवा करने के लिए होना चाहिए।
- धैर्य और विवेक: गणेश जी के बड़े कान हमें अच्छे श्रोता बनने की प्रेरणा देते हैं, और उनका छोटा मुख कम परंतु सार्थक बोलने का संदेश देता है।
- पारिवारिक सामंजस्य: भजन में शिव, पार्वती और कार्तिकेय का उल्लेख पारिवारिक एकता और आदर का संदेश देता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| सुमिरन | स्मरण करना / ध्यान लगाना | ईश्वर के नाम का निरंतर जप करना। |
| क्लेश | कष्ट, दुःख या मानसिक अशांति | संसार के त्रिविध ताप (आध्यात्मिक, आधिभौतिक, आधिदैविक)। |
| एकदंत | एक दांत वाले | द्वैत से परे अद्वैत सत्य का प्रतीक। |
| रिद्धि-सिद्धि | ज्ञान और अलौकिक शक्तियां | गणेश जी की पत्नियां जो समृद्धि और बुद्धि का प्रतीक हैं। |
| विघ्न विनाशक | बाधाओं को नष्ट करने वाले | जीवन के सभी संकटों को हरने वाले देव। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश..."
हे भगवान गणेश! आपकी सदैव जय-जयकार हो। हम आपके दिव्य स्वरूप की वंदना करते हैं।
"तुमको सुमिरन करते हैं हम, काटो हमारे सारे क्लेश..."
हम अपने दिन और कर्म की शुरुआत आपका स्मरण करके करते हैं। कृपा करके हमारे जीवन के सभी दुखों, चिंताओं और क्लेशों का अंत करें।
"शीश मुकुट और कान में कुंडल, गल सोहे फूलों का हार..."
आपके मस्तक पर सुंदर मुकुट सुशोभित है, कानों में कुंडल चमक रहे हैं और गले में पुष्पों की महकती हुई माला आपके दिव्य सौंदर्य को बढ़ा रही है।
"एक दंत दयावंत कहाओ, चार भुजा धारी कहलाओ..."
आप एक दांत वाले और अत्यंत दयालु हैं। आपकी चार भुजाएं चारों दिशाओं में भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहती हैं।
"रिद्धि-सिद्धि के दाता तुम हो, विघ्न विनाशक तुम ही हो..."
आप ही संसार को रिद्धि (बुद्धि) और सिद्धि (सफलता) प्रदान करने वाले हैं। हमारे मार्ग में आने वाले सभी विघ्नों को दूर करने की शक्ति केवल आपमें ही है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात भगवान गणेश के इस प्रसिद्ध श्लोक का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अर्थ: घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे सभी कार्यों को हमेशा बाधा रहित (निर्विघ्न) पूरा करें।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश |
| समर्पित देव | भगवान श्री गणेश जी |
| मुख्य विषय | विघ्न विनाश, प्रथम पूज्य वंदना, रिद्धि-सिद्धि प्रार्थना |
| भक्ति भाव | विनय, समर्पण, शरणागति |
| भाषा | सरल हिंदी (खड़ी बोली) |
| उपयुक्त अवसर | गणेश चतुर्थी, दैनिक सुबह की पूजा, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "तेरी जय हो गणेश" भजन किस देवता को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र, प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी को समर्पित है।
प्रश्न 2: इस भजन को गाने से क्या लाभ होता है?
उत्तर: इस भजन के श्रद्धापूर्वक गायन से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, बुद्धि का विकास होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
प्रश्न 3: भगवान गणेश को "प्रथम पूज्य" क्यों कहा जाता है?
उत्तर: शिव महापुराण के अनुसार, माता पार्वती और भगवान शिव द्वारा दी गई पृथ्वी की परिक्रमा की चुनौती में गणेश जी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर विजय प्राप्त की थी, जिसके बाद उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला।
प्रश्न 4: इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय कौन सा है?
उत्तर: इस भजन को प्रातः काल की पूजा के समय या किसी भी नए कार्य को शुरू करने से पहले गाना सबसे उत्तम माना जाता है।
प्रश्न 5: भजन में "रिद्धि-सिद्धि" का क्या अर्थ है?
उत्तर: रिद्धि का अर्थ है समृद्धि, बुद्धि और विवेक; जबकि सिद्धि का अर्थ है सफलता, आध्यात्मिक शक्ति और पूर्णता। ये दोनों भगवान गणेश की पत्नियां मानी जाती हैं।
प्रश्न 6: भगवान गणेश का वाहन मूषक क्यों है?
उत्तर: मूषक चंचलता और कुतर्क का प्रतीक है। गणेश जी द्वारा मूषक की सवारी करना यह दर्शाता है कि उन्होंने अपनी बुद्धि से चंचलता और विकारों को अपने नियंत्रण में कर लिया है।
प्रश्न 7: क्या इस भजन को बच्चे भी गा सकते हैं?
उत्तर: हाँ, इस भजन की भाषा अत्यंत सरल और लयबद्ध है, जिससे बच्चे इसे बहुत आसानी से सीख और गा सकते हैं।
प्रश्न 8: गणेश चतुर्थी पर इस भजन का क्या महत्व है?
उत्तर: गणेश चतुर्थी के दस दिवसीय उत्सव के दौरान इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करने से वातावरण अत्यंत पवित्र और भक्तिमय हो जाता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख भक्तिलोक के विद्वान संपादकों द्वारा सनातन धर्म के ग्रंथों, पौराणिक कथाओं और पारंपरिक भजन संग्रहों के गहन अध्ययन के बाद तैयार किया गया है। इस भजन की व्याख्या और इसके पीछे के आध्यात्मिक संदेशों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठक न केवल इसके बोलों का आनंद ले सकें, बल्कि इसके गहरे अर्थ को भी समझ सकें। यह "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" पाठकों के ज्ञानवर्धन और आध्यात्मिक उन्नति के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- गणेश पुराण: भगवान गणेश के अवतारों और उनकी महिमा का वर्णन।
- शिव महापुराण: गणेश जन्म और उनके प्रथम पूज्य बनने की कथा।
- पारंपरिक भजन संग्रह: लोक संस्कृति में प्रचलित गणेश वंदनाएं।
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