भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

पहिले पहिले बानी कईले छठी मैया भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें पहिले पहिले बानी कईले छठी मैया भक्ति इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

परिचय

लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ की जब भी बात आती है, तो जुबान पर सबसे पहला नाम जो आता है, वह है "पहिले पहिले बानी कईले छठी मईया"। यह केवल एक लोकगीत या भजन नहीं है, बल्कि यह उस कोटि-कोटि श्रद्धालुओं के अंतःकरण की पवित्र पुकार है, जो जीवन में पहली बार छठी मैया का कठिन, निष्ठावान और आत्मकेंद्रित व्रत धारण करते हैं। इस भजन के हर एक शब्द में एक ओर जहाँ छठी मैया के प्रति अगाध श्रद्धा, समर्पण और विनय झलकता है, वहीं दूसरी ओर व्रत के दौरान होने वाली छोटी-मोटी भूल-चूक के लिए क्षमा-प्रार्थना का वह भाव है जो भक्त और भगवान के बीच के रिश्ते को अत्यंत कोमल और सजीव बना देता है। शारदीय और चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले इस महाव्रत में जब बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश-विदेश के कोने-कोने में नदी तटों, तालाबों और घाटों पर यह सुमधुर स्वर गूंजता है, तो पूरा वातावरण छठी मईया की असीम कृपा से आलोकित हो उठता है। यह भजन लोक-संस्कृति, पारिवारिक परंपरा, और प्रकृति की पूजा का वह अनूठा संगम है जो मन को शांत कर आत्मा को दिव्यता से जोड़ देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मुखड़ा):

पहिले पहिले बानी कईले छठी मईया, बरत तोहार,
करिह क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार...
सबके अरजिया छठी मईया, सुनली तs हमरो अरज,
दियरा जरत बाटे छठी मईया, तोहरे नाम के...

अंतरा 1:

घाट सजवले बानी छठी मईया, तोहरे नाम के,
अर्जी लगाइले बानी छठी मईया, तोहरे नाम के...
भईया हो दीनानाथ, घाट सजवले बानी,
तोहरे नाम के, तोहरे नाम के...

अंतरा 2:

सोना के दियुरिया जरे, चांदी के कटोरिया,
चारों ओर खेलेइले छठी मईया, सुख के लहरिया...
केकरा घरे होईहें छठी मईया, धान के खेतिया,
केकरा घरे होईहें छठी मईया, सुत के बेठिया...

अंतरा 3:

घाटवा पे आइले बानी, जोड़ी-जोड़ी सुरज देवता,
पूजे के बानी आइल, छठी मईया के बरतिया...
अखिया के नीरवा से, पखइले चरनिया,
दिहें आशीष छठी मईया, हमरो ललनवा...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस अत्यंत लोकप्रिय और भावुक छठ भजन का केंद्रीय भाव पहली बार व्रत रखने वाले व्रती की मानसिक स्थिति, समर्पण और छठी मैया के प्रति उसकी अनन्य भक्ति पर आधारित है। जब कोई भक्त अपने जीवन में पहली बार छठ व्रत का संकल्प लेता है, तो उसके मन में एक पवित्र भय, उत्साह और पूर्ण समर्पण का भाव रहता है। वह छठी मैया से प्रार्थना करता है कि हे मैया! मैंने जीवन में पहली बार आपका यह अत्यंत कठिन और पवित्र व्रत रखा है। पूजा-पाठ के दौरान यदि मुझसे कोई अनजाने में भूल-चूक या गलती हो जाए, तो एक माता की तरह मेरी उन सभी गलतियों को क्षमा कर देना।

भजन की अगली पंक्तियों में व्रती कहता है कि हे छठी मैया! आप तो संसार के सभी भक्तों की मनोकामनाएं और अरज सुनती हैं, कृपया मेरी भी इस छोटी सी पुकार को स्वीकार करें। आपके नाम का यह मिट्टी का दीपक रातभर जल रहा है, जो मेरे मन के प्रकाश और अटल विश्वास का प्रतीक है। मैंने नदी के घाट को आपकी आराधना के लिए पूरी श्रद्धा से सजाया है और अपनी अर्जी आपके चरणों में समर्पित कर दी है। हे दीनानाथ (सूर्य देव)! यह पूरा आयोजन और घाट की सजावट केवल और केवल आपकी महिमा के विस्तार के लिए है। इस प्रकार यह भजन सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक गृहणी, एक मां या परिवार के किसी भी सदस्य की छठी मैया के प्रति साक्षात जीवंत वंदना है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

छठ महापर्व सूर्य उपासना और प्रकृति की पूजा का सबसे बड़ा उत्सव है। यह भजन इस पर्व की आत्मा को सीधे स्पर्श करता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • प्रथम व्रत का भाव: यह भजन विशेष रूप से उन महिलाओं और पुरुषों को समर्पित है जो अपने जीवन में पहली बार छठी मैया का कठिन 36 घंटे निर्जला व्रत रख रहे हैं।
  • क्षमा और विनय: सनातन संस्कृति में भगवान और भक्त का संबंध माता और संतान का होता है। इस भजन में वही बाल-सुलभ विनय और क्षमा-याचना दिखाई देती है।
  • लोक-संस्कृति का दर्पण: भोजपुरी और अंगिका आंचलिक बोलियों की मिठास इस भजन को हर उम्र के व्यक्ति के दिल के करीब ले आती है।
  • दिव्य ऊर्जा का संचार: छठ घाटों पर जब यह गीत बजता है, तो प्रवासी लोग भी अपने गांवों और घरों की ओर खिंचे चले आते हैं, जो हमारी संस्कृति को जीवित रखता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष रूप से छठ पूजा के चार दिनों के दौरान यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक सुना और गाया जाता है:

  • नहाय-खाय के दिन: घर की साफ-सफाई और प्रसाद बनाने के समय।
  • खरना (लोहंडा) के दिन: संध्या के समय जब व्रती खीर का प्रसाद ग्रहण करती हैं।
  • संध्या अर्घ्य (पहला अर्घ्य): जब नदियां या तालाबों के घाटों पर लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं और सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तब यह गीत वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देता है।
  • उषा अर्घ्य (भोर का अर्घ्य): उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करने से ठीक पहले और घाट पर पूजा के दौरान।
  • इसके अलावा इसे किसी भी शुभ अवसर, पारिवारिक अनुष्ठान या लोक संगीत के कार्यक्रमों में भी गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में दो मुख्य दिव्य शक्तियां हैं—छठी मैया (षष्ठी माता) और सूर्य देव (दीनानाथ)।

छठी मैया: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार षष्ठी देवी को भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन माना जाता है। इन्हें संतानों की रक्षा करने वाली, आयु और आरोग्यता प्रदान करने वाली लोकमाता कहा जाता है।

सूर्य देव (दीनानाथ): छठ पूजा प्रत्यक्ष देवता सूर्य की उपासना का पर्व है। सूर्य देव ही इस ब्रह्मांड के प्रकाश, ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन के आधार हैं। इस भजन में भईया कहकर सूर्य देव को परिवार के एक अभिभावक के रूप में संबोधित किया गया है, जो लोक-संस्कृति की अनूठी मिसाल है। आप सूर्य देव मंत्र और साधना के माध्यम से उनकी महिमा के बारे में और अधिक जान सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

पारंपरिक लोकगीतों की श्रृंखला में आधुनिक युग में इस गीत को व्यावसायिक और लोकप्रिय रूप देने में शारदा सिन्हा और अनुराधा पौडवाल जैसे प्रसिद्ध लोक कलाकारों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। हालांकि इस गीत की जड़ें बिहार और पूर्वांचल की लोक-परंपराओं में बहुत गहरी हैं, जहाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी महिलाएं इसे गाती चली आ रही हैं। यह गीत इस बात का प्रतीक है कि आधुनिक संगीत के दौर में भी हमारी लोक-संस्कृति और पारंपरिक गीत कितने जीवंत और प्रासंगिक हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन भोजपुरी और अंगिका की लोक भाषा में रचित है, जो सीधे हृदय को छूती है। इसकी काव्य शैली सरल, प्रवाहपूर्ण और आत्मीय है। इसमें किसी कठिन संस्कृत के शब्दों के बजाय आम बोलचाल के शब्दों जैसे 'बरत', 'अरजिया', 'दियरा', 'घाट सजवले' और 'ललनवा' का प्रयोग किया गया है। यह सहजता ही इस गीत की सबसे बड़ी खूबी है, जिसे पढ़कर या सुनकर अनपढ़ व्यक्ति भी इसके भाव से तुरंत जुड़ जाता है। इसी प्रकार के अन्य पारंपरिक गीतों के लिए आप देवी माता के लोकप्रिय भजन और गीत संग्रह को पढ़ सकते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन में कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षाएं देता है:

  • अहंकार का त्याग: पहली बार व्रत करने वाला व्यक्ति ईश्वर के सामने पूर्णतः नतमस्तक हो जाता है और अपनी कमियों को स्वीकार करता है।
  • क्षमाशीलता: मनुष्य से गलतियां होना स्वाभाविक है, किंतु भगवान के दरबार में सच्चे मन से क्षमा मांगने से हर भूल माफ हो जाती है।
  • सामूहिक सद्भाव: छठ पर्व और यह गीत जाति, ऊंच-नीच के भेदों को मिटाकर सभी को एक घाट पर ले आता है।
  • प्रकृति प्रेम: सूर्य, जल, मिट्टी और अन्न के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का यह सबसे बड़ा माध्यम है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
बरत तोहार तुम्हारा व्रत छठी मैया का 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास
अरजिया प्रार्थना / विनती मैया के चरणों में रखी जाने वाली मनोकामना
दियरा जरत बाटे दीपक जल रहा है भक्ति और आस्था का प्रकाश
दीनानाथ सूर्य देव समस्त संसार को ऊर्जा देने वाले देवता
ललनवा संतान / बालक वंश वृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"पहिले पहिले बानी कईले छठी मईया, बरत तोहार..."
भावार्थ: व्रती कहता है कि हे छठी मैया, आज मैं अपने जीवन में पहली बार आपका यह महान व्रत रख रहा हूँ। मेरे मन में आपकी पूजा को लेकर बहुत श्रद्धा है।

"करिह क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार..."
भावार्थ: हे माता! मैं मनुष्य हूँ और पूजा-पाठ की विधि में मुझसे अनजाने में कोई भूल या गलती हो जाए, तो अपनी संतान समझकर मुझे क्षमा कर देना।

"सबके अरजिया छठी मईया, सुनली तs हमरो अरज..."
भावार्थ: हे मैया, आप दुनिया भर के करोड़ों भक्तों की पुकार सुनती हैं, इसलिए मेरी भी इस छोटी सी विनती को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

छठ पूजा के समय और इस भजन के गायन के दौरान सूर्य देव को अर्ق देते समय निम्नलिखित वैदिक मंत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

ॐ सूर्याय नमः।
हिर्भाय सहस्रांशो तेजस्विनी नमो नमः॥
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥

इस मंत्र के जाप से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है और व्रती के सभी कष्ट दूर होते हैं। आप गायत्री मंत्र जप विधि और लाभ के लेख को भी पढ़ सकते हैं जो सूर्योपासना से जुड़ा है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम पहिले पहिले बानी कईले छठी मैया
आराध्य देवी / देवता छठी मैया एवं सूर्य देव (दीनानाथ)
संबंधित पर्व छठ महापर्व (कार्तिक एवं चैत्र षष्ठी)
भाषा / बोली भोजपुरी / लोक-भाषा
मुख्य भाव समर्पण, विनय, क्षमा-प्रार्थना और लोक-आस्था
श्रेणी लोक भक्ति गीत / छठ भजन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"पहिले पहिले बानी कईले छठी मैया" भजन किस पर्व से संबंधित है?

यह भजन लोक आस्था के महापर्व 'छठ पूजा' से संबंधित है, जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है।

यह भजन मुख्य रूप से किसके लिए गाया जाता है?

यह भजन उन महिलाओं या पुरुषों द्वारा विशेष रूप से गाया जाता है जो जीवन में पहली बार छठ मैया का व्रत धारण करते हैं।

छठ पूजा में किस देवता की पूजा की जाती है?

छठ पूजा में प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य (दीनानाथ) और छठी मईया (षष्ठी देवी) की पूजा की जाती है।

क्या यह गीत केवल महिलाओं द्वारा गाया जाता है?

नहीं, हालांकि महिलाएं इसे व्रत के दौरान अधिक गाती हैं, लेकिन छठ घाटों पर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पुरुष, बच्चे और सभी आयु वर्ग के लोग इसे गाते हैं।

छठ व्रत कितने दिनों का होता है?

छठ महापर्व कुल चार दिनों का होता है, जो नहाय-खाय से शुरू होकर खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के साथ संपन्न होता है।

इस भजन के लोकप्रिय गायक कौन हैं?

इस भजन को शारदा सिन्हा, अनुराधा पौडवाल और कई अन्य प्रसिद्ध लोक कलाकारों ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

भजन में 'दीनानाथ' किसे कहा गया है?

भजन में 'दीनानाथ' भगवान सूर्य को कहा गया है जो समस्त संसार को जीवन और ऊर्जा प्रदान करते हैं।

छठ पूजा में उगते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?

उगता हुआ सूर्य नई शुरुआत, ऊर्जा, जीवन और सकारात्मकता का प्रतीक है, इसलिए उन्हें अर्घ्य देकर आशीर्वाद मांगा जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

इस आलेख को Bhaktilok.in के संपादकीय मंडल द्वारा लोक-संस्कृति, पारंपरिक मान्यताओं और शास्त्रीय संदर्भों का गहन अध्ययन करके तैयार किया गया है। आलेख में दी गई जानकारी पूरी तरह से पारंपरिक स्रोतों और लोक-साहित्य पर आधारित है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि पाठकों को सटीक, प्रामाणिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जानकारी प्राप्त हो।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भारतीय लोक-संस्कृति और छठ पर्व की परंपराएं
  • पूर्वांचल और बिहार के पारंपरिक लोकगीत संकलन
  • सूर्य उपासना और षष्ठी व्रत से जुड़े पौराणिक संदर्भ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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