Papmochani Ekadashi Vrat Katha बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

TOP 5 माता केMost Popular Mata Ke Bhajan Video Jukebox (Navratri)

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सनातन संस्कृति में भगवती आदिशक्ति दुर्गा जी की उपासना का परम पावन पर्व नवरात्रि केवल एक व्रत या उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि यह अंतर्मन की शुद्धि, आद्य शक्ति के जागरण और भगवती जगदम्बा के प्रति अनन्य भक्ति-समर्पण का जीवंत साधन है। नवरात्रि के नौ पावन दिनों में मैया के दरबार में दीप प्रज्वलित कर, अखंड ज्योति जलाकर जब भक्तगण भक्तिमय सुरों में माता रानी के भजनों का संकीर्तन करते हैं, तो संपूर्ण वातावरण अलौकिक ऊर्जा से स्पंदित हो उठता है। प्रस्तुत विशेष संग्रह में जगज्जननी भगवती जगदम्बा के अत्यंत लोकप्रिय एवं सर्वप्रिय 5 माता के भजनों का अनूठा संकलन प्रस्तुत किया गया है। "अम्बे तू है जगदम्बे काली", "तूने मुझे बुलाया शेरावालिये", "मैया का चोला है लाल लाल", "प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी" तथा "नंगे नंगे पांव चला अकबर आया" जैसे कालजयी भजन साधक के हृदय में श्रद्धा, विरह, वात्सल्य और शरणागति के पावन भावों का संचार करते हैं। इन भजनों के निरंतर श्रवण और गायन से गृह-क्लेश नष्ट होते हैं, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवती की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

अम्बे तू है जगदम्बे काली (आरती व भजन)

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

तेरे भक्त जनों पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिंहों की बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली।
दुष्टों को तू ही संहारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

मां बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पर करुणा बरसाने वाली, अमृत रस ढालने वाली।
दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें मां तेरे चरणों में एक छोटा सा कोना॥
सबकी झोली भरने वाली, भरदे झोली खाली।
सबकी बिगड़ी को सुधारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥


तूने मुझे बुलाया शेरावालिये

तूने मुझे बुलाया शेरावालिये, मैं आया मैं आया शेरावालिये।
ओ जोतावालिये, ओ पहाड़ावालिये, ओ मेहरावालिये॥

सारे जग में एक ठिकाना, सांचा तेरा दरबार है।
मात-पिता, सुत-बांधव सब झूठा ये संसार है॥
सबने मुझको ठुकराया है, तूने गले लगाया मां।
तूने मुझे बुलाया शेरावालिये, मैं आया मैं आया शेरावालिये॥

कदम-कदम पर राह दिखाती, तू भक्तों की रखवाली।
द्वार पे तेरे जो भी आया, लौटी न झोली खाली॥
प्रेम का दीपक मन में जला के, तेरा ध्यान लगाया मां।
तूने मुझे बुलाया शेरावालिये, मैं आया मैं आया शेरावालिये॥


मैया का चोला है लाल लाल लाल

मैया का चोला है लाल लाल लाल, सिंदूरी चोला लाल लाल लाल।
ओ ओ ओ मैया का चोला है लाल लाल लाल॥

अम्बे मां का चोला लाल लाल, जगदम्बे मां का चोला लाल लाल।
शेरावाली का चोला लाल लाल, पहाड़ावाली का चोला लाल लाल॥

पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट चढ़े तोहे लाल लाल।
मां के माथे पे बिंदिया सोहे, चुनरी सोहे लाल लाल॥
भक्तों के मन को भाता है, मैया का रूप रसाला।
जय-जय मां, जय-जय मां, जय-जय मां॥


प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी

प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी, भक्तों की लगी है कतार भवानी।
तेरे भवन पर ज्योति जगे, मैया जी तेरे भवन पर ज्योति जगे॥

ऊंचे पहाड़ों पे मंदिर तेरा, मैया जी तेरा भवन निराला।
द्वार पे तेरे जो भी आए, मिट जाए मन का अंधियारा॥
फूलों से महके दरबार भवानी, भक्तों की लगी है कतार भवानी॥

अंग कटे पर शीश न झुके, ध्यानु भक्त ने शीश चढ़ाया।
प्रकट हुई मां जगदम्बे और ध्यानु का सीस लगाया॥
तेरी कृपा का कोई पार न पावे, तू है जगदाधार भवानी।
प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी, भक्तों की लगी है कतार भवानी॥


नंगे नंगे पांव चला अकबर आया

नंगे नंगे पांव चला अकबर आया, अकबर आया संग सोने का छत्र लाया।
माता रानी के भवन में शीश नवाया॥

अहंकार में डूबा था जो, मैया की शक्ति ना जाना।
ज्वाला मां की अद्भुत ज्योति देख हुआ है दीवाना॥
सोने का छत्र चढ़ाने आया, पर मां ने न उसे अपनाया।
छत्र हुआ पल में खंडित, मां की महिमा को दर्शाया॥

सच्चे मन से जो भी ध्यावे, मैया उसे अपनाती है।
अहंकारी का मान घटा के, राह सही दिखलाती है॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

प्रस्तुत भजन-संग्रह केवल काव्यात्मक रचनाएँ नहीं हैं, अपितु यह श्रीमद्देवीभागवत पुराण और दुर्गा सप्तशती के गूढ़ दार्शनिक सत्यों का संगीतमय प्रकटीकरण हैं। जब साधक इन भजनों का संकीर्तन करता है, तो उसका अहम् (अहंकार) विलीन होकर भगवती के चरणों में समर्पित हो जाता है। प्रथम भजन "अम्बे तू है जगदम्बे काली" में भगवती की संहारक और पालकमयी दोनों शक्तियों का अद्भुत सामंजस्य है। इसमें जीवात्मा यह स्वीकार करती है कि संसार में भले ही पुत्र कपूत हो जाए, किंतु माता कभी कुमाता नहीं हो सकती। यह वात्सल्य भाव का सर्वोच्च शिखर है।

"तूने मुझे बुलाया शेरावालिये" भजन में शरणागति (Self-surrender) की भावना प्रधान है। जब मनुष्य सांसारिक संबंधों (माता, पिता, बंधु-बांधव) की नश्वरता और स्वार्थ को समझ लेता है, तब उसे ज्ञात होता है कि संसार का एकमात्र सत्य और शाश्वत आश्रय भगवती शेरावाली का दरबार ही है। भगवती का बुलावा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा की ओर आध्यात्मिक निमंत्रण है।

"मैया का चोला है लाल लाल" और "प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी" भजन भगवती की दिव्य छवि, सौंदर्य, अखंड ज्योति और वात्सल्य रस का गुणगान करते हैं। लाल रंग शक्ति, पराक्रम, सिंदूर और जीवन-ऊर्जा का प्रतीक है। वहीं, "अकबर और ध्यानु भक्त" से जुड़े प्रसंग इस बात का साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं कि भगवती केवल निश्छल प्रेम और भक्ति से प्रसन्न होती हैं; धन, पद, सत्ता या अहंकार के सोने के छत्र को वे सहर्ष अस्वीकार कर देती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

नवरात्रि के पावन अवसर पर इन शीर्ष 5 माता के भजनों के संकीर्तन और श्रवण की अनेक आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विशेषताएं हैं:

  • नवदुर्गा कृपा प्राप्ति: इन भजनों में भगवती के शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री रूपों की सामूहिक महिमा अंतर्निहित है।
  • मानसिक शांति व भयमुक्ति: "अष्ट भुजाओं वाली" माँ का स्मरण करने से साधक के भीतर का भय, निराशा और डिप्रेशन दूर होता है तथा अद्वितीय आत्मबल का संचार होता है।
  • अखंड ज्योति की महिमा: भजनों में मैया के दरबार की पावन ज्योति का वर्णन है, जो जीव के अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट कर ज्ञान रूपी प्रकाश फैलाती है।
  • सामूहिक संकीर्तन का महत्व: माता की चौकी, जगराता और नवरात्रि संध्या में इन भजनों को मिलकर गाने से संपूर्ण वातावरण शुद्ध और धन्य हो जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भगवती की आराधना में समय और भावना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इन भजनों का संपूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित शास्त्रीय एवं पारंपरिक नियमों का पालन करना चाहिए:

क्रम उपयुक्त समय / अवसर गायन व पूजन विधि विशेष नियम व ध्यान रखने योग्य बातें
1 नवरात्रि (प्रातःकाल व संध्याकाल) स्वच्छ वस्त्र (लाल या पीले) धारण कर, दीपक जलाएं और पूरे भाव से गाएं। पूजन स्थान को गंगाजल से पवित्र करें; मन में केवल भक्ति भाव रखें।
2 मंगलवार व शुक्रवार माता रानी के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित कर दुर्गा चालीसा के पश्चात गाएं। गुड़हल का लाल पुष्प और बताशे या हलवे का भोग अवश्य लगाएं।
3 माता की चौकी व जागरण सामूहिक रूप से ढोलक, मंजीरे और तालियों की थाप के साथ भजन संकीर्तन करें। भजन गाते समय अहंकार मुक्त होकर नृत्य व भाव-विभोर होना शुभ माना जाता है।
4 दैनिक संध्या आरती गाय के घी के दीपक या कपूर से आरती करते हुए "अम्बे तू है जगदम्बे" गाएं। आरती के पश्चात परिक्रमा करें और क्षमा याचना मंत्र का पाठ करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

ये पावन भजन प्रत्यक्ष रूप से भगवती आदिशक्ति जगदम्बा, माता दुर्गा, शेरावाली, पहाड़ावाली और महाकाली को समर्पित हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, मार्कंडेय पुराण के 'देवी माहात्म्यं' (श्री दुर्गा सप्तशती) में भगवती की जिस महिमा का गान किया गया है, वही महिमा इन भजनों में लोकभाषा में अभिव्यक्त हुई है। मध्यकाल और आधुनिक काल में परम पूज्य संत ध्यानु भक्त, लखनपाल और आधुनिक युग के महान देवी-भक्त गायकों (जैसे स्वर्गीय श्री नरेंद्र चंचल जी, गुलशन कुमार जी एवं लखबीर सिंह लखा जी) ने इन भजनों को जन-जन के हृदय तक पहुंचाया। ध्यानु भक्त की अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर ही भगवती ने उनका शीश पुनः जोड़ा था, जिसका उल्लेख इन भजनों में बड़े ही आदर के साथ किया जाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

उत्तरी भारत की लोक संस्कृति और नवरात्रि परंपरा में 'माता की चौकी' और 'माता का जागरण' सदियों से रचे-बसे हैं। 1970 और 1980 के दशक में जब भक्ति संगीत का स्वर्ण युग प्रारंभ हुआ, तब पारंपरिक पंजाबी, ब्रज और लोक धुनों पर आधारित इन भजनों की रचना हुई। "तूने मुझे बुलाया शेरावालिये" जैसे कालजयी गीतों ने भारतीय सिनेमा और भक्ति संगीत के अंतर को समाप्त कर दिया। इन भजनों की पृष्ठभूमि ऐतिहासिक प्रसंगों (जैसे सम्राट अकबर का अहंकार भंग होना और ज्वाला देवी की ज्योति) तथा पौराणिक आख्यानों (महिशासुर वध, शुंभ-निशुंभ वध) पर आधारित है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इन भजनों की भाषा अत्यंत सरल, सहज और प्रवाहमयी हिंदी है, जिसमें ब्रज, राजस्थानी और पंजाबी लोक-बोलियों का मधुर मिश्रण है। काव्य शैली में गेयता (Melody), लयबद्धता और तुकांत (Rhyming) पंक्तियों का सुंदर प्रयोग हुआ है। "लाल लाल लाल", "शेरावालिये", "पहाड़ावालिये" जैसे पुनरुक्त शब्दों का प्रयोग श्रोताओं के मन में एक लयबद्ध आनंद और तादात्म्य स्थापित करता है। इसमें वात्सल्य, करुणा, शांत और वीर रस (दुष्ट संहारक रूप में) का अद्भुत समावेश देखने को मिलता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

माता के इन पावन भजनों से हमें व्यावहारिक और आध्यात्मिक जीवन की अनेक अमूल्य शिक्षाएं मिलती हैं:

  • अहंकार का त्याग: अकबर के सोने के छत्र वाले प्रसंग से सीख मिलती है कि ईश्वर के दरबार में धन या पद का अहंकार नहीं चलता, केवल निष्कपट भाव ही स्वीकार्य है।
  • अटल विश्वास और भक्ति: ध्यानु भक्त का प्रसंग सिखाता है कि यदि श्रद्धा में दृढ़ता हो, तो परमात्मा स्वयं भक्त की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं।
  • माता-पिता का आदर: "पूत कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता" पंक्ति हमें सिखाती है कि संसार में मातृ-ऋण और वात्सल्य से बड़ा कोई सत्य नहीं है।
  • समता का भाव: मैया के दरबार में राजा हो या रंक, सब एक समान हैं। भगवती किसी के साथ भेद-भाव नहीं करतीं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

क्र.सं. शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक / संदर्भ भावार्थ
1 जगदम्बे जगत की माता (जगत् + अम्बा) समस्त ब्रह्मांड की रचना करने वाली पराशक्ति।
2 खप्पर वाली हाथ में खप्पर (पात्र) धारण करने वाली अधर्मियों और असुरी प्रवृत्तियों का संहार करने वाला रूप।
3 शेरावालिये सिंह पर सवारी करने वाली मां धैर्य, साहस और पराक्रम की देवी।
4 नीरमल नाता पवित्र और स्वार्थरहित संबंध मां और संतान के बीच का निष्काम और पावन प्रेम।
5 छत्र सोने का मुकुट/छाता राजसी वैभव और अहंकार का प्रतीक।
6 भवन पवित्र मंदिर या दरबार साधक के मन रूपी मंदिर और भगवती का धाम।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"पूत कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता"

भावार्थ: इस संसार में पुत्र मार्ग से भटक सकता है, कुमार्गी हो सकता है या अपनी माता के प्रति अनुचित व्यवहार कर सकता है; किंतु माता कभी अपनी संतान का अहित नहीं सोच सकती। भगवती जगदम्बा अपने सभी भक्तों के दुर्गुणों को भुलाकर उन्हें अपनी छत्रछाया में शरण देती हैं।

"अंग कटे पर शीश न झुके, ध्यानु भक्त ने शीश चढ़ाया"

भावार्थ: सच्चा भक्त अपने प्राणों की बाजी लगा सकता है, किंतु अपने इष्टदेव के प्रति निष्ठा से पीछे नहीं हटता। ध्यानु भक्त ने अपना शीश काटकर मैया के चरणों में समर्पित कर दिया था, और भगवती ने तुरंत प्रकट होकर उसके शीश को पुनः जोड़कर उसे जीवनदान दिया। यह पंक्ति पराभक्ति और चरम समर्पण की परिचायक है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

भजन गायन से पूर्व या पश्चात् निम्नलिखित सिद्ध पौराणिक श्लोकों का पाठ करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है:

सर्वमंगल मंगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे सर्वमंगलदायिनी, कल्याणमयी, समस्त मनोरथों को पूर्ण करने वाली, शरणदात्री, त्रिनेत्री गौरी नारायणी! आपको बारंबार नमस्कार है।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशिष्ट विवरण जानकारी / तथ्य
संग्रह का नाम नवरात्रि स्पेशल - शीर्ष 5 माता के लोकप्रिय भजन (Mata Ke Bhajan Video Jukebox)
मुख्य आराध्य देवी भगवती आदिशक्ति माता दुर्गा / शेरावाली / काली / जगदम्बा
मुख्य भाव (Bhava) वात्सल्य, शरणागति, भक्ति, समर्पण एवं उत्साह
भाषा व शैली सरल हिंदी, ब्रज व पंजाबी लोक-शैली मिश्रित
सर्वोत्तम अवसर शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि, माता का जागरण, मंगलवार, शुक्रवार, दुर्गा पूजा
संबद्ध पौराणिक प्रसंग ध्यानु भक्त की कथा, ज्वाला जी अकबर छत्र प्रसंग, महिषासुर वध

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

नवरात्रि में माता के भजन सुनने का क्या आध्यात्मिक महत्व है?

नवरात्रि में माता के भजनों का संकीर्तन करने और सुनने से मन का रजोगुण और तमोगुण शांत होता है तथा सत्वगुण की वृद्धि होती है। इससे घर का वातावरण पवित्र होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं।

"अम्बे तू है जगदम्बे काली" आरती कब और कैसे गानी चाहिए?

यह पावन आरती प्रतिदिन प्रातः एवं संध्या पूजन के समय, विशेषकर नवरात्रि में कपूर या घी का दीपक जलाकर गाई जानी चाहिए। आरती पूर्ण होने के बाद परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।

भजनों में अकबर और सोने के छत्र की क्या कथा है?

मुगल सम्राट अकबर ने माता ज्वाला जी के मंदिर की अखंड ज्योति को बुझाने का प्रयास किया था, किंतु असफल रहा। इसके पश्चात उसने अहंकारवश सोने का छत्र चढ़ाया, जिसे माता ने स्वीकार नहीं किया और वह छत्र अज्ञात धातु में बदल गया। यह प्रसंग सिखाता है कि ईश्वर के दरबार में भक्ति श्रेष्ठ है, धन-दौलत नहीं।

क्या घर में प्रतिदिन माता के भजन बजाना शुभ होता है?

जी हां, प्रातःकाल घर में देवी भजन या स्तोत्र चलाने से वास्तु दोष समाप्त होते हैं, घर के सदस्यों में मानसिक तनाव घटता है और सकारात्मक ऊर्जा का निवास होता है।

ध्यानु भक्त कौन थे और उनका भजन में क्या उल्लेख है?

ध्यानु भक्त भगवती दुर्गा के अनन्य उपासक थे। उन्होंने सम्राट अकबर की सेना के सामने माता की शक्ति सिद्ध करने के लिए अपना मस्तक माता के चरणों में अर्पित कर दिया था। प्रसन्न होकर मैया ने उनका शीश पुनः जोड़ दिया था।

इन भजनों का गायन किस वाद्ययंत्र के साथ सबसे प्रभावशाली होता है?

पारंपरिक रूप से ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम और खंजरी की थाप पर माता के भजनों का संकीर्तन अत्यंत दिव्य और उत्साहवर्धक वातावरण निर्मित करता है।

नवरात्रि में माता रानी को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय क्या है?

सच्चे हृदय से निष्काम भाव से मैया का नाम जप, श्री दुर्गा चालीसा पाठ एवं भावार्थ का वाचन और भक्ति भजनों का गायन करना माता रानी को शीघ्र प्रसन्न करने का सबसे सरल माध्यम है।

क्या इन भजनों का पाठ व्रत न रखने वाले भी कर सकते हैं?

अवश्य, भगवती की भक्ति पर सभी का समान अधिकार है। व्रत रखा हो या न रखा हो, कोई भी व्यक्ति शुद्ध मन और पवित्रता से भजनों का गायन व श्रवण कर सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत वैदिक ग्रंथों, मार्कंडेय पुराण, श्री दुर्गा सप्तशती तथा सनातन भक्ति परंपरा के प्रामाणिक संदर्भों के आधार पर तैयार किया गया है। भजनों के बोल और उनके अर्थ विद्वान आचार्यों एवं शास्त्रीय मान्यताओं के अनुकूल प्रस्तुत किए गए हैं ताकि पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण - देवी महिमा एवं चरित्र
  • मार्कंडेय पुराण - श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्यं)
  • सनातन भक्ति संगीत एवं लोक जागरण परंपरा

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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