Parvati Stotram

Khesari Lal सुपरहिट देवी गीत भोजपुरी भक्ति सॉन्ग 2021 || ऋसब के मम्मी || Bhakti Song 2021 - BhaktiLok

71 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भोजपुरी भक्ति संगीत की दुनिया में खेसारी लाल यादव का नाम एक ऐसे कलाकार के रूप में स्थापित है, जिन्होंने अपनी गायकी के माध्यम से लोक-संस्कृति और भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है। "ऋसब के मम्मी" शीर्षक से प्रसिद्ध यह देवी गीत न केवल एक मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह माता दुर्गा के प्रति एक भक्त के सरल, निश्छल और पारिवारिक समर्पण को भी दर्शाता है। भोजपुरी अंचल में देवी गीतों की परंपरा अत्यंत प्राचीन है, जहाँ भक्त अपनी आराध्या को अपनी कुलदेवी, अपनी माँ और अपनी रक्षक के रूप में संबोधित करते हैं। यह गीत माता के ममतामयी स्वरूप का आह्वान करता है और भक्तों को शक्ति की उपासना के लिए प्रेरित करता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

(मुखड़ा)
ऋसब के मम्मी, ऋसब के मम्मी
आईं ना माई, आईं ना माई
भक्तन के पुकार सुनी, आईं ना माई...

(अंतरा 1)
लाल चुनरिया ओढ़ के आईल बानी
शेर पे सवार होके आईल बानी
दुखवा हर लीं, सुखवा भर दीं
ऋसब के मम्मी, आईं ना माई...

(अंतरा 2)
भोजपुरी माटी के मान बढ़ाईं
सकल जगत के कष्ट मिटाईं
भक्ति के सागर में हमके बहाईं
ऋसब के मम्मी, आईं ना माई...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस गीत में भक्त माता दुर्गा को 'ऋसब के मम्मी' कहकर संबोधित करता है, जो माता के साथ भक्त के अत्यंत निकट और आत्मीय संबंध को दर्शाता है। यहाँ 'ऋसब' एक प्रतीक है, जो भक्त के परिवार या स्वयं भक्त का प्रतिनिधित्व करता है। भक्त माता से आग्रह करता है कि वे अपने शेर पर सवार होकर आएं और भक्तों के दुखों को हर लें। गीत का भावार्थ यह है कि ईश्वर केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि हमारे घर-परिवार के बीच, हमारी पुकार में विद्यमान हैं। माता का ममतामयी रूप भक्त के समस्त भय को दूर करने में सक्षम है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'वात्सल्य' और 'शरणागति' है। यह संदेश देता है कि भक्ति के लिए किसी कठिन कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक सच्चे और सरल हृदय की पुकार ही माता को प्रसन्न करने के लिए पर्याप्त है। यह गीत भोजपुरी संस्कृति की सरलता और माता के प्रति अटूट विश्वास को प्रदर्शित करता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण जानकारी
गीत का नामऋसब के मम्मी (देवी गीत)
गायकखेसारी लाल यादव
भाषाभोजपुरी
विषयमाता दुर्गा भक्ति
वर्ष2021

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भोजपुरी लोक-परंपरा में देवी गीतों का विशेष स्थान है। नवरात्रि के दौरान गाँव-गाँव में माता के भजनों का गान होता है। खेसारी लाल के ये गीत आधुनिक पीढ़ी को अपनी जड़ों और धार्मिक मान्यताओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से, माता को 'मम्मी' कहना 'मातृशक्ति' के उस स्वरूप को नमन करना है जो सृष्टि का पालन करती है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • अटूट विश्वास: कठिन समय में माता पर भरोसा रखना चाहिए।
  • सरलता: ईश्वर के साथ संबंध को जटिल नहीं, बल्कि सरल और आत्मीय बनाना चाहिए।
  • शक्ति का आह्वान: अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर करने के लिए सकारात्मक ऊर्जा (माता) का आह्वान करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह गीत मुख्य रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान, या किसी भी शुभ अवसर पर माता की पूजा करते समय सुना जा सकता है।

हाँ, यह गीत पूरी तरह से पारिवारिक और भक्तिपूर्ण है, जिसे सभी आयु वर्ग के लोग सुन सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह लेख भोजपुरी भक्ति संगीत की लोकप्रियता और उसके सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए लिखा गया है। संदर्भ हेतु देवीभागवत पुराण और लोक-भक्ति परंपराओं का आधार लिया गया है।


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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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