भक्ति काव्य व भजन बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो

पढ़ें भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

"भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो" एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण श्याम भजन है, जो भगवान श्री कृष्ण (खाटू श्याम जी) के प्रति अनन्य भक्ति, समर्पण और विरह की भावना को दर्शाता है। यह भजन अंजलि द्विवेदी जी द्वारा गाया गया है और यह भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इस भजन में जीवात्मा की परमात्मा से मिलने की व्याकुलता, अपने घर में प्रभु के शुभागमन की कामना और जीवन की विषमताओं से पार पाने के लिए प्रभु से निरंतर मार्गदर्शन की प्रार्थना की गई है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो ॥

(मुखड़ा)
भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो,
आते रहा करो प्रभु जाते रहा करो।
भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो...

(अंतरा 1)
सूनी डगर में ज्ञान का दीपक जला के तुम,
भटके हुए को राह पे लाते रहा करो।
भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो...

(अंतरा 2)
रूठे हुए हैं हमसे हमारे ही कर्म सब,
बिगड़ी हुई तकदीर बनाते रहा करो।
भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो...

(अंतरा 3)
नैया हमारी पार लगाओगे तुम प्रभु,
मझधार से इसे बचाते रहा करो।
भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो...

(अंतरा 4)
अंजलि खड़ी है द्वार पे दर्शन की प्यास में,
भक्ति का रस हमें भी पिलाते रहा करो।
भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन "भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो" भगवान श्री कृष्ण के सगुण रूप (सांवरे) के प्रति एक भक्त की आर्त पुकार है। इस भजन का मुख्य भाव 'सख्य' और 'माधुर्य' भक्ति से ओतप्रोत है, जहां भक्त अपने आराध्य को अपने घर आने का निमंत्रण दे रहा है। भक्त कहता है कि हे सांवरे! आप केवल मंदिरों या वैकुंठ में ही मत रहिए, बल्कि हम जैसे साधारण भक्तों के हृदय रूपी घर में भी आते-जाते रहा कीजिए।

भजन के माध्यम से भक्त अपनी असमर्थता और अज्ञानता को स्वीकार करता है। वह जानता है कि संसार की मोह-माया के कारण उसका मार्ग अंधकारमय हो सकता है, इसलिए वह प्रभु से प्रार्थना करता है कि वे उसके जीवन की सूनी डगर पर ज्ञान का प्रकाश फैलाएं। यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह जीवात्मा की परमात्मा से निरंतर जुड़े रहने की एक आकुल प्रार्थना है। जब भक्त कहता है कि "बिगड़ी हुई तकदीर बनाते रहा करो", तो यह पूर्ण शरणागति का सूचक है, जहां भक्त अपने कर्मों के फल को भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से अलग और विशेष बनाती हैं:

  • अनन्य शरणागति का भाव: इस भजन में भक्त अपने कर्मों की भूलों को स्वीकार करते हुए भगवान से अपनी तकदीर संवारने की प्रार्थना करता है।
  • सरलता और सुगमता: भजन की भाषा अत्यंत सरल और सुगम है, जिससे कोई भी साधारण व्यक्ति इसे आसानी से गा और समझ सकता है।
  • खाटू श्याम जी के प्रति समर्पण: 'सांवरे' शब्द का प्रयोग विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण और कलयुग के अवतारी देव श्री खाटू श्याम जी के लिए किया गया है, जो 'हारे का सहारा' कहलाते हैं।
  • आध्यात्मिक मार्गदर्शन की याचना: भजन में ज्ञान के दीपक को जलाने की बात कही गई है, जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करने का प्रतीक है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए कोई भी समय वर्जित नहीं है, फिर भी इस भजन को गाने और सुनने के कुछ विशेष अवसर और विधियां इस प्रकार हैं:

सर्वोत्तम समय: इस भजन का गायन संध्या आरती के समय या रात्रि संकीर्तन के दौरान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से एकादशी और द्वादशी तिथि को, जो खाटू श्याम जी को समर्पित है, इस भजन का गायन करने से मन को अपार शांति मिलती है।

गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण का भाव होना चाहिए। यदि संभव हो, तो घर के मंदिर में श्री कृष्ण या खाटू श्याम जी की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाकर, हाथ में करताल या मंजीरा लेकर सामूहिक रूप से इसका संकीर्तन करें। इससे घर का वातावरण सकारात्मक और भक्तिमय बनता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण के 'सांवरे' रूप और कलयुग के परम दानी वीर बर्बरीक (जिन्हें भगवान कृष्ण ने अपना नाम 'श्याम' दिया था) को समर्पित है। सनातन परंपरा में श्री कृष्ण भजन का बहुत बड़ा महत्व है। खाटू श्याम जी को कलयुग का सबसे जाग्रत देव माना जाता है, जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर तुरंत दौड़े चले आते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त उसी दयालुता और वात्सल्य भाव की याचना कर रहा है जो भगवान कृष्ण ने सुदामा और अर्जुन के प्रति प्रदर्शित की थी।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन को प्रसिद्ध भजन गायिका अंजलि द्विवेदी जी ने अपने मधुर कंठ से गाकर जन-जन तक पहुंचाया है। भजन की पृष्ठभूमि आधुनिक श्याम भजनों की समृद्ध परंपरा से जुड़ी हुई है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम से जुड़े लाखों श्रद्धालु इस भजन को अपनी दैनिक प्रार्थना का हिस्सा मानते हैं। भजन की रचना में पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय सुगम संगीत का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है, जो श्रोताओं को सीधे ईश्वर से जोड़ता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें ब्रजभाषा और राजस्थानी लोक शैली का पुट देखने को मिलता है। काव्य शैली अत्यंत संवादात्मक है, जैसे भक्त सीधे अपने आराध्य से बात कर रहा हो। इसमें रूपक और अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है। उदाहरण के लिए, "ज्ञान का दीपक" और "भक्ति का रस" जैसे शब्द आध्यात्मिक प्रतीकों को बहुत ही खूबसूरती से प्रस्तुत करते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

  1. अहंकार का त्याग: जब हम भगवान से अपनी तकदीर बनाने और नैया पार लगाने की प्रार्थना करते हैं, तो हम अपने अहंकार को त्याग कर ईश्वर की सर्वोच्च सत्ता को स्वीकार करते हैं।
  2. कर्म और कृपा का संतुलन: भजन स्वीकार करता है कि हमारे कर्म हमसे रूठ सकते हैं, लेकिन ईश्वर की कृपा से उन बिगड़े कर्मों का प्रभाव भी समाप्त हो सकता है।
  3. निरंतरता का महत्व: "आते रहा करो" शब्द यह सिखाते हैं कि भक्ति कोई एक दिन की क्रिया नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के साथ एक निरंतर चलने वाला संबंध है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
सांवरे श्याम वर्ण वाले (श्री कृष्ण) भगवान का सगुण और मनमोहक रूप
सूनी डगर सूना रास्ता या जीवन पथ ज्ञान और भक्ति के बिना सूना जीवन
मझधार नदी या समुद्र के बीच की धारा संसार रूपी सागर की कठिनाइयां और संकट
नैया नाव मानव जीवन रूपी नौका
भक्ति का रस ईश्वर प्रेम का आनंद परमानंद की प्राप्ति जो संसार से विरक्त करती है

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो, आते रहा करो प्रभु जाते रहा करो।"
भक्त भगवान से प्रार्थना करता है कि हे प्रभु, आप हमारे जीवन में निरंतर बने रहें। हमारे घर (हृदय) में आपका आना-जाना लगा रहना चाहिए ताकि हम कभी भी आपकी उपस्थिति से वंचित न हों।

2. "सूनी डगर में ज्ञान का दीपक जला के तुम, भटके हुए को राह पे लाते रहा करो।"
संसार के इस कठिन मार्ग पर जब हम अज्ञानता के कारण भटक जाएं, तो आप अपने ज्ञान रूपी प्रकाश से हमारा मार्गदर्शन करें और हमें पुनः धर्म के मार्ग पर लाएं।

3. "रूठे हुए हैं हमसे हमारे ही कर्म सब, बिगड़ी हुई तकदीर बनाते रहा करो।"
हमारे पूर्व जन्मों या इस जन्म के बुरे कर्मों के कारण यदि हमारा भाग्य हमसे रूठ गया है, तो आप अपनी असीम अनुकंपा से हमारी बिगड़ी हुई तकदीर को संवार दीजिए।

4. "नैया हमारी पार लगाओगे तुम प्रभु, मझधार से इसे बचाते रहा करो।"
यह संसार एक विशाल भवसागर है और हमारा जीवन एक कमजोर नौका की तरह है। इस नौका को पार लगाने वाले केवल आप ही हैं, इसलिए इसे संकटों के मझधार से बचाते रहिए।

5. "अंजलि खड़ी है द्वार पे दर्शन की प्यास में, भक्ति का रस हमें भी पिलाते रहा करो।"
भक्त (यहाँ गायिका अंजलि स्वयं को एक प्रतिनिधि भक्त के रूप में प्रस्तुत कर रही हैं) आपके द्वार पर दर्शन की अभिलाषा लेकर खड़ी है। हमें अपनी अनन्य भक्ति का रस पिलाकर कृतार्थ करें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भावों को पुष्ट करने के लिए श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक अत्यंत प्रासंगिक है, जहाँ भगवान अर्जुन से कहते हैं:

"अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥"

(श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 9, श्लोक 22)

अर्थ: जो अनन्य प्रेमी भक्त मुझ परमेश्वर का निरंतर चिंतन करते हुए निष्काम भाव से मेरी उपासना करते हैं, उन नित्य निरंतर मुझमें लीन रहने वाले पुरुषों का योगक्षेम (आवश्यकताओं की पूर्ति और रक्षा) मैं स्वयं वहन करता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम भगतों के घर भी सांवरे आते रहा करो
मुख्य देव भगवान श्री कृष्ण / श्री खाटू श्याम जी
प्रसिद्ध गायिका अंजलि द्विवेदी
भाषा हिंदी (सुगम भक्ति शैली)
मुख्य भाव समर्पण, विनय और सख्य भाव
उपयुक्त अवसर श्याम संकीर्तन, एकादशी, दैनिक संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन सुप्रसिद्ध भजन गायिका अंजलि द्विवेदी जी द्वारा गाया गया है। उनकी मधुर और भावपूर्ण आवाज ने इस भजन को देश-विदेश में बसे श्याम भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बना दिया है।

इस भजन में 'सांवरे' शब्द भगवान श्री कृष्ण और उनके कलयुगी अवतार श्री खाटू श्याम जी के लिए प्रयुक्त हुआ है। श्याम भक्त प्यार से भगवान को 'सांवरा' या 'सांवरिया' कहकर पुकारते हैं।

इस भजन को सुनने या गाने का कोई भी समय उत्तम है, परंतु संध्या काल की आरती के समय या एकादशी के पावन अवसर पर इसका श्रवण और कीर्तन करना विशेष रूप से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।

इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति और ईश्वर पर अटूट विश्वास है। यह हमें सिखाता है कि जब हम अपने जीवन की बागडोर (नैया) भगवान के हाथों में सौंप देते हैं, तो वे हमें हर संकट से पार लगा देते हैं।

हाँ, इस भजन को आप अपनी दैनिक सुबह या शाम की पूजा के समय गा सकते हैं। यह घर के वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक बनाने में मदद करता है।

महाभारत काल में बर्बरीक (श्याम जी) ने प्रतिज्ञा की थी कि वे युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। भगवान कृष्ण ने उनकी इस भावना और महान बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके 'श्याम' नाम से पूजे जाएंगे और जो भी हारा हुआ व्यक्ति सच्चे मन से उन्हें पुकारेगा, वे उसका सहारा बनेंगे।

"ज्ञान का दीपक" जलाने का तात्पर्य है कि भगवान हमारे भीतर के अज्ञान, मोह और अंधकार को दूर कर विवेक और सत्य का प्रकाश फैलाएं, जिससे हम सही मार्ग पर चल सकें।

यह भजन अत्यंत मधुर, शांत और हृदय को छू लेने वाली सुगम संगीत शैली में निबद्ध है। इसकी धुन इतनी सरल है कि एक बार सुनने के बाद ही यह मन में बस जाती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस भजन के पाठ, इसके आध्यात्मिक अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भों की गहन समीक्षा की है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य पाठकों और साधकों के मन में ईश्वर के प्रति प्रेम और विश्वास को सुदृढ़ करना है। यह सामग्री सनातन धर्म की संकीर्तन परंपरा और श्रीमद्भगवद्गीता के भक्ति योग के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार की गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 9, भक्ति योग)
  • पारंपरिक खाटू श्याम भजन संग्रह एवं संकीर्तन पद्धति
  • अंजलि द्विवेदी जी द्वारा प्रस्तुत मूल भजन संकीर्तन ऑडियो/वीडियो संदर्भ

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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