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नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये - Pawan Singh - Priyanka Singh - Chait Navratri Song

पढ़ें नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये - Pawan Singh - Priyanka Singh - Chait Navratri Song का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्

Pawan Singh & Priyanka Singh | चैत्र नवरात्रि भक्ति गीत

भक्ति और संगीत के पावन संगम में भोजपुरी जगत के लोकप्रिय गायक पवन सिंह और प्रसिद्ध गायिका प्रियंका सिंह द्वारा गाया गया यह चैत्र नवरात्रि गीत "नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये" सनातन संस्कृति और माता रानी के प्रति अटूट प्रेम का एक अनूठा उदाहरण है। चैत्र नवरात्रि के पवित्र दिनों में जब संपूर्ण देश मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना में लीन होता है, तब यह भजन ग्रामीण और शहरी दोनों ही परिवेश में विशेष रूप से गूंजता है। इस गीत में माता के प्रति एक अनन्य समर्पण, लोक-संस्कृति की मिठास और पारिवारिक जीवन का एक सुंदर सामंजस्य देखने को मिलता है। शक्ति की उपासना का यह पर्व केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतःकरण को पवित्र करने का एक महान अवसर है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन गीत के बोल, उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, लोक-संस्कृति में इसके महत्व तथा चैत्र नवरात्रि के व्रत और पूजा विधान से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों की गहन चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मुखड़ा:
लिखित बा दरबार में अर्जी हमार,
नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये!
मैया के भुअतिया में लागी बा बजार,
नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये!
फोनवा के तार तू तs दीर्घर से खींचिये,
नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये!

अंतरा 1:
सुबहो-सुरुजो से पहिले उठ के जगावे ला,
मईया के धियान में मनवा लगावे ला।
पूजा के थरिया सजावे ला रोजे,
माई के भजनिया सुनावै ला रोजे।
ऐ जी सुनिए, बात के गहराई समझिये,
नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये!
लिखिन बा दरबार में अर्जी हमार,
नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये!

अंतरा 2:
पवन सिंह-प्रियंका के सुर में झूमे संसारी,
घर-घर होखे ला पूजा अउर बलिहारी।
नव दिन व्रत राखी के जवानी डोलता,
भक्तन के हियरा में मैया रानी बोलता।
भक्ति के रंग में रंगाइल बानी, बुझिये,
नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये!
लिखित बा दरबार में अर्जी हमार,
नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में साधक की मनोदशा का एक सजीव चित्रण है। गीत के माध्यम से एक भक्त अपनी अर्जी मां के दरबार में लगाने की बात कहता है और सांसारिक बाधाओं या व्यवधानों से दूर रहने का आग्रह करता है। 'नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये' पंक्ति का दार्शनिक अर्थ यह है कि जब मनुष्य ईश्वर या शक्ति की आराधना में लीन हो, तो उसकी एकाग्रता भंग नहीं होनी चाहिए। नवरात्रि का समय आत्म-चिंतन, संयम और भगवती के ध्यान का होता है।

भजन में सुबह जल्दी उठना, पूजा की थाली सजाना, और मां के भजन गाना—ये सभी कर्म एक अनुशासित और पवित्र जीवनशैली को दर्शाते हैं। लोकभाषा की मिठास के साथ यह गीत यह संदेश देता है कि दैवीय ऊर्जा से जुड़ने के लिए मन का शांत और संसार के अनावश्यक कोलाहल से मुक्त होना अत्यंत आवश्यक है। इससे साधक की भक्ति और अधिक प्रगाढ़ होती है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना पवित्रता, अनन्य भक्ति, और एकाग्रता है। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर माता दुर्गा के नौ रूपों—शैलमाता, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की पूजा की जाती है। इस दौरान भक्त अपने घर-परिवार और मोह-माया से परे होकर पूरी तरह भगवती की सेवा में समर्पित हो जाते हैं। गीत यह सिखाता है कि भक्ति में पूर्ण तल्लीनता होनी चाहिए। जब तक मन शांत और एकाग्र न हो, तब तक वास्तविक आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति नहीं हो सकती। इसके साथ ही यह लोक-संस्कृति और पर्वों के प्रति हमारे सामूहिक उल्लास को भी प्रगट करता है।

गीत की विशेषता विवरण
गीत का नाम नौरातन में डिस्टर्ब ना कीजिये
गायक कलाकार पवन सिंह एवं प्रियंका सिंह
संगीत शैली भोजपुरी चैत्र नवरात्रि भक्ति गीत
मुख्य भाव भक्ति, एकाग्रता, समर्पण और उत्सव
अवसर चैत्र नवरात्रि / वासंतिक नवरात्र

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी संगीत जगत में पवन सिंह और प्रियंका सिंह की जोड़ी ने अनगिनत सुपरहिट और लोकप्रिय गाने दिए हैं। पवन सिंह अपनी ऊर्जावान और दमदार आवाज के लिए जाने जाते हैं, वहीं प्रियंका सिंह की मधुर और सुरीली आवाज श्रोताओं के मन को मोह लेती है। जब ये दोनों कलाकार किसी धार्मिक या पर्व विशेष के गीत को गाते हैं, तो उसमें पारंपरिक लोकगीतों की सोंधी खुशबू के साथ आधुनिक संगीत का बेहतरीन समन्वय देखने को मिलता है। इस गीत के माध्यम से उन्होंने चैत्र नवरात्रि के माहौल को जीवंत कर दिया है, जिसे लोग बड़े चाव से सुनते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
नौरातन नवरात्रि / नौ रातों का पावन पर्व चैत्र या शारदीय नवरात्रि के विशेष दिन
अर्जी निवेदन या प्रार्थना माता के दरबार में अपनी मनोकामना रखना
भुअतिया माता का दरबार / पवित्र स्थल पूजा स्थल या मंदिर का प्रांगण
धियान ध्यान / एकाग्रता ईश्वर में मन लगाना
थरिया पूजा की थाली आरती और पूजन सामग्री की थाली

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भारत में संगीत और संस्कृति का अटूट रिश्ता है। सनातन धर्म में प्रत्येक पर्व और उत्सव के साथ विशिष्ट गीत जुड़े हुए हैं जो समाज को एकजुट रखते हैं। चैत्र नवरात्रि, जिसे वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है, हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इस समय प्रकृति में भी परिवर्तन होता है और सर्दियों के बाद बसंत एवं गर्मियों का संधिकाल होता है। ऐसे में लोकगीतों और भक्ति संगीत के माध्यम से घरों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह गीत इस बात का प्रतीक है कि हमारी संस्कृति में पर्व केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं हैं, बल्कि वे आनंद, संगीत और उत्सव का भी माध्यम हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • एकाग्रता का महत्व: जीवन के किसी भी महत्वपूर्ण कार्य या साधना के लिए पूर्ण एकाग्रता और बाहरी बाधाओं से दूरी जरूरी है।
  • समर्पण भाव: ईश्वर या अपने लक्ष्य के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण होना चाहिए।
  • संयम और अनुशासन: नवरात्रि के व्रत और नियम हमें जीवन में अनुशासन और संयम की सीख देते हैं।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: अपनी जड़ों, लोकभाषा और पारंपरिक पर्वों से जुड़े रहकर मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है।
  • सकारात्मकता: भक्ति संगीत सुनने से मन के नकारात्मक विचार दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान घर-घर में, मंदिरों के प्रांगण में और पंडालों में बजाया जाता है। सुबह की पूजा के समय, कलश स्थापना के पावन अनुष्ठान के दौरान, या संध्या आरती के वक्त ऐसे भक्ति गीत वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय बना देते हैं। इसके अलावा जब महिलाएं मिलकर माता के जवारे बोती हैं या माता के गीत गाती हैं, तब इस प्रकार के आधुनिक लोक-भजन उत्सव के आनंद को और बढ़ा देते हैं। आप श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र के साथ-साथ इस पावन गीत को भी अपनी दैनिक प्रार्थना सूची में शामिल कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय चैत्र नवरात्रि गीत को प्रसिद्ध भोजपुरी गायक पवन सिंह और गायिका प्रियंका सिंह ने अपनी सुरीली आवाज में गाया है।

चैत्र नवरात्रि आमतौर पर अंग्रेजी कैलेंडर के मार्च या अप्रैल महीने में, हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है।

इस गीत का मुख्य संदेश नवरात्रि के पवित्र दिनों में माता की आराधना के समय मन को एकाग्र रखना और संसार के अनावश्यक व्यवधानों से दूर रहकर पूरी तरह भक्ति में लीन होना है।

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

हाँ, यह एक बहुत ही सुंदर और ऊर्जावान भक्ति गीत है जिसे आप चैत्र या शारदीय नवरात्रि के दौरान अपने घर में पूजा और आरती के समय सुन सकते हैं।

चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत) की शुरुआत का प्रतीक है और इसी दिन से भगवान श्री राम का जन्मोत्सव (राम नवमी) भी जुड़ा हुआ है।

नवरात्रि के दिनों में सात्विक आहार, संयमित आचरण, नियमित पूजा-पाठ और सकारात्मक विचारों के साथ ईश्वर का स्मरण करना चाहिए।

लोक संगीत और भक्ति गीत हमारी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं तथा लोगों को उनके धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत गीत के बोल, अर्थ और सांस्कृतिक महत्व को पाठकों की सुविधा और प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए संकलित किया गया है। हमारा उद्देश्य सनातन संस्कृति, लोक संगीत और पर्वों से जुड़ी सकारात्मक जानकारियों को सहज और सरल भाषा में आप तक पहुंचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोकगीत एवं भोजपुरी संगीत परंपरा
  • चैत्र नवरात्रि व्रत एवं पूजा विधान ग्रंथ
  • सनातन पंचांग एवं धार्मिक सांस्कृतिक आलेख

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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